मंत्र · शिव

महामृत्युंजय मंत्र: अर्थ, शब्द-दर-शब्द, और जप की विधि

स्वास्थ्य, आरोग्य और भय से मुक्ति के लिए शिव की महान प्रार्थना। इसकी उपमा कोमल है: पका हुआ खीरा जो बेल से सहज ही अलग हो जाता है, पूरा और मुक्त।

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सुनें: महामृत्युंजय मंत्र

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

महामृत्युंजय मंत्र क्या है

महामृत्युंजय का अर्थ है “मृत्यु पर महान विजय”। यह मंत्र ऋग्वेद के सातवें मंडल के 59वें सूक्त का बारहवाँ मंत्र है, जिसे ऋषि वसिष्ठ से जोड़ा जाता है, और यह यजुर्वेद में भी आता है। यह त्र्यंबक, यानी “तीन नेत्रों वाले” शिव को संबोधित है।

इसके केंद्र में एक उपमा है। बेल पर लगा खीरा अपने डंठल से बँधा रहता है; पूरा पक जाने पर वह बिना टूटे, अपने आप अलग हो जाता है। प्रार्थना शिव से कहती है कि वैसे ही, सहज रूप से, हमें मृत्यु और भय के बंधन से छुड़ाएँ, पर अमृत (अमरता) से नहीं। परिवार इसका जप तब करते हैं जब कोई बीमार हो, ऑपरेशन या यात्रा से पहले, दुख के समय, और बस मन की शांति के लिए। यह शक्ति और शांति की प्रार्थना है, इलाज का विकल्प नहीं।

महामृत्युंजय मंत्र, अर्थ सहित

परंपरा से इसे लगातार तीन बार, या माला पर 108 बार जपा जाता है; ऑडियो में यह एक बार धीरे-धीरे है, ताकि आप उसके बाद दोहरा सकें।

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महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

Om tryambakam yajamahe sugandhim pushtivardhanam,
urvarukam iva bandhanan mrityor mukshiya mamritat.

अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंध से भरे हैं और सबका पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका खीरा अपनी बेल के बंधन से छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

Meaning: We worship the three-eyed one, fragrant, who makes all beings grow strong. As a ripe cucumber is freed from its vine, may he free us from death, and not from the deathless.

शब्द-दर-शब्द अर्थ

  • त्र्यम्बकम्: तीन नेत्रों वाले, शिव।
  • यजामहे: हम पूजा करते हैं, आराधना करते हैं।
  • सुगन्धिम्: सुगंधित; जिनकी अच्छाई सुगंध की तरह फैलती है।
  • पुष्टिवर्धनम्: जो पोषण और शक्ति बढ़ाते हैं।
  • उर्वारुकम् इव: खीरे (पकी ककड़ी) की तरह।
  • बन्धनात्: बंधन से, उस डंठल से जो उसे थामे है।
  • मृत्योः मुक्षीय: मैं मृत्यु से मुक्त हो जाऊँ।
  • मा अमृतात्: अमृत (अमरता, स्थायी जीवन) से नहीं।

जप कैसे करें, क्रम से

तीन बार में लगभग एक मिनट लगता है; 108 की माला में लगभग बीस मिनट।

  1. हाथ-मुँह धोकर शिव जी के चित्र या शिवलिंग के सामने, या बस पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके शांत बैठें।
  2. हो सके तो शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएँ, या एक दीया जलाएँ।
  3. अगर किसी और के लिए जप कर रहे हैं, तो एक पल उनका नाम लेकर उन्हें याद करें।
  4. मंत्र धीरे-धीरे 3, 11 या 108 बार जपें; 108 के लिए हो सके तो रुद्राक्ष की माला लें।
  5. अंत में एक पल चुपचाप बैठें।

सोमवार, प्रदोष और सावन का महीना शिव जी के पारंपरिक समय हैं, पर यह मंत्र जिस दिन ज़रूरत हो, उसी दिन जपा जाता है। कुछ परिवार पंडित जी के साथ कई दिनों में सवा लाख जप करवाते हैं; रोज़ के लिए दिल से किए कुछ जप काफ़ी हैं।

सवाल-जवाब

महामृत्युंजय मंत्र कब जपा जाता है?

कभी भी, ख़ास तौर पर बीमारी या स्वस्थ होने के समय, ऑपरेशन या यात्रा से पहले, दुख में, और सोमवार व सावन में। सुबह सबसे आम है।

क्या “मामृतात्” का अर्थ “अमरता से” है?

यह दो शब्द हैं, मा अमृतात्: “अमृत से नहीं”। प्रार्थना मृत्यु और भय से मुक्ति माँगती है, पर अमर, स्थायी जीवन से कभी नहीं।

क्या किसी और के लिए जप कर सकते हैं?

हाँ। परिवार अक्सर किसी बीमार व्यक्ति को मन में रखकर साथ मिलकर जप करते हैं। यह सही इलाज के साथ सहारे की प्रार्थना है, उसकी जगह कभी नहीं।

कितनी बार जप करें?

3, 11 या 108 बार। एक बार बहुत ज़्यादा से रोज़ थोड़ा-थोड़ा जप ज़्यादा मायने रखता है।

पाठ और स्रोत

पाठ: ऋग्वेद 7.59.12 (संस्कृत विकिस्रोत पर सायण भाष्य सहित ऋग्वेद से मिलाया गया) और वही मंत्र कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 1.8.6) और शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता 3.60) में। शुरू में ॐ आम चलन के अनुसार है; रोज़ के जप की तरह वैदिक स्वर-चिह्न नहीं दिए गए हैं। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ, शब्दार्थ और अनुवाद हमारे अपने हैं।

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