चालीसा · विंध्यवासिनी

श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा: अर्थ सहित

विंध्य पर्वत पर बसने वाली माँ विंध्यवासिनी की स्तुति। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: विन्ध्येश्वरी चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

विंध्यवासिनी कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

विंध्यवासिनी (या विन्ध्येश्वरी, “विंध्य की रानी”) वह देवी माँ हैं जो मध्य भारत के विंध्य पर्वत पर बसती हैं। उनका सबसे प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश में मिर्ज़ापुर के पास, गंगा किनारे विंध्याचल में है, और पास ही अष्टभुजा और काली के मंदिर हैं। देवी माहात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती के रूप में पढ़ा जाता है, में देवी वचन देती हैं कि वे नंद के घर यशोदा के गर्भ से जन्म लेंगी और फिर विंध्य पर्वत पर निवास करेंगी; परंपरा इसे उस कन्या से जोड़ती है जो नवजात कृष्ण के बदले रखी गई थी और कंस के हाथों से छूटकर आकाश में चली गई।

चालीसा लगभग चालीस पदों की सरल हिंदी स्तुति होती है। विन्ध्येश्वरी चालीसा एक दोहे से शुरू होती है और उसमें अड़तीस चौपाइयाँ हैं, जिन्हें संस्करण चालीस गिनते हैं; अंत में कोई दोहा नहीं है। पहले आधे भाग में माँ की अनेक नामों और तीर्थों से स्तुति है, वैष्णवी और काली से लेकर हिंगलाज, शीतला और मुम्बा देवी तक, सब एक ही देवी के रूप में। दूसरे आधे भाग में पुरानी भक्ति-कविता की विश्वास भरी भाषा में क़र्ज़, बीमारी, क़ैद और संतान की कामना में भक्तों की आशाओं की बात है, और ध्वजा और नारियल चढ़ाने जैसी रीतियों की। ये विश्वास के शब्द हैं, वादे नहीं। किसी कवि का नाम नहीं है; यह पारंपरिक स्तुति है जो दशकों से चालीसा-संग्रहों में छपती है।

कई परिवार इसे नवरात्रि में पढ़ते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू का दोहा और अड़तीस चौपाइयाँ।

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दोहा 1

नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब।
सन्त जनों के काज में, करती नहीं विलम्ब॥

Namo namo Vindhyeshvari, namo namo Jagadamb,
sant janon ke kaaj mein, karti nahin vilamb.

अर्थ: हे विंध्येश्वरी, आपको बार-बार नमस्कार; हे जगदम्बा, आपको बार-बार नमस्कार। सज्जनों के काम में आप देर नहीं करतीं।

Meaning: Salutations again and again to you, Vindhyeshwari, Mother of the world; you never delay in helping good people.

चौपाई 1

जय जय जय विन्ध्याचल रानी।
आदि शक्ति जग विदित भवानी॥

Jai jai jai Vindhyaachal raani,
aadi shakti jag vidit Bhavaani.

अर्थ: विंध्याचल की रानी, आपकी जय हो; हे भवानी, आप आदि शक्ति हैं, जिन्हें सारा जगत जानता है।

Meaning: Victory to the queen of the Vindhya hills; Bhavani, you are the first power, known to all the world.

चौपाई 2

सिंहवाहिनी जय जगमाता।
जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥

Singhavaahini jai jagmaata,
jai jai jai tribhuvan sukhdaata.

अर्थ: सिंह पर सवार जगत-माता, आपकी जय हो; तीनों लोकों को सुख देने वाली, आपकी जय हो।

Meaning: Victory to the Mother of the world who rides the lion; victory to you who bring joy to the three worlds.

चौपाई 3

कष्ट निवारिणी जय जग देवी।
जय जय सन्त असुर सुर सेवी॥

Kasht nivaarini jai jag devi,
jai jai sant asur sur sevi.

अर्थ: कष्ट दूर करने वाली जगत की देवी, आपकी जय हो; संत, असुर और देवता, सब आपकी सेवा करते हैं।

Meaning: Victory to the goddess of the world who ends suffering; saints, asuras and gods alike serve you.

चौपाई 4

महिमा अमित अपार तुम्हारी।
शेष सहस मुख वर्णत हारी॥

Mahima amit apaar tumhaari,
Shesh sahas mukh varnat haari.

अर्थ: आपकी महिमा असीम और अपार है; शेषनाग हज़ार मुखों से वर्णन करते-करते हार गए।

Meaning: Your glory is boundless; even Shesha, with a thousand mouths, tired of describing it.

चौपाई 5

दीनन के दुख हरत भवानी।
नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी॥

Deenan ke dukh harat Bhavaani,
nahin dekhyo tum sam kou daani.

अर्थ: हे भवानी, आप दीनों के दुख हरती हैं; आप जैसा दानी कोई नहीं देखा।

Meaning: Bhavani, you take away the sorrows of the poor; no one so generous has ever been seen.

चौपाई 6

सब कर मनसा पुरवत माता।
महिमा अमित जगत विख्याता॥

Sab kar mansa puravat maata,
mahima amit jagat vikhyaata.

अर्थ: हे माता, आप सबकी इच्छा पूरी करती हैं; आपकी असीम महिमा जगत में प्रसिद्ध है।

Meaning: Mother, you fulfil everyone's wishes; your boundless glory is famed throughout the world.

चौपाई 7

जो जन ध्यान तुम्हारो लावै।
सो तुरतहि वांछित फल पावै॥

Jo jan dhyaan tumhaaro laavai,
so turatahi vaanchhit phal paavai.

अर्थ: जो व्यक्ति आपका ध्यान करता है, वह जल्दी ही मनचाहा फल पाता है।

Meaning: Whoever turns their mind to you soon receives what they long for.

चौपाई 8

तू ही वैष्णवी तू ही रुद्रानी।
तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी॥

Too hi Vaishnavi too hi Rudraani,
too hi Shaarada aru Brahmaani.

अर्थ: आप ही वैष्णवी हैं, आप ही रुद्राणी; आप ही शारदा और ब्रह्माणी हैं।

Meaning: You are Vaishnavi, you are Rudrani; you are Sharada and Brahmani.

चौपाई 9

रमा राधिका श्यामा काली।
तू ही मातु सन्तन प्रतिपाली॥

Rama Raadhika Shyaama Kaali,
too hi maatu santan pratipaali.

अर्थ: रमा, राधिका, श्यामा और काली आप ही हैं; हे माता, आप ही संतों का पालन करती हैं।

Meaning: You are Rama, Radhika, Shyama and Kali; Mother, it is you who cares for the good.

चौपाई 10

उमा माधवी चण्डी ज्वाला।
बेगि मोहि पर होहु दयाला॥

Uma Maadhavi Chandi Jvaala,
begi mohi par hohu dayaala.

अर्थ: आप उमा, माधवी, चंडी और ज्वाला हैं; जल्दी मुझ पर दया कीजिए।

Meaning: You are Uma, Madhavi, Chandi and Jvala; be kind to me soon.

चौपाई 11

तू ही हिंगलाज महारानी।
तू ही शीतला अरु विज्ञानी॥

Too hi Hinglaaj mahaaraani,
too hi Sheetala aru vigyaani.

अर्थ: आप ही हिंगलाज की महारानी हैं, आप ही शीतला और ज्ञान से भरी देवी हैं।

Meaning: You are the great queen of Hinglaj; you are Sheetala, and the goddess of wisdom.

चौपाई 12

दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता।
तू ही लक्ष्मी जग सुखदाता॥

Durga durg vinaashini maata,
too hi Lakshmi jag sukhdaata.

अर्थ: आप दुर्गा हैं, कठिनाइयों को मिटाने वाली माता; आप ही जगत को सुख देने वाली लक्ष्मी हैं।

Meaning: You are Durga, the Mother who breaks down every hardship; you are Lakshmi, who brings joy to the world.

चौपाई 13

तू ही जाह्नवी अरु उत्राणी।
हेमावती अम्बे निर्वाणी॥

Too hi Jaahnavi aru Utraani,
Hemaavati Ambe Nirvaani.

अर्थ: आप ही जाह्नवी (गंगा) हैं और उत्राणी; आप हेमावती, अम्बा और निर्वाणी (मुक्ति देने वाली) हैं।

Meaning: You are Jahnavi (the Ganga) and Utrani; you are Hemavati, Amba and Nirvani, who grants release.

चौपाई 14

अष्टभुजी वाराहिनी देवा।
करत विष्णु शिव जाकर सेवा॥

Ashtabhuji Vaaraahini deva,
karat Vishnu Shiv jaakar seva.

अर्थ: आप आठ भुजाओं वाली वाराही देवी हैं, जिनकी सेवा विष्णु और शिव करते हैं।

Meaning: You are the eight-armed goddess Varahi, whom Vishnu and Shiva serve.

चौपाई 15

चौंसट्ठी देवी कल्यानी।
गौरी मंगला सब गुण खानी॥

Chaunsatthi devi kalyaani,
Gauri Mangala sab gun khaani.

अर्थ: आप चौंसठ योगिनियों वाली कल्याणी देवी हैं; आप गौरी और मंगला हैं, सब गुणों की खान।

Meaning: You are the gracious goddess of the sixty-four yoginis; you are Gauri and Mangala, treasure of every virtue.

चौपाई 16

पाटन मुम्बा दन्त कुमारी।
भद्रकालि सुन विनय हमारी॥

Paatan Mumba Dant Kumaari,
Bhadrakaali sun vinay hamaari.

अर्थ: आप पाटन की देवी हैं, मुम्बा, दंता और कुमारी हैं; हे भद्रकाली, हमारी विनती सुनिए।

Meaning: You are the goddess of Patan, and Mumba, Danta and Kumari; Bhadrakali, hear our prayer.

चौपाई 17

वज्रधारिणी शोक नाशिनी।
आयु रक्षिणी विन्ध्यवासिनी॥

Vajradhaarini shok naashini,
aayu rakshini Vindhyavaasini.

अर्थ: आप वज्र धारण करने वाली, शोक मिटाने वाली, आयु की रक्षा करने वाली विंध्यवासिनी हैं।

Meaning: Wielder of the thunderbolt, ender of grief, protector of life: you are Vindhyavasini.

चौपाई 18

जया और विजया बैताली।
मातु सुगन्धा अरु विकराली॥

Jaya aur Vijaya Baitaali,
maatu Sugandha aru Vikaraali.

अर्थ: आप जया, विजया और बैताली हैं; आप सुगंधा माता और विकराली हैं।

Meaning: You are Jaya, Vijaya and Baitali; you are Mother Sugandha and the fierce Vikarali.

चौपाई 19

नाम अनन्त तुम्हार भवानी।
बरनै किमि मानुष अज्ञानी॥

Naam anant tumhaar Bhavaani,
barnai kimi maanush agyaani.

अर्थ: हे भवानी, आपके नाम अनंत हैं; अज्ञानी मनुष्य उनका वर्णन कैसे करे?

Meaning: Bhavani, your names are endless; how could an unknowing human describe them?

चौपाई 20

जापर कृपा मातु तव होई।
तो वह करै चहै मन जोई॥

Jaapar kripa maatu tav hoi,
to vah karai chahai man joi.

अर्थ: हे माता, जिस पर आपकी कृपा होती है, वह मन चाहा कर पाता है।

Meaning: Mother, the one on whom your grace falls can do whatever the heart desires.

चौपाई 21

कृपा करहु मोपर महारानी।
सिद्धि करिय अम्बे मम बानी॥

Kripa karahu mopar mahaaraani,
siddhi kariya Ambe mam baani.

अर्थ: हे महारानी, मुझ पर कृपा कीजिए; हे अम्बा, मेरी वाणी को सफल कीजिए।

Meaning: Great queen, be kind to me; Amba, let my words bear fruit.

चौपाई 22

जो नर धरै मातु कर ध्याना।
ताकर सदा होय कल्याना॥

Jo nar dharai maatu kar dhyaana,
taakar sada hoy kalyaana.

अर्थ: जो माता का ध्यान करता है, उसका सदा भला होता है।

Meaning: Whoever meditates on the Mother is always blessed.

चौपाई 23

विपति ताहि सपनेहु नहिं आवै।
जो देवी कर जाप करावै॥

Vipati taahi sapnehu nahin aavai,
jo devi kar jaap karaavai.

अर्थ: जो देवी का जाप करवाता है, उस पर सपने में भी विपत्ति नहीं आती।

Meaning: Whoever has the goddess's name chanted meets no misfortune, not even in dreams.

चौपाई 24

जो नर कहँ ऋण होय अपारा।
सो नर पाठ करै शत बारा॥

Jo nar kahan rin hoy apaara,
so nar paath karai shat baara.

अर्थ: जिस पर अपार क़र्ज़ हो, वह सौ बार यह पाठ करे;

Meaning: Let the one weighed down by endless debt recite it a hundred times,

चौपाई 25

निश्चय ऋण मोचन होइ जाई।
जो नर पाठ करै मन लाई॥

Nishchay rin mochan hoi jaai,
jo nar paath karai man laai.

अर्थ: जो मन लगाकर पाठ करता है, उसका क़र्ज़ निश्चय ही उतर जाता है।

Meaning: for whoever recites it with a willing heart is surely freed of debt.

चौपाई 26

अस्तुति जो नर पढ़ै पढ़ावै।
या जग में सो बहु सुख पावै॥

Astuti jo nar padhai padhaavai,
ya jag mein so bahu sukh paavai.

अर्थ: जो यह स्तुति पढ़ता और पढ़वाता है, वह इस जगत में बहुत सुख पाता है।

Meaning: Whoever reads this hymn of praise, or has it read, finds much happiness in this world.

चौपाई 27

जाको व्याधि सतावै भाई।
जाप करत सब दूरि पराई॥

Jaako vyaadhi sataavai bhaai,
jaap karat sab doori paraai.

अर्थ: भाई, जिसे कोई रोग सताता हो, जाप करने से वह सब दूर भाग जाता है।

Meaning: Friend, whoever is troubled by illness finds it all driven away by this chanting.

चौपाई 28

जो नर अति बन्दी महँ होई।
बार हजार पाठ कर सोई॥

Jo nar ati bandi mahan hoi,
baar hajaar paath kar soi.

अर्थ: जो व्यक्ति कड़ी क़ैद में हो, वह हज़ार बार पाठ करे;

Meaning: Let the one held fast in prison recite it a thousand times,

चौपाई 29

निश्चय बन्दी ते छुटि जाई।
सत्य बचन मम मानहु भाई॥

Nishchay bandi te chhuti jaai,
satya bachan mam maanahu bhaai.

अर्थ: वह निश्चय ही क़ैद से छूट जाता है; भाई, मेरी बात सच मानिए।

Meaning: and they will surely be set free; friend, take my word as true.

चौपाई 30

जापर जो कछु संकट होई।
निश्चय देविहिं सुमिरै सोई॥

Jaapar jo kachhu sankat hoi,
nishchay devihin sumirai soi.

अर्थ: जिस पर कोई भी संकट आए, वह विश्वास से देवी को याद करे।

Meaning: Whoever faces any trouble at all, let them remember the goddess with trust.

चौपाई 31

जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई।
सो नर या विधि करै उपाई॥

Ja kahan putra hoy nahin bhaai,
so nar ya vidhi karai upaai.

अर्थ: भाई, जिसके संतान न हो, वह इस तरह उपाय करे:

Meaning: Friend, whoever has no child, let them do as follows:

चौपाई 32

पाँच वर्ष सो पाठ करावै।
नौरातन में विप्र जिमावै॥

Paanch varsh so paath karaavai,
nauraatan mein vipra jimaavai.

अर्थ: पाँच वर्ष तक पाठ करवाए, और नवरात्रि में ब्राह्मणों को भोजन कराए।

Meaning: have this read for five years, and feed Brahmins during Navratri.

चौपाई 33

निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी।
पुत्र देहिं ता कहँ गुणखानी॥

Nishchay hohin prasann Bhavaani,
putra dehin ta kahan gunkhaani.

अर्थ: तब भवानी निश्चय ही प्रसन्न होती हैं, और गुणों की खान वे उसे संतान देती हैं।

Meaning: Then Bhavani, treasure of virtues, is surely pleased and grants that person a child.

चौपाई 34

ध्वजा नारियल आन चढ़ावै।
विधि समेत पूजन करवावै॥

Dhvaja naariyal aan chadhaavai,
vidhi samet poojan karvaavai.

अर्थ: भक्त ध्वजा और नारियल लाकर चढ़ाए, और विधि सहित पूजा करवाए।

Meaning: Let the devotee bring a flag and a coconut as offerings, and have the worship done with its proper rites.

चौपाई 35

नित प्रति पाठ करै मन लाई।
प्रेम सहित नहिं आन उपाई॥

Nit prati paath karai man laai,
prem sahit nahin aan upaai.

अर्थ: रोज़ मन लगाकर, प्रेम से पाठ करे; इसके सिवा कोई और उपाय नहीं चाहिए।

Meaning: Let them recite it daily with a willing heart and with love; no other means is needed.

चौपाई 36

यह श्री विन्ध्याचल चालीसा।
रंक पढ़त होवे अवनीसा॥

Yah Shri Vindhyaachal chaalisa,
rank padhat hove avaneesa.

अर्थ: यह श्री विंध्याचल चालीसा है; इसे पढ़कर निर्धन भी राजा हो जाता है।

Meaning: This is the Shri Vindhyachal Chalisa: reading it, even a pauper becomes a king.

चौपाई 37

यह जनि अचरज मानहु भाई।
कृपा दृष्टि जापर होइ जाई॥

Yah jani acharaj maanahu bhaai,
kripa drishti jaapar hoi jaai.

अर्थ: भाई, इसे अचरज मत मानिए; यह उसके साथ होता है जिस पर माँ की कृपा-दृष्टि पड़ जाए।

Meaning: Friend, do not think it a wonder: it happens to the one on whom the Mother's kind glance falls.

चौपाई 38

जय जय जय जग मातु भवानी।
कृपा करहु मो पर जन जानी॥

Jai jai jai jag maatu Bhavaani,
kripa karahu mo par jan jaani.

अर्थ: जगत की माता भवानी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो; मुझे अपना जानकर मुझ पर कृपा कीजिए।

Meaning: Victory, victory, victory to Bhavani, Mother of the world; know me as your own and be kind to me.

सवाल-जवाब

विन्ध्येश्वरी चालीसा किसने लिखी?

पाठ में किसी कवि का नाम नहीं है और कोई लेखक दर्ज नहीं है। यह पारंपरिक स्तुति है, जो बिना लेखक के नाम के चालीसा-संग्रहों और भक्ति वेबसाइटों पर छपती है।

क्या विंध्यवासिनी और दुर्गा एक ही हैं?

हाँ, इस अर्थ में कि भक्त सब देवियों को एक ही माँ के रूप मानते हैं; चालीसा स्वयं उन्हें दुर्गा, लक्ष्मी, काली, उमा और कई नामों से पुकारती है। विंध्यवासिनी वही माँ हैं, जैसे विंध्य पर्वत पर पूजी जाती हैं।

इसमें चालीस नहीं, अड़तीस चौपाइयाँ क्यों हैं?

हमने जितनी भी छपी और ऑनलाइन प्रतियाँ देखीं, सबमें वही अड़तीस हैं। “चालीसा” एक शैली का नाम है, लगभग चालीस पदों की स्तुति, और कुछ संस्करण अंतिम पद को चालीसवाँ गिन लेते हैं।

विंध्यवासिनी मंदिर कहाँ है?

उत्तर प्रदेश में मिर्ज़ापुर के पास, गंगा किनारे विंध्याचल में। पास के अष्टभुजा और काली खोह मंदिरों के साथ यह तीर्थयात्रा का एक प्रसिद्ध त्रिकोण बनाता है।

पाठ और स्रोत

पाठ को चार प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: छपा हुआ आरती चालीसा संग्रह (रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार, 2000; archive.org पर स्कैन), sanskritdocuments.org (एक पुरानी फ़ाइल जिसमें आ की मात्राएँ छूट गई हैं, पर शब्द पढ़े जा सकते हैं), भक्ति भारत (bhaktibharat.com) और द्रिक पंचांग (drikpanchang.com)। चारों में वही दोहा और अड़तीस चौपाइयाँ उसी क्रम में हैं, और किसी में लेखक का नाम नहीं है। जहाँ ये अलग हैं, वहाँ हमने वह पाठ लिया जो अधिकतर प्रतियों में है।

पाठभेद: चौ. 3 निवारिणी (भक्ति भारत निवारण); चौ. 5 दीनन के … देख्यो (भक्ति भारत दीनन को … देखो); चौ. 8, 9, 11, 12, 13 तू ही (भक्ति भारत तुम्हीं); चौ. 13 उत्राणी (भक्ति भारत रुद्रानी; नाम अस्पष्ट है), हेमावती अम्बे निर्वाणी (कहीं अम्ब, निरवाणी/निर्वानी); चौ. 18 मातु सुगन्धा (2000 की छपी प्रति मात संकटी); चौ. 20 तो वह करै (भक्ति भारत जो वह करै); चौ. 21 सिद्धि करिय अम्बे (कहीं सिद्ध करहु अम्बे, और 2000 की प्रति में सिद्ध करिए अब यह); चौ. 23 देवी कर (2000 की प्रति देवी का); चौ. 25 मन लाई (भक्ति भारत चित लाई); चौ. 26 बहु सुख (2000 की प्रति अति सुख); चौ. 32 सो पाठ (भक्ति भारत जो पाठ); चौ. 37 जनि (भक्ति भारत जन); चौ. 38 मो पर जन जानी (भक्ति भारत मोहि निज जन जानी)। चौ. 16 में पाटन मुम्बा दन्त कुमारी को तीर्थ-देवियों की सूची के रूप में पढ़ा गया है (पाटन देवी, मुम्बा देवी, दंता और कुमारी); ठीक कौन-से तीर्थ अभिप्रेत हैं, यह निश्चित नहीं। सौ या हज़ार बार पाठ करने या नवरात्रि में ब्राह्मण-भोजन की बात करने वाली चौपाइयाँ पारंपरिक पाठ का हिस्सा हैं और जैसी हैं वैसी अनूदित की गई हैं। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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