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संक्षेप में: चंद्रमा 18:05 बजे तक कर्क राशि में है, फिर सिंह में (निरयन)। तिथि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, जो 17:13 बजे पंचमी में बदलती है। दोपहर के आसपास चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में है, जिसके देवता सर्प (नाग) हैं; यह तीक्ष्ण नक्षत्र है, जो परंपरा से पूरे हो चुके कामों को समेटने, खोज और सफ़ाई के लिए अच्छा माना जाता है। कर्क में चंद्रमा के साथ केतु है। विष्कुम्भ योग मुहूर्त-ग्रंथों में नए काम की शुरुआत के लिए टाला जाता है; रोज़ का काम सामान्य रूप से चलता है। रिक्ता तिथि परंपरा से शुरू करने के बजाय समेटने और पूरा करने के लिए रखी जाती है।

आज का पंचांग

वार रविवार — स्वामी सूर्य
तिथि कृष्ण पक्ष: चतुर्थी 17:13 तक; फिर पंचमी (सूर्योदय पर रिक्ता तिथि)
नक्षत्र आश्लेषा 18:04 तक; फिर मघा
योग विष्कुम्भ 20:53 तक; फिर प्रीति
करण बालव 17:13 तक; कौलव 28 दिसंबर, 04:01 तक; फिर तैतिल
चंद्र राशि (निरयन) कर्क; 18:05 बजे से सिंह
वक्री ग्रह गुरु
सूर्योदय / सूर्यास्त 07:12 / 17:32 (नई दिल्ली)
राहु काल 16:14–17:32 (नई दिल्ली)

राहु काल रविवार को दिनमान के आठ बराबर भागों में से आठवाँ भाग है, जो स्थानीय सूर्योदय से गिना जाता है — इसलिए इसका समय आपके शहर पर निर्भर करता है: आज नई दिल्ली में यह 16:14–17:32 बजे तक है। बहुत-से परिवार इसमें नया काम शुरू नहीं करते; अपने शहर का समय हिंदी पंचांग पर देखें।

चंद्र राशि के अनुसार राशिफल

मेष

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके चौथे भाव में है, जो घर-परिवार से जुड़ा है; फिर वह पाँचवें भाव में आता है — संतान, रचनात्मकता, बुद्धि और पुण्य। चंद्रमा से चौथे भाव का गोचर परंपरा में सहायक नहीं गिना जाता; घर-परिवार में दबाव से ज़्यादा धीरज काम आएगा। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। आज के नक्षत्र आश्लेषा के स्वामी बुध हैं; आपकी राशि से वे नौवें भाव में हैं, जो दिन को पढ़ाई, आस्था और यात्रा से जोड़ता है। चौथा भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके नौवें भाव में है — पढ़ाई, आस्था और यात्रा की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: माँ या किसी बुज़ुर्ग के साथ इत्मीनान से समय बिताएँ।

वृषभ

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके तीसरे भाव में है, जो मेहनत और बातचीत से जुड़ा है; फिर वह चौथे भाव में आता है — घर, माँ, संपत्ति और मन की शांति। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से तीसरे भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन मेहनत और बातचीत के लिए मददगार रहेगा। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके आठवें भाव में है — इसलिए दिन में साझे धन और निजी बातों की भी भूमिका रहती है। तीसरा भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके आठवें भाव में है — साझे धन और निजी बातों की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: भाई-बहन या पड़ोसी की किसी छोटी बात में मदद करें।

मिथुन

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके दूसरे भाव में है, जो धन और परिवार से जुड़ा है; फिर वह तीसरे भाव में आता है — साहस, भाई-बहन, हुनर और बातचीत। परंपरा चंद्रमा से दूसरे भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए धन और परिवार को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके सातवें भाव में है — इसलिए दिन में साझेदारी की भी भूमिका रहती है। दूसरा भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके सातवें भाव में है — साझेदारी की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: परिवार का कोई छोटा मामला सुलझाएँ।

कर्क

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके पहले भाव में है, जो निजी मामलों से जुड़ा है; फिर वह दूसरे भाव में आता है — धन, परिवार, भोजन और वाणी। आज चंद्रमा आपकी अपनी राशि में है, परंपरा से शुभ पर कोमल समय: जो कहना है साफ़ कहें और चाल धीमी रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। आज के नक्षत्र आश्लेषा के स्वामी बुध हैं; आपकी राशि से वे छठे भाव में हैं, जो दिन को काम और सेहत की आदतों से जोड़ता है। पहला भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके छठे भाव में है — काम और सेहत की आदतों की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: दिन की शुरुआत थोड़ी सैर या शांति से करें।

सिंह

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके बारहवें भाव में है, जो ख़र्च और विश्राम से जुड़ा है; फिर वह पहले भाव में आता है — शरीर, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व। चंद्रमा से बारहवें भाव का गोचर परंपरा में सहायक नहीं गिना जाता; ख़र्च और विश्राम में दबाव से ज़्यादा धीरज काम आएगा। उस भाव में चंद्रमा के साथ केतु है: शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन। आज के नक्षत्र आश्लेषा के स्वामी बुध हैं; आपकी राशि से वे पाँचवें भाव में हैं, जो दिन को रचनात्मक कामों और संतान से जोड़ता है। बारहवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके पाँचवें भाव में है — रचनात्मक कामों और संतान की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: ख़र्च से पहले बजट देखें।

कन्या

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके ग्यारहवें भाव में है, जो लाभ और मित्रता से जुड़ा है; फिर वह बारहवें भाव में आता है — ख़र्च, एकांत, विदेश और मोक्ष। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से ग्यारहवें भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन लाभ और मित्रता के लिए मददगार रहेगा। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। आज के नक्षत्र आश्लेषा के स्वामी बुध हैं; आपकी राशि से वे चौथे भाव में हैं, जो दिन को घर-परिवार से जोड़ता है। ग्यारहवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके चौथे भाव में है — घर-परिवार की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: जिसका इंतज़ार था, उस पर बात आगे बढ़ाएँ।

तुला

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके दसवें भाव में है, जो करियर से जुड़ा है; फिर वह ग्यारहवें भाव में आता है — लाभ, मित्र, संपर्क और इच्छाएँ। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से दसवें भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन करियर के लिए मददगार रहेगा। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके तीसरे भाव में है — इसलिए दिन में मेहनत और बातचीत की भी भूमिका रहती है। दसवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके तीसरे भाव में है — मेहनत और बातचीत की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: हफ़्ते के कामों को व्यवस्थित करें।

वृश्चिक

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके नौवें भाव में है, जो पढ़ाई, आस्था और यात्रा से जुड़ा है; फिर वह दसवें भाव में आता है — करियर, पद और कर्म। परंपरा चंद्रमा से नौवें भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए पढ़ाई, आस्था और यात्रा को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। उस भाव में चंद्रमा के साथ केतु है: शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके दूसरे भाव में है — इसलिए दिन में धन और परिवार की भी भूमिका रहती है। नौवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके दूसरे भाव में है — धन और परिवार की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: पिता या किसी मार्गदर्शक के लिए कुछ अच्छा करें।

धनु

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके आठवें भाव में है, जो साझे धन और निजी बातों से जुड़ा है; फिर वह नौवें भाव में आता है — भाग्य, आस्था, गुरु और लंबी यात्राएँ। धनु चंद्र राशि वालों के लिए यह चंद्राष्टम है (18:05 बजे तक): पंचांग की परंपरा ज़रूरी नई शुरुआत किसी और दिन के लिए रखती है, इसलिए साझे धन और निजी बातों में धीरे चलें। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके पहले भाव में है — इसलिए दिन में निजी मामलों की भी भूमिका रहती है। आठवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। दिन का अच्छा उपयोग: कुछ समय मनन या अध्ययन में बिताएँ।

मकर

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके सातवें भाव में है, जो साझेदारी से जुड़ा है; फिर वह आठवें भाव में आता है — परिवर्तन, साझा धन और गुप्त बातें। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से सातवें भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन साझेदारी के लिए मददगार रहेगा। चंद्राष्टम 18:05 बजे शुरू होता है, इसलिए नई शुरुआत उसके पहले करें। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके बारहवें भाव में है — इसलिए दिन में ख़र्च और विश्राम की भी भूमिका रहती है। सातवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके बारहवें भाव में है — ख़र्च और विश्राम की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: साथी की बात बोलने से ज़्यादा सुनें।

कुंभ

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके छठे भाव में है, जो काम और सेहत की आदतों से जुड़ा है; फिर वह सातवें भाव में आता है — विवाह, साथी और अनुबंध। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से छठे भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन काम और सेहत की आदतों के लिए मददगार रहेगा। वहाँ चंद्रमा का साथ केतु दे रहा है, जिससे अक्सर शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन रहता है। आज के नक्षत्र आश्लेषा के स्वामी बुध हैं; आपकी राशि से वे ग्यारहवें भाव में हैं, जो दिन को लाभ और मित्रता से जोड़ता है। छठा भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके ग्यारहवें भाव में है — लाभ और मित्रता की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: छूटी हुई सेहत की दिनचर्या फिर शुरू करें।

मीन

चंद्रमा 18:05 बजे तक आपके पाँचवें भाव में है, जो रचनात्मक कामों और संतान से जुड़ा है; फिर वह छठे भाव में आता है — काम, सेवा, सेहत की आदतें, क़र्ज़ और प्रतिस्पर्धा। चंद्रमा से पाँचवें भाव का गोचर परंपरा में सहायक नहीं गिना जाता; रचनात्मक कामों और संतान में दबाव से ज़्यादा धीरज काम आएगा। उस भाव में चंद्रमा के साथ केतु है: शांत, भीतर की ओर मुड़ा मन। दिन का नक्षत्र आश्लेषा है, जिसका स्वामी बुध आपके दसवें भाव में है — इसलिए दिन में करियर की भी भूमिका रहती है। पाँचवाँ भाव आपके लिए चंद्रमा का अपना भाव है, इसलिए इसके मामले आज निजी लगेंगे। आज रविवार है, जिसका स्वामी सूर्य आपके दसवें भाव में है — करियर की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: मन को कुछ अच्छा पढ़ने दें।

इस पेज को कैसे पढ़ें

दैनिक राशिफल चंद्रमा के साथ चलता है — सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह — और आपकी राशि से गिने गए भावों में उसकी यात्रा पढ़ता है; आकाश रोज़ बदलता है, इसलिए फल भी रोज़ बदलता है। आपकी अपनी कुंडली इससे कहीं ज़्यादा सटीक है: आपका दिन आपकी जन्म-कुंडली से हर दिन का पाठ देता है, और मुफ़्त कुंडली आपकी चंद्र राशि, लग्न और चल रही दशा दिखाती है। सूर्य राशि (पश्चिमी) के राशिफल अंग्रेज़ी पेज पर हैं।

स्रोत

  1. Sunyra engine (positions verified against NASA/JPL Horizons; panchang for New Delhi)
  2. Phaladeepika of Mantreswara, ch. 26 (transits from the Moon)
  3. Muhurta Chintamani of Rama Daivajna (nakshatra classes, tithi groups)
  4. Brihat Parashara Hora Shastra, ch. 26 (graha drishti) (Santhanam)

Sunyra संपादकीय द्वारा लिखित। ज्योतिष व्याख्या की एक परंपरा है; इसे मार्गदर्शन की तरह पढ़ें, पक्की भविष्यवाणी की तरह नहीं। अस्वीकरण (Disclaimer)।

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