चालीसा · अन्नपूर्णा

श्री अन्नपूर्णा चालीसा: अर्थ सहित

अन्न देने वाली माँ, काशी की रानी अन्नपूर्णा की स्तुति। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: अन्नपूर्णा चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

अन्नपूर्णा कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

अन्नपूर्णा (अन्न और पूर्णा, यानी अन्न से भरी हुई) पार्वती का वह रूप हैं जो संसार को भोजन देती हैं। वे काशी (वाराणसी) की रानी हैं, जहाँ उनका मंदिर काशी विश्वनाथ के पास है, और उन्हें हाथ में करछी और अन्न का पात्र लिए दिखाया जाता है। एक प्रिय कथा है कि एक बार शिव ने संसार को, भोजन समेत, माया कहा; तब पार्वती ने अपनी पोषण शक्ति खींच ली और कुछ भी उगना बंद हो गया, फिर वे काशी में अन्नपूर्णा बनकर प्रकट हुईं, जहाँ स्वयं शिव भिक्षापात्र लेकर उनके पास आए और उन्होंने उन्हें भोजन कराया। इसीलिए कई रसोईघरों में उनका चित्र रहता है और भोजन से पहले उनका आशीर्वाद माँगा जाता है।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल पुरानी हिंदी स्तुति होती है। अन्नपूर्णा चालीसा एक दोहे से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। काशी की रानी के रूप में उनकी स्तुति के बाद यह पार्वती की कथा कहती है: सती का देह-त्याग, हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म, नारद का उनके निश्चय को परखना, उनका तप और ब्रह्मा का वरदान कि शिव फिर उनके होंगे। फिर यह उन्हें काली और चंडी, कैलास की गिरिजा और लक्ष्मी के रूप में देखती है, और उन आशीर्वादों के साथ पूरी होती है जिन्हें परंपरा इस स्तुति से जोड़ती है। किसी कवि का नाम नहीं है; यह पुराना भक्ति-पाठ है जो पीढ़ियों से चालीसा संग्रहों में छपता आया है।

कई परिवार मार्गशीर्ष पूर्णिमा, यानी अन्नपूर्णा जयंती, पर माँ अन्नपूर्णा का स्मरण करते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री अन्नपूर्णा चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू का एक दोहा, चालीस चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा।

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दोहा 1

विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय।
अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय॥

Vishweshwar padapadam ki raj nij sheesh lagaay,
Annapoorne, tav suyash baranaun kavi mati laay.

अर्थ: विश्वेश्वर (काशी के शिव) के चरण-कमलों की धूल अपने सिर पर लगाकर, हे अन्नपूर्णा, मैं कवि अपनी बुद्धि लगाकर आपके सुंदर यश का वर्णन करता हूँ।

Meaning: Placing on my head the dust of the lotus feet of Vishweshwar, the Lord of Kashi, I, the poet, set my mind to telling your good fame, Annapurna.

चौपाई 1

नित्य आनंद करिणी माता।
वर अरु अभय भाव प्रख्याता॥

Nitya aanand karini maata,
var aru abhay bhaav prakhyaata.

अर्थ: हे माता, आप सदा आनंद देती हैं; वरदान और अभय देने वाला आपका भाव प्रसिद्ध है।

Meaning: Mother, you give joy for ever; your gesture of blessing and of fearlessness is known to all.

चौपाई 2

जय! सौंदर्य सिंधु जग जननी।
अखिल पाप हर भव-भय-हरनी॥

Jai! saundarya sindhu jag janani,
akhil paap har bhav-bhay-harani.

अर्थ: जय हो, सुंदरता के सागर, जगत की माता; आप सारे पाप और संसार के भय हर लेती हैं।

Meaning: Victory to you, ocean of beauty, Mother of the world, who takes away every wrong and the fears of worldly life.

चौपाई 3

श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि।
संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि॥

Shwet badan par shwet basan puni,
santan tuv pad sevat rishi muni.

अर्थ: गोरे शरीर पर सफ़ेद वस्त्र हैं; संत, ऋषि और मुनि आपके चरणों की सेवा करते हैं।

Meaning: White garments on your fair form; saints, sages and seers serve at your feet.

चौपाई 4

काशी पुराधीश्वरी माता।
माहेश्वरी सकल जग त्राता॥

Kaashi puraadheeshwari maata,
Maaheshwari sakal jag traata.

अर्थ: हे माता, आप काशी नगरी की स्वामिनी हैं; हे माहेश्वरी, आप सारे जगत की रक्षा करती हैं।

Meaning: Mother, queen of the city of Kashi; Maheshwari, protector of the whole world.

चौपाई 5

वृषभारूढ़ नाम रुद्राणी।
विश्व विहारिणि जय! कल्याणी॥

Vrishabhaaroodh naam Rudraani,
vishwa vihaarini jai! Kalyaani.

अर्थ: बैल पर सवार, आपका नाम रुद्राणी है; सारे विश्व में विचरने वाली कल्याणी, आपकी जय हो।

Meaning: Riding the bull, you are called Rudrani; victory to you, Kalyani, who moves through all the world.

चौपाई 6

पतिदेवता सुतीत शिरोमणि।
पदवी प्राप्त कीन्ह गिरि नंदिनि॥

Patidevata suteet shiromani,
padavi praapt keenh Giri nandini.

अर्थ: हे पर्वतराज की पुत्री, आपने पति को देवता मानने वाली पत्नियों में शिरोमणि का पद पाया।

Meaning: Daughter of the mountain, you won the place of crown jewel among wives devoted to their husbands.

चौपाई 7

पति विछोह दुख सहि नहिं पावा।
योग अग्नि तब बदन जरावा॥

Pati vichhoh dukh sahi nahin paava,
yog agni tab badan jaraava.

अर्थ: (सती रूप में) आप पति से बिछड़ने का दुख सह न सकीं, तब आपने योग की अग्नि से अपना शरीर जला दिया।

Meaning: (As Sati) you could not bear the pain of being parted from your husband, and burnt your body in the fire of yoga.

चौपाई 8

देह तजत शिव चरण सनेहू।
राखेहु जात हिमगिरि गेहू॥

Deh tajat Shiv charan sanehu,
raakhehu jaat Himagiri gehu.

अर्थ: देह छोड़ते समय भी आपने शिव के चरणों का प्रेम सँभाले रखा, और हिमालय के घर में जन्म लिया।

Meaning: Even as you left that body you kept your love for Shiva's feet, and were born in the home of the Himalaya.

चौपाई 9

प्रकटी गिरिजा नाम धरायो।
अति आनंद भवन मँह छायो॥

Prakati Girija naam dharaayo,
ati aanand bhavan manh chhaayo.

अर्थ: आप प्रकट हुईं और गिरिजा नाम पाया; घर में बहुत आनंद छा गया।

Meaning: You were born and named Girija, and great joy filled the house.

चौपाई 10

नारद ने तब तोहिं भरमायहु।
ब्याह करन हित पाठ पढ़ायहु॥

Naarad ne tab tohin bharmaayahu,
byaah karan hit paath padhaayahu.

अर्थ: तब नारद ने आपको परखने के लिए भ्रम में डाला और विवाह के लिए तरह-तरह की बातें सिखाईं।

Meaning: Then Narada tried to sway you, giving you counsel about whom to marry.

चौपाई 11

ब्रह्मा वरुण कुबेर गनाये।
देवराज आदिक कहि गाये॥

Brahma Varun Kuber ganaaye,
Devraaj aadik kahi gaaye.

अर्थ: उन्होंने ब्रह्मा, वरुण, कुबेर और इंद्र आदि देवताओं को गिनाया और उनके गुण गाए।

Meaning: He named Brahma, Varuna, Kuber, Indra and other gods, and sang their praises.

चौपाई 12

सब देवन को सुजस बखानी।
मति पलटन की मन मँह ठानी॥

Sab devan ko sujas bakhaani,
mati palatan ki man manh thaani.

अर्थ: सब देवताओं का यश बखान कर उन्होंने मन में ठान लिया कि आपका निश्चय बदल देंगे।

Meaning: Praising the glory of all the gods, he set his mind on changing your resolve.

चौपाई 13

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या।
कीन्ही सिद्ध हिमाचल कन्या॥

Achal raheen tum pran par dhanya,
keenhi siddh Himaachal kanya.

अर्थ: हे धन्य हिमाचल-कन्या, आप अपने प्रण पर अटल रहीं और उसे सिद्ध कर दिखाया।

Meaning: Blessed daughter of the Himalaya, you stood firm in your vow and proved it true.

चौपाई 14

निज कौ तब नारद घबराये।
तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये॥

Nij kau tab Naarad ghabraaye,
tab pran pooran mantra padhaaye.

अर्थ: तब नारद स्वयं चकित रह गए, और उन्होंने आपको प्रण पूरा करने का मंत्र सिखाया।

Meaning: Then Narada himself was taken aback, and taught you the mantra to fulfil your vow.

चौपाई 15

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ।
संत बचन तुम सत्य परेखेहु॥

Karan hetu tap tohin updeshehu,
sant bachan tum satya parekhehu.

अर्थ: उन्होंने आपको तप करने का उपदेश दिया, और आपने संत के वचन को सच्चा मानकर परखा।

Meaning: He counselled you to do austerities, and you took the saint's word as true.

चौपाई 16

गगनगिरा सुनि टरी न टारे।
ब्रह्मा तब तुव पास पधारे॥

Gagangira suni tari na taare,
Brahma tab tuv paas padhaare.

अर्थ: आकाशवाणी सुनकर भी आप टालने से नहीं टलीं; तब ब्रह्मा आपके पास आए।

Meaning: Even a voice from the sky could not turn you aside; then Brahma came to you.

चौपाई 17

कहेउ पुत्रि वर माँगु अनूपा।
देहुँ आज तुव मति अनुरूपा॥

Kaheu putri var maangu anoopa,
dehun aaj tuv mati anuroopa.

अर्थ: उन्होंने कहा: बेटी, कोई अनुपम वर माँगो; आज मैं तुम्हारी इच्छा के अनुसार दूँगा।

Meaning: He said: “Daughter, ask for a matchless boon; today I shall give whatever you wish.”

चौपाई 18

तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी।
कष्ट उठायहु अति सुकुमारी॥

Tum tap keenh alaukik bhaari,
kasht uthaayahu ati sukumaari.

अर्थ: “तुमने अद्भुत और कठोर तप किया है; इतनी कोमल होकर भी बहुत कष्ट उठाया है।

Meaning: “You have done austerities beyond this world; tender as you are, you have borne great hardship.

चौपाई 19

अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों।
है सौगंध नहीं छल तोसों॥

Ab sandeh chhaandi kachhu moson,
hai saugandh nahin chhal toson.

अर्थ: अब मुझसे कोई संदेह छोड़ दो; मैं सौगंध खाता हूँ, तुमसे कोई छल नहीं है।

Meaning: Now set aside any doubt of me; I give you my word, there is no trick in this.

चौपाई 20

करत वेद विद ब्रह्मा जानहु।
वचन मोर यह साँचो मानहु॥

Karat Ved vid Brahma jaanahu,
vachan mor yah saancho maanahu.

अर्थ: मुझे वेदों को जानने और रचने वाला ब्रह्मा जानो, और मेरी यह बात सच मानो।

Meaning: Know me as Brahma, who knows and gives the Vedas, and take my word as true.

चौपाई 21

तजि संकोच कहहु निज इच्छा।
देहौं मैं मनमानी भिक्षा॥

Taji sankoch kahahu nij ichchha,
dehaun main manmaani bhiksha.

अर्थ: संकोच छोड़कर अपनी इच्छा बताओ; तुम जो माँगोगी, वही दूँगा।”

Meaning: Put shyness aside and tell me your wish; I shall give you whatever you ask.”

चौपाई 22

सुनि ब्रह्मा की मधुरी बानी।
मुख सों कछु मुसुकाय भवानी॥

Suni Brahma ki madhuri baani,
mukh son kachhu musukaay Bhavaani.

अर्थ: ब्रह्मा की मीठी बात सुनकर भवानी थोड़ा मुस्कुराईं।

Meaning: Hearing Brahma's sweet words, Bhavani smiled a little.

चौपाई 23

बोली तुम का कहहु विधाता।
तुम तो जग के स्रष्टा धाता॥

Boli tum ka kahahu Vidhaata,
tum to jag ke srashta dhaata.

अर्थ: वे बोलीं: हे विधाता, आप क्या कह रहे हैं; आप तो जगत के रचने और धारण करने वाले हैं।

Meaning: She said: “What are you asking, Creator? You are the maker and upholder of the world.

चौपाई 24

मम कामना गुप्त नहिं तोंसों।
कहवावा चाहहु का मोंसों॥

Mam kaamana gupt nahin tonson,
kahvaava chaahahu ka monson.

अर्थ: मेरी इच्छा आपसे छिपी नहीं है; फिर मुझसे क्या कहलवाना चाहते हैं?

Meaning: My wish is no secret from you; why do you want me to say it?

चौपाई 25

दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा।
शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा॥

Daksh yagya manh marti baara,
Shambhunaath puni hohin hamaara.

अर्थ: दक्ष के यज्ञ में देह त्यागते समय मैंने यही चाहा था कि शंभुनाथ फिर से मेरे हों।

Meaning: When I gave up my body at Daksha's sacrifice, my wish was that Shiva would be mine again.”

चौपाई 26

सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये।
कहि तथास्तु विधि धाम सिधाये॥

So ab milahin mohin manbhaaye,
kahi tathaastu vidhi dhaam sidhaaye.

अर्थ: “वही मनचाहे पति अब मुझे मिलें।” “तथास्तु” कहकर ब्रह्मा अपने धाम चले गए।

Meaning: “May that beloved one now be mine.” Saying “So be it”, Brahma went back to his realm.

चौपाई 27

तब गिरिजा शंकर तव भयऊ।
फल कामना संशयो गयऊ॥

Tab Girija Shankar tav bhayau,
phal kaamana sanshayo gayau.

अर्थ: तब हे गिरिजा, शंकर आपके हो गए; इच्छा का फल मिला और सारा संशय मिट गया।

Meaning: Then, Girija, Shankar became yours; your wish bore fruit and every doubt was gone.

चौपाई 28

चन्द्रकोटि रवि कोटि प्रकाशा।
तब आनन महँ करत निवासा॥

Chandrakoti ravi koti prakaasha,
tab aanan manh karat nivaasa.

अर्थ: करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों का प्रकाश आपके मुख पर बसता है।

Meaning: The light of millions of moons and suns lives in your face.

चौपाई 29

माला पुस्तक अंकुश सोहै।
कर मँह अपर पाश मन मोहै॥

Maala pustak ankush sohai,
kar manh apar paash man mohai.

अर्थ: आपके हाथों में माला, पुस्तक और अंकुश सुशोभित हैं, और दूसरे हाथ का पाश मन मोह लेता है।

Meaning: A rosary, a book and a goad shine in your hands, and the noose in the other hand charms the heart.

चौपाई 30

अन्नपूर्णे! सदापूर्णे।
अज अनवद्य अनंत पूर्णे॥

Annapoorne! sadaapoorne,
aj anavadya anant poorne.

अर्थ: हे अन्नपूर्णा, सदा भरी-पूरी; अजन्मा, निर्दोष, अनंत और पूर्ण माता।

Meaning: Annapurna, ever full; unborn, flawless, endless and complete.

चौपाई 31

कृपा सागरी क्षेमंकरि माँ।
भव विभूति आनंद भरी माँ॥

Kripa saagari kshemankari maa,
bhav vibhooti aanand bhari maa.

अर्थ: हे माँ, आप कृपा का सागर और कल्याण करने वाली हैं; संसार की संपदा और आनंद से भरी हैं।

Meaning: Mother, ocean of kindness, giver of well-being, full of the riches and joy of the world.

चौपाई 32

कमल विलोचन विलसित भाले।
देवि कालिके चण्डि कराले॥

Kamal vilochan vilasit bhaale,
Devi Kaalike Chandi Karaale.

अर्थ: कमल जैसे नेत्र और चमकता माथा; हे देवी, आप ही कालिका, चंडी और कराला हैं।

Meaning: Lotus eyes and a shining brow; Goddess, you are also Kalika, Chandi and the fierce Karala.

चौपाई 33

तुम कैलास माँहि ह्वै गिरिजा।
विलसी आनंद साथ सिंधुजा॥

Tum Kailaas maanhi hvai Girija,
vilasi aanand saath Sindhuja.

अर्थ: कैलास पर आप गिरिजा बनकर रहती हैं, और सागर से जन्मी लक्ष्मी बनकर आनंद में शोभा पाती हैं।

Meaning: On Kailash you are Girija, and as Sindhuja, Lakshmi born of the ocean, you shine in joy.

चौपाई 34

स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी।
मर्त्य लोक लक्ष्मी पद पायी॥

Swarg Mahaalakshmi kahlaayi,
martya lok Lakshmi pad paayi.

अर्थ: स्वर्ग में आप महालक्ष्मी कहलाती हैं, और धरती पर आपने लक्ष्मी का पद पाया।

Meaning: In heaven you are called Mahalakshmi, and on earth you are known as Lakshmi.

चौपाई 35

विलसी सब मँह सर्व सरूपा।
सेवत तोहिं अमर पुर भूपा॥

Vilasi sab manh sarva saroopa,
sevat tohin amar pur bhoopa.

अर्थ: आप सबमें, हर रूप में शोभा पाती हैं; देवलोक के राजा भी आपकी सेवा करते हैं।

Meaning: You shine in all things, in every form; even the king of the immortals serves you.

चौपाई 36

जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा।
फल पइहहिं शुभ साखी ईसा॥

Jo padhihahin yah tav chaalisa,
phal paihahin shubh saakhi Eesa.

अर्थ: जो आपकी यह चालीसा पढ़ेंगे, उन्हें शुभ फल मिलेगा; इसके साक्षी स्वयं शिव हैं।

Meaning: Those who read this chalisa of yours will receive good fruit; Shiva himself is witness.

चौपाई 37

प्रात समय जो जन मन लायो।
पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अधिकायो॥

Praat samay jo jan man laayo,
padhihahin bhakti suruchi adhikaayo.

अर्थ: जो लोग सुबह के समय मन लगाकर, भक्ति और प्रेम से इसे पढ़ेंगे,

Meaning: Those who read it in the morning with their heart in it, with deep devotion and love,

चौपाई 38

स्त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत।
परमैश्वर्य लाभ लहि अद्भुत॥

Stree kalatra pati mitra putra yut,
paramaishwarya laabh lahi adbhut.

अर्थ: वे पत्नी, पति, मित्रों और संतान के साथ अद्भुत सुख-संपदा पाते हैं।

Meaning: find, together with wife or husband, friends and children, a wonderful abundance.

चौपाई 39

राज विमुख को राज दिवावै।
जस तेरो जन सुजस बढ़ावै॥

Raaj vimukh ko raaj divaavai,
jas tero jan sujas badhaavai.

अर्थ: आप राज से वंचित को राज दिलाती हैं, और आपका यश आपके भक्त का यश बढ़ाता है।

Meaning: You restore the kingdom to one who has lost it, and your glory adds to the good name of your devotee.

चौपाई 40

पाठ महा मुद मंगल दाता।
भक्त मनोवांछित निधि पाता॥

Paath maha mud mangal daata,
bhakt manovaanchhit nidhi paata.

अर्थ: यह पाठ बड़ा आनंद और मंगल देने वाला है; भक्त मनचाहा ख़ज़ाना पाता है।

Meaning: This recitation gives great joy and blessing; the devotee finds the treasure the heart longs for.

अंतिम दोहा 1

जो यह चालीसा सुभग, पढ़ि नावैंगे माथ।
तिनके कारज सिद्ध सब, साखी काशी नाथ॥

Jo yah chaalisa subhag, padhi naavainge maath,
tinke kaaraj siddh sab, saakhi Kaashi Naath.

अर्थ: जो इस सुंदर चालीसा को पढ़कर माथा नवाएँगे, उनके सब काम पूरे होंगे; इसके साक्षी काशी के नाथ शिव हैं।

Meaning: Those who read this lovely chalisa and bow their heads will see all their work fulfilled; the Lord of Kashi is witness.

सवाल-जवाब

अन्नपूर्णा चालीसा किसने लिखी?

किसी कवि का नाम नहीं है। शुरू का दोहा केवल “कवि” की बात करता है जो काशी के स्वामी विश्वेश्वर को प्रणाम करता है, जिससे लगता है कि यह काशी में या काशी के लिए रचा गया। यह पुराना भक्ति-पाठ है, जो बिना लेखक के नाम के चालीसा संग्रहों में छपता है।

क्या अन्नपूर्णा और पार्वती एक ही हैं?

हाँ। अन्नपूर्णा पार्वती का अन्न देने वाला रूप हैं। चालीसा स्वयं पार्वती की कथा कहती है और उन्हें काली, चंडी और लक्ष्मी के रूप में भी देखती है: एक ही माँ, अनेक रूप।

अन्नपूर्णा की चालीसा में सती और पार्वती की कथा क्यों है?

क्योंकि अन्नपूर्णा पार्वती ही हैं। सती के देह-त्याग से लेकर पार्वती के लंबे तप तक, शिव के प्रति उनकी अटल भक्ति ही उनका स्वरूप है; चालीसा संसार को अन्न देने वाली माँ की स्तुति यह बताकर करती है कि उन्होंने शिव को कैसे पाया।

अन्नपूर्णा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कहाँ है?

वाराणसी (काशी) में, काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही क़दम पर। चालीसा उन्हें काशी पुराधीश्वरी, यानी काशी नगरी की रानी, कहती है।

पाठ और स्रोत

पाठ को दो स्वतंत्र परंपराओं से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया। ऑनलाइन: भक्ति भारत (bhaktibharat.com), और डिवाइन आरती, द भजन और इंस्टाएस्ट्रो, जिनमें छपाई की भूलों समेत शब्दशः वही पाठ है, इसलिए वे एक ही साक्ष्य माने गए। छपे हुए: रणधीर प्रकाशन (हरिद्वार) के चालीसा संग्रह आरती चालीसा संग्रह (2000) और 51 चालीसा संग्रह (2004), जो archive.org पर स्कैन हैं। दोनों में वही दोहा, चालीस चौपाइयाँ और अंतिम दोहा है। जहाँ ये अलग हैं, वहाँ हमने साफ़ और छंद के अनुसार सही पाठ लिया है।

पाठभेद: चौ. 20 साँचो (छपा; ऑनलाइन सांचा); चौ. 27 संशयो (ऑनलाइन; छपे में संशय); चौ. 30 अनवद्य … अनंत पूर्णे (ऑनलाइन में छपाई की भूल अनवघ; छपे में सदपूर्णे … अपूर्णे); चौ. 31 सागरी (ऑनलाइन; छपे में सगरी); चौ. 32 भाले (ऑनलाइन; छपे में बाले); चौ. 33 ह्वै गिरिजा (छपा; ऑनलाइन है); चौ. 34 लक्ष्मी (छपे में लछमी); चौ. 36 पइहहिं (छपा; ऑनलाइन पाइंहहि); चौ. 38 परमैश्वर्य और पति (छपे में पनि); अंतिम दोहा नावैंगे (छपे में नावहिंगे)। चौ. 6 का सुतीत हर संस्करण में है; यह शायद सुतीय (“सुशील पत्नियाँ”) का घिसा रूप है, और हमने अर्थ वैसा ही लिया है। पहले दोहे का पदपदम (चरण-कमल) जैसा छपा है वैसा रखा है। वर्तनी के छोटे अंतर नहीं गिनाए। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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