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संक्षेप में: चंद्रमा 15:04 बजे तक कुंभ राशि में है, फिर मीन में (निरयन)। तिथि शुक्ल पक्ष की द्वादशी है, जो 14:36 बजे त्रयोदशी में बदलती है। दोपहर के आसपास चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में है, जिसके देवता अज एकपाद हैं; यह उग्र नक्षत्र है, जिसे परंपरा नाज़ुक शुरुआतों के बजाय कठिन या निर्णायक कामों के लिए रखती है। कुंभ में चंद्रमा के साथ राहु है। इस राशि पर मंगल की आठवीं दृष्टि है — जो गर्मी जोड़ती है, इसलिए रफ़्तार सँभालें। व्याघात योग मुहूर्त-ग्रंथों में नए काम की शुरुआत के लिए टाला जाता है; रोज़ का काम सामान्य रूप से चलता है।
आज का पंचांग
| वार | शुक्रवार — स्वामी शुक्र |
| तिथि | शुक्ल पक्ष: द्वादशी 14:36 तक; फिर त्रयोदशी (सूर्योदय पर भद्रा तिथि) |
| नक्षत्र | पूर्वाभाद्रपद 21:03 तक; फिर उत्तराभाद्रपद |
| योग | ध्रुव 22:08 तक; फिर व्याघात |
| करण | बालव 14:36 तक; कौलव 24 अक्टूबर, 02:12 तक; फिर तैतिल |
| चंद्र राशि (निरयन) | कुंभ; 15:04 बजे से मीन |
| वक्री ग्रह | शुक्र और शनि |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:26 / 17:43 (नई दिल्ली) |
| राहु काल | 10:40–12:05 (नई दिल्ली) |
राहु काल शुक्रवार को दिनमान के आठ बराबर भागों में से चौथा भाग है, जो स्थानीय सूर्योदय से गिना जाता है — इसलिए इसका समय आपके शहर पर निर्भर करता है: आज नई दिल्ली में यह 10:40–12:05 बजे तक है। बहुत-से परिवार इसमें नया काम शुरू नहीं करते; अपने शहर का समय हिंदी पंचांग पर देखें।
चंद्र राशि के अनुसार राशिफल
मेष
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके ग्यारहवें भाव में है, जो लाभ और मित्रता से जुड़ा है; फिर वह बारहवें भाव में आता है — ख़र्च, एकांत, विदेश और मोक्ष। चंद्रमा से ग्यारहवें भाव का गोचर परंपरा में शुभ माना गया है — लाभ और मित्रता के लिए सहायक पृष्ठभूमि। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। दिन का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जिसका स्वामी गुरु आपके चौथे भाव में है — इसलिए दिन में घर-परिवार की भी भूमिका रहती है। उस भाव के स्वामी शनि आपके बारहवें भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग ख़र्च और विश्राम से आता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके सातवें भाव में है — साझेदारी की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: जिसका इंतज़ार था, उस पर बात आगे बढ़ाएँ।
वृषभ
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके दसवें भाव में है, जो करियर से जुड़ा है; फिर वह ग्यारहवें भाव में आता है — लाभ, मित्र, संपर्क और इच्छाएँ। चंद्रमा से दसवें भाव का गोचर परंपरा में शुभ माना गया है — करियर के लिए सहायक पृष्ठभूमि। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे तीसरे भाव में हैं, जो दिन को मेहनत और बातचीत से जोड़ता है। उस भाव के स्वामी शनि आपके ग्यारहवें भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग लाभ और मित्रता से आता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके छठे भाव में है — काम और सेहत की आदतों की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: दिन का सबसे अच्छा घंटा अपने मुख्य काम को दें।
मिथुन
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके नौवें भाव में है, जो पढ़ाई, आस्था और यात्रा से जुड़ा है; फिर वह दसवें भाव में आता है — करियर, पद और कर्म। परंपरा चंद्रमा से नौवें भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए पढ़ाई, आस्था और यात्रा को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे दूसरे भाव में हैं, जो दिन को धन और परिवार से जोड़ता है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके दसवें भाव में है, जो उसे करियर से जोड़ता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके पाँचवें भाव में है — रचनात्मक कामों और संतान की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: पिता या किसी मार्गदर्शक के लिए कुछ अच्छा करें।
कर्क
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके आठवें भाव में है, जो साझे धन और निजी बातों से जुड़ा है; फिर वह नौवें भाव में आता है — भाग्य, आस्था, गुरु और लंबी यात्राएँ। कर्क चंद्र राशि वालों के लिए यह चंद्राष्टम है (15:04 बजे तक): पंचांग की परंपरा ज़रूरी नई शुरुआत किसी और दिन के लिए रखती है, इसलिए साझे धन और निजी बातों में धीरे चलें। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। दिन का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जिसका स्वामी गुरु आपके पहले भाव में है — इसलिए दिन में निजी मामलों की भी भूमिका रहती है। उस भाव के स्वामी शनि आपके नौवें भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग पढ़ाई, आस्था और यात्रा से आता है। दिन का अच्छा उपयोग: योजनाएँ छोटी रखें और जो शुरू है उसे पूरा करें।
सिंह
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके सातवें भाव में है, जो साझेदारी से जुड़ा है; फिर वह आठवें भाव में आता है — परिवर्तन, साझा धन और गुप्त बातें। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से सातवें भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन साझेदारी के लिए मददगार रहेगा। चंद्राष्टम 15:04 बजे शुरू होता है, इसलिए नई शुरुआत उसके पहले करें। उस भाव में चंद्रमा के साथ राहु है: बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे बारहवें भाव में हैं, जो दिन को ख़र्च और विश्राम से जोड़ता है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके आठवें भाव में है, जो उसे साझे धन और निजी बातों से जोड़ता है। दिन का अच्छा उपयोग: साथी की बात बोलने से ज़्यादा सुनें।
कन्या
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके छठे भाव में है, जो काम और सेहत की आदतों से जुड़ा है; फिर वह सातवें भाव में आता है — विवाह, साथी और अनुबंध। चंद्रमा से छठे भाव का गोचर परंपरा में शुभ माना गया है — काम और सेहत की आदतों के लिए सहायक पृष्ठभूमि। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे ग्यारहवें भाव में हैं, जो दिन को लाभ और मित्रता से जोड़ता है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके सातवें भाव में है, जो उसे साझेदारी से जोड़ता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके दूसरे भाव में है — धन और परिवार की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: कोई छोटा क़र्ज़ या विवाद शांति से सुलझाएँ।
तुला
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके पाँचवें भाव में है, जो रचनात्मक कामों और संतान से जुड़ा है; फिर वह छठे भाव में आता है — काम, सेवा, सेहत की आदतें, क़र्ज़ और प्रतिस्पर्धा। परंपरा चंद्रमा से पाँचवें भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए रचनात्मक कामों और संतान को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे दसवें भाव में हैं, जो दिन को करियर से जोड़ता है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके छठे भाव में है, जो उसे काम और सेहत की आदतों से जोड़ता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके पहले भाव में है — निजी मामलों की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: यदि आपकी साधना है, तो थोड़ी प्रार्थना या मंत्र-जप करें।
वृश्चिक
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके चौथे भाव में है, जो घर-परिवार से जुड़ा है; फिर वह पाँचवें भाव में आता है — संतान, रचनात्मकता, बुद्धि और पुण्य। परंपरा चंद्रमा से चौथे भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए घर-परिवार को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। उस भाव में चंद्रमा के साथ राहु है: बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह। दिन का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जिसका स्वामी गुरु आपके नौवें भाव में है — इसलिए दिन में पढ़ाई, आस्था और यात्रा की भी भूमिका रहती है। उस भाव के स्वामी शनि आपके पाँचवें भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग रचनात्मक कामों और संतान से आता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके बारहवें भाव में है — ख़र्च और विश्राम की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: माँ या किसी बुज़ुर्ग के साथ इत्मीनान से समय बिताएँ।
धनु
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके तीसरे भाव में है, जो मेहनत और बातचीत से जुड़ा है; फिर वह चौथे भाव में आता है — घर, माँ, संपत्ति और मन की शांति। परंपरा (फलदीपिका, अध्याय 26) चंद्रमा से तीसरे भाव को शुभ गोचर में गिनती है, इसलिए दिन मेहनत और बातचीत के लिए मददगार रहेगा। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। दिन का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जिसका स्वामी गुरु आपके आठवें भाव में है — इसलिए दिन में साझे धन और निजी बातों की भी भूमिका रहती है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके चौथे भाव में है, जो उसे घर-परिवार से जोड़ता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके ग्यारहवें भाव में है — लाभ और मित्रता की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: आधा घंटा किसी हुनर के अभ्यास में लगाएँ।
मकर
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके दूसरे भाव में है, जो धन और परिवार से जुड़ा है; फिर वह तीसरे भाव में आता है — साहस, भाई-बहन, हुनर और बातचीत। चंद्रमा से दूसरे भाव का गोचर परंपरा में सहायक नहीं गिना जाता; धन और परिवार में दबाव से ज़्यादा धीरज काम आएगा। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। दिन का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जिसका स्वामी गुरु आपके सातवें भाव में है — इसलिए दिन में साझेदारी की भी भूमिका रहती है। चंद्रमा वाले भाव का स्वामी शनि आपके तीसरे भाव में है, जो उसे मेहनत और बातचीत से जोड़ता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके दसवें भाव में है — करियर की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: परिवार का कोई छोटा मामला सुलझाएँ।
कुंभ
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके पहले भाव में है, जो निजी मामलों से जुड़ा है; फिर वह दूसरे भाव में आता है — धन, परिवार, भोजन और वाणी। यह आपका जन्म-चंद्र है — चंद्रमा आपकी अपनी राशि में — जिसे परंपरा अनुकूल मानती है; मन तेज़ रहेगा, इसलिए योजनाएँ सरल रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे छठे भाव में हैं, जो दिन को काम और सेहत की आदतों से जोड़ता है। उस भाव के स्वामी शनि आपके दूसरे भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग धन और परिवार से आता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके नौवें भाव में है — पढ़ाई, आस्था और यात्रा की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: अपनी दिनचर्या सरल रखें और नींद-भोजन का ध्यान रखें।
मीन
चंद्रमा 15:04 बजे तक आपके बारहवें भाव में है, जो ख़र्च और विश्राम से जुड़ा है; फिर वह पहले भाव में आता है — शरीर, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व। परंपरा चंद्रमा से बारहवें भाव को अनुकूल गोचर नहीं मानती, इसलिए ख़र्च और विश्राम को लेकर उम्मीदें संतुलित रखें। वहाँ चंद्रमा का साथ राहु दे रहा है, जिससे अक्सर बेचैनी और कुछ नया पाने की चाह रहता है। आज के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद के स्वामी गुरु हैं; आपकी राशि से वे पाँचवें भाव में हैं, जो दिन को रचनात्मक कामों और संतान से जोड़ता है। उस भाव के स्वामी शनि आपके पहले भाव में बैठे हैं, इसलिए दिन का रंग निजी मामलों से आता है। आज शुक्रवार है, जिसका स्वामी शुक्र आपके आठवें भाव में है — साझे धन और निजी बातों की ओर एक हल्का इशारा। दिन का अच्छा उपयोग: ख़र्च से पहले बजट देखें।
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दैनिक राशिफल चंद्रमा के साथ चलता है — सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह — और आपकी राशि से गिने गए भावों में उसकी यात्रा पढ़ता है; आकाश रोज़ बदलता है, इसलिए फल भी रोज़ बदलता है। आपकी अपनी कुंडली इससे कहीं ज़्यादा सटीक है: आपका दिन आपकी जन्म-कुंडली से हर दिन का पाठ देता है, और मुफ़्त कुंडली आपकी चंद्र राशि, लग्न और चल रही दशा दिखाती है। सूर्य राशि (पश्चिमी) के राशिफल अंग्रेज़ी पेज पर हैं।
स्रोत
- Sunyra engine (positions verified against NASA/JPL Horizons; panchang for New Delhi)
- Phaladeepika of Mantreswara, ch. 26 (transits from the Moon)
- Muhurta Chintamani of Rama Daivajna (nakshatra classes, tithi groups)
- Brihat Parashara Hora Shastra, ch. 26 (graha drishti) (Santhanam)
Sunyra संपादकीय द्वारा लिखित। ज्योतिष व्याख्या की एक परंपरा है; इसे मार्गदर्शन की तरह पढ़ें, पक्की भविष्यवाणी की तरह नहीं। अस्वीकरण (Disclaimer)।
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