व्रत कथा और पूजा विधि

करवा चौथ 2027: चंद्रोदय, व्रत कथा और पूजा विधि

सोमवार, 18 अक्टूबर 2027। नई दिल्ली में चाँद शाम 7:30 बजे निकलेगा। दिन की पूरी तैयारी एक जगह: सरगी, सामग्री, पूजा की विधि, कथा और व्रत खोलना।

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सुनें: करवा चौथ 2027

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

करवा चौथ 2027 एक नज़र में

  • तारीख़: सोमवार, 18 अक्टूबर 2027।
  • तिथि: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, 18 अक्टूबर शाम 5:52 से 19 अक्टूबर शाम 4:42 तक। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमांत पंचांग में इस महीने को आश्विन कहते हैं; दिन वही है।
  • नई दिल्ली में चंद्रोदय: शाम 7:30 (बाक़ी शहर नीचे)। उस शाम चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में है।
  • सरगी: सूर्योदय से पहले। दिल्ली में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:42 से 5:33 और सूर्योदय 6:23 बजे।
  • शाम की पूजा: सूर्यास्त (दिल्ली में 5:48) के बाद और चंद्रोदय से पहले; ज़्यादातर परिवार चाँद निकलने से एक-दो घंटे पहले पूजा करते हैं।
  • दिल्ली में व्रत: सूर्योदय से चंद्रोदय तक, लगभग 13 घंटे 7 मिनट।

करवा चौथ क्या है

करवा चौथ एक दिन का व्रत है जिसे विवाहित स्त्रियाँ, ख़ास तौर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में, अपने पति की लंबी आयु और कुशलता के लिए रखती हैं। करवा मिट्टी का टोंटी वाला छोटा घड़ा है जो पूजा में रखा जाता है, और चौथ यानी चतुर्थी: कार्तिक महीने में पूर्णिमा के बाद का चौथा दिन।

दिन का क्रम सीधा है। भोर से पहले स्त्री सरगी खाती है, जो आम तौर पर सास भेजती हैं। फिर दिन भर व्रत, परंपरा से बिना अन्न और जल के। शाम को परिवार और पड़ोस की स्त्रियाँ दुल्हन की तरह सजकर गौरी (पार्वती) की करवा माता के रूप में पूजा करती हैं और कथा सुनती हैं। चाँद निकलने पर वह उसे जल (अर्घ्य) देती है, छलनी से पहले चाँद और फिर पति को देखती है, और पति उसे पहला घूँट पानी और पहला कौर खिलाकर व्रत खुलवाते हैं।

आजकल कई अविवाहित लड़कियाँ भी मनचाहे जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं, और बहुत से पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। यह व्रत प्रेम और धैर्य का अर्पण है, परीक्षा नहीं। अगर आप गर्भवती हैं, शिशु को दूध पिलाती हैं, डायबिटीज़ है या तबीयत ठीक नहीं, तो जल और फल (फलाहार) के साथ व्रत भी पूरी तरह परंपरा के भीतर है; निर्जल व्रत से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछें।

करवा चौथ 2027 पर चंद्रोदय का समय, शहरवार

समय सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 के हैं (भारतीय समय)। व्रत सूर्योदय से चाँद दिखने तक चलता है।

शहरसूर्योदयचंद्रोदयव्रत की अवधि
नई दिल्ली06:2319:3013h 07m
मुंबई06:3320:1013h 37m
कोलकाता05:3418:5813h 25m
चेन्नई05:5919:5213h 53m
जयपुर06:2719:4013h 13m
लखनऊ06:0719:1913h 12m
चंडीगढ़06:2619:2612h 59m
बेंगलुरु06:1020:0413h 54m
हैदराबाद06:0919:5113h 41m
अहमदाबाद06:3720:0313h 26m
पटना05:4919:0513h 16m
इंदौर06:2419:5013h 26m

Sunyra इंजन से गणना: जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा समतल क्षितिज पर आता है (सामान्य अपवर्तन सहित)। पहाड़, इमारतें और धुंध हों तो चाँद कुछ मिनट बाद दिखता है।

अपने शहर का चंद्रोदय

अपना शहर चुनिए; नीचे का पंचांग उस दिन का चंद्रोदय दिखाएगा (तारीख़ पहले से भरी है)।

आपका पंचांग

आपके शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और पूरा पंचांग यहाँ दिखेगा।

सरगी: भोर से पहले का भोजन

सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, अच्छा हो तो ब्रह्म मुहूर्त में (दिल्ली में सुबह 4:42 से 5:33)। परंपरा से इसे सास आशीर्वाद के साथ भेजती हैं; वे दूर हों तो बहू ख़ुद तैयार करती है। ऐसा भोजन चुनें जो लंबे दिन में सहारा दे:

  • दूध में पकी फेनी या सेवइयाँ, सरगी का पारंपरिक व्यंजन।
  • फल, ख़ासकर केला, सेब और अनार।
  • भीगे बादाम, काजू, किशमिश और खजूर।
  • मठरी, पराठा या हल्की सब्ज़ी, अगर पूरा भोजन चाहें।
  • नारियल पानी या भरपूर सादा पानी। नमक और बहुत मीठा कम रखें: बाद में प्यास बढ़ाते हैं।
  • सरगी के साथ श्रृंगार भी आता है: चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर और मेहंदी, दिन के आशीर्वाद के रूप में।

पूजा सामग्री

  • करवा: टोंटी और ढक्कन वाला मिट्टी (या धातु) का घड़ा, जल से भरा। कई घरों में दो करवे रखते हैं, एक अपना और एक बदलने के लिए।
  • करवा माता / गौरी का चित्र या मिट्टी की प्रतिमा, साथ में शिव, गणेश और कार्तिकेय; कई घरों में करवा चौथ का छपा चित्र लगाते हैं।
  • पूजा की थाली: रोली या कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी, घी का दीया, धूप, फूल और जल की छोटी कटोरी।
  • चाँद देखने के लिए छलनी, और अर्घ्य के लिए जल का लोटा या गिलास।
  • भोग के लिए मिठाई, फल, मठरी या पुए, और कथा सुनते समय हाथ में रखने के लिए गेहूँ या चावल के कुछ दाने।
  • बया: सास के लिए भेंट (मिठाई, मेवा, कपड़े या साड़ी, थोड़े रुपये), जो पूजा के बाद दी जाती है।
  • अपने लिए सुहाग का श्रृंगार: लाल या चटक कपड़े, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहंदी।

पूजा विधि, क्रम से

हर परिवार में थोड़ा अंतर होता है; जहाँ आपके घर के बड़ों की रीति अलग हो, वही मानें। शाम की पूजा में लगभग 45 मिनट लगते हैं, फिर चाँद का इंतज़ार।

  1. सुबह का संकल्प। सरगी और स्नान के बाद पूर्व की ओर मुँह करके बैठें, दाहिने हाथ में थोड़ा जल और अक्षत लें, और अपने शब्दों में कहें कि आप पति की लंबी आयु और परिवार के सुख के लिए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। जल धरती पर छोड़ दें।
  2. दिन भर। आराम करें, मन शांत रखें, झगड़े और कटु वचन से बचें। चाहें तो मेहंदी लगाएँ। कई स्त्रियाँ इस दिन सिलाई या कपड़ा काटने का काम नहीं करतीं।
  3. पूजा का स्थान। सूर्यास्त से पहले फिर स्नान करके श्रृंगार करें। पूजा की जगह साफ़ करें, आटे या हल्दी से छोटा चौक बनाएँ और चौकी पर करवा माता का चित्र रखें। पास में भरा हुआ करवा, दीया, थाली और भोग रखें।
  4. पहले गणेश जी। दीया और धूप जलाएँ। गणेश जी को रोली, अक्षत और फूल चढ़ाकर प्रार्थना करें कि व्रत बिना विघ्न पूरा हो।
  5. करवा माता की पूजा। गौरी (करवा माता) और शिव, गणेश, कार्तिकेय को रोली, सिंदूर, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएँ। करवे पर रोली से तिलक करें और उसकी गर्दन पर कलावा बाँधें।
  6. कथा। सब साथ बैठें, हाथ में गेहूँ या चावल के कुछ दाने लें, और नीचे दी कथा पढ़ें या सुनें। बाद में ये दाने अर्घ्य के साथ अर्पित करने के लिए रख लें।
  7. फेरी (जहाँ रीति हो)। स्त्रियाँ गोल घेरे में बैठकर अपनी थालियाँ सात बार एक-दूसरे को आगे बढ़ाती हैं और अपने इलाक़े का करवा का पारंपरिक गीत गाती हैं।
  8. बया। सास (या घर की किसी बड़ी स्त्री) के पैर छूकर बया दें; वे सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देती हैं।
  9. आरती। गौरी या गणेश जी की आरती से पूजा पूरी करें, फिर शांति से चाँद का इंतज़ार करें।

करवा चौथ व्रत कथा: वीरावती की कहानी

यह वह कथा है जो ज़्यादातर घरों में सुनाई जाती है। हमने इसे सरल हिंदी में अपने शब्दों में लिखा है, हर भाग के नीचे अंग्रेज़ी में भी। ज़ोर से पढ़ने में लगभग आठ मिनट लगते हैं।

बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे थे और एक ही बेटी थी, जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई अपनी बहन को प्राणों से भी ज़्यादा प्यार करते थे। वे उसे खिलाए बिना ख़ुद भोजन नहीं करते थे।

Long ago, in a certain town, there lived a merchant. He had seven sons and one daughter, Veeravati. The seven brothers loved their sister more than their own lives, and would not eat until she had eaten.

समय आने पर वीरावती का विवाह हो गया। विवाह के बाद पहली करवा चौथ आई तो वह अपने मायके में थी। उसने अपनी भाभियों के साथ पूरे मन से निर्जल व्रत रखा। पर वह कोमल थी, और शाम होते-होते भूख और प्यास से बेहाल होकर मूर्छित-सी हो गई।

In time Veeravati was married. When her first Karwa Chauth came, she was at her parents' home. She kept the fast without food or water, with all her heart, together with her brothers' wives. But she was delicate, and by evening hunger and thirst had left her faint.

भाइयों से बहन की यह हालत देखी नहीं गई। वे जानते थे कि वह चाँद देखे बिना व्रत नहीं खोलेगी, और चाँद अभी निकला नहीं था। तब उन्होंने एक उपाय सोचा। एक भाई दूर पीपल के पेड़ पर दीया और छलनी लेकर चढ़ गया। छलनी के पीछे जलता दीया दूर से ऐसा दिखा जैसे पेड़ों के पीछे से चाँद उग रहा हो।

The brothers could not bear to see her like this. They knew she would not break the fast before seeing the Moon, and the Moon had not yet risen. So they made a plan. One brother climbed a distant pipal tree with a lamp and a sieve. The lamp glowing behind the sieve looked, from afar, like the Moon rising behind the trees.

भाइयों ने आकर कहा, “बहन, चाँद निकल आया है, अर्घ्य देकर भोजन कर लो।” वीरावती ने अपनी भाभियों से भी कहा, पर वे सच जानती थीं और बोलीं, “तुम्हारे भाइयों का चाँद निकला है, हमारा अभी नहीं।” भोली वीरावती ने बात नहीं समझी। उसने दीये को चाँद मानकर अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई।

The brothers came and said, “Sister, the Moon has risen. Offer arghya and eat.” Veeravati asked her sisters-in-law to come too, but they knew the truth and said, “Your brothers' moon has risen, not ours.” Innocent Veeravati did not understand. Taking the lamp for the Moon, she offered water to it and sat down to eat.

पहले कौर में बाल निकला। दूसरे कौर पर उसे छींक आ गई। तीसरा कौर उठाया ही था कि ससुराल से संदेश आया कि उसके पति बहुत बीमार हैं, और जब वह वहाँ पहुँची तो उन्होंने प्राण त्याग दिए थे। वीरावती का हृदय टूट गया। वह रो-रोकर कहने लगी कि उसने तो पूरे मन से व्रत रखा था, फिर यह क्या हुआ।

In the first morsel there was a hair. At the second she sneezed. She had barely lifted the third when word came from her husband's home that he was gravely ill, and when she reached him, he had already passed away. Veeravati's heart broke. She wept and asked how this could happen when she had kept the fast with all her heart.

उसका विलाप सुनकर देवी इंद्राणी (कुछ कथाओं में स्वयं माता पार्वती) प्रकट हुईं। उन्होंने स्नेह से बताया, “बेटी, तुम्हारा कोई दोष नहीं। तुम्हारे भाइयों ने प्रेम में तुम्हें नक़ली चाँद दिखाया, और व्रत अधूरा रह गया। अब धैर्य रखो। साल भर हर महीने की चौथ का व्रत श्रद्धा से करो, और अगली करवा चौथ पर पूरे विधि-विधान से व्रत रखो।”

Hearing her grief, the goddess Indrani (in some tellings Mother Parvati herself) appeared. She told her gently, “Daughter, you are not at fault. Out of love your brothers showed you a false moon, and the fast was left incomplete. Now be patient. Keep the fast of every month's Chauth with faith for a year, and keep the next Karwa Chauth fully, in the proper way.”

वीरावती ने पति के शरीर को न छोड़ने का प्रण लिया और साल भर उसकी सेवा करती रही। उसने हर महीने की चौथ का व्रत किया। फिर अगली करवा चौथ आई। उसने सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल व्रत रखा, करवा माता की पूजा की, कथा सुनी और असली चाँद निकलने पर ही अर्घ्य दिया।

Veeravati vowed not to leave her husband's side, and for a whole year she cared for him. She kept the fast of every month's Chauth. Then the next Karwa Chauth came. She fasted from sunrise to moonrise, worshipped Karwa Mata, listened to the katha, and offered arghya only when the true Moon had risen.

उसकी अटूट श्रद्धा और धैर्य से माता प्रसन्न हुईं, और उनकी कृपा से उसके पति फिर से जीवित हो उठे, जैसे गहरी नींद से जागे हों। दोनों ने सुख से लंबा जीवन बिताया। कथा के अंत में स्त्रियाँ कहती हैं: “जैसे करवा माता ने वीरावती का सुहाग लौटाया, वैसे ही सबका सुहाग अमर रखें।”

Pleased by her unbroken faith and patience, the Mother blessed her, and by her grace Veeravati's husband came back to life, as if waking from deep sleep. The two lived long and happily. At the end of the katha the women say: “As Karwa Mata gave Veeravati back her husband, may she keep every woman's marriage whole.”

इस दिन और कथाएँ भी सुनाई जाती हैं: पतिव्रता करवा, जिसने पति को मगरमच्छ से बचाया; सावित्री, जिसने यमराज से सत्यवान को वापस पाया; और द्रौपदी, जिसने अर्जुन के दूर रहने पर कृष्ण की सलाह से यह व्रत रखा। सबका अर्थ एक है: धैर्य और स्थिरता से भरा प्रेम।

चाँद देखना और व्रत खोलना

  1. चाँद निकल आए तो थाली, जल भरा करवा, छलनी और जलता दीया लेकर छत, बालकनी या खुली जगह पर जाएँ।
  2. चंद्रमा को रोली, अक्षत और थोड़ा मीठा अर्पित करें, फिर कथा के समय हाथ में रखे दानों के साथ करवे या लोटे से जल का अर्घ्य दें। सीधी प्रार्थना काफ़ी है: “चंद्र देव, मेरा अर्घ्य स्वीकार करें; मेरे पति को लंबी आयु और हमारे घर को शांति दें।”
  3. छलनी में या उसके पास दीया रखें। छलनी से पहले चाँद को देखें, फिर उसी छलनी से पति को।
  4. परिवार की रीति हो तो पति के पैर छुएँ। पति करवे से पहला घूँट पानी और मिठाई का पहला कौर खिलाते हैं; व्रत पूरा होता है।
  5. धीरे-धीरे खाएँ। पहले पानी और कुछ हल्का (फल, खीर या दाल), फिर पूरा भोजन।
  6. बादल हों तो अपने शहर के चंद्रोदय के कुछ देर बाद तक रुकें। फिर भी न दिखे तो कई परिवार तय समय पर चाँद की दिशा में, या चंद्रमा के चित्र को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं; घर के बड़ों से पूछें।

सवाल-जवाब

2027 में करवा चौथ कब है?

करवा चौथ 2027 सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को है (कार्तिक कृष्ण चतुर्थी)। नई दिल्ली में चाँद शाम 7:30 बजे निकलेगा।

करवा चौथ 2027 पर चाँद कितने बजे निकलेगा?

18 अक्टूबर 2027 को चाँद नई दिल्ली में शाम 7:30, मुंबई में 8:10, कोलकाता में 6:58, चेन्नई में 7:52, जयपुर में 7:40, लखनऊ में 7:19 और चंडीगढ़ में 7:26 बजे निकलेगा। इस पेज पर किसी भी शहर का समय देखा जा सकता है।

सरगी कब खानी चाहिए?

सूर्योदय से पहले, अच्छा हो तो ब्रह्म मुहूर्त में। 18 अक्टूबर 2027 को दिल्ली में यह सुबह 4:42 से 5:33 है, और सूर्योदय 6:23 बजे।

क्या करवा चौथ के व्रत में पानी पी सकते हैं?

पारंपरिक व्रत निर्जल होता है। पर गर्भावस्था, स्तनपान, डायबिटीज़, दवाइयों या बीमारी में जल और फल के साथ व्रत पूरी तरह मान्य है; सेहत पहले है, और व्रत भक्ति का है, कष्ट का नहीं।

करवा चौथ पर कौन-सी कथा पढ़ी जाती है?

ज़्यादातर घरों में वीरावती की कथा पढ़ी जाती है, सात भाइयों की बहन जिसने नक़ली चाँद देखकर व्रत तोड़ दिया और साल भर की श्रद्धा से पति को फिर पाया। यह ऊपर हिंदी और अंग्रेज़ी में दी है।

क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

हाँ। कई लड़कियाँ मनचाहे जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं और परिवार की रीति के अनुसार चाँद या तारे देखकर व्रत खोलती हैं।

पाठ और स्रोत

इस पेज की तारीख़ और हर समय Sunyra इंजन से निकाला गया है (निरयण लाहिरी, उत्तर भारत की तरह पूर्णिमांत महीने), और त्योहार के अगले दिन अपने-आप अगले साल का हो जाता है; ये वही अंक हैं जो हमारे पंचांग में हैं। कथा, विधि और बातें हमने आम मौखिक परंपरा से अपने शब्दों में लिखी हैं; हर घर की रीति अलग होती है, और आपके घर के लिए आपके बड़ों की रीति ही सही है।

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