चालीसा · लक्ष्मी

श्री लक्ष्मी चालीसा: अर्थ सहित

समृद्धि, कृपा और कल्याण की देवी लक्ष्मी की चालीस छोटी चौपाइयाँ। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

Read in English →

सुनें: लक्ष्मी चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

तेज़ पाठ, पूरा पाठ (3 मिनट)

पूरा पाठ तेज़ गति में, जैसे बहुत से लोग रोज़ पढ़ते हैं; कुछ भी छोड़ा नहीं गया।

लक्ष्मी चालीसा क्या है

लक्ष्मी समृद्धि, कृपा और कल्याण की देवी हैं। वे भगवान विष्णु की पत्नी हैं। पुराण बताते हैं कि जब देवताओं और असुरों ने क्षीर सागर का मंथन किया, तब उसके चौदह रत्नों में से एक बनकर लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने विष्णु को अपना स्वामी चुना। विष्णु जहाँ भी जन्म लेते हैं, वे साथ आती हैं: राम के साथ सीता बनकर, कृष्ण के साथ रुक्मिणी बनकर। उन्हें कमल पर बैठे, हाथ से सोने के सिक्के बरसाते और दोनों ओर जल डालते हाथियों के साथ दिखाया जाता है।

चालीसा लगभग चालीस पदों का भजन है, सरल हिंदी में, जिसे कोई भी घर पर गा सकता है। लक्ष्मी चालीसा एक दोहे और एक सोरठे से शुरू होती है, फिर उनतालीस चौपाइयाँ हैं, और अंत में दो दोहे। इसमें लक्ष्मी जी की स्तुति है, सागर से उनके प्रकट होने और विष्णु के हर अवतार में उनकी सेवा की कथा है, और उनसे ज्ञान, संकट से मुक्ति और ऐसे घर की प्रार्थना है जहाँ किसी चीज़ की कमी न हो।

इसे किसने लिखा, यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। अंतिम दोहे में रामदास नाम आता है, जो प्रार्थना करने वाले भक्त हैं; उनके बारे में और कुछ जानकारी हम तक नहीं पहुँची। यह पुराना भक्ति पाठ है, जो पीढ़ियों से उत्तर भारत के घरों में गाया जाता है।

कई परिवार इसे शुक्रवार की शाम और दिवाली पर पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री लक्ष्मी चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है। शुरू का दोहा और सोरठा संकल्प हैं, उनतालीस चौपाइयाँ मुख्य चालीसा हैं, और दो दोहे उसे पूरा करते हैं।

दिखाएँ

दोहा 1

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

Matu lakshmi kari kripa, karo hriday mein vaas,
manokamana siddh kari, puravahu meri aas.

अर्थ: हे माँ लक्ष्मी, कृपा करके मेरे हृदय में निवास करें; मेरी मनोकामना पूरी करके मेरी आशा पूरी करें।

Meaning: Mother Lakshmi, be kind and come to live in my heart; fulfil my heart's wish and complete my hope.

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूँ।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

Yahi mor ardaas, haath jod vinati karoon,
sab vidhi karau suvaas, jai janani jagadambika.

अर्थ: यही मेरी प्रार्थना है, हाथ जोड़कर विनती करता हूँ: हर तरह से मेरे घर में बसें। जय हो, जगत की माँ जगदंबिका।

Meaning: This is my one prayer, made with folded hands: dwell with me in every way. Victory to you, Mother of the world.

चौपाई 1

सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही।
ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥

Sindhu suta main sumiraun tohi,
gyaan buddhi vidya do mohi.

अर्थ: हे सागर की पुत्री, मैं आपको याद करता हूँ; मुझे ज्ञान, बुद्धि और विद्या दें।

Meaning: Daughter of the ocean, I remember you; grant me knowledge, good sense and learning.

चौपाई 2

तुम समान नहिं कोई उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

Tum samaan nahin koi upkaari,
sab vidhi puravahu aas hamaari.

अर्थ: आपके जैसा भला करने वाला कोई नहीं; हर तरह से हमारी आशा पूरी करें।

Meaning: No one does good as you do; fulfil our hopes in every way.

चौपाई 3

जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

Jai jai jagat janani jagadamba,
sabki tum hi ho avalamba.

अर्थ: जय हो, संसार की माँ जगदंबा; आप ही सबका सहारा हैं।

Meaning: Victory to you, Mother of the world; you alone are everyone's support.

चौपाई 4

तुम ही हो सब घट घट वासी।
विनती यही हमारी खासी॥

Tum hi ho sab ghat ghat vaasi,
vinati yahi hamaari khaasi.

अर्थ: आप हर प्राणी के भीतर बसती हैं; यही हमारी ख़ास विनती है।

Meaning: You live within every being; this is our heartfelt plea.

चौपाई 5

जगजननी जय सिन्धु कुमारी।
दीनन की तुम हो हितकारी॥

Jagajanani jai sindhu kumaari,
deenan ki tum ho hitkaari.

अर्थ: जय हो, जगत की माँ, सागर की बेटी; आप दुखियों का भला करने वाली हैं।

Meaning: Victory to the Mother of the world, daughter of the ocean; you look after the poor and troubled.

चौपाई 6

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥

Vinavaun nitya tumahin maharaani,
kripa karau jag janani bhavaani.

अर्थ: हे महारानी, मैं रोज़ आपसे विनती करता हूँ; हे जगत की माँ भवानी, कृपा करें।

Meaning: Great Queen, I pray to you every day; be gracious, Mother of the world.

चौपाई 7

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।
सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

Kehi vidhi stuti karaun tihaari,
sudhi leejai apraadh bisaari.

अर्थ: मैं किस तरह आपकी स्तुति करूँ? मेरी भूलें भुलाकर मेरी सुध लें।

Meaning: How can I ever praise you enough? Forget my faults and take care of me.

चौपाई 8

कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी।
जगजननी विनती सुन मोरी॥

Kripa drishti chitavo mam ori,
jagajanani vinati sun mori.

अर्थ: मेरी ओर कृपा भरी नज़र से देखें; हे जगत की माँ, मेरी विनती सुनें।

Meaning: Look my way with kind eyes; Mother of the world, hear my prayer.

चौपाई 9

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।
संकट हरो हमारी माता॥

Gyaan buddhi jai sukh ki daata,
sankat haro hamaari maata.

अर्थ: आप ज्ञान, बुद्धि, विजय और सुख देने वाली हैं; हे माँ, हमारे संकट दूर करें।

Meaning: You give knowledge, good sense, success and happiness; Mother, take away our troubles.

चौपाई 10

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

Ksheerasindhu jab vishnu mathaayo,
chaudah ratna sindhu mein paayo.

अर्थ: जब विष्णु ने क्षीर सागर का मंथन करवाया, तब सागर से चौदह रत्न निकले।

Meaning: When Vishnu had the ocean of milk churned, fourteen treasures came out of it.

चौपाई 11

चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

Chaudah ratna mein tum sukhraasi,
seva kiyo prabhu bani daasi.

अर्थ: उन चौदह रत्नों में आप सुख का भंडार थीं; आपने प्रभु की सेविका बनकर उनकी सेवा की।

Meaning: Among those fourteen treasures you were the store of all joy, and you devoted yourself to the Lord.

चौपाई 12

जब जब जन्म जहाँ प्रभु लीन्हा।
रूप बदल तहँ सेवा कीन्हा॥

Jab jab janma jahaan prabhu leenha,
roop badal tahan seva keenha.

अर्थ: प्रभु ने जब-जब, जहाँ-जहाँ जन्म लिया, आपने रूप बदलकर वहाँ उनका साथ दिया।

Meaning: Whenever and wherever the Lord took birth, you took a new form and stood by him there.

चौपाई 13

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

Svayam vishnu jab nar tanu dhaara,
leenheu avadhpuri avtaara.

अर्थ: जब स्वयं विष्णु ने मनुष्य का शरीर धारण किया और अयोध्या में (राम बनकर) अवतार लिया,

Meaning: When Vishnu himself took a human body and was born in Ayodhya (as Rama),

चौपाई 14

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

Tab tum pragat janakpur maahin,
seva kiyo hriday pulkaahin.

अर्थ: तब आप जनकपुर में (सीता बनकर) प्रकट हुईं और प्रसन्न मन से उनकी सेवा की।

Meaning: then you appeared in Janakpur (as Sita) and served him with a joyful heart.

चौपाई 15

अपनायो तोहि अन्तर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

Apnaayo tohi antaryaami,
vishva vidit tribhuvan ki svaami.

अर्थ: सबके मन की जानने वाले प्रभु ने आपको अपनाया; आप तीनों लोकों की स्वामिनी हैं, यह सारा संसार जानता है।

Meaning: The Lord who knows every heart made you his own; the whole world knows you as queen of the three worlds.

चौपाई 16

तुम सम प्रबल शक्ति नहिं आनी।
कहँ लौं महिमा कहौं बखानी॥

Tum sam prabal shakti nahin aani,
kahan laun mahima kahaun bakhaani.

अर्थ: आपके जैसी कोई दूसरी प्रबल शक्ति नहीं; आपकी महिमा का बखान मैं कहाँ तक करूँ?

Meaning: There is no other power as strong as you; how far could I go in telling your glory?

चौपाई 17

मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित वांछित फल पाई॥

Man kram vachan karai sevakaai,
man ichchhit vaanchhit phal paai.

अर्थ: जो मन, कर्म और वचन से आपकी सेवा करता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।

Meaning: Whoever serves you in thought, deed and word receives what the heart longs for.

चौपाई 18

तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भाँति मन लाई॥

Taji chhal kapat aur chaturaai,
poojahin vividh bhaanti man laai.

अर्थ: छल, कपट और चालाकी छोड़कर, मन लगाकर कई तरह से आपकी पूजा करें।

Meaning: Leave aside deceit, pretence and cleverness, and worship her in many ways with your whole heart.

चौपाई 19

और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करै मन लाई॥

Aur haal main kahaun bujhaai,
jo yah paath karai man laai.

अर्थ: और मैं समझाकर बताता हूँ कि जो मन लगाकर यह पाठ करता है,

Meaning: Let me explain further: whoever recites this with a devoted mind,

चौपाई 20

ताको कोई कष्ट न होई।
मन इच्छित पावै फल सोई॥

Taako koi kasht na hoi,
man ichchhit paavai phal soi.

अर्थ: उसे कोई कष्ट नहीं होता, और वह मनचाहा फल पाता है।

Meaning: meets with no hardship, and receives the fruit the heart wishes for.

चौपाई 21

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥

Traahi traahi jai dukh nivaarini,
trividh taap bhav bandhan haarini.

अर्थ: रक्षा करें, रक्षा करें, हे दुख दूर करने वाली; आप तीनों तरह के कष्ट और संसार के बंधन हरने वाली हैं।

Meaning: Protect us, protect us, you who end sorrow; you take away the three kinds of suffering and the bonds of worldly life.

चौपाई 22

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

Jo chaalisa padhai padhaavai,
dhyaan lagaakar sunai sunaavai.

अर्थ: जो यह चालीसा पढ़ता या पढ़वाता है, ध्यान लगाकर सुनता या सुनाता है,

Meaning: Whoever reads this chalisa or has it read, and listens to it or recites it for others with attention,

चौपाई 23

ताको कोई न रोग सतावै।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥

Taako koi na rog sataavai,
putra aadi dhan sampatti paavai.

अर्थ: उसे कोई रोग नहीं सताता, और वह संतान, धन और संपत्ति पाता है।

Meaning: is not troubled by illness, and is blessed with children, wealth and property.

चौपाई 24

पुत्रहीन अरु सम्पति हीना।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

Putraheen aru sampati heena,
andh badhir kodhi ati deena.

अर्थ: जो संतानहीन हो या धनहीन, देख-सुन न सके, रोगी हो या बहुत दुखी हो,

Meaning: One who is childless or without means, who cannot see or hear, who is ill or in deep distress,

चौपाई 25

विप्र बोलाय कै पाठ करावै।
शंका दिल में कभी न लावै॥

Vipra bolaay kai paath karaavai,
shanka dil mein kabhi na laavai.

अर्थ: वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर यह पाठ करवाए, और मन में कभी शंका न लाए।

Meaning: may invite a learned priest to recite it, and keep no doubt in the heart.

चौपाई 26

पाठ करावै दिन चालीसा।
ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

Paath karaavai din chaalisa,
ta par kripa karain gaurisa.

अर्थ: जो चालीस दिन तक पाठ करवाता है, उस पर गौरी के स्वामी (शिव) भी कृपा करते हैं।

Meaning: Whoever has it recited for forty days receives grace, even from Shiva, the lord of Gauri.

चौपाई 27

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
कमी नहीं काहू की आवै॥

Sukh sampatti bahut si paavai,
kami nahin kaahoo ki aavai.

अर्थ: वह बहुत सुख और संपत्ति पाता है, और उसे किसी चीज़ की कमी नहीं होती।

Meaning: They gain much happiness and wealth, and want for nothing.

चौपाई 28

बारह मास करै जो पूजा।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

Baarah maas karai jo pooja,
tehi sam dhanya aur nahin dooja.

अर्थ: जो बारहों महीने पूजा करता है, उसके जैसा धन्य कोई दूसरा नहीं।

Meaning: One who worships all twelve months of the year is blessed like no other.

चौपाई 29

प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं।
उन सम कोउ जग में कहुँ नाहीं॥

Pratidin paath karai man maahin,
un sam kou jag mein kahun naahin.

अर्थ: जो रोज़ मन ही मन पाठ करता है, उसके जैसा संसार में कहीं कोई नहीं।

Meaning: One who recites it daily within the heart has no equal anywhere in the world.

चौपाई 30

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

Bahuvidhi kya main karaun badaai,
leya pareeksha dhyaan lagaai.

अर्थ: मैं इसकी बड़ाई कई तरह से क्या करूँ; कोई भी ध्यान लगाकर ख़ुद अनुभव कर ले।

Meaning: Why should I praise it at length? Anyone can see for themselves by reciting it with attention.

चौपाई 31

करि विश्वास करै व्रत नेमा।
होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥

Kari vishvaas karai vrat nema,
hoy siddh upjai ur prema.

अर्थ: जो विश्वास के साथ व्रत और नियम निभाता है, उसका काम सिद्ध होता है और हृदय में प्रेम जागता है।

Meaning: Whoever keeps the fast and the discipline with faith finds their aim fulfilled and love rising in the heart.

चौपाई 32

जय जय जय लक्ष्मी भवानी।
सब में व्यापित हो गुण खानी॥

Jai jai jai lakshmi bhavaani,
sab mein vyaapit ho gun khaani.

अर्थ: जय हो, जय हो, देवी लक्ष्मी; आप सबमें व्याप्त हैं और गुणों की खान हैं।

Meaning: Victory, victory to goddess Lakshmi; you pervade all things and are a mine of every virtue.

चौपाई 33

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।
तुम सम कोउ दयालु कहुँ नाहीं॥

Tumharo tej prabal jag maahin,
tum sam kou dayaalu kahun naahin.

अर्थ: संसार में आपका तेज सबसे प्रबल है; आपके जैसा दयालु कहीं कोई नहीं।

Meaning: Your radiance is the strongest in the world; no one anywhere is as kind as you.

चौपाई 34

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

Mohi anaath ki sudhi ab leejai,
sankat kaati bhakti mohi deejai.

अर्थ: मुझ बेसहारा की अब सुध लें; मेरे संकट काटकर मुझे भक्ति दें।

Meaning: Look after me now, for I have no other refuge; cut away my troubles and give me devotion.

चौपाई 35

भूल चूक करि क्षमा हमारी।
दर्शन दीजै दशा निहारी॥

Bhool chook kari kshama hamaari,
darshan deejai dasha nihaari.

अर्थ: हमारी भूल-चूक क्षमा करें; हमारी हालत देखकर हमें दर्शन दें।

Meaning: Forgive our mistakes and lapses; see our state and show yourself to us.

चौपाई 36

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

Bin darshan vyaakul adhikaari,
tumahi achhat dukh sahte bhaari.

अर्थ: आपके दर्शन बिना यह भक्त व्याकुल है; आपके रहते हुए भी हम भारी दुख सह रहे हैं।

Meaning: Without seeing you, your devotee is restless; even with you so near, we bear heavy sorrow.

चौपाई 37

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में।
सब जानत हो अपने मन में॥

Nahin mohin gyaan buddhi hai tan mein,
sab jaanat ho apne man mein.

अर्थ: मुझमें न ज्ञान है, न बुद्धि; आप अपने मन में सब जानती हैं।

Meaning: I have neither knowledge nor wisdom; you know everything in your own heart.

चौपाई 38

रूप चतुर्भुज करके धारण।
कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

Roop chaturbhuj karke dhaaran,
kasht mor ab karahu nivaaran.

अर्थ: अपना चार भुजाओं वाला रूप धारण करके अब मेरे कष्ट दूर करें।

Meaning: Take your four-armed form and remove my hardships now.

चौपाई 39

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

Kehi prakaar main karaun badaai,
gyaan buddhi mohi nahin adhikaai.

अर्थ: मैं किस तरह आपकी बड़ाई करूँ? मुझमें ज़्यादा ज्ञान और बुद्धि नहीं है।

Meaning: How can I praise you properly? I do not have much knowledge or wisdom.

अंतिम दोहा 1

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

Traahi traahi dukh haarini, haro vegi sab traas,
jayati jayati jai lakshmi, karo shatru ko naash.

अर्थ: रक्षा करें, हे दुख हरने वाली, सारे भय जल्दी दूर करें। जय हो, जय हो लक्ष्मी, जो कुछ हमारा बुरा करता है उसका अंत करें।

Meaning: Protect us, you who take away sorrow; quickly remove every fear. Victory to Lakshmi: put an end to all that works against us.

अंतिम दोहा 2

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

Raamdaas dhari dhyaan nit, vinay karat kar jor,
maatu lakshmi daas par, karahu daya ki kor.

अर्थ: रामदास रोज़ ध्यान करके हाथ जोड़कर विनती करता है: हे माँ लक्ष्मी, अपने इस सेवक पर दया की नज़र रखें।

Meaning: Ramdas meditates on you daily and prays with folded hands: Mother Lakshmi, turn a kind glance on your servant.

सवाल-जवाब

लक्ष्मी चालीसा किसने लिखी?

लेखक निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। अंतिम दोहे में रामदास नाम आता है, जो प्रार्थना करने वाले भक्त हैं; उनके बारे में और कुछ दर्ज नहीं है। यह पुराना भक्ति पाठ है, जो पीढ़ियों से गाया जाता है।

कुछ किताबों में पाठ थोड़ा अलग क्यों है?

चालीसा गाकर और छोटी पुस्तिकाओं से आगे बढ़ी, इसलिए कुछ शब्द, आख़िरी चौपाइयों का क्रम और अंतिम दोहे अलग-अलग संस्करणों में थोड़े बदलते हैं। सभी पढ़े जा सकते हैं; यह पेज सबसे ज़्यादा गाए जाने वाले पाठ को मानता है।

क्या बिना पूजा के या बिना हिंदी जाने पढ़ सकते हैं?

हाँ। एक दीया और शांत मन काफ़ी है, और आप इसे अंग्रेज़ी अक्षरों में या ऑडियो के साथ पढ़ सकते हैं। एक बार अर्थ पढ़ लेने से शब्द और जीवंत लगते हैं।

क्या इसे पढ़ने से धन मिलेगा?

परंपरा कहती है कि लक्ष्मी जी की कृपा से समृद्धि और संतोष आता है, और बहुत परिवारों को यह अभ्यास मन को स्थिर करता लगता है। यह श्रद्धा है, कोई गारंटी नहीं: परंपरा ख़ुद कहती है कि लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहाँ ईमानदार मेहनत हो, इसलिए अपना कर्म करते रहें।

पाठ और स्रोत

हिंदी पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक भक्ति स्तुति है। हर पंक्ति तीन स्वतंत्र प्रकाशित पाठों (भक्ति भारत, भारत डिस्कवरी और शुभ पंचांग) से मिलाई गई, और प्रभात ख़बर के पाठ से भी जाँची गई। हम सबसे ज़्यादा गाया जाने वाला पाठ मानते हैं: शुरू में एक दोहा और सोरठा, उनतालीस चौपाइयाँ और अंत में दो दोहे।

आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: कुछ संस्करणों में शुरू में एक और दोहा (“सिंधु सुता विष्णुप्रिये…”) और अंत से पहले चालीसवीं चौपाई (“रामदास अब कहाई पुकारी…”) है; कुछ में “केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई” आख़िर की जगह “बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी” से पहले है; कुछ में रामदास वाला दोहा नहीं है। छोटे शब्द-भेद: “दो मोही / दे मोही”, “जय सुख / सब सुख”, “तन में / मन में”, “भवानी / महारानी” (चौपाई 32), “अछत / अक्षत” और “शत्रु को / शत्रुन का”। ऑनलाइन मिली साफ़ छपाई की ग़लतियाँ (जैसे “कष्ट न होई” की जगह “कष्ट नोई”) ठीक कर दी गई हैं। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

पाठ या ऑडियो में कोई ग़लती दिखी? हमें बताइए →