व्रत कथा और पूजा विधि

अहोई अष्टमी 2027: तारे देखने का समय, व्रत कथा और पूजा विधि

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027। माताएँ अपनी संतान के लिए सूर्योदय से शाम के पहले तारों तक व्रत रखती हैं; नई दिल्ली में लगभग शाम 6:09 बजे तक तारे दिखने लगते हैं।

Read in English →

सुनें: अहोई अष्टमी 2027

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

अहोई अष्टमी 2027 एक नज़र में

  • तारीख़: शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027, करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से सात दिन पहले।
  • तिथि: कार्तिक कृष्ण अष्टमी, 22 अक्टूबर सुबह 11:56 से 23 अक्टूबर सुबह 9:59 तक। व्रत 22 अक्टूबर को है क्योंकि पूजा के समय, यानी शाम को, अष्टमी रहेगी।
  • नई दिल्ली में सूर्यास्त: शाम 5:45; पहले तारे लगभग 6:09 बजे से दिखने लगते हैं। चंद्रोदय देर से, रात 11:36 पर।
  • पूजा: शाम को, सूर्यास्त के बाद; तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

अहोई अष्टमी क्या है

अहोई अष्टमी माताओं का व्रत है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उत्तर भारत की माताएँ सूर्योदय से तारे निकलने तक व्रत रखती हैं और अहोई माता से, जो संतान की रक्षा करने वाली देवी का सौम्य रूप हैं, अपने बेटे-बेटियों की लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना करती हैं। संतान की कामना रखने वाली स्त्रियाँ भी यह व्रत रखती हैं।

दिन का क्रम सरल है: दिन भर अन्न नहीं (और परंपरा से जल भी नहीं), दीवार पर अहोई माता का चित्र, साथ में सेही (स्याहू) और उसके बच्चे, शाम को कथा, और तारों को अर्घ्य। कई घरों में करवा चौथ वाला करवा ही भरा जाता है। कुछ घरों में माँ स्याहू की माला पहनती हैं, जिसमें चाँदी की अहोई और हर संतान के लिए चाँदी का एक मोती होता है।

तबीयत ठीक न हो, गर्भावस्था हो या शिशु को दूध पिलाती हों, तो जल और फल के साथ व्रत रखें। यह व्रत माँ की प्रार्थना है, कोई कठिन परीक्षा नहीं।

अहोई अष्टमी 2027 पर तारे कब दिखेंगे, शहरवार

समय शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027 के हैं (भारतीय समय)। साफ़ आसमान में पहले चमकीले तारे सूर्यास्त के लगभग 20 से 25 मिनट बाद दिखते हैं। कुछ परिवार तारों की जगह चाँद का इंतज़ार करते हैं; उसका समय आख़िरी कॉलम में है।

शहरसूर्यास्ततारे दिखने लगते हैं (लगभग)चंद्रोदय
नई दिल्ली17:4518:0923:36
मुंबई18:1118:3500:13
कोलकाता17:0617:3023:02
चेन्नई17:4618:1023:53
जयपुर17:5218:1623:46
लखनऊ17:3117:5523:24
चंडीगढ़17:4418:0823:34
बेंगलुरु17:5718:2100:04
हैदराबाद17:5018:1423:53
अहमदाबाद18:0818:3200:07
पटना17:1617:4023:09
इंदौर17:5518:1923:54

Sunyra इंजन से गणना। ‘तारे दिखने लगते हैं’ = सूर्यास्त के 24 मिनट बाद, इस मौसम में उत्तर भारत में संध्या-प्रकाश (civil twilight) के ख़त्म होने का समय; शहर की रोशनी और धुंध में थोड़ी देर हो सकती है।

अपने शहर का चंद्रोदय

अपना शहर चुनिए; नीचे का पंचांग उस दिन का चंद्रोदय दिखाएगा (तारीख़ पहले से भरी है)।

आपका पंचांग

आपके शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और पूरा पंचांग यहाँ दिखेगा।

पूजा सामग्री

  • अहोई माता का चित्र, सेही और उसके बच्चों के साथ: दीवार पर गेरू से बनाया हुआ या छपा हुआ अहोई का चित्र।
  • जल से भरा करवा या लोटा (कई घरों में करवा चौथ वाला करवा), गले में कलावा बँधा हुआ।
  • रोली, अक्षत, घी का दीया, धूप, फूल, और कथा के समय हाथ में रखने के लिए गेहूँ के कुछ दाने।
  • भोग: आठ पूरियाँ या पुए, हलवा, उबले चने या मिठाई (कई घरों में अष्टमी के लिए हर चीज़ आठ)।
  • स्याहू की माला, अगर घर की रीति हो, और सास या घर की बड़ी स्त्री के लिए बया।

पूजा विधि, क्रम से

शाम की पूजा में लगभग 30 से 40 मिनट लगते हैं। जहाँ आपके घर की रीति अलग हो, वही मानें।

  1. सुबह संकल्प। स्नान के बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने शब्दों में कहें कि आप संतान की लंबी आयु और सुख के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं।
  2. अहोई माता का चित्र। दोपहर में साफ़ दीवार पर अहोई माता, सेही और उसके बच्चे (और आठ कोठे, अष्ट कोष्ठक) बनाएँ, या चित्र लगाएँ।
  3. पूजा सजाएँ। सूर्यास्त से पहले चित्र के दाहिनी ओर भरा करवा रखें, साथ में दीया, रोली, अक्षत और भोग।
  4. पूजा। दीया और धूप जलाएँ, अहोई माता और सेही को रोली, अक्षत, फूल और भोग चढ़ाएँ, और अपनी संतान का नाम लेकर प्रार्थना करें।
  5. कथा। हाथ में गेहूँ के दाने लेकर नीचे दी कथा पढ़ें या सुनें; बच्चे अक्सर माँ के पास बैठते हैं।
  6. आरती और बया। अहोई माता की आरती करें, सास के पैर छूकर उन्हें बया दें।
  7. तारों को अर्घ्य। तारे निकल आएँ तो करवे के जल से (गेहूँ के दानों के साथ) उन्हें अर्घ्य दें, फिर जल और भोग से व्रत खोलें। कई घरों में करवे का जल दिवाली तक रखा जाता है।

अहोई अष्टमी व्रत कथा

यह वह कथा है जो ज़्यादातर घरों में सुनाई जाती है, हमने इसे सरल हिंदी में अपने शब्दों में लिखा है, नीचे अंग्रेज़ी में भी। ज़ोर से पढ़ने में लगभग पाँच मिनट लगते हैं।

बहुत समय पहले एक नगर में एक साहूकार अपनी पत्नी और सात बेटों के साथ रहता था। दिवाली से कुछ दिन पहले साहूकार की पत्नी घर लीपने के लिए मिट्टी लेने जंगल गई।

Long ago, in a certain town, a moneylender lived with his wife and their seven sons. A few days before Diwali, the wife went to the forest to dig earth for plastering the house.

जिस जगह वह कुदाल से मिट्टी खोद रही थी, वहाँ एक सेही (स्याहू) की माँद थी। अनजाने में कुदाल लगने से सेही का एक बच्चा मर गया। यह देखकर उसका मन दुख और पछतावे से भर गया, पर अब कुछ हो नहीं सकता था, और वह मिट्टी लेकर घर लौट आई।

Where she was digging there was the den of a porcupine (syahu). Without knowing it, her spade struck and killed one of the porcupine's young. She was filled with grief and remorse, but nothing could be undone, and she went home with the earth.

कुछ समय बाद एक-एक करके उसके बेटे बीमार पड़ने लगे, और साल भर में उसके सातों बेटे चल बसे। वह दिन-रात रोती रहती। एक दिन उसने गाँव की बड़ी-बूढ़ी स्त्रियों को अपनी सारी बात बताई, कि उससे अनजाने में सेही का बच्चा मर गया था।

Some time later her sons fell ill one after another, and within a year all seven were gone. She wept day and night. One day she told the elder women of the village everything, including how she had killed the porcupine's young without meaning to.

बड़ी स्त्रियों ने उसे सांत्वना दी और कहा, “तुमने सच कहकर आधा पाप धो दिया। अब कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखो। दीवार पर सेही और उसके बच्चों का चित्र बनाकर उनकी पूजा करो और सच्चे मन से क्षमा माँगो। माता प्रसन्न होंगी।”

The elder women comforted her and said, “By telling the truth you have already washed away half the wrong. Now keep the fast of Ahoi Mata on Kartik Krishna Ashtami. Draw the porcupine and her young on the wall, worship them, and ask forgiveness with a true heart. The Mother will be pleased.”

साहूकार की पत्नी ने वैसा ही किया। उसने अष्टमी के दिन निर्जल व्रत रखा, अहोई माता और सेही का चित्र बनाकर पूजा की, कथा सुनी और तारों को अर्घ्य दिया। वह हर साल यह व्रत पूरी श्रद्धा से करती रही।

The moneylender's wife did just that. On the Ashtami she fasted without water, drew Ahoi Mata and the porcupine and worshipped them, heard the katha and offered water to the stars. Every year she kept the vrat with complete faith.

उसकी सच्ची श्रद्धा और पश्चाताप से अहोई माता प्रसन्न हुईं। उनकी कृपा से उसके घर फिर से संतान का सुख लौटा, और उसका परिवार हँसी-ख़ुशी से भर गया। तभी से माताएँ अपनी संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।

Pleased by her true faith and repentance, Ahoi Mata blessed her, and by her grace the joy of children returned to her home and her family was full of laughter again. Since then mothers keep the Ahoi Ashtami fast for the protection and long life of their children.

कथा के अंत में माताएँ कहती हैं: “हे अहोई माता, जैसे आपने साहूकार की पत्नी की गोद भरी, वैसे ही सबकी संतान को सुखी और दीर्घायु रखना।”

At the end of the katha the mothers say: “O Ahoi Mata, as you filled the moneylender's wife's lap with children again, keep every child happy and long-lived.”

एक और कथा में सात बहुएँ हैं, और सबसे छोटी बहू गाय और सेही माता की सेवा करके अपनी संतान की रक्षा पाती है। अर्थ वही है: सच्चाई, हर जीव के लिए करुणा, और माँ की धैर्य भरी प्रार्थना।

सवाल-जवाब

2027 में अहोई अष्टमी कब है?

अहोई अष्टमी 2027 शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027 को है (कार्तिक कृष्ण अष्टमी), करवा चौथ के चार दिन बाद।

अहोई अष्टमी का व्रत कितने बजे खोल सकते हैं?

शाम की पूजा के बाद, जब तारे दिखने लगें: नई दिल्ली में लगभग शाम 6:09 बजे से (सूर्यास्त 5:45)। जो परिवार चाँद का इंतज़ार करते हैं, वे चंद्रोदय पर, दिल्ली में रात 11:36 पर, व्रत खोलते हैं।

अहोई माता कौन हैं?

अहोई माता देवी का सौम्य रूप हैं, जिन्हें संतान की रक्षा करने वाली माता के रूप में पूजा जाता है; बहुत लोग उन्हें माता पार्वती का रूप मानते हैं। व्रत कथा के कारण उनके साथ सेही और उसके बच्चे बनाए जाते हैं।

क्या अहोई अष्टमी का व्रत बेटियों के लिए भी रखा जाता है?

हाँ। पहले इसे बेटों का व्रत कहा जाता था, पर आज माताएँ इसे अपनी सारी संतान के लिए रखती हैं, और संतान की कामना वाली स्त्रियाँ भी रखती हैं।

पाठ और स्रोत

तारीख़ और समय Sunyra इंजन से निकाले गए हैं (निरयण लाहिरी, उत्तर भारत की तरह पूर्णिमांत महीने), और व्रत के अगले दिन अपने-आप अगले साल के हो जाते हैं; ये वही अंक हैं जो हमारे पंचांग में हैं। कथा और विधि हमने आम मौखिक परंपरा से अपने शब्दों में लिखी हैं; हर घर की रीति अलग होती है।

पाठ या ऑडियो में कोई ग़लती दिखी? हमें बताइए →