दिवाली पूजन विधि

दिवाली 2026 लक्ष्मी-गणेश पूजन: मुहूर्त, सामग्री और मंत्र सहित विधि

रविवार, 8 नवंबर 2026। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:55 से 7:50 है। घर पर परिवार के साथ लगभग एक घंटे में होने वाली पूरी पूजा, हर मंत्र के साथ।

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मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा एक नज़र में

  • तारीख़: रविवार, 8 नवंबर 2026।
  • अमावस्या: 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक; 8 नवंबर को सूर्यास्त के समय अमावस्या रहेगी, इसलिए शाम की पूजा 8 नवंबर को है।
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, नई दिल्ली: शाम 5:55 से 7:50, जब प्रदोष काल (सूर्यास्त 5:31) के भीतर स्थिर लग्न वृषभ उदित है।
  • निशीथ काल पूजा: सिंह लग्न, 8 नवंबर की रात 12:25 से 2:42, जिसे कुछ परिवार और मंदिर करते हैं।
  • समय: नीचे दी पूजा में लगभग 45 से 60 मिनट, फिर दीये जलाना।

दिवाली पूजन क्या है

कार्तिक अमावस्या की रात पूरे भारत में घर-घर समृद्धि, कृपा और कल्याण की देवी लक्ष्मी की पूजा होती है, साथ में विघ्नहर्ता गणेश की, जिनकी पूजा हमेशा सबसे पहले होती है। कई परिवार धन के रक्षक कुबेर (जिनका पूजन ख़ास तौर पर दो दिन पहले धनतेरस पर होता है) और सरस्वती की भी पूजा करते हैं, और व्यापारी नए बही-खाते (चोपड़ा पूजन) शुरू करते हैं।

पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है, अच्छा हो तो स्थिर लग्न में, क्योंकि परंपरा मानती है कि स्थिर लग्न में शुरू किया काम टिकता है। नीचे की विधि घर के लिए पूरी और सरल पूजा (पंचोपचार, पाँच उपचार) है जिसे कोई भी कर सकता है; पंडित जी की षोडशोपचार पूजा में सोलह चरण होते हैं और वह भी उतनी ही सही है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026, शहरवार

मुहूर्त प्रदोष काल (सूर्यास्त से 2 घंटे 24 मिनट) का वह भाग है जिसमें वृषभ लग्न उदित हो, रविवार, 8 नवंबर 2026 के लिए, भारतीय समय में।

शहरलक्ष्मी पूजा मुहूर्तप्रदोष कालवृषभ लग्न
नई दिल्ली17:55–19:5017:31–19:5517:55–19:50
मुंबई18:28–20:2618:02–20:2618:28–20:27
कोलकाता17:20–19:1916:55–19:1917:20–19:19
चेन्नई18:07–20:0417:40–20:0418:07–20:09
जयपुर18:03–20:0017:39–20:0318:03–20:00
लखनऊ17:43–19:3917:19–19:4317:43–19:39
चंडीगढ़17:52–19:4717:29–19:5317:52–19:47
बेंगलुरु18:18–20:1517:51–20:1518:18–20:20
हैदराबाद18:08–20:0517:41–20:0518:08–20:08
अहमदाबाद18:23–20:2117:58–20:2218:23–20:21
पटना17:28–19:2517:04–19:2817:28–19:25
इंदौर18:10–20:0817:45–20:0918:10–20:08

Sunyra इंजन से गणना (निरयण लाहिरी), वही तरीक़ा जो हमारे Lens के दिवाली पेजों में है; नई दिल्ली के अंक उसी से मिलते हैं। अगर इस समय में पूजा न हो सके, तो अमावस्या की शाम प्रदोष में कभी भी पूजा परंपरा से मान्य है।

पूजा सामग्री

  • चौकी पर लाल या पीला कपड़ा; लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र (सामने से देखने पर गणेश जी लक्ष्मी जी के बाईं ओर, यानी उनके दाहिने हाथ की ओर)।
  • जल भरा कलश (तांबे या पीतल का), नारियल, आम या पान के पाँच पत्ते, एक सिक्का और कलावा।
  • रोली, हल्दी, अक्षत, चंदन, फूल और मिल सके तो कमल, गणेश जी के लिए दूर्वा।
  • रात भर जलने वाला घी का बड़ा दीया, घर के लिए छोटे दीये, धूप, आरती के लिए कपूर।
  • नैवेद्य: खील-बताशे, मिठाई (गणेश जी के लिए लड्डू), फल, और पान-सुपारी।
  • लक्ष्मी जी के सामने रखने के लिए सिक्के, गहने या बही-खाता; आचमन के लिए जल की कटोरी और चम्मच।

पूजा से पहले

  1. दिन में घर साफ़ करें; दरवाज़े पर रंगोली बनाएँ और शाम को मुख्य द्वार खुला रखें।
  2. सूर्यास्त से पहले स्नान करके साफ़ या नए कपड़े पहनें। चौकी पूर्व या उत्तर की ओर रखें, कलश उसके दाहिनी ओर और बड़ा दीया भी दाहिनी ओर।
  3. परिवार देवताओं के सामने बैठे। घर के बड़े (या जिसे मंत्र आते हों) पूजा कराएँ; बाक़ी लोग दोहराएँ या हाथ जोड़कर साथ रहें।

मंत्र सहित पूजन विधि, क्रम से

हर चरण में उसका संस्कृत मंत्र, अंग्रेज़ी अक्षरों में, और उसका अर्थ दिया है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसका अर्थ अपने शब्दों में शांत मन से कहें: वह भी पूरी पूजा है।

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1 · पवित्रीकरण

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

Om apavitrah pavitro va sarvavastham gato'pi va,
yah smaret pundarikaksham sa bahyabhyantarah shuchih.

अर्थ: पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमल-नयन भगवान विष्णु का स्मरण करता है, वह भीतर-बाहर से शुद्ध हो जाता है। (हाथ में जल लेकर अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें।)

Meaning: Whether pure or impure, in whatever state one may be, whoever remembers the lotus-eyed Lord becomes pure within and without. (Sprinkle a little water on yourself and the puja items.)

2 · आचमन

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
ॐ हृषीकेशाय नमः॥

Om keshavaya namah. Om narayanaya namah. Om madhavaya namah.
Om hrishikeshaya namah.

अर्थ: केशव, नारायण और माधव को नमस्कार (हर नाम पर दाहिनी हथेली से थोड़ा जल पिएँ); हृषीकेश को नमस्कार (हाथ धो लें)।

Meaning: Salutations to Keshava, Narayana and Madhava (sip a little water from the right palm with each name); salutations to Hrishikesha (rinse the hand).

3 · संकल्प

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। अद्य कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे अमावस्यायां तिथौ
श्री महालक्ष्मी प्रीत्यर्थं गणेश महालक्ष्मी पूजनं करिष्ये॥

Om vishnur vishnur vishnuh. Adya kartika mase krishna pakshe amavasyayam tithau
shri mahalakshmi prityartham ganesha mahalakshmi pujanam karishye.

अर्थ: विष्णु का तीन बार स्मरण करके: आज कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या तिथि को, श्री महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए मैं गणेश और महालक्ष्मी का पूजन करूँगा/करूँगी। (हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर कहें, अपना नाम और गोत्र जोड़ सकते हैं, फिर जल धरती पर छोड़ दें।)

Meaning: Remembering Vishnu three times: today, in the month of Kartik, in the dark fortnight, on the Amavasya, to please Shri Mahalakshmi, I shall worship Ganesha and Mahalakshmi. (Hold water, rice and a flower; add your name and gotra if you wish, then let the water fall.)

4 · पहले गणेश पूजन

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ गं गणपतये नमः॥

Vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha,
nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada.
Om gam ganapataye namah.

अर्थ: हे घुमावदार सूँड़ और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सब कामों को सदा बिना विघ्न के पूरा करें। ॐ गं गणपति को नमस्कार। (गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और लड्डू चढ़ाएँ।)

Meaning: O Lord with the curved trunk and mighty form, radiant as a million suns, make all my work free of obstacles, always. Om, salutations to Ganapati. (Offer roli, rice, durva, flowers and a laddoo to Ganesha.)

5 · कलश पूजन

कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥

Kalashasya mukhe vishnuh kanthe rudrah samashritah,
mule tatra sthito brahma madhye matriganah smritah.

अर्थ: कलश के मुख में विष्णु, कंठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और मध्य में मातृगण वास करते हैं। (कलश पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।)

Meaning: In the mouth of the kalash dwells Vishnu, in its neck Rudra, at its base Brahma, and in its middle the Mothers. (Offer roli, rice and flowers to the kalash.)

6 · लक्ष्मी ध्यान और आवाहन

या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। आवाहयामि स्थापयामि॥

Ya sa padmasanastha vipulakatitati padmapatrayatakshi,
gambhiravartanabhih stanabharanamita shubhravastrottariya.
Om shrim mahalakshmyai namah. Avahayami sthapayami.

अर्थ: जो कमल के आसन पर विराजमान हैं, जिनकी आँखें कमल की पंखुड़ी जैसी लंबी हैं, जो गहरी नाभि वाली, मातृत्व से भरी और श्वेत वस्त्र ओढ़े हैं, उन महालक्ष्मी को नमस्कार; मैं आपका आवाहन करता/करती हूँ और यहाँ स्थापित करता/करती हूँ। (हाथ जोड़कर ध्यान करें, फिर मूर्ति पर फूल चढ़ाएँ।)

Meaning: She who sits on a lotus, with eyes long as lotus petals, a deep navel, full with motherhood, wrapped in white: salutations to Mahalakshmi; I invite you and seat you here. (Meditate with folded hands, then offer a flower to the image.)

7 · पंचोपचार पूजन

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। गन्धं समर्पयामि। पुष्पं समर्पयामि।
धूपम् आघ्रापयामि। दीपं दर्शयामि। नैवेद्यं निवेदयामि॥

Om shrim mahalakshmyai namah. Gandham samarpayami. Pushpam samarpayami.
Dhupam aghrapayami. Deepam darshayami. Naivedyam nivedayami.

अर्थ: महालक्ष्मी को नमस्कार। मैं चंदन-रोली अर्पित करता/करती हूँ, फूल अर्पित करता/करती हूँ, धूप दिखाता/दिखाती हूँ, दीपक दिखाता/दिखाती हूँ, और नैवेद्य (भोग) अर्पित करता/करती हूँ। (हर वाक्य के साथ वह चीज़ अर्पित करें।)

Meaning: Salutations to Mahalakshmi. I offer sandal paste, I offer flowers, I offer the fragrance of incense, I show the lamp, I offer food. (Offer each item as you say it.)

8 · लक्ष्मी गायत्री (11 या 108 बार)

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

Om mahalakshmyai cha vidmahe vishnupatnyai cha dhimahi,
tanno lakshmih prachodayat.

अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानें, विष्णु की पत्नी का ध्यान करें; वे लक्ष्मी हमें प्रेरणा और प्रकाश दें।

Meaning: May we know Mahalakshmi; may we meditate on the consort of Vishnu; may that Lakshmi inspire and guide us.

9 · कुबेर और बही-खाता पूजन

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

Om yakshaya kuberaya vaishravanaya dhanadhanyadhipataye,
dhanadhanya samriddhim me dehi dapaya svaha.

अर्थ: यक्षों के राजा, विश्रवा के पुत्र, धन और अन्न के स्वामी कुबेर को नमस्कार; मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें और दिलाएँ। (तिजोरी, सिक्कों या बही-खाते पर रोली से स्वस्तिक बनाकर अक्षत और फूल चढ़ाएँ।)

Meaning: To Kuber, lord of the yakshas, son of Vishrava, master of wealth and grain: grant me plenty of wealth and grain, and let it come to me. (Draw a swastika with roli on the safe, the coins or the account book and offer rice and a flower.)

10 · आरती

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

Karpuragauram karunavataram samsarasaram bhujagendraharam,
sada vasantam hridayaravinde bhavam bhavanisahitam namami.

अर्थ: कपूर जैसे उजले, करुणा के अवतार, संसार के सार, नागराज का हार पहनने वाले, जो सदा हृदय-कमल में बसते हैं, उन शिव को पार्वती सहित नमस्कार। (कपूर जलाकर पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की आरती गाएँ: “ॐ जय लक्ष्मी माता”।)

Meaning: Fair as camphor, compassion embodied, the essence of the world, wearing the king of serpents as a garland, ever dwelling in the lotus of the heart: I bow to Shiva together with Bhavani. (Light camphor and sing the aarti of Ganesha, then of Lakshmi, ‘Om Jai Lakshmi Mata’.)

11 · क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥

Avahanam na janami na janami visarjanam,
pujam chaiva na janami kshamasva parameshvari.

अर्थ: मैं न आवाहन जानता/जानती हूँ, न विसर्जन, न पूजा की पूरी विधि; हे परमेश्वरी, मेरी भूलों को क्षमा करें।

Meaning: I do not know how to invite you, nor how to bid you farewell, nor even how to worship you properly: forgive me, O Supreme Goddess.

आरती और चालीसा

कर्पूरगौरं (चरण 10) के बाद उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में जलते कपूर के साथ दो आरतियाँ गाई जाती हैं: पहले जय गणेश देवा, फिर ॐ जय लक्ष्मी माता। दोनों पेजों पर पूरे शब्द हिंदी और अंग्रेज़ी अक्षरों में, हर पद के अर्थ के साथ हैं, ताकि पूरा परिवार फ़ोन से देखकर साथ गा सके।

कई परिवार आरती से पहले, या रात में बड़े दीये के जलते रहते, लक्ष्मी चालीसा भी पढ़ते हैं। इसमें लगभग दस मिनट लगते हैं।

पूजा के बाद

  1. पूजा के दीये से और दीये जलाकर पूरे घर में रखें: दरवाज़ा, रसोई, तुलसी, खिड़कियाँ और छत।
  2. प्रसाद बाँटें: खील-बताशे और मिठाई, पहले परिवार को फिर पड़ोसियों को।
  3. कई परिवार बड़ा दीया रात भर जलाए रखते हैं और मूर्तियाँ अगली सुबह तक वहीं रहने देते हैं; अगले दिन कलश का जल पूरे घर में छिड़का जाता है।
  4. पटाख़े चाहें तो सावधानी से; दीयों से भरा शांत घर भी पूरी दिवाली है।

सवाल-जवाब

2026 में दिवाली लक्ष्मी पूजा कब है?

रविवार, 8 नवंबर 2026 को। अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक है और 8 नवंबर की शाम को रहेगी, इसलिए वही शाम दिवाली है।

2026 में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को शाम 5:55 से 7:50 (प्रदोष काल में वृषभ लग्न)। इस पेज की तालिका में ग्यारह और शहर हैं।

क्या बिना पंडित के लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?

हाँ। ज़्यादातर परिवार घर की पूजा ख़ुद करते हैं। इस पेज के चरण पूरे हैं; कोई मंत्र कठिन लगे तो उसका अर्थ श्रद्धा से अपने शब्दों में कहें।

दिवाली पर लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा क्यों होती है?

हर पूजा में सबसे पहले विघ्नहर्ता और सद्बुद्धि देने वाले गणेश जी की पूजा होती है; परंपरा धन (लक्ष्मी) को उसके सही उपयोग की बुद्धि (गणेश) के साथ जोड़ती है।

पाठ और स्रोत

तारीख़, मुहूर्त और हर समय Sunyra इंजन से निकाला गया है, और दिवाली के अगले दिन अपने-आप अगली दिवाली का हो जाता है; 2026 के लिए ये वही अंक हैं जो Sunyra Lens के दिवाली पेजों में हैं। मंत्र पारंपरिक, सार्वजनिक संस्कृत श्लोक हैं जो घर की पूजा में बोले जाते हैं (पवित्रीकरण और कलश के श्लोक, गणेश ध्यान, लक्ष्मी ध्यान, लक्ष्मी गायत्री, कुबेर मंत्र, कर्पूरगौरं और क्षमा प्रार्थना), दो पूजा-पद्धतियों से मिलाए गए; अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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