चालीसा · हनुमान

हनुमान चालीसा: अर्थ सहित

हनुमान जी की स्तुति की चालीस छोटी चौपाइयाँ, जो गोस्वामी तुलसीदास ने चार सौ से अधिक वर्ष पहले लिखीं और जो आज लाखों घरों में रोज़ पढ़ी जाती हैं। यहाँ पूरा पाठ है, हर पद के सरल अर्थ के साथ।

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मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

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हनुमान चालीसा क्या है

हनुमान जी रामायण में भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हैं: माता अंजनी और पवन देव के पुत्र, इतने बलवान कि समुद्र लाँघकर लंका पहुँच गए, फिर भी विनम्र, बुद्धिमान और पूरी तरह राम को समर्पित। उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, यानी संकट से छुड़ाने वाले, और वे सेवा में लगे बल का सबसे सुंदर उदाहरण हैं।

चालीसा का अर्थ है चालीस छंदों की स्तुति। हनुमान चालीसा में चालीस चौपाइयाँ हैं, शुरू में दो दोहे और अंत में एक दोहा। इसे संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी (16वीं सदी) ने अवधी भाषा में लिखा, जो पुरानी हिंदी का एक रूप है। रामचरितमानस भी उन्हीं की रचना है।

एक प्रिय परंपरा कहती है कि तुलसीदास जी ने इसे तब लिखा जब मुग़ल बादशाह ने उन्हें बंदी बना लिया था, और इसके पाठ के बाद वे छूट गए। इतिहास इस कथा की पुष्टि नहीं कर पाता, पर यह बड़े प्रेम से सुनाई जाती है, और बताती है कि सदियों से लोगों के लिए चालीसा क्या रही है: एक छोटी, सरल प्रार्थना जिसे कोई भी सच्चे मन से कह सकता है।

कई परिवार इसे मंगलवार और शनिवार को पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

हनुमान चालीसा: अर्थ सहित पूरा पाठ

हर चौपाई मूल अवधी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में, और सरल हिंदी व अंग्रेज़ी अर्थ के साथ दी है। पाठ वही है जो सबसे ज़्यादा पढ़ा जाता है; छोटे पाठभेद अंत में स्रोत वाले भाग में दिए हैं।

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दोहा 1

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

Shri Guru charan saroj raj, nij manu mukuru sudhari,
baranau Raghubar bimal jasu, jo dayaku phal chari.

अर्थ: गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को साफ़ करके, मैं श्री राम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाला है।

Meaning: Cleaning the mirror of my mind with the dust of my Guru's lotus feet, I sing the pure glory of Rama, which gives the four fruits of life: dharma, wealth, fulfilment and liberation.

दोहा 2

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥

Buddhiheen tanu janike, sumirau Pavan-kumar,
bal buddhi vidya dehu mohi, harahu kalesh vikar.

अर्थ: अपने को बुद्धि में कमज़ोर जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान को याद करता हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए, और मेरे दुख और मन के दोष दूर कीजिए।

Meaning: Knowing how little wisdom I have, I remember Hanuman, son of the Wind. Give me strength, understanding and knowledge, and take away my troubles and faults.

चौपाई 1

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

Jai Hanuman gyan gun sagar,
jai Kapis tihu lok ujagar.

अर्थ: ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान जी की जय। तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले वानरराज की जय।

Meaning: Victory to Hanuman, ocean of wisdom and virtue. Victory to the lord of the monkeys, who lights up the three worlds.

चौपाई 2

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

Ram doot atulit bal dhama,
Anjani putra Pavansut nama.

अर्थ: आप राम के दूत और अपार बल के भंडार हैं। आप अंजनी-पुत्र और पवनसुत के नाम से जाने जाते हैं।

Meaning: You are Rama's messenger, a home of matchless strength, known as Anjani's son and the son of the Wind.

चौपाई 3

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

Mahabir bikram Bajrangi,
kumati nivar sumati ke sangi.

अर्थ: आप महावीर, पराक्रमी और वज्र जैसे अंगों वाले हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि वालों के साथी हैं।

Meaning: Great hero, mighty one, with limbs strong as a thunderbolt, you drive away bad thinking and stand beside those of good mind.

चौपाई 4

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

Kanchan baran biraj subesa,
kanan kundal kunchit kesa.

अर्थ: आपका रंग सोने जैसा है और आप सुंदर वेश में शोभित हैं। कानों में कुंडल हैं और बाल घुँघराले हैं।

Meaning: Golden in colour and finely dressed, you wear earrings, and your hair is curly.

चौपाई 5

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेउ साजै॥

Haath bajra au dhvaja birajai,
kandhe moonj janeu sajai.

अर्थ: आपके हाथों में वज्र और ध्वजा है, और कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभा देता है।

Meaning: In your hands shine the thunderbolt and a banner; a sacred thread of munj grass adorns your shoulder.

चौपाई 6

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥

Sankar suvan Kesari-nandan,
tej pratap maha jag bandan.

अर्थ: आप शिव के अंश और केसरी के पुत्र हैं। आपके तेज और प्रताप की पूरा संसार वंदना करता है।

Meaning: Born of Shiva and son of Kesari, your radiance and glory are honoured by the whole world.

चौपाई 7

बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

Vidyavan guni ati chatur,
Ram kaj karibe ko aatur.

अर्थ: आप विद्वान, गुणवान और बहुत चतुर हैं, और राम का काम करने को सदा उत्सुक रहते हैं।

Meaning: Learned, virtuous and very wise, you are always eager to do Rama's work.

चौपाई 8

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

Prabhu charitra sunibe ko rasiya,
Ram Lakhan Sita man basiya.

अर्थ: आपको प्रभु राम की कथा सुनने में आनंद आता है। राम, लक्ष्मण और सीता आपके मन में बसते हैं।

Meaning: You delight in hearing the Lord's story; Rama, Lakshmana and Sita live in your heart.

चौपाई 9

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

Sookshma roop dhari Siyahi dikhava,
bikat roop dhari Lank jarava.

अर्थ: आपने छोटा रूप धरकर सीता जी को दर्शन दिए, और विशाल रूप धरकर लंका जलाई।

Meaning: Taking a tiny form you appeared before Sita; taking a fearsome form you set Lanka ablaze.

चौपाई 10

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥

Bheem roop dhari asur sanhare,
Ramchandra ke kaj sanvare.

अर्थ: भयंकर रूप धरकर आपने असुरों का नाश किया और श्री रामचंद्र के काम पूरे किए।

Meaning: In a mighty form you destroyed the demons and brought Rama's work to completion.

चौपाई 11

लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥

Laay sajivan Lakhan jiyaye,
Shri Raghubir harashi ur laye.

अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवन दिया, तो श्री राम ने प्रसन्न होकर आपको गले लगा लिया।

Meaning: You brought the life-giving herb and revived Lakshmana, and Rama, overjoyed, held you to his heart.

चौपाई 12

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

Raghupati kinhi bahut badai,
tum mam priya Bharatahi sam bhai.

अर्थ: श्री राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा, “तुम मुझे भाई भरत जैसे ही प्रिय हो।”

Meaning: Rama praised you greatly and said, “You are as dear to me as my brother Bharata.”

चौपाई 13

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

Sahas badan tumharo jas gavain,
as kahi Shripati kanth lagavain.

अर्थ: “हज़ार मुखों वाले शेषनाग भी तुम्हारा यश गाएँ,” ऐसा कहकर श्री राम ने आपको गले लगा लिया।

Meaning: “May the thousand-mouthed serpent sing your glory,” said Rama, and embraced you.

चौपाई 14

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

Sanakadik Brahmadi munisa,
Narad Sarad sahit Ahisa.

अर्थ: सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, बड़े-बड़े मुनि, नारद, सरस्वती और शेषनाग भी आपका यश गाते हैं।

Meaning: Sanaka and the sages, Brahma and the gods, the great munis, Narada, Saraswati and the king of serpents all sing your praise.

चौपाई 15

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

Jam Kuber digpal jahan te,
kabi kobid kahi sake kahan te.

अर्थ: यमराज, कुबेर और दिशाओं के रक्षक भी आपका पूरा यश नहीं कह पाते, तो कवि और विद्वान कैसे कह सकते हैं।

Meaning: Even Yama, Kubera and the guardians of the directions cannot tell all your glory; how then could poets and scholars?

चौपाई 16

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

Tum upkar Sugrivahi kinha,
Ram milaay raj pad dinha.

अर्थ: आपने सुग्रीव पर उपकार किया; उन्हें राम से मिलाकर राजपद दिलाया।

Meaning: You did Sugriva a great kindness: you brought him to Rama and so restored him to his throne.

चौपाई 17

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

Tumharo mantra Vibhishan mana,
Lankeshvar bhaye sab jag jana.

अर्थ: विभीषण ने आपकी सलाह मानी और वे लंका के राजा बने, यह सारा संसार जानता है।

Meaning: Vibhishana followed your counsel and became king of Lanka, as the whole world knows.

चौपाई 18

जुग सहस्र जोजन पर भानु।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

Jug sahasra jojan par bhanu,
leelyo tahi madhur phal janu.

अर्थ: हज़ारों योजन दूर के सूर्य को आपने मीठा फल समझकर निगल लिया था।

Meaning: The Sun, thousands of leagues away, you swallowed, taking it for a sweet fruit.

चौपाई 19

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥

Prabhu mudrika meli mukh mahin,
jaladhi langhi gaye achraj nahin.

अर्थ: प्रभु राम की अँगूठी मुँह में रखकर आपने समुद्र लाँघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं।

Meaning: Holding the Lord's ring in your mouth, you leapt across the ocean; no wonder at all for you.

चौपाई 20

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

Durgam kaj jagat ke jete,
sugam anugrah tumhare tete.

अर्थ: संसार के जितने भी कठिन काम हैं, आपकी कृपा से वे सब आसान हो जाते हैं।

Meaning: However hard the tasks of the world, by your grace they all become easy.

चौपाई 21

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

Ram duare tum rakhvare,
hot na agya binu paisare.

अर्थ: आप राम के द्वार के रखवाले हैं; आपकी आज्ञा के बिना कोई भीतर नहीं जा सकता।

Meaning: You guard Rama's door; no one enters without your leave.

चौपाई 22

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना॥

Sab sukh lahai tumhari sarna,
tum rakshak kahu ko dar na.

अर्थ: जो आपकी शरण में आता है उसे सब सुख मिलते हैं; जब आप रक्षक हैं तो किसी का डर नहीं।

Meaning: Whoever takes refuge in you finds every joy; with you as protector, there is no one to fear.

चौपाई 23

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

Aapan tej samharo aapai,
teenon lok haank te kaanpai.

अर्थ: अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं; आपकी एक हुंकार से तीनों लोक काँप उठते हैं।

Meaning: Only you can hold your own power; at your roar the three worlds tremble.

चौपाई 24

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

Bhoot pisach nikat nahin aavai,
Mahabir jab naam sunavai.

अर्थ: जहाँ महावीर हनुमान का नाम लिया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच पास नहीं आते।

Meaning: Ghosts and evil spirits do not come near where the name of the great hero is spoken.

चौपाई 25

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

Nasai rog harai sab peera,
japat nirantar Hanumat beera.

अर्थ: जो वीर हनुमान का निरंतर जप करता है, उसके रोग नष्ट होते हैं और सारी पीड़ा दूर होती है।

Meaning: For those who keep chanting the name of brave Hanuman, illness is destroyed and all pain taken away.

चौपाई 26

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

Sankat te Hanuman chhudavai,
man kram bachan dhyan jo lavai.

अर्थ: जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे वे संकटों से छुड़ाते हैं।

Meaning: Hanuman frees from trouble whoever keeps him in thought, deed and word.

चौपाई 27

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥

Sab par Ram tapasvi raja,
tin ke kaj sakal tum saja.

अर्थ: तपस्वी राजा राम सबसे ऊपर हैं, और उनके सारे काम आपने ही पूरे किए।

Meaning: Rama, the ascetic king, is above all, and it was you who carried out all his work.

चौपाई 28

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥

Aur manorath jo koi lavai,
soi amit jeevan phal pavai.

अर्थ: जो कोई भी मनोकामना लेकर आपके पास आता है, वह जीवन का अपार फल पाता है।

Meaning: Whoever comes to you with any wish receives the boundless fruit of life.

चौपाई 29

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥

Charon jug partap tumhara,
hai parsiddh jagat ujiyara.

अर्थ: चारों युगों में आपका प्रताप फैला है; आपकी कीर्ति प्रसिद्ध है और संसार को उजाला देती है।

Meaning: Your glory runs through all four ages; it is famous and lights up the world.

चौपाई 30

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

Sadhu sant ke tum rakhvare,
asur nikandan Ram dulare.

अर्थ: आप साधु-संतों के रक्षक, असुरों का नाश करने वाले और राम जी के दुलारे हैं।

Meaning: You protect the saints and the good, destroy the demons, and are dearly loved by Rama.

चौपाई 31

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥

Ashta siddhi nau nidhi ke data,
as bar deen Janaki mata.

अर्थ: माता सीता ने आपको यह वरदान दिया कि आप आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाले बनें।

Meaning: Mother Sita blessed you to be the giver of the eight powers and the nine treasures.

चौपाई 32

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

Ram rasayan tumhare pasa,
sada raho Raghupati ke dasa.

अर्थ: आपके पास राम-भक्ति का अमृत है; आप सदा श्री राम के सेवक बने रहें।

Meaning: You hold the nectar of devotion to Rama; may you remain forever Rama's servant.

चौपाई 33

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥

Tumhare bhajan Ram ko pavai,
janam janam ke dukh bisravai.

अर्थ: आपके भजन से राम मिलते हैं, और जन्म-जन्म के दुख भूल जाते हैं।

Meaning: Through singing of you one reaches Rama, and the sorrows of many lifetimes are forgotten.

चौपाई 34

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

Ant kaal Raghubar pur jaai,
jahan janm Haribhakt kahai.

अर्थ: अंत समय में भक्त श्री राम के धाम जाता है, और जहाँ भी जन्म ले, हरि का भक्त कहलाता है।

Meaning: At life's end the devotee goes to Rama's abode, and wherever born again, is known as a devotee of Hari.

चौपाई 35

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

Aur devata chitt na dharai,
Hanumat sei sarb sukh karai.

अर्थ: किसी और देवता का ध्यान न भी करे, तो भी हनुमान जी की सेवा से सब सुख मिल जाते हैं।

Meaning: Even without holding any other deity in mind, one who serves Hanuman finds every happiness.

चौपाई 36

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

Sankat katai mitai sab peera,
jo sumirai Hanumat balbeera.

अर्थ: जो बलवान वीर हनुमान को याद करता है, उसके संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है।

Meaning: Whoever remembers the strong and brave Hanuman sees troubles cut away and every pain fade.

चौपाई 37

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

Jai jai jai Hanuman Gosain,
kripa karahu gurudev ki nain.

अर्थ: हे स्वामी हनुमान, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! गुरु की तरह मुझ पर कृपा कीजिए।

Meaning: Victory, victory, victory to you, Lord Hanuman! Be kind to me as a Guru is.

चौपाई 38

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

Jo sat baar path kar koi,
chhootahi bandi maha sukh hoi.

अर्थ: जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से छूट जाता है और उसे बड़ा सुख मिलता है।

Meaning: Whoever recites this a hundred times is freed from bondage and finds great joy.

चौपाई 39

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

Jo yah padhai Hanuman Chalisa,
hoy siddhi sakhi Gaurisa.

अर्थ: जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसे सिद्धि मिलती है; इसके साक्षी स्वयं भगवान शिव हैं।

Meaning: Whoever reads this Hanuman Chalisa attains fulfilment; Shiva, lord of Gauri, is its witness.

चौपाई 40

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

Tulsidas sada Hari chera,
keejai nath hriday mahan dera.

अर्थ: तुलसीदास सदा हरि के सेवक हैं; हे नाथ, मेरे हृदय में निवास कीजिए।

Meaning: Tulsidas is forever the servant of Hari; O Lord, make your home in my heart.

अंतिम दोहा

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥

Pavan tanay sankat haran, mangal murati roop,
Ram Lakhan Sita sahit, hriday basahu sur bhoop.

अर्थ: हे पवनपुत्र, संकट हरने वाले, मंगल की मूर्ति, देवताओं के राजा, आप राम, लक्ष्मण और सीता के साथ मेरे हृदय में बसिए।

Meaning: Son of the Wind, remover of troubles, form of all that is auspicious, king among the gods: dwell in my heart with Rama, Lakshmana and Sita.

सवाल-जवाब

हनुमान चालीसा किसने लिखी?

गोस्वामी तुलसीदास जी ने, जो 16वीं सदी के संत कवि थे और जिन्होंने रामचरितमानस भी लिखी। उन्होंने इसे अवधी भाषा में लिखा; अंतिम चौपाई में उनका नाम आता है।

“चालीसा” का क्या अर्थ है?

यह चालीस शब्द से बना है: चालीस छंदों की स्तुति। हनुमान चालीसा में चालीस चौपाइयाँ हैं, शुरू में दो दोहे और अंत में एक दोहा।

क्या महिलाएँ हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ। इसे कोई भी पढ़ सकता है, महिलाएँ और पुरुष, बच्चे और बुज़ुर्ग, घर पर या मंदिर में। हनुमान जी सभी भक्तों को समान प्रेम करते हैं।

पाठ और स्रोत

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी की सार्वजनिक (पब्लिक डोमेन) अवधी रचना है। यहाँ की हर पंक्ति तीन स्वतंत्र पाठों से मिलाई गई है: sanskritdocuments.org (वहाँ चालीसा के संस्कृत अनुवाद के साथ दी गई अवधी पंक्तियाँ), shlokam.org और भक्ति भारत। जहाँ पाठ अलग हैं, वहाँ हमने वह पाठ लिया जो सबसे ज़्यादा पढ़ा जाता है, और जो गीता प्रेस के प्रचलित संस्करण का भी पाठ है। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

चौपाई 25: हमने “नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥” लिया है (shlokam.org, भक्ति भारत)। sanskritdocuments.org में यहाँ चौपाई 36 की दूसरी पंक्ति “जो सुमिरै हनुमत बलबीरा” दोहराई गई है, जो कुछ पाठों में सुनाई भी देती है।

चौपाई 6: तीनों में “संकर सुवन केसरीनंदन” (शिव के पुत्र/अंश); भक्ति भारत दूसरा प्रचलित पाठ “शंकर स्वयं” (स्वयं शिव) भी बताता है, क्योंकि बहुत से भक्त हनुमान जी को शिव का अवतार मानते हैं।

चौपाई 3: “कुमति निवार सुमति के संगी” तीनों स्रोतों में एक जैसा है।

छोटे पाठभेद: दोहा 2 में “बल बुधि बिद्या … कलेस बिकार” (shlokam.org, भक्ति भारत) और “बल बुद्धि विद्या … क्लेश विकार” (sanskritdocuments.org); चौपाई 5 में “औ” या “अरु”; चौपाई 12 में “भरतहि सम” या “भरत सम”; चौपाई 15 में “कहि सके” या “कहि सकहि”; चौपाई 37 में “जय जय जय” (तीन बार; भक्ति भारत में “जै जै जै”) या “जय जय” (sanskritdocuments.org); चौपाई 40 में “हृदय महँ” या “हृदय मह”। हर जगह हमने ऊपर दिया बहुमत का पाठ लिया है। तुम्हरो/तुह्मरो और संकर/सङ्कर जैसे अंतर सिर्फ़ लिखने के ढंग के हैं, उच्चारण के नहीं। अंतिम दोहा तीनों में एक जैसा है।

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