दुर्गा सप्तशती · अध्याय 6

दुर्गा सप्तशती अध्याय 6 (धूम्रलोचन वध): हिंदी अर्थ सहित

देवी ने शुम्भ का प्रस्ताव ठुकरा दिया है, इसलिए वह अपने सेनापति धूम्रलोचन को साठ हज़ार सैनिकों के साथ उन्हें बलपूर्वक लाने भेजता है। देवी शांति से उत्तर देती हैं, केवल “हुं” की एक ध्वनि से उसे भस्म कर देती हैं, और उनका सिंह उसकी सेना को तितर-बितर कर देता है। क्रोधित शुम्भ अब चण्ड और मुण्ड नाम के दो भाइयों को भेजता है।

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अध्याय 6 किस बारे में है

अध्याय 6 सप्तशती के तीसरे और सबसे लंबे भाग, उत्तम चरित्र (अध्याय 5 से 13) का हिस्सा है, जिसमें मेधा मुनि राजा सुरथ और समाधि वैश्य को बताते हैं कि देवी ने देवताओं को शुम्भ और निशुम्भ नाम के भाइयों से कैसे मुक्त किया। अध्याय 5 में देवताओं ने उनकी स्तुति की, वे पार्वती के शरीर से तेजस्वी अम्बिका के रूप में प्रकट हुईं, और शुम्भ ने उनसे विवाह का प्रस्ताव लेकर एक दूत भेजा। देवी ने उत्तर दिया कि उन्होंने एक प्रतिज्ञा की है: वे उसी से विवाह करेंगी जो उन्हें युद्ध में जीत ले।

यह अध्याय दूत की क्रोध भरी सूचना से शुरू होता है। शुम्भ अपने सेनापति धूम्रलोचन (“धुएँ जैसी आँखों वाला”) को साठ हज़ार असुरों के साथ भेजता है और आदेश देता है कि देवी को बाल पकड़कर घसीटते हुए ले आए (6.4)। देवी का उत्तर शांत और लगभग मुस्कुराता हुआ है (6.11): तुम बलवान हो, तुम्हारे साथ सेना है; यदि तुम मुझे बलपूर्वक ले जाओ, तो मैं क्या कर सकती हूँ? जब वह उन पर झपटता है, तो वे केवल “हुं” की ध्वनि से उसे भस्म कर देती हैं (6.13)।

बाकी युद्ध उनके सिंह का है, जो सेना पर टूट पड़ता है और पल भर में उसे नष्ट कर देता है (6.15–6.19); ग्रंथ इसे कुछ सीधी, तीखी पंक्तियों में कहता है। फिर क्रोध से काँपता शुम्भ चण्ड और मुण्ड नाम के भाइयों को बड़ी सेना के साथ भेजता है (6.21–6.24), जिससे कथा अध्याय 7 में जाती है। 24 मंत्रों वाला यह सप्तशती का सबसे छोटा अध्याय है; संस्कृत में पाठ करने में लगभग 4 मिनट और अर्थ के साथ पढ़ने में लगभग 10 मिनट लगते हैं।

श्लोक 6.1–6.12: धूम्रलोचन को भेजा जाता है

शुम्भ अपने सेनापति को देवी को बलपूर्वक लाने भेजता है, और देवी शांति से उसे उत्तर देती हैं।

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श्लोक 6.1

ॐ ऋषिरुवाच॥

Rishir uvacha

अर्थ: ऋषि (मेधा मुनि) ने कहा:

Meaning: The sage (Medhas) said:

श्लोक 6.2

इत्याकर्ण्य वचो देव्याः स दूतोऽमर्षपूरितः।
समाचष्ट समागम्य दैत्यराजाय विस्तरात्॥

Ityakarnya vacho devyah sa duto 'marsha-puritah,
samachashta samagamya daitya-rajaya vistarat.

अर्थ: देवी के ये वचन सुनकर वह दूत क्रोध और अपमान से भर गया। उसने लौटकर दैत्यराज (शुम्भ) को सारी बात विस्तार से सुना दी।

Meaning: Hearing the Goddess’s words, the messenger was filled with resentment. He went back and told the king of the daityas everything in detail.

श्लोक 6.3

तस्य दूतस्य तद्वाक्यमाकर्ण्यासुरराट् ततः।
सक्रोधः प्राह दैत्यानामधिपं धूम्रलोचनम्॥

Tasya dutasya tad vakyam akarnyasura-rat tatah,
sakrodhah praha daityanam adhipam dhumralochanam.

अर्थ: दूत की वह बात सुनकर असुरों का राजा क्रोध में भर गया और दैत्यों के सेनापति धूम्रलोचन से बोला:

Meaning: Hearing the messenger’s report, the king of the asuras grew angry and spoke to Dhumralochana, a commander of the daityas:

श्लोक 6.4

हे धूम्रलोचनाशु त्वं स्वसैन्यपरिवारितः।
तामानय बलाद् दुष्टां केशाकर्षणविह्वलाम्॥

He dhumralochanashu tvam sva-sainya-parivaritah,
tam anaya balad dushtam keshakarshana-vihvalam.

अर्थ: “हे धूम्रलोचन, तुम अपनी सेना के साथ तुरंत जाओ और उस दुष्टा को बलपूर्वक ले आओ, चाहे बाल पकड़कर घसीटना पड़े और वह व्याकुल हो जाए।

Meaning: “Dhumralochana, go at once with your army and bring that wicked woman here by force, dragging her by the hair in her distress if you must.

श्लोक 6.5

तत्परित्राणदः कश्चिद्यदि वोत्तिष्ठतेऽपरः।
स हन्तव्योऽमरो वापि यक्षो गन्धर्व एव वा॥

Tat-paritranadah kashchid yadi vottishthate 'parah,
sa hantavyo 'maro vapi yaksho gandharva eva va.

अर्थ: और यदि कोई दूसरा उसकी रक्षा के लिए खड़ा हो, चाहे वह देवता हो, यक्ष हो या गंधर्व, तो उसे मार डालना।”

Meaning: And if anyone else stands up to protect her, be it a god, a yaksha or a gandharva, he is to be killed.”

श्लोक 6.6

ऋषिरुवाच॥

Rishir uvacha

अर्थ: ऋषि ने कहा:

Meaning: The sage said:

श्लोक 6.7

तेनाज्ञप्तस्ततः शीघ्रं स दैत्यो धूम्रलोचनः।
वृतः षष्ट्या सहस्राणामसुराणां द्रुतं ययौ॥

Tenajnaptas tatah shighram sa daityo dhumralochanah,
vritah shashtya sahasranam asuranam drutam yayau.

अर्थ: शुम्भ की आज्ञा पाकर वह दैत्य धूम्रलोचन साठ हज़ार असुरों से घिरा हुआ तुरंत चल पड़ा।

Meaning: So ordered, the daitya Dhumralochana set out at once, surrounded by sixty thousand asuras.

श्लोक 6.8

स दृष्ट्वा तां ततो देवीं तुहिनाचलसंस्थिताम्।
जगादोच्चैः प्रयाहीति मूलं शुम्भनिशुम्भयोः॥

Sa drishtva tam tato devim tuhinachala-samsthitam,
jagadochchaih prayahiti mulam shumbha-nishumbhayoh.

अर्थ: उसने हिमालय पर विराजमान देवी को देखा और ऊँचे स्वर में कहा: “शुम्भ और निशुम्भ के पास चलो।

Meaning: He saw the Goddess seated on the snowy mountain and called out loudly: “Come with me to Shumbha and Nishumbha.

श्लोक 6.9

न चेत्प्रीत्याद्य भवती मद्भर्तारमुपैष्यति।
ततो बलान्नयाम्येष केशाकर्षणविह्वलाम्॥

Na chet prityadya bhavati mad-bhartaram upaishyati,
tato balan nayamy esha keshakarshana-vihvalam.

अर्थ: यदि तुम आज प्रेम से मेरे स्वामी के पास नहीं चलोगी, तो मैं तुम्हें बाल पकड़कर बलपूर्वक ले जाऊँगा।”

Meaning: If you do not come to my master willingly today, I will take you by force, dragging you by the hair.”

श्लोक 6.10

देव्युवाच॥

Devy uvacha

अर्थ: देवी ने कहा:

Meaning: The Goddess said:

श्लोक 6.11

दैत्येश्वरेण प्रहितो बलवान् बलसंवृतः।
बलान्नयसि मामेवं ततः किं ते करोम्यहम्॥

Daityeshvarena prahito balavan bala-samvritah,
balan nayasi mam evam tatah kim te karomy aham.

अर्थ: “तुम्हें दैत्यराज ने भेजा है, तुम स्वयं बलवान हो और तुम्हारे साथ सेना भी है। यदि तुम मुझे इस तरह बलपूर्वक ले जाओ, तो मैं तुम्हारा क्या कर सकती हूँ?”

Meaning: “You have been sent by the lord of the daityas, you are strong, and an army stands with you. If you take me by force like this, what can I do to you?”

श्लोक 6.12

ऋषिरुवाच॥

Rishir uvacha

अर्थ: ऋषि ने कहा:

Meaning: The sage said:

श्लोक 6.13–6.24: एक हुंकार, सिंह, और चण्ड-मुण्ड

धूम्रलोचन भस्म होता है, सिंह उसकी सेना को नष्ट करता है, और शुम्भ दो नए सेनापति भेजता है।

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श्लोक 6.13

इत्युक्तः सोऽभ्यधावत्तामसुरो धूम्रलोचनः।
हुंकारेणैव तं भस्म सा चकाराम्बिका ततः॥

Ityuktah so 'bhyadhavat tam asuro dhumralochanah,
hunkarenaiva tam bhasma sa chakarambika tatah.

अर्थ: यह सुनकर असुर धूम्रलोचन उनकी ओर झपटा। तब अम्बिका ने केवल “हुं” की ध्वनि (हुंकार) से उसे भस्म कर दिया।

Meaning: At these words the asura Dhumralochana rushed at her. Then Ambika turned him to ashes with nothing but the sound “hum”.

श्लोक 6.14

अथ क्रुद्धं महासैन्यमसुराणां तथाम्बिका।
ववर्ष सायकैस्तीक्ष्णैस्तथा शक्तिपरश्वधैः॥

Atha kruddham maha-sainyam asuranam tathambika,
vavarsha sayakais tikshnais tatha shakti-parashvadhaih.

अर्थ: इससे असुरों की विशाल सेना क्रोध में भर गई। तब अम्बिका ने उस पर तीखे बाणों, शक्तियों (भालों) और फरसों की वर्षा की।

Meaning: At this the great army of the asuras grew furious, and Ambika rained sharp arrows, spears and axes upon it.

श्लोक 6.15

ततो धुतसटः कोपात्कृत्वा नादं सुभैरवम्।
पपातासुरसेनायां सिंहो देव्याः स्ववाहनः॥

Tato dhuta-satah kopat kritva nadam subhairavam,
papatasura-senayam simho devyah sva-vahanah.

अर्थ: तब देवी का अपना वाहन सिंह क्रोध से अयाल झटकते हुए, भयंकर गर्जना करके असुरों की सेना पर टूट पड़ा।

Meaning: Then the Goddess’s own mount, the lion, shaking its mane in anger and giving a terrible roar, fell upon the asura army.

श्लोक 6.16

कांश्चित् करप्रहारेण दैत्यानास्येन चापरान्।
आक्रम्य चाधरेणान्यान् स जघान महासुरान्॥

Kamshchit kara-praharena daityan asyena chaparan,
akramya chadharenanyan sa jaghana mahasuran.

अर्थ: कुछ दैत्यों को उसने पंजों की मार से, कुछ को जबड़ों से, और कुछ को अपने नीचे दबाकर मार गिराया। (कुछ प्रतियों में “पैरों से कुचलकर” पाठ है।)

Meaning: Some daityas it struck down with blows of its paws, others with its jaws, and others it pinned beneath its body. (Some copies read “trampled under its feet”.)

श्लोक 6.17

केषांचित्पाटयामास नखैः कोष्ठानि केसरी।
तथा तलप्रहारेण शिरांसि कृतवान् पृथक्॥

Keshanchit patayamasa nakhaih koshthani kesari,
tatha tala-praharena shiramsi kritavan prithak.

अर्थ: किसी का पेट उस सिंह ने नाखूनों से फाड़ दिया, और पंजे के थप्पड़ से कितनों के सिर अलग कर दिए।

Meaning: The lion tore open the bellies of some with its claws, and with blows of its paw it struck off the heads of others.

श्लोक 6.18

विच्छिन्नबाहुशिरसः कृतास्तेन तथापरे।
पपौ च रुधिरं कोष्ठादन्येषां धुतकेसरः॥

Vichchhinna-bahu-shirasah kritas tena tathapare,
papau cha rudhiram koshthad anyesham dhuta-kesarah.

अर्थ: कितनों की भुजाएँ और सिर उसने काट डाले, और अयाल झटकते हुए दूसरों का रक्त पी गया।

Meaning: Others it left with arms and heads cut away, and, shaking its mane, it drank the blood of others.

श्लोक 6.19

क्षणेन तद्बलं सर्वं क्षयं नीतं महात्मना।
तेन केसरिणा देव्या वाहनेनातिकोपिना॥

Kshanena tad balam sarvam kshayam nitam mahatmana,
tena kesarina devya vahanenatikopina.

अर्थ: देवी के उस अत्यंत क्रोधित, महाबली वाहन सिंह ने पल भर में वह सारी सेना नष्ट कर दी।

Meaning: In a moment that whole army was destroyed by the Goddess’s mighty mount, the lion, in its great fury.

श्लोक 6.20

श्रुत्वा तमसुरं देव्या निहतं धूम्रलोचनम्।
बलं च क्षयितं कृत्स्नं देवीकेसरिणा ततः॥

Shrutva tam asuram devya nihatam dhumralochanam,
balam cha kshayitam kritsnam devi-kesarina tatah.

अर्थ: जब (शुम्भ ने) सुना कि देवी ने असुर धूम्रलोचन को मार डाला है और देवी के सिंह ने उसकी सारी सेना नष्ट कर दी है,

Meaning: When Shumbha heard that the Goddess had slain the asura Dhumralochana, and that her lion had destroyed his entire army,

श्लोक 6.21

चुकोप दैत्याधिपतिः शुम्भः प्रस्फुरिताधरः।
आज्ञापयामास च तौ चण्डमुण्डौ महासुरौ॥

Chukopa daityadhipatih shumbhah prasphuritadharah,
ajnapayamasa cha tau chanda-mundau mahasurau.

अर्थ: तो दैत्यों का स्वामी शुम्भ क्रोध से भर गया, उसके होंठ फड़कने लगे, और उसने चण्ड और मुण्ड नाम के दो महान असुरों को आज्ञा दी:

Meaning: Shumbha, lord of the daityas, was enraged, his lips trembling, and he gave orders to the two great asuras Chanda and Munda:

श्लोक 6.22

हे चण्ड हे मुण्ड बलैर्बहुभिः परिवारितौ।
तत्र गच्छत गत्वा च सा समानीयतां लघु॥

He chanda he munda balair bahubhih parivaritau,
tatra gachchhata gatva cha sa samaniyatam laghu.

अर्थ: “हे चण्ड, हे मुण्ड, तुम दोनों बड़ी-बड़ी सेनाएँ साथ लेकर वहाँ जाओ और उसे जल्दी यहाँ ले आओ।

Meaning: “Chanda! Munda! Take large armies with you, go there, and bring her here quickly.

श्लोक 6.23

केशेष्वाकृष्य बद्ध्वा वा यदि वः संशयो युधि।
तदाशेषायुधैः सर्वैरसुरैर्विनिहन्यताम्॥

Keshesv akrishya baddhva va yadi vah samshayo yudhi,
tadashesha-yudhaih sarvair asurair vinihanyatam.

अर्थ: उसे बालों से खींचकर या बाँधकर लाना। और यदि युद्ध में (जीत पर) तुम्हें संदेह हो, तो सब असुर मिलकर सारे अस्त्र-शस्त्रों से उस पर प्रहार करें।

Meaning: Drag her by the hair or bind her and bring her. And if you have any doubt about the fight, let all the asuras strike her down together with every weapon they have.

श्लोक 6.24

तस्यां हतायां दुष्टायां सिंहे च विनिपातिते।
शीघ्रमागम्यतां बद्ध्वा गृहीत्वा तामथाम्बिकाम्॥

Tasyam hatayam dushtayam simhe cha vinipatite,
shighram agamyatam baddhva grihitva tam athambikam.

अर्थ: जब वह दुष्टा घायल हो जाए और उसका सिंह मार गिराया जाए, तब उस अम्बिका को पकड़कर, बाँधकर जल्दी लौट आना।” (यहाँ “हतायां” का अर्थ टीकाकार “घायल होने पर” लेते हैं, क्योंकि शुम्भ उन्हें जीवित लाना चाहता है।)

Meaning: When that wicked one is struck down and her lion has fallen, seize Ambika, bind her, and come back quickly.” (Commentators take “struck down” here as “wounded”, since Shumbha wants her brought alive.)

पुष्पिका

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये
शुम्भनिशुम्भसेनानीधूम्रलोचनवधो नाम षष्ठोऽध्यायः॥

Iti shri-markandeya-purane savarnike manvantare devi-mahatmye
shumbha-nishumbha-senani-dhumralochana-vadho nama shashtho 'dhyayah.

अर्थ: इस प्रकार श्री मार्कण्डेय पुराण में, सावर्णिक मन्वंतर की कथा के अंतर्गत देवी माहात्म्य में “शुम्भ-निशुम्भ के सेनापति धूम्रलोचन का वध” नाम का छठा अध्याय पूरा हुआ।

Meaning: Thus ends the sixth chapter, called “the slaying of Dhumralochana, commander of Shumbha and Nishumbha”, in the Devi Mahatmya, part of the account of the Savarni Manvantara in the Shri Markandeya Purana.

सवाल-जवाब

धूम्रलोचन कौन था?

उसके नाम का अर्थ है “धुएँ जैसी आँखों वाला”। वह दैत्य सेना का एक सेनापति था, और देवी के प्रस्ताव ठुकराने के बाद शुम्भ ने सबसे पहले उसी को उनके विरुद्ध भेजा। वह साठ हज़ार असुरों के साथ देवी को बलपूर्वक ले जाने आया और शुम्भ के सेनापतियों में सबसे पहले मारा गया। बहुत से गुरु उसे धुंधली, धुएँ जैसी दृष्टि का प्रतीक मानते हैं, जो साफ़ चेतना के सामने टिक नहीं पाती।

देवी ने उसे “हुं” से मारा, इसका क्या अर्थ है?

श्लोक 6.13 कहता है कि देवी ने बिना कोई अस्त्र उठाए केवल हुंकार, यानी “हुं” की एक ध्वनि, से उसे भस्म कर दिया। कथा का भाव उनकी सहज शक्ति है: जो काम सबसे बड़ी सेना नहीं कर सकती, वह वे एक साँस में कर देती हैं। “हुं” मंत्र साधना में प्रयोग होने वाले बीज अक्षरों में से भी एक है, इसलिए भक्त टीकाकार इस श्लोक में पवित्र ध्वनि की शक्ति देखते हैं।

क्या अध्याय 6 दुर्गा सप्तशती का सबसे छोटा अध्याय है?

हाँ। गीता प्रेस की गिनती में इसमें 24 मंत्र हैं (वक्ता की चार पंक्तियाँ और बीस श्लोक), जो तेरह अध्यायों में सबसे कम हैं; इसके बाद 27 मंत्रों वाला अध्याय 7 आता है। संस्कृत में इसका पाठ लगभग 4 मिनट में होता है। जो लोग पूरा पाठ एक बार में नहीं कर पाते, वे नवरात्रि में रोज़ कुछ अध्याय पढ़ते हैं, और यह अध्याय रोज़ के छोटे पाठ में आसानी से आ जाता है।

शुम्भ स्वयं लड़ने के बजाय दूसरों को क्यों भेजता रहता है?

वह देवी को गंभीरता से नहीं लेता। उसकी दृष्टि में वे एक स्त्री हैं जिन्हें उसके दरबार में लाया जाना है, इसलिए वह पहले एक सेनापति भेजता है, फिर चण्ड और मुण्ड को (6.21–6.24), फिर रक्तबीज और पूरी सेना को (अध्याय 8)। हर हार के साथ दाँव बढ़ता है, और अध्याय 9 और 10 में जाकर निशुम्भ और शुम्भ स्वयं लड़ने आते हैं। बहुत से पाठक इसमें देखते हैं कि अहंकार कैसे बार-बार सामने की शक्ति को कम आँकता है।

पाठ और स्रोत

संस्कृत पाठ सार्वजनिक है। हमने सभी 24 मंत्र और पुष्पिका एक-एक करके 1 नवंबर 2026 को लिए गए पाठों से मिलाए: sanskritdocuments.org पर पूरी सप्तशती (“durga700”) और संस्कृत विकिस्रोत पर मार्कण्डेय पुराण का अध्याय 86 (वहाँ देवी माहात्म्य अध्याय 81–93 है), जिन्हें विराम-चिह्न और वर्तनी के अंतर हटाकर प्रोग्राम से मिलाया, और archive.org पर गीता प्रेस की “श्रीदुर्गासप्तशती” के दो संस्करणों (मूल भाग, और हिंदी अनुवाद वाला सचित्र संस्करण) के स्कैन, जिन्हें हाथ से पढ़कर मिलाया। हमने गीता प्रेस का पाठ और उसकी गिनती अपनाई है, जो वक्ता की चार पंक्तियों (6.1, 6.6, 6.10, 6.12) को भी मंत्र गिनती है, जिससे कुल 24 होते हैं; पुराण के पाठ में केवल 20 श्लोक गिने गए हैं। गीता प्रेस और विकिस्रोत में “सा चकाराम्बिका ततः” (6.13; sanskritdocuments में “तदा”) और “आक्रम्य चाधरेणान्यान् स जघान महासुरान्” (6.16; sanskritdocuments में “आक्रान्त्या … जघान स”) है; गीता प्रेस 6.16 में “आक्रान्त्या”, “चरणेनान्यान्”, “संजघान” या “निजघान”, 6.14 में “तथाम्बिकाम्” और 6.17 में “केशरी” को पाठभेद के रूप में देती है। गीता प्रेस पहली वक्ता-पंक्ति से पहले “ॐ” और अध्याय के आरंभ में एक ध्यान श्लोक (“नागाधीश्वरविष्टरां…”) देती है; इन पृष्ठों पर ध्यान श्लोक केवल पाठ के तीनों चरित्रों के आरंभ में (अध्याय 1, 2 और 5) दिए गए हैं, और ध्यान 700 मंत्रों में नहीं गिना जाता। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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