आरती · दुर्गा
जय अम्बे गौरी: दुर्गा जी की आरती अर्थ सहित
नवरात्रि की हर शाम गाई जाने वाली माँ की आरती: उनका रूप, उनका सिंह, असुरों पर उनकी विजय, और शरण में आने वालों के लिए उनका स्नेह। यहाँ यह हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और हर पद के सरल अर्थ के साथ है।
सुनें: दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी
ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।
यह आरती क्या है
“जय अम्बे गौरी” माँ अम्बा की आरती है, जो गौरी (उजली) भी हैं और श्यामा (साँवली) भी। इसके पदों में उनका वही रूप है जो दुर्गा सप्तशती में है: करोड़ों सूर्य-चंद्र जैसी ज्योति, सिंह की सवारी, शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, चंड-मुंड, रक्तबीज और मधु-कैटभ का संहार; और साथ ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला, जगत का पालन करने वाली माँ।
अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम है, जिन्हें परंपरा से यह आरती और “ॐ जय शिव ओंकारा” दोनों का रचयिता माना जाता है। यह पुराना भक्ति पाठ है, सबके लिए।
कब गाई जाती है
- नवरात्रि: दोनों नवरात्रों में हर सुबह-शाम, और कन्या पूजन पर।
- शुक्रवार और अष्टमी, दुर्गा चालीसा के बाद।
- जगराते और दुर्गा पूजा के आयोजनों में।
आरती कैसे करें, क्रम से
पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, और इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग six मिनट में किया जा सकता है।
- हाथ-मुँह धोकर दुर्गा माँ के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
- एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और लाल फूल और मिठाई रखें।
- दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
- नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
- आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
- सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ। फिर प्रसाद बाँटें।
धुन और कुछ शब्द हर घर में थोड़े अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।
जय अम्बे गौरी, अर्थ सहित
पहला पद टेक है: यह शुरू में गाया जाता है और हर पद के बाद दोहराया जाता है।
सवाल-जवाब
जय अम्बे गौरी कब गाई जाती है?
नवरात्रि की हर सुबह-शाम, शुक्रवार और अष्टमी को, और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती पाठ के अंत में।
पद 11 में “श्रीमालकेतु” का क्या अर्थ है?
अर्थ के बारे में मत अलग हैं: कुछ इसे देवी के धाम का नाम मानते हैं, कुछ मालाओं से सजी उनकी ध्वजा (केतु)। दोनों तरह से पंक्ति का चित्र एक है: आरती के समय उनका मंदिर करोड़ों रत्नों जैसा जगमगाता है।
क्या घर पर बिना पंडित के गा सकते हैं?
हाँ। एक दीया, एक फूल और सच्चा मन काफ़ी है; ऊपर दिए चरण ही पूरे हैं।
पाठ और स्रोत
हिंदी पाठ शिवानंद स्वामी से जुड़ी पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति द्रिक पंचांग और संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के “आरती संग्रह” से मिलाई गई; जहाँ अंतर है, वहाँ द्रिक का पाठ लिया है। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: टेक में “हरि ब्रह्मा शिवजी”, पद 3 में “खड्ग कृपाण धारी”, पद 2 में “रक्त पुष्प गले माला, कण्ठ हार साजे”, पद 6 में “सुर भय दूर करे” और पद 11 में “माल केतु में”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।
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