चालीसा · काली

श्री काली चालीसा: अर्थ सहित

माँ काली की चालीस चौपाइयाँ, जो स्वयं काल-रूप माँ हैं, बुराई के लिए उग्र और अपने बच्चों के लिए कोमल। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: काली चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

माँ काली कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

माँ काली दिव्य माँ का सबसे शक्तिशाली रूप हैं। उनका नाम काल, यानी समय, से आता है, और इसका अर्थ “श्यामा” भी है: वे स्वयं काल हैं, जिनके आगे हर रूप आता-जाता है, और वह गहरा अँधेरा जिससे प्रकाश जन्म लेता है। देवी माहात्म्य में वे चंड, मुंड और रक्तबीज को हराने के लिए दुर्गा के मस्तक से प्रकट होती हैं; बंगाल और पूरे पूर्वी भारत में उन्हें बस माँ कहकर प्यार किया जाता है, अपने बच्चों की कोमल रक्षक।

उनका रूप उग्र दिखता है: श्याम वर्ण, मुंडों की माला, खड्ग, बाहर निकली जीभ। परंपरा इन्हें प्रतीक मानती है। मुंड अहंकार और उसके अनेक रूप हैं, जिन्हें काट दिया गया; खड्ग वह ज्ञान है जो मुक्त करता है। सबसे प्रसिद्ध कथा, जो चालीसा भी कहती है, करुणा की कथा है: युद्ध के बाद जब उनका क्रोध शांत नहीं हुआ, तो शिव जी उनकी राह में लेट गए, और जब उनका पैर शिव पर पड़ा, उन्होंने उन्हें पहचाना, जीभ बाहर निकाली और शांत हो गईं।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल पुरानी हिंदी की स्तुति होती है। यह काली चालीसा, जो जयकाली कलिमलहरण से शुरू होती है, एक दोहे से खुलती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। इसमें माँ की आठ भुजाओं और उनमें धारण की चीज़ों का, उनके साथी भैरव और चौंसठ योगिनियों का, और हर युग में उनके युद्धों का वर्णन है, और अंत में उनकी दया-दृष्टि के लिए अपनी-सी प्रार्थना है। किसी कवि का नाम नहीं है; यह एक पारंपरिक भक्ति रचना है। एक ही नाम से कई अलग स्तुतियाँ छपती हैं; यह वह है जो सबसे ज़्यादा प्रचलित है। कई परिवार इसे नवरात्रि और काली पूजा पर पढ़ते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री काली चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू का एक दोहा, चालीस चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा।

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दोहा 1

जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार।
महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार॥

Jai Kaali kalimal haran, mahima agam apaar,
Mahish mardini Kaalika, dehu abhay apaar.

अर्थ: जय हो माँ काली, कलियुग का मैल धोने वाली, आपकी महिमा अगम और अपार है। हे महिषासुर को हराने वाली कालिका, हमें असीम निर्भयता दीजिए।

Meaning: Victory to Kali, who washes away the grime of this age; your glory is beyond reach and beyond measure. Kalika, conqueror of Mahisha, grant us boundless freedom from fear.

चौपाई 1

अरि मद मान मिटावन हारी।
मुण्डमाल गल सोहत प्यारी॥

Ari mad maan mitaavan haari,
mundmaal gal sohat pyaari.

अर्थ: आप शत्रुओं का घमंड और अहंकार मिटाने वाली हैं; आपके गले में मुंडों की माला सुंदर लगती है।

Meaning: You break the pride and arrogance of the hostile; a garland of heads hangs beautifully at your throat.

चौपाई 2

अष्टभुजी सुखदायक माता।
दुष्टदलन जग में विख्याता॥

Ashtabhuji sukhdaayak maata,
dushtdalan jag mein vikhyaata.

अर्थ: आठ भुजाओं वाली, सुख देने वाली माँ, आप दुष्टों को हराने के लिए जग में प्रसिद्ध हैं।

Meaning: Eight-armed Mother, giver of happiness, you are known throughout the world for overcoming the wicked.

चौपाई 3

भाल विशाल मुकुट छवि छाजै।
कर में शीश शत्रु का साजै॥

Bhaal vishaal mukut chhavi chhaajai,
kar mein sheesh shatru ka saajai.

अर्थ: आपके चौड़े माथे पर मुकुट शोभा देता है; एक हाथ में शत्रु का सिर है।

Meaning: A crown shines on your broad forehead; in one hand you hold the head of a foe.

चौपाई 4

दूजे हाथ लिए मधु प्याला।
हाथ तीसरे सोहत भाला॥

Dooje haath liye madhu pyaala,
haath teesre sohat bhaala.

अर्थ: दूसरे हाथ में मधु का प्याला है, और तीसरे हाथ में भाला शोभा देता है।

Meaning: In the second hand is a cup of mead, and in the third a spear gleams.

चौपाई 5

चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे।
छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे॥

Chauthe khappar khadg kar paanche,
chhathe trishool shatru bal jaanche.

अर्थ: चौथे हाथ में खप्पर, पाँचवें में खड्ग, और छठे में त्रिशूल है, जो शत्रु का बल परखता है।

Meaning: The fourth hand holds a skull-bowl, the fifth a sword, and the sixth a trident that tests the enemy's strength.

चौपाई 6

सप्तम कर दमकत असि प्यारी।
शोभा अद्भुत मात तुम्हारी॥

Saptam kar damakat asi pyaari,
shobha adbhut maat tumhaari.

अर्थ: सातवें हाथ में सुंदर तलवार चमकती है; हे माँ, आपकी शोभा अद्भुत है।

Meaning: In the seventh hand a fine blade flashes; Mother, your splendour is wondrous.

चौपाई 7

अष्टम कर भक्तन वर दाता।
जग मनहरण रूप ये माता॥

Ashtam kar bhaktan var daata,
jag manharan roop ye maata.

अर्थ: आठवाँ हाथ भक्तों को वरदान देता है; हे माँ, आपका यह रूप जग का मन मोह लेता है।

Meaning: The eighth hand grants blessings to devotees; Mother, this form of yours wins the heart of the world.

चौपाई 8

भक्तन में अनुरक्त भवानी।
निशदिन रटें ऋषि-मुनि ज्ञानी॥

Bhaktan mein anurakt Bhavaani,
nishdin raten rishi-muni gyaani.

अर्थ: हे भवानी, आप भक्तों से प्रेम करती हैं; ऋषि, मुनि और ज्ञानी दिन-रात आपका नाम लेते हैं।

Meaning: Bhavani, you love your devotees; sages, seers and the wise repeat your name day and night.

चौपाई 9

महाशक्ति अति प्रबल पुनीता।
तू ही काली तू ही सीता॥

Mahaashakti ati prabal puneeta,
too hi Kaali too hi Seeta.

अर्थ: आप महाशक्ति हैं, बहुत प्रबल और पवित्र; आप ही काली हैं और आप ही सीता।

Meaning: You are the great power, mighty and pure; you are Kali, and you are Sita too.

चौपाई 10

पतित तारिणी हे जग पालक।
कल्याणी पापी कुल घालक॥

Patit taarini he jag paalak,
kalyaani paapi kul ghaalak.

अर्थ: हे गिरे हुओं को उबारने वाली, जग का पालन करने वाली, कल्याण करने वाली, बुराई की जड़ मिटाने वाली।

Meaning: You lift up the fallen and sustain the world; you are kindness itself, and you uproot the lines of wrongdoers.

चौपाई 11

शेष सुरेश न पावत पारा।
गौरी रूप धर्यो इक बारा॥

Shesh Suresh na paavat paara,
Gauri roop dharyo ik baara.

अर्थ: शेषनाग और इंद्र भी आपकी महिमा का पार नहीं पाते; एक बार आपने गौरी का रूप धारण किया।

Meaning: Not even Shesha or Indra can find the limit of your glory; once you took the form of Gauri.

चौपाई 12

तुम समान दाता नहिं दूजा।
विधिवत करें भक्तजन पूजा॥

Tum samaan daata nahin dooja,
vidhivat karen bhaktjan pooja.

अर्थ: आपके जैसा देने वाला कोई दूसरा नहीं; भक्त मन लगाकर आपकी पूजा करते हैं।

Meaning: There is no giver like you; your devotees worship you with loving care.

चौपाई 13

रूप भयंकर जब तुम धारा।
दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा॥

Roop bhayankar jab tum dhaara,
dushtdalan keenhehu sanhaara.

अर्थ: जब आपने भयंकर रूप धारण किया, तो दुष्टों के दल का अंत किया।

Meaning: When you took on your fearsome form, you brought the hosts of the wicked to an end.

चौपाई 14

नाम अनेकन मात तुम्हारे।
भक्तजनों के संकट टारे॥

Naam anekan maat tumhaare,
bhaktjanon ke sankat taare.

अर्थ: हे माँ, आपके अनेक नाम हैं; आपने भक्तों के संकट टाले हैं।

Meaning: Mother, you have many names, and you have turned away the troubles of your devotees.

चौपाई 15

कलि के कष्ट कलेशन हरनी।
भव भय मोचन मंगल करनी॥

Kali ke kasht kaleshan harani,
bhav bhay mochan mangal karani.

अर्थ: आप कलियुग के कष्ट और क्लेश हरती हैं, संसार के भय से छुड़ाती हैं और मंगल करती हैं।

Meaning: You take away the pains and sorrows of this age, free us from the fear of worldly life and bring what is good.

चौपाई 16

महिमा अगम वेद यश गावैं।
नारद शारद पार न पावैं॥

Mahima agam Ved yash gaavain,
Naarad Shaarad paar na paavain.

अर्थ: आपकी महिमा अगम है; वेद आपका यश गाते हैं, पर नारद और शारदा भी उसका पार नहीं पाते।

Meaning: Your glory is beyond reach; the Vedas sing your fame, yet even Narada and Sharada cannot find its end.

चौपाई 17

भू पर भार बढ्यौ जब भारी।
तब तब तुम प्रकटीं महतारी॥

Bhoo par bhaar badhyau jab bhaari,
tab tab tum prakateen mahtaari.

अर्थ: जब-जब धरती पर बुराई का बोझ बहुत बढ़ा, तब-तब हे माँ, आप प्रकट हुईं।

Meaning: Whenever the burden of wrong grew heavy on the earth, Mother, you appeared.

चौपाई 18

आदि अनादि अभय वरदाता।
विश्वविदित भव संकट त्राता॥

Aadi anaadi abhay vardaata,
vishvavidit bhav sankat traata.

अर्थ: आप आदि भी हैं और अनादि भी, निर्भयता का वरदान देने वाली; जग जानता है कि आप संसार के संकटों से बचाती हैं।

Meaning: You are the beginning and without beginning, the giver of fearlessness; the world knows you as the rescuer from life's dangers.

चौपाई 19

कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा।
उसको सदा अभय वर दीन्हा॥

Kusamay naam tumhaarau leenha,
usko sada abhay var deenha.

अर्थ: जिसने बुरे समय में आपका नाम लिया, उसे आपने सदा निर्भयता का वरदान दिया।

Meaning: Whoever called your name in a hard time, you always blessed with freedom from fear.

चौपाई 20

ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा।
काल रूप लखि तुमरो भेषा॥

Dhyaan dharen shruti Shesh Suresha,
kaal roop lakhi tumro bhesha.

अर्थ: वेद, शेषनाग और इंद्र आपके काल-रूप को देखकर आपका ध्यान करते हैं।

Meaning: The Vedas, Shesha and Indra meditate on you, beholding your form as Time itself.

चौपाई 21

कलुआ भैंरों संग तुम्हारे।
अरि हित रूप भयानक धारे॥

Kalua Bhairon sang tumhaare,
ari hit roop bhayaanak dhaare.

अर्थ: कलुआ और भैरव आपके साथ रहते हैं, जो शत्रुओं के लिए भयानक रूप धारण करते हैं।

Meaning: Kalua and Bhairava go with you, taking on fearsome forms against the hostile.

चौपाई 22

सेवक लांगुर रहत अगारी।
चौसठ जोगन आज्ञाकारी॥

Sevak Laangur rahat agaari,
chausath jogan aagyaakaari.

अर्थ: आपका सेवक लांगुर वीर आगे-आगे चलता है, और चौंसठ योगिनियाँ आपकी आज्ञा मानती हैं।

Meaning: Your servant Langur Vir walks ahead of you, and the sixty-four yoginis obey your word.

चौपाई 23

त्रेता में रघुवर हित आई।
दशकंधर की सैन नसाई॥

Treta mein Raghuvar hit aai,
Dashkandhar ki sain nasaai.

अर्थ: त्रेता युग में आप राम जी के लिए आईं और दस सिर वाले रावण की सेना का नाश किया।

Meaning: In the Treta age you came for Rama's sake and destroyed the army of ten-headed Ravana.

चौपाई 24

खेला रण का खेल निराला।
भरा मांस-मज्जा से प्याला॥

Khela ran ka khel niraala,
bhara maans-majja se pyaala.

अर्थ: आपने रणभूमि में अनोखा खेल खेला, और आपका प्याला शत्रुओं के मांस और मज्जा से भर गया।

Meaning: You played the strange game of battle, and your cup was filled with the flesh and marrow of the foe.

चौपाई 25

रौद्र रूप लखि दानव भागे।
कियौ गवन भवन निज त्यागे॥

Raudra roop lakhi daanav bhaage,
kiyau gavan bhavan nij tyaage.

अर्थ: आपका रौद्र रूप देखकर दानव भाग गए; वे अपने घर छोड़कर चले गए।

Meaning: Seeing your furious form, the demons fled, abandoning their own homes.

चौपाई 26

तब ऐसौ तामस चढ़ आयो।
स्वजन विजन को भेद भुलायो॥

Tab aisau taamas chadh aayo,
svajan vijan ko bhed bhulaayo.

अर्थ: तब आप पर ऐसा क्रोध चढ़ा कि आप अपने और पराए का भेद भी भूल गईं।

Meaning: Then such fury rose in you that you forgot the difference between your own and strangers.

चौपाई 27

ये बालक लखि शंकर आए।
राह रोक चरनन में धाए॥

Ye baalak lakhi Shankar aaye,
raah rok charnan mein dhaaye.

अर्थ: यह देखकर शंकर जी बालक की तरह आए, और आपकी राह रोककर आपके चरणों में लेट गए।

Meaning: Seeing this, Shiva came like a child, lay down in your path and fell at your feet.

चौपाई 28

तब मुख जीभ निकर जो आई।
यही रूप प्रचलित है माई॥

Tab mukh jeebh nikar jo aai,
yahi roop prachalit hai maai.

अर्थ: तब (शिव जी को अपने चरणों में देखकर) आपकी जीभ बाहर निकल आई; हे माँ, आपका यही रूप सबसे प्रचलित है।

Meaning: Then, seeing Shiva at your feet, your tongue came out of your mouth; Mother, this is the form in which you are best known.

चौपाई 29

बाढ्यो महिषासुर मद भारी।
पीड़ित किए सकल नर-नारी॥

Baadhyo Mahishaasur mad bhaari,
peedit kiye sakal nar-naari.

अर्थ: महिषासुर का घमंड बहुत बढ़ गया, और उसने सब स्त्री-पुरुषों को सताया।

Meaning: Mahishasura's arrogance grew great, and he tormented all men and women.

चौपाई 30

करुण पुकार सुनी भक्तन की।
पीर मिटावन हित जन-जन की॥

Karun pukaar suni bhaktan ki,
peer mitaavan hit jan-jan ki.

अर्थ: आपने भक्तों की करुण पुकार सुनी, और हर व्यक्ति की पीड़ा मिटाने के लिए,

Meaning: You heard the pitiful cry of your devotees, and to end the pain of every person,

चौपाई 31

तब प्रगटी निज सैन समेता।
नाम पड़ा मां महिष विजेता॥

Tab pragati nij sain sameta,
naam pada Maan Mahish vijeta.

अर्थ: आप अपनी सेना के साथ प्रकट हुईं, और आपका नाम पड़ा “महिष को जीतने वाली माँ”।

Meaning: you appeared with your army, and came to be called the Mother who conquered Mahisha.

चौपाई 32

शुंभ निशुंभ हने छन माहीं।
तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं॥

Shumbh Nishumbh hane chhan maaheen,
tum sam jag doosar kou naaheen.

अर्थ: आपने शुंभ और निशुंभ को पल भर में हरा दिया; जग में आपके समान कोई दूसरा नहीं।

Meaning: You struck down Shumbha and Nishumbha in a moment; there is no one in the world like you.

चौपाई 33

मान मथनहारी खल दल के।
सदा सहायक भक्त विकल के॥

Maan mathanhaari khal dal ke,
sada sahaayak bhakt vikal ke.

अर्थ: आप दुष्टों के दल का घमंड चूर करती हैं, और व्याकुल भक्तों की सदा सहायता करती हैं।

Meaning: You crush the pride of the hosts of the wicked and always help devotees in distress.

चौपाई 34

दीन विहीन करैं नित सेवा।
पावैं मनवांछित फल मेवा॥

Deen viheen karain nit seva,
paavain manvaanchhit phal meva.

अर्थ: दीन और असहाय लोग रोज़ आपकी सेवा करते हैं और मनचाहा फल पाते हैं।

Meaning: The poor and the helpless serve you daily and receive the fruit their hearts desire.

चौपाई 35

संकट में जो सुमिरन करहीं।
उनके कष्ट मातु तुम हरहीं॥

Sankat mein jo sumiran karaheen,
unke kasht maatu tum haraheen.

अर्थ: हे माँ, जो संकट में आपको याद करते हैं, आप उनके कष्ट हर लेती हैं।

Meaning: Those who remember you in trouble, Mother, you free from their pain.

चौपाई 36

प्रेम सहित जो कीरति गावैं।
भव बंधन सों मुक्ती पावैं॥

Prem sahit jo keerati gaavain,
bhav bandhan son mukti paavain.

अर्थ: जो प्रेम से आपकी कीर्ति गाते हैं, वे संसार के बंधनों से मुक्ति पाते हैं।

Meaning: Those who sing your praise with love are freed from the bonds of worldly life.

चौपाई 37

काली चालीसा जो पढ़हीं।
स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं॥

Kaali chaalisa jo padhaheen,
swarglok binu bandhan chadhaheen.

अर्थ: जो काली चालीसा पढ़ते हैं, वे बिना किसी बंधन के स्वर्ग को जाते हैं।

Meaning: Those who read the Kali Chalisa rise to heaven, free of every bond.

चौपाई 38

दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा।
केहि कारण मां कियौ विलम्बा॥

Daya drishti herau Jagadamba,
kehi kaaran Maan kiyau vilamba.

अर्थ: हे जगदंबा, दया की नज़र से देखिए; हे माँ, आपने देर क्यों की?

Meaning: Mother of the world, look on me with kindness; Mother, why have you delayed?

चौपाई 39

करहु मातु भक्तन रखवाली।
जयति जयति काली कंकाली॥

Karahu maatu bhaktan rakhvaali,
jayati jayati Kaali Kankaali.

अर्थ: हे माँ, भक्तों की रखवाली कीजिए; जय हो, जय हो काली कंकाली।

Meaning: Mother, watch over your devotees; victory, victory to Kali Kankali.

चौपाई 40

सेवक दीन अनाथ अनारी।
भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी॥

Sevak deen anaath anaari,
bhaktibhaav yuti sharan tumhaari.

अर्थ: आपका यह सेवक दीन, अनाथ और अनजान है, पर भक्ति-भाव के साथ आपकी शरण में है।

Meaning: Your servant is poor, alone and unlearned, but comes to your shelter with a devoted heart.

अंतिम दोहा 1

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ।
तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ॥

Prem sahit jo kare, Kaali chaalisa paath,
tinki pooran kaamna, hoy sakal jag thaath.

अर्थ: जो प्रेम से काली चालीसा का पाठ करता है, उसकी कामना पूरी होती है और जग में उसका मान बना रहता है।

Meaning: Whoever recites the Kali Chalisa with love sees their wishes fulfilled and lives with honour in the world.

सवाल-जवाब

काली चालीसा किसने लिखी?

पाठ में किसी कवि का नाम नहीं है, और किसी संस्करण में लेखक नहीं बताया गया। यह एक पारंपरिक भक्ति स्तुति है, जो छोटी छपी पुस्तिकाओं और गायन के ज़रिए चली आई है।

माँ काली की जीभ बाहर क्यों है?

चालीसा सबसे प्रसिद्ध कथा कहती है: युद्ध के बाद उनका क्रोध शांत नहीं हुआ, तो शिव जी उनकी राह में लेट गए। जब उनका पैर शिव पर पड़ा, उन्होंने उन्हें पहचाना, अचरज में जीभ बाहर निकाली और शांत हो गईं। यह रूप उस पल की याद है जब उग्र शक्ति फिर माँ की कोमलता बन गई।

क्या काली चालीसा एक से ज़्यादा हैं?

हाँ। इस नाम से कई अलग स्तुतियाँ छपती हैं, जैसे जय काली जगदम्ब जय से शुरू होने वाली, और चौवन पदों वाली एक लंबी स्तुति। इस पेज पर जयकाली कलिमलहरण से शुरू होने वाली स्तुति है, जो सबसे ज़्यादा प्रचलित है और नवरात्रि की सातवीं रात के लिए कालरात्रि चालीसा के नाम से भी छपती है।

क्या ज्योतिष में काली किसी ग्रह से जुड़ी हैं?

कुछ ज्योतिष परंपराएँ दस महाविद्याओं को ग्रहों से जोड़ती हैं और काली को समय के ग्रह शनि से। चालीसा अपने आप में माँ की भक्ति की स्तुति है, कोई उपाय या किसी फल की गारंटी नहीं।

पाठ और स्रोत

पाठ को चार प्रकाशित प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: भक्ति भारत (bhaktibharat.com, “काली चालीसा: अरि मद मान मिटावन हारी”), आज तक (aajtak.in, कालरात्रि चालीसा के नाम से), श्लोकम् (shlokam.org) और ट्रिंग (tring.co.in)। ट्रिंग भक्ति भारत को पंक्ति-दर-पंक्ति दोहराता है, इसलिए उसे स्वतंत्र नहीं गिना गया। सब शुरू के दोहे, चालीस चौपाइयों और अंतिम दोहे पर एकमत हैं। द्रिक पंचांग इसी नाम से एक अलग, लंबी स्तुति छापता है, और भक्ति भारत पर दो और हैं (“जय काली जगदम्ब जय” और “जय काली कंकाल मालिनी”); वे यहाँ नहीं लिए गए।

पाठभेद (पहले हमारा पाठ): चौ. 9 महाशक्ति (भक्ति भारत में छपाई की भूल महशक्ति); चौ. 8 ऋषि-मुनि (कहीं ऋषी-मुनि); चौ. 32 कोउ (श्लोकम्: कौ); चौ. 6 कर दमकत (अक्सर जुड़ा हुआ छपा, करदमकत); चौ. 30 करुण (छपा करूण); चौ. 17 और 29 बढ्यौ, बाढ्यो (कहीं ढ़ के साथ)। अनुस्वार और अनुनासिक जैसे वर्तनी के छोटे अंतर नहीं गिनाए। चौ. 27 में ये बालक लखि को हमने “यह देखकर शंकर जी बालक की तरह आए” पढ़ा है। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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