दुर्गा सप्तशती · अध्याय 7

दुर्गा सप्तशती अध्याय 7 (चण्ड-मुण्ड वध): हिंदी अर्थ सहित

चण्ड और मुण्ड पूरी सेना लेकर देवी पर चढ़ आते हैं। क्रोध से देवी का मुख काला पड़ जाता है, और उनके ललाट से भयंकर, निर्भय काली प्रकट होती हैं, जो सेना को तोड़ देती हैं और दोनों सेनापतियों को गिरा देती हैं। जब काली उन्हें देवी के सामने लाती हैं, तो देवी उन्हें एक नया नाम देती हैं: चामुण्डा।

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अध्याय 7 किस बारे में है

अध्याय 7 सप्तशती के तीसरे भाग, उत्तम चरित्र (अध्याय 5 से 13) को आगे बढ़ाता है, जिसे मेधा मुनि राजा सुरथ और समाधि वैश्य को सुनाते हैं। अध्याय 6 में देवी ने शुम्भ के सेनापति धूम्रलोचन को एक ध्वनि से भस्म कर दिया था, और शुम्भ ने चण्ड और मुण्ड नाम के भाइयों को देवी को बाँधकर लाने भेजा था। अब वे हाथी, रथ, घोड़े और पैदल सैनिकों की सेना लेकर आते हैं, और देवी को सोने के पर्वत-शिखर पर सिंह पर बैठी, धीरे-धीरे मुस्कुराती हुई पाते हैं (7.3)।

जब सैनिक पास आते हैं, तो क्रोध से देवी का मुख स्याही जैसा काला हो जाता है, और उनकी तनी हुई भौंहों के बीच से काली प्रकट होती हैं (7.5–7.8): दुबली, विशाल मुख वाली, बाघ की खाल और मुंडों की माला पहने, हाथों में तलवार, पाश और खट्वांग (खोपड़ी लगा दंड) लिए। सप्तशती में काली का यह पहला प्राकट्य है। ग्रंथ उन्हें भयानक बताता है, पर उनका भय उस सेना के लिए है जो देवी को घसीटकर ले जाने आई थी। वे उस सेना को तोड़ देती हैं (7.9–7.15), और जब चण्ड और मुण्ड उन पर आक्रमण करते हैं, तो दोनों को गिरा देती हैं (7.20–7.21)।

काली दोनों के सिर देवी के पास लाती हैं और कहती हैं कि यह युद्ध एक यज्ञ है, जिसमें अम्बिका स्वयं शुम्भ और निशुम्भ का अंत करेंगी (7.24)। देवी मधुर वचनों में एक नाम देकर उत्तर देती हैं (7.27): तुम चण्ड और मुण्ड को लेकर आई हो, इसलिए संसार में चामुण्डा नाम से प्रसिद्ध होगी। यही नाम नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” में है, जिसका जप बहुत से लोग सप्तशती के साथ करते हैं। अध्याय में 27 मंत्र हैं; संस्कृत में पाठ करने में लगभग 5 मिनट और अर्थ के साथ पढ़ने में लगभग 12 मिनट लगते हैं।

श्लोक 7.1–7.9: काली का प्राकट्य

चण्ड और मुण्ड सेना लेकर आते हैं, और देवी के ललाट से काली प्रकट होती हैं।

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श्लोक 7.1

ॐ ऋषिरुवाच॥

Rishir uvacha

अर्थ: ऋषि (मेधा मुनि) ने कहा:

Meaning: The sage (Medhas) said:

श्लोक 7.2

आज्ञप्तास्ते ततो दैत्याश्चण्डमुण्डपुरोगमाः।
चतुरङ्गबलोपेता ययुरभ्युद्यतायुधाः॥

Ajnaptas te tato daityash chanda-munda-purogamah,
chaturanga-balopeta yayur abhyudyatayudhah.

अर्थ: शुम्भ की आज्ञा पाकर चण्ड और मुण्ड के नेतृत्व में वे दैत्य चतुरंगिणी सेना (हाथी, रथ, घोड़े और पैदल) के साथ हथियार उठाए चल पड़े।

Meaning: So ordered, the daityas, led by Chanda and Munda, set out with an army of all four kinds (elephants, chariots, horses and foot soldiers), their weapons raised.

श्लोक 7.3

ददृशुस्ते ततो देवीमीषद्धासां व्यवस्थिताम्।
सिंहस्योपरि शैलेन्द्रशृङ्गे महति काञ्चने॥

Dadrishus te tato devim ishad-dhasam vyavasthitam,
simhasyopari shailendra-shringe mahati kanchane.

अर्थ: वहाँ उन्होंने देवी को देखा, जो पर्वतराज (हिमालय) के एक विशाल सुनहरे शिखर पर सिंह के ऊपर बैठी धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थीं।

Meaning: There they saw the Goddess, smiling gently, seated on her lion upon a great golden peak of the king of mountains.

श्लोक 7.4

ते दृष्ट्वा तां समादातुमुद्यमं चक्रुरुद्यताः।
आकृष्टचापासिधरास्तथान्ये तत्समीपगाः॥

Te drishtva tam samadatum udyamam chakrur udyatah,
akrishta-chapasi-dharas tathanye tat-samipagah.

अर्थ: उन्हें देखकर वे उन्हें पकड़ने के लिए तैयार होकर आगे बढ़े; कुछ धनुष ताने और तलवारें लिए उनके पास तक आ पहुँचे।

Meaning: Seeing her, they made ready and moved to seize her; others, with bows drawn and swords in hand, came close to her.

श्लोक 7.5

ततः कोपं चकारोच्चैरम्बिका तानरीन् प्रति।
कोपेन चास्या वदनं मषीवर्णमभूत्तदा॥

Tatah kopam chakarochchair ambika tan arin prati,
kopena chasya vadanam mashi-varnam abhut tada.

अर्थ: तब अम्बिका को उन शत्रुओं पर बहुत क्रोध आया, और क्रोध से उनका मुख स्याही की तरह काला हो गया।

Meaning: Then Ambika grew very angry with those enemies, and in her anger her face turned dark as ink.

श्लोक 7.6

भ्रुकुटीकुटिलात्तस्या ललाटफलकाद्द्रुतम्।
काली करालवदना विनिष्क्रान्तासिपाशिनी॥

Bhrukuti-kutilat tasya lalata-phalakad drutam,
kali karala-vadana vinishkrantasi-pashini.

अर्थ: उनके ललाट से, तनी और टेढ़ी भौंहों के बीच से, तुरंत विकराल मुख वाली काली प्रकट हुईं, जिनके हाथों में तलवार और पाश था।

Meaning: From her forehead, from between her frowning, knitted brows, there swiftly came forth Kali, of fearsome face, holding a sword and a noose.

श्लोक 7.7

विचित्रखट्वाङ्गधरा नरमालाविभूषणा।
द्वीपिचर्मपरीधाना शुष्कमांसातिभैरवा॥

Vichitra-khatvanga-dhara nara-mala-vibhushana,
dvipi-charma-paridhana shushka-mamsati-bhairava.

अर्थ: वे अनोखा खट्वांग (खोपड़ी लगा दंड) लिए थीं, मनुष्यों के मुंडों की माला पहने थीं, बाघ की खाल ओढ़े थीं, और उनका शरीर सूखा-दुबला था, जिससे वे बहुत भयानक लगती थीं।

Meaning: She carried a strange skull-topped staff and wore a garland of human heads; she was dressed in a tiger skin, and her gaunt, wasted body made her most terrible to see.

श्लोक 7.8

अतिविस्तारवदना जिह्वाललनभीषणा।
निमग्नारक्तनयना नादापूरितदिङ्मुखा॥

Ativistara-vadana jihva-lalana-bhishana,
nimagnarakta-nayana nadapurita-dinmukha.

अर्थ: उनका मुख बहुत फैला हुआ था, लपलपाती जीभ से वे डरावनी लगती थीं, उनकी आँखें धँसी हुई और लाल थीं, और उनकी गर्जना से सारी दिशाएँ गूँज उठीं।

Meaning: Her mouth was very wide and her lolling tongue fearsome; her eyes were sunken and reddish, and her roar filled every direction.

श्लोक 7.9

सा वेगेनाभिपतिता घातयन्ती महासुरान्।
सैन्ये तत्र सुरारीणामभक्षयत तद्बलम्॥

Sa veganabhipatita ghatayanti mahasuran,
sainye tatra surarinam abhakshayata tad balam.

अर्थ: वे बड़े वेग से सेना पर टूट पड़ीं और बड़े-बड़े असुरों को मारते हुए देवताओं के शत्रुओं की उस सेना को निगलने लगीं।

Meaning: She fell upon them with great speed, striking down the great asuras, and began to devour that army of the gods’ enemies.

श्लोक 7.10–7.22: युद्ध में काली

काली सेना को तोड़ देती हैं और चण्ड-मुण्ड को गिरा देती हैं।

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श्लोक 7.10

पार्ष्णिग्राहाङ्कुशग्राहियोधघण्टासमन्वितान्।
समादायैकहस्तेन मुखे चिक्षेप वारणान्॥

Parshni-grahankusha-grahi-yodha-ghanta-samanvitan,
samadayaika-hastena mukhe chikshepa varanan.

अर्थ: हाथियों को, उनके पीछे बैठे रक्षकों, अंकुश वाले महावतों, योद्धाओं और घंटियों समेत, वे एक हाथ से उठाकर मुँह में डाल लेती थीं।

Meaning: She lifted elephants with one hand, together with their rear guards, their drivers with goads, their warriors and their bells, and threw them into her mouth.

श्लोक 7.11

तथैव योधं तुरगै रथं सारथिना सह।
निक्षिप्य वक्त्रे दशनैश्चर्वयन्त्यतिभैरवम्॥

Tathaiva yodham turagai ratham sarathina saha,
nikshipya vaktre dashanaish charvayanty atibhairavam.

अर्थ: इसी तरह घोड़ों समेत घुड़सवारों को और सारथियों समेत रथों को मुँह में डालकर वे बड़े भयानक ढंग से दाँतों से चबा डालती थीं।

Meaning: In the same way she put horsemen with their horses and chariots with their drivers into her mouth and ground them between her teeth, a terrible sight.

श्लोक 7.12

एकं जग्राह केशेषु ग्रीवायामथ चापरम्।
पादेनाक्रम्य चैवान्यमुरसान्यमपोथयत्॥

Ekam jagraha keshesu grivayam atha chaparam,
padenakramya chaivanyam urasanyam apothayat.

अर्थ: किसी को उन्होंने बालों से पकड़ा, किसी को गले से; किसी को पैर से कुचल दिया और किसी को छाती के धक्के से गिरा दिया।

Meaning: One she seized by the hair, another by the neck; one she trampled under her foot, and another she knocked down with her chest.

श्लोक 7.13

तैर्मुक्तानि च शस्त्राणि महास्त्राणि तथासुरैः।
मुखेन जग्राह रुषा दशनैर्मथितान्यपि॥

Tair muktani cha shastrani mahastrani tathasuraih,
mukhena jagraha rusha dashanair mathitany api.

अर्थ: असुरों के छोड़े हुए शस्त्रों और बड़े-बड़े अस्त्रों को उन्होंने क्रोध में भरकर मुँह से पकड़ लिया और दाँतों से पीस डाला।

Meaning: The weapons and great missiles the asuras hurled at her she caught in her mouth in fury and crushed with her teeth.

श्लोक 7.14

बलिनां तद्बलं सर्वमसुराणां दुरात्मनाम्।
ममर्दाभक्षयच्चान्यानन्यांश्चाताडयत्तथा॥

Balinam tad balam sarvam asuranam duratmanam,
mamardabhakshayach chanyan anyamsh chatadayat tatha.

अर्थ: बलवान और दुष्ट असुरों की उस सारी सेना को उन्होंने रौंद डाला; कुछ को निगल गईं और कुछ को मार भगाया।

Meaning: That whole army of mighty, evil-minded asuras she crushed; some she devoured, and others she struck down.

श्लोक 7.15

असिना निहताः केचित्केचित्खट्वाङ्गताडिताः।
जग्मुर्विनाशमसुरा दन्ताग्राभिहतास्तथा॥

Asina nihatah kechit kechit khatvanga-taditah,
jagmur vinasham asura dantagrabhihatas tatha.

अर्थ: कुछ असुर तलवार से मारे गए, कुछ खट्वांग से पीटे गए, और कुछ दाँतों की नोक से घायल होकर नष्ट हो गए।

Meaning: Some asuras were cut down by the sword, some beaten with the skull-staff, and others perished struck by the points of her teeth.

श्लोक 7.16

क्षणेन तद्बलं सर्वमसुराणां निपातितम्।
दृष्ट्वा चण्डोऽभिदुद्राव तां कालीमतिभीषणाम्॥

Kshanena tad balam sarvam asuranam nipatitam,
drishtva chando 'bhidudrava tam kalim atibhishanam.

अर्थ: असुरों की सारी सेना को पल भर में गिरा हुआ देखकर चण्ड उन अत्यंत भयानक काली की ओर दौड़ा।

Meaning: Seeing the whole asura army brought down in a moment, Chanda rushed at Kali, most terrible to behold.

श्लोक 7.17

शरवर्षैर्महाभीमैर्भीमाक्षीं तां महासुरः।
छादयामास चक्रैश्च मुण्डः क्षिप्तैः सहस्रशः॥

Shara-varshair maha-bhimair bhimakshim tam mahasurah,
chhadayamasa chakraish cha mundah kshiptaih sahasrashah.

अर्थ: महादैत्य मुण्ड ने भी बहुत भयंकर बाणों की वर्षा से और हज़ारों की संख्या में फेंके गए चक्रों से उन भयानक नेत्रों वाली देवी को ढक दिया। (कुछ टीकाकार बाणों की वर्षा चण्ड की और चक्र मुण्ड के मानते हैं।)

Meaning: The great asura Munda covered the fierce-eyed goddess with showers of dreadful arrows and with discs hurled by the thousand. (Some commentators take the arrows as Chanda’s and the discs as Munda’s.)

श्लोक 7.18

तानि चक्राण्यनेकानि विशमानानि तन्मुखम्।
बभुर्यथार्कबिम्बानि सुबहूनि घनोदरम्॥

Tani chakrany anekani vishamanani tan-mukham,
babhur yatharka-bimbani subahuni ghanodaram.

अर्थ: वे अनेक चक्र उनके मुख में समाते हुए ऐसे लगे, मानो बहुत से सूर्य-मंडल बादल के भीतर समा रहे हों।

Meaning: Those many discs, vanishing into her mouth, looked like many orbs of the sun disappearing into the depths of a cloud.

श्लोक 7.19

ततो जहासातिरुषा भीमं भैरवनादिनी।
काली करालवक्त्रान्तर्दुर्दर्शदशनोज्ज्वला॥

Tato jahasatirusha bhimam bhairava-nadini,
kali karala-vaktrantar-durdarsha-dashanojjvala.

अर्थ: तब भयंकर गर्जना करने वाली काली अत्यंत क्रोध में भरकर भयानक हँसी हँसीं; उनके विकराल मुख के भीतर ऐसे दाँत चमक रहे थे जिन्हें देखना भी कठिन था।

Meaning: Then Kali, roaring dreadfully, laughed a terrible laugh in her great fury; within her fearsome mouth her teeth gleamed, hard even to look upon.

श्लोक 7.20

उत्थाय च महासिं हं देवी चण्डमधावत।
गृहीत्वा चास्य केशेषु शिरस्तेनासिनाच्छिनत्॥

Utthaya cha mahasim ham devi chandam adhavata,
grihitva chasya keshesu shiras tenasinachchhinat.

अर्थ: देवी (काली) ने विशाल तलवार उठाई और “हं” की ध्वनि करते हुए चण्ड पर धावा किया; उसके बाल पकड़कर उसी तलवार से उसका सिर काट दिया। (कुछ प्रतियों में “महासिंहं” पाठ है, जिसे कुछ लोग “महान सिंह पर चढ़कर” समझते हैं।)

Meaning: Raising her great sword and crying “ham”, the goddess (Kali) rushed at Chanda, seized him by the hair and cut off his head with that sword. (Some copies read “mahasimham”, which some take as “mounting the great lion”.)

श्लोक 7.21

अथ मुण्डोऽभ्यधावत्तां दृष्ट्वा चण्डं निपातितम्।
तमप्यपातयद्भूमौ सा खड्गाभिहतं रुषा॥

Atha mundo 'bhyadhavat tam drishtva chandam nipatitam,
tam apy apatayad bhumau sa khadgabhihatam rusha.

अर्थ: चण्ड को गिरा हुआ देखकर मुण्ड उनकी ओर दौड़ा; उन्होंने क्रोध में भरकर उसे भी तलवार से मारकर धरती पर गिरा दिया।

Meaning: Seeing Chanda fallen, Munda rushed at her; and she, in her fury, struck him with her sword and brought him to the ground as well.

श्लोक 7.22

हतशेषं ततः सैन्यं दृष्ट्वा चण्डं निपातितम्।
मुण्डं च सुमहावीर्यं दिशो भेजे भयातुरम्॥

Hata-shesham tatah sainyam drishtva chandam nipatitam,
mundam cha sumaha-viryam disho bheje bhayaturam.

अर्थ: चण्ड को और महापराक्रमी मुण्ड को भी गिरा हुआ देखकर बची हुई सेना डर से व्याकुल होकर चारों दिशाओं में भाग गई।

Meaning: Seeing Chanda fallen, and mighty Munda too, what was left of the army fled in every direction, stricken with fear.

श्लोक 7.23–7.27: चामुण्डा नाम

काली दोनों सेनापतियों को देवी के पास लाती हैं, और देवी उन्हें चामुण्डा नाम देती हैं।

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श्लोक 7.23

शिरश्चण्डस्य काली च गृहीत्वा मुण्डमेव च।
प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम्॥

Shirash chandasya kali cha grihitva mundam eva cha,
praha prachandatta-hasa-mishram abhyetya chandikam.

अर्थ: तब काली चण्ड और मुण्ड के सिर लेकर चण्डिका के पास आईं और प्रचंड अट्टहास के साथ बोलीं:

Meaning: Then Kali took the heads of Chanda and Munda, came to Chandika and, with a great booming laugh, said:

श्लोक 7.24

मया तवात्रोपहृतौ चण्डमुण्डौ महापशू।
युद्धयज्ञे स्वयं शुम्भं निशुम्भं च हनिष्यसि॥

Maya tavatropahritau chanda-mundau maha-pashu,
yuddha-yajne svayam shumbham nishumbham cha hanishyasi.

अर्थ: “मैंने चण्ड और मुण्ड नाम के इन दो महापशुओं को यहाँ आपको भेंट कर दिया है। अब युद्ध रूपी यज्ञ में शुम्भ और निशुम्भ का अंत आप स्वयं करेंगी।”

Meaning: “Here I have brought you Chanda and Munda, two great beasts for the offering. In the sacrifice of battle you yourself will slay Shumbha and Nishumbha.”

श्लोक 7.25

ऋषिरुवाच॥

Rishir uvacha

अर्थ: ऋषि ने कहा:

Meaning: The sage said:

श्लोक 7.26

तावानीतौ ततो दृष्ट्वा चण्डमुण्डौ महासुरौ।
उवाच कालीं कल्याणी ललितं चण्डिका वचः॥

Tav anitau tato drishtva chanda-mundau mahasurau,
uvacha kalim kalyani lalitam chandika vachah.

अर्थ: वहाँ लाए गए उन दोनों महादैत्यों चण्ड और मुण्ड को देखकर कल्याणमयी चण्डिका ने काली से मधुर वचन कहे:

Meaning: Seeing the two great asuras Chanda and Munda brought before her, the gracious Chandika spoke sweet words to Kali:

श्लोक 7.27

यस्माच्चण्डं च मुण्डं च गृहीत्वा त्वमुपागता।
चामुण्डेति ततो लोके ख्याता देवि भविष्यसि॥

Yasmach chandam cha mundam cha grihitva tvam upagata,
chamundeti tato loke khyata devi bhavishyasi.

अर्थ: “हे देवी, क्योंकि तुम चण्ड और मुण्ड को लेकर मेरे पास आई हो, इसलिए संसार में तुम “चामुण्डा” नाम से प्रसिद्ध होगी।”

Meaning: “Goddess, because you have come to me bringing Chanda and Munda, you will be known in the world as Chamunda.”

पुष्पिका

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये
चण्डमुण्डवधो नाम सप्तमोऽध्यायः॥

Iti shri-markandeya-purane savarnike manvantare devi-mahatmye
chanda-munda-vadho nama saptamo 'dhyayah.

अर्थ: इस प्रकार श्री मार्कण्डेय पुराण में, सावर्णिक मन्वंतर की कथा के अंतर्गत देवी माहात्म्य में “चण्ड-मुण्ड वध” नाम का सातवाँ अध्याय पूरा हुआ।

Meaning: Thus ends the seventh chapter, called “the slaying of Chanda and Munda”, in the Devi Mahatmya, part of the account of the Savarni Manvantara in the Shri Markandeya Purana.

सवाल-जवाब

दुर्गा सप्तशती अध्याय 7 में काली कैसे प्रकट होती हैं?

जब चण्ड और मुण्ड के सैनिक देवी को पकड़ने आते हैं, तो क्रोध से उनका मुख काला हो जाता है, और उनके ललाट से, तनी भौंहों के बीच से, काली प्रकट होती हैं (7.5–7.6)। वे बाहर से बुलाई गई कोई अलग देवी नहीं हैं: वे स्वयं अम्बिका से, उनकी अपनी उग्र शक्ति के रूप में निकलती हैं। सप्तशती में काली का यह पहला प्राकट्य है।

देवी को चामुण्डा क्यों कहा जाता है?

श्लोक 7.27 कारण बताता है: काली चण्ड और मुण्ड को देवी के सामने लाईं, इसलिए देवी ने कहा, “तुम संसार में चामुण्डा नाम से प्रसिद्ध होगी” (चण्ड और मुण्ड से चा-मुण्डा)। यह नाम नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का केंद्र है, जिसका जप परंपरा से सप्तशती के पाठ से पहले और बाद में किया जाता है, और भारत भर में चामुण्डा देवी के बहुत से मंदिर इसी रूप की पूजा करते हैं।

काली का वर्णन इतना भयानक क्यों है?

ग्रंथ जान-बूझकर उन्हें उग्र रूप में दिखाता है: दुबली, विशाल मुख वाली, मुंडों की माला पहने, पूरी सेना को निगलती हुई (7.7–7.13)। उनकी उग्रता उस सेना के विरुद्ध है जो देवी को बलपूर्वक घसीटकर ले जाने आई थी। भक्तों के लिए वे रक्षा करने वाली माँ हैं, और उनके डरावने रूप को उस सबके नाश के रूप में पढ़ा जाता है जो हानि करता है: शाक्त दृष्टि में अहंकार, भय और अधर्म। देवी से काली हँसते हुए बात करती हैं, और देवी उन्हें मधुर वचनों में उत्तर देती हैं (7.26)।

7.24 में “युद्ध रूपी यज्ञ” का क्या अर्थ है?

काली चण्ड और मुण्ड को भेंट के लिए लाए गए “दो महापशु” कहती हैं, और युद्ध को यज्ञ, जिसमें देवी स्वयं शुम्भ और निशुम्भ का अंत करेंगी। यह पुराने वैदिक यज्ञ से लिया गया चित्र है: असुरों के विरुद्ध युद्ध को केवल लड़ाई नहीं, बल्कि व्यवस्था लौटाने वाला पवित्र कर्म माना गया है। यह आगे की ओर भी संकेत करता है: दोनों भाई स्वयं देवी के लिए छोड़े गए हैं, अध्याय 9 और 10 में।

पाठ और स्रोत

संस्कृत पाठ सार्वजनिक है। हमने सभी 27 मंत्र और पुष्पिका एक-एक करके 1 नवंबर 2026 को लिए गए पाठों से मिलाए: sanskritdocuments.org पर पूरी सप्तशती (“durga700”) और संस्कृत विकिस्रोत पर मार्कण्डेय पुराण का अध्याय 87 (वहाँ देवी माहात्म्य अध्याय 81–93 है), जिन्हें विराम-चिह्न और वर्तनी के अंतर हटाकर प्रोग्राम से मिलाया, और archive.org पर गीता प्रेस की “श्रीदुर्गासप्तशती” के दो संस्करणों (मूल भाग, और हिंदी अनुवाद वाला सचित्र संस्करण) के स्कैन, जिन्हें हाथ से पढ़कर मिलाया। हमने गीता प्रेस का पाठ और उसकी गिनती अपनाई है, जो वक्ता की पंक्तियों 7.1 और 7.25 को भी मंत्र गिनती है, जिससे कुल 27 होते हैं। sanskritdocuments के बजाय गीता प्रेस और विकिस्रोत के साथ लिए गए पाठ: “पार्ष्णिग्राहाङ्कुशग्राहि” (7.10; sanskritdocuments में “ग्राह”), “चाताडयत्तथा” (7.14; “तदा”), “करालवक्त्रान्तर्दुर्दर्श” (7.19; “करालवदना दुर्दर्श”) और संबोधन “ख्याता देवि” (7.27)। 7.20 में गीता प्रेस “महासिं हं” (“विशाल तलवार, ‘हं’ कहकर”) छापती है, जहाँ अन्य दोनों में “महासिंहं” है। 7.24 में हमने sanskritdocuments, विकिस्रोत और गीता प्रेस के हिंदी अनुवाद (“भेंट किया है”) के अनुसार “उपहृतौ” लिया है, यद्यपि गीता प्रेस के दोनों स्कैन “उपहतौ” छापते हैं। विकिस्रोत 7.15 में “दन्ताग्राभिहता रणे” पढ़ता है, जिसे गीता प्रेस भी पाठभेद के रूप में देती है, और 7.20 के बाद एक पंक्ति “छिन्ने शिरसि दैत्येन्द्रश्चक्रे नादं सुभैरवम् …” जोड़ता है, जिसे गीता प्रेस पाद-टिप्पणी में शान्तनवी टीका द्वारा माने गए अतिरिक्त श्लोक के रूप में देती है; हमने उसे नहीं गिना। गीता प्रेस 7.1 से पहले “ॐ” और अध्याय के आरंभ में एक ध्यान श्लोक (“ध्यायेयं रत्नपीठे…”) देती है; इन पृष्ठों पर ध्यान श्लोक केवल पाठ के तीनों चरित्रों के आरंभ में (अध्याय 1, 2 और 5) दिए गए हैं, और ध्यान 700 मंत्रों में नहीं गिना जाता। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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