आपका पंचांग
दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — साथ में मास, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहु काल, अभिजीत मुहूर्त और चौघड़िया, आपके चुने हुए स्थान के लिए।
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग का अर्थ है "पाँच अंग": तिथि (चंद्र दिन — सूर्य और चंद्र के बीच हर 12 अंश की दूरी), वार (सूर्योदय से गिना जाने वाला दिन), नक्षत्र (चंद्रमा जिस नक्षत्र में है), योग (सूर्य और चंद्र के भोगांश के जोड़ से) और करण (आधी तिथि)।
स्थान क्यों मायने रखता है
हिंदू दिन स्थानीय सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए पंचांग आपके अक्षांश और देशांतर के साथ बदलता है। राहु काल, गुलिक काल और यमगण्ड सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान के निश्चित भाग हैं — इसीलिए एक ही तारीख़ को अलग-अलग शहरों में इनका समय अलग होता है।
मास और संवत
उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है (पूर्णिमांत), जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमावस्या के बाद (अमांत)। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक ही होता है; कृष्ण पक्ष में हम दोनों नाम दिखाते हैं। विक्रम संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से बदलता है।
मुहूर्त
हम स्थानीय दोपहर के आसपास का अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल, दिन और रात का चौघड़िया और ग्रहों के होरा भी दिखाते हैं। ये शुभ कार्यों के लिए समय चुनने के पारंपरिक तरीक़े हैं; इन्हें मार्गदर्शन की तरह देखिए — कोई घड़ी अपने-आप अच्छी या बुरी नहीं होती।