चालीसा · नर्मदा

श्री नर्मदा चालीसा: अर्थ सहित

मध्य भारत की पवित्र नदी माँ नर्मदा, जिन्हें रेवा भी कहते हैं, की चालीस चौपाइयाँ। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: नर्मदा चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

माँ नर्मदा कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

नर्मदा, जिन्हें रेवा भी कहते हैं, मध्य प्रदेश की मैकल पहाड़ियों में अमरकंटक से निकलती हैं और लगभग 1,300 किलोमीटर पश्चिम की ओर, मध्य प्रदेश और गुजरात से होकर, खंभात की खाड़ी तक बहती हैं। वे भारत की उन गिनी-चुनी बड़ी नदियों में हैं जो पश्चिम की ओर बहती हैं, और सात सबसे पवित्र नदियों में एक हैं। पुराण, ख़ास तौर पर स्कंद पुराण का रेवा खंड, बताते हैं कि उनका जन्म स्वयं शिव से हुआ, इसीलिए उन्हें शांकरी और सोमोद्भवा (“शिव से उत्पन्न”) कहते हैं, और इसीलिए उनकी तलहटी के चिकने पत्थर शिवलिंग (नर्मदेश्वर) के रूप में पूजे जाते हैं। उन्हें कमल पर बैठी, मकर (मगर) पर सवार एक युवा देवी के रूप में दिखाया जाता है।

पुराणों में मिलने वाली और इस चालीसा में दोहराई गई एक पुरानी कहावत पवित्र नदियों की तुलना करती है: यमुना सात दिनों में पवित्र करती हैं, सरस्वती तीन दिनों में, गंगा तुरंत, और नर्मदा केवल दर्शन से। तीर्थयात्री नर्मदा परिक्रमा से उनका सम्मान करते हैं, यानी उद्गम से समुद्र तक और वापस, दोनों किनारों पर पैदल यात्रा।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। नर्मदा चालीसा दो दोहों से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। इसमें माघ शुक्ल सप्तमी (जिसे नर्मदा जयंती के रूप में मनाते हैं) को अमरकंटक में उनके प्रकट होने की कथा, उनके रूप, मकर वाहन और अनगिनत तीर्थों का वर्णन, दूसरी पवित्र नदियों से तुलना, और अंत में एक सरल प्रार्थना है। किसी कवि का नाम नहीं है; यह चालीसा-संग्रहों और भक्ति वेबसाइटों पर बिना लेखक के नाम के छपती है। इसमें कही गई आशाएँ भक्ति के शब्द हैं, वादे नहीं।

कई परिवार इसे नर्मदा जयंती पर और नदी के किनारे पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री नर्मदा चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा।

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दोहा 1

देवि पूजित नर्मदा, महिमा बड़ी अपार।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥

Devi poojit Narmada, mahima badi apaar,
chaalisa varnan karat, kavi aru bhakt udaar.

अर्थ: देवी नर्मदा सबकी पूजनीय हैं, उनकी महिमा बहुत बड़ी और अपार है; उदार कवि और भक्त यह चालीसा गाकर उसका वर्णन करते हैं।

Meaning: Goddess Narmada is worshipped by all, and her glory is vast and boundless; generous poets and devotees describe it in this chalisa.

दोहा 2

इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान॥

Inki seva se sada, mitte paap mahaan,
tat par kar jap daan nar, paate hain nit gyaan.

अर्थ: इनकी सेवा से बड़े-बड़े पाप सदा मिट जाते हैं; इनके तट पर जप और दान करने वाले लोग नित ज्ञान पाते हैं।

Meaning: Serving her washes away even great wrongs; those who pray and give on her banks gain wisdom day by day.

चौपाई 1

जय जय जय नर्मदा भवानी।
तुम्हरी महिमा सब जग जानी॥

Jai jai jai Narmada Bhavaani,
tumhri mahima sab jag jaani.

अर्थ: जय हो, जय हो, जय हो, माँ नर्मदा भवानी; आपकी महिमा सारा संसार जानता है।

Meaning: Victory, victory, victory to Mother Narmada; the whole world knows your glory.

चौपाई 2

अमरकण्ठ से निकलीं माता।
सर्व सिद्धि नव निधि की दाता॥

Amarkanth se nikleen maata,
sarv siddhi nav nidhi ki daata.

अर्थ: हे माता, आप अमरकंटक से निकलती हैं, और सब सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाली हैं।

Meaning: Mother, you rise at Amarkantak, and you are the giver of every accomplishment and of the nine treasures.

चौपाई 3

कन्या रूप सकल गुण खानी।
जब प्रकटीं नर्मदा भवानी॥

Kanya roop sakal gun khaani,
jab prakteen Narmada Bhavaani.

अर्थ: जब माँ नर्मदा भवानी प्रकट हुईं, तो वे सब गुणों की खान, एक कन्या के रूप में थीं।

Meaning: When Mother Narmada appeared, she came as a young girl, a mine of every virtue.

चौपाई 4

सप्तमी सूर्य मकर रविवारा।
अश्वनि माघ मास अवतारा॥

Saptami Soorya makar Ravivaara,
Ashvani Maagh maas avataara.

अर्थ: आपका अवतार माघ मास की सप्तमी को हुआ, जब सूर्य मकर राशि में थे, दिन रविवार था और अश्विनी नक्षत्र था।

Meaning: You came down on the seventh lunar day of Magha, with the Sun in Capricorn, on a Sunday, under the star Ashvini.

चौपाई 5

वाहन मकर आपको साजैं।
कमल पुष्प पर आप विराजैं॥

Vaahan makar aapko saajain,
kamal pushp par aap viraajain.

अर्थ: मकर (मगर) आपका वाहन बनकर शोभा देता है, और आप कमल के फूल पर विराजती हैं।

Meaning: The makara, the river crocodile, is your graceful mount, and you are seated on a lotus flower.

चौपाई 6

ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं।
तब ही मनवांछित फल पावैं॥

Brahma Hari Har tumko dhyaavain,
tab hi manvaanchhit phal paavain.

अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु और शिव आपका ध्यान करते हैं, और तभी मनचाहा फल पाते हैं।

Meaning: Brahma, Vishnu and Shiva meditate on you, and so receive what their hearts desire.

चौपाई 7

दर्शन करत पाप कटि जाते।
कोटि भक्त गण नित्य नहाते॥

Darshan karat paap kati jaate,
koti bhakt gan nitya nahaate.

अर्थ: आपके दर्शन से पाप कट जाते हैं; करोड़ों भक्त रोज़ आपमें स्नान करते हैं।

Meaning: Just seeing you cuts away wrongdoing; millions of devotees bathe in you every day.

चौपाई 8

जो नर तुमको नित ही ध्यावै।
वह नर रुद्र लोक को जावैं॥

Jo nar tumko nit hi dhyaavai,
vah nar Rudra lok ko jaavain.

अर्थ: जो व्यक्ति रोज़ आपका ध्यान करता है, वह शिव के लोक को जाता है।

Meaning: Whoever meditates on you every day goes to the world of Shiva (Rudra).

चौपाई 9

मगरमच्छ तुम में सुख पावैं।
अन्तिम समय परमपद पावैं॥

Magarmachchh tum mein sukh paavain,
antim samay parampad paavain.

अर्थ: मगरमच्छ भी आपके जल में सुख से रहते हैं और अंत समय में परमपद पाते हैं।

Meaning: Even the crocodiles live happily in your waters, and at their end they reach the highest state.

चौपाई 10

मस्तक मुकुट सदा ही साजैं।
पांव पैंजनी नित ही राजैं॥

Mastak mukut sada hi saajain,
paanv painjani nit hi raajain.

अर्थ: आपके माथे पर सदा मुकुट शोभा देता है और पाँवों में पायल चमकती है।

Meaning: A crown always graces your brow, and anklets shine on your feet.

चौपाई 11

कल-कल ध्वनि करती हो माता।
पाप ताप हरती हो माता॥

Kal-kal dhvani karti ho maata,
paap taap harti ho maata.

अर्थ: हे माता, आप कल-कल की ध्वनि करती बहती हैं और पाप और दुख की जलन हर लेती हैं।

Meaning: Mother, you flow with a murmuring sound, and you take away wrongdoing and the burning of sorrow.

चौपाई 12

पूरब से पश्चिम की ओरा।
बहतीं माता नाचत मोरा॥

Poorab se pashchim ki ora,
bahteen maata naachat mora.

अर्थ: माता, आप पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं, और आपके किनारे मोर नाचते हैं।

Meaning: Mother, you flow from east to west, while peacocks dance along your banks.

चौपाई 13

शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं।
सूत आदि तुम्हरौ यश गावैं॥

Shaunak rishi tumhrau gun gaavain,
Soot aadi tumhrau yash gaavain.

अर्थ: शौनक ऋषि आपके गुण गाते हैं, और सूत जी आदि कथावाचक आपका यश गाते हैं।

Meaning: The sage Shaunaka sings your virtues, and Suta and the other storytellers sing your fame.

चौपाई 14

शिव गणेश भी तेरे गुण गावैं।
सकल देव गण तुमको ध्यावैं॥

Shiv Ganesh bhi tere gun gaavain,
sakal dev gan tumko dhyaavain.

अर्थ: शिव और गणेश भी आपके गुण गाते हैं, और सब देवता आपका ध्यान करते हैं।

Meaning: Shiva and Ganesha too sing your praises, and all the gods meditate on you.

चौपाई 15

कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे।
ये सब कहलाते दुःख हारे॥

Koti teerth Narmada kinaare,
ye sab kahlaate dukh haare.

अर्थ: नर्मदा के किनारे करोड़ों तीर्थ हैं, और ये सब दुख हरने वाले कहलाते हैं।

Meaning: Countless holy places line the Narmada's banks, and all of them are known as removers of sorrow.

चौपाई 16

मनोकामना पूरण करती।
सर्व दुःख माँ नित ही हरतीं॥

Manokaamna pooran karti,
sarv dukh maan nit hi harteen.

अर्थ: माँ मन की इच्छाएँ पूरी करती हैं और सदा सब दुख हरती हैं।

Meaning: The Mother fulfils the wishes of the heart and always takes away every sorrow.

चौपाई 17

कनखल में गंगा की महिमा।
कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा॥

Kankhal mein Ganga ki mahima,
Kurukshetra mein Saraswati mahima.

अर्थ: कनखल में गंगा की महिमा है, कुरुक्षेत्र में सरस्वती की महिमा,

Meaning: The Ganga is glorified at Kankhal, the Saraswati at Kurukshetra,

चौपाई 18

पर नर्मदा ग्राम जंगल में।
नित रहती माता मंगल में॥

Par Narmada graam jangal mein,
nit rahti maata mangal mein.

अर्थ: पर माँ नर्मदा गाँव हो या जंगल, हर जगह सदा मंगलमय रहती हैं।

Meaning: but Mother Narmada is holy everywhere, in village and forest alike, and is always a blessing.

चौपाई 19

एक बार करके असनाना।
तरत पीढ़ी है नर नाना॥

Ek baar karke asnaana,
tarat peedhi hai nar naana.

अर्थ: आपमें एक बार स्नान करके मनुष्य की अनेक पीढ़ियाँ तर जाती हैं।

Meaning: By bathing in you even once, a person carries many generations across to freedom.

चौपाई 20

मेकल कन्या तुम ही रेवा।
तुम्हरी भजन करें नित देवा॥

Mekal kanya tum hi Reva,
tumhri bhajan karen nit deva.

अर्थ: आप ही मेकल पर्वत की पुत्री, रेवा हैं; देवता सदा आपके भजन करते हैं।

Meaning: You are Reva, daughter of the Mekal hills; the gods sing your praises every day.

चौपाई 21

जटा शंकरी नाम तुम्हारा।
तुमने कोटि जनों को तारा॥

Jata Shankari naam tumhaara,
tumne koti janon ko taara.

अर्थ: आपका एक नाम जटाशंकरी है, यानी शिव की जटाओं से निकली; आपने करोड़ों लोगों को पार लगाया है।

Meaning: One of your names is Jatashankari, she who flows from Shiva's locks; you have carried millions across.

चौपाई 22

समोद्भवा नर्मदा तुम हो।
पाप मोचनी रेवा तुम हो॥

Samodbhava Narmada tum ho,
paap mochani Reva tum ho.

अर्थ: आप सोमोद्भवा, यानी शिव से उत्पन्न नर्मदा हैं; आप पापों से छुड़ाने वाली रेवा हैं।

Meaning: You are Narmada, “born of Shiva” (Somodbhava); you are Reva, who frees from wrongdoing.

चौपाई 23

तुम महिमा कहि नहिं जाई।
करत न बनती मातु बड़ाई॥

Tum mahima kahi nahin jaai,
karat na banti maatu badaai.

अर्थ: आपकी महिमा कही नहीं जा सकती; माँ, आपकी बड़ाई करते नहीं बनती।

Meaning: Your glory cannot be told; Mother, no praise is equal to you.

चौपाई 24

जल प्रताप तुममें अति माता।
जो रमणीय तथा सुख दाता॥

Jal prataap tum mein ati maata,
jo ramaneey tatha sukh daata.

अर्थ: माता, आपके जल में बड़ी शक्ति है, जो मनोहर भी है और सुख देने वाली भी।

Meaning: Mother, great power lives in your waters, lovely to see and a giver of joy.

चौपाई 25

चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी।
महिमा अति अपार है तुम्हारी॥

Chaal sarpini sam hai tumhaari,
mahima ati apaar hai tumhaari.

अर्थ: आपकी चाल नागिन जैसी बलखाती है, और आपकी महिमा अत्यंत अपार है।

Meaning: You wind along like a serpent, and your glory is beyond all measure.

चौपाई 26

तुम में पड़ी अस्थि भी भारी।
छुवत पाषाण होत वर वारी॥

Tum mein padi asthi bhi bhaari,
chhuvat paashaan hot var vaari.

अर्थ: आपमें पड़ी भारी हड्डी भी, आपके श्रेष्ठ जल को छूते ही पत्थर बन जाती है।

Meaning: Even a heavy bone that falls into you turns to stone at the touch of your blessed water.

चौपाई 27

यमुना में जो मनुज नहाता।
सात दिनों में वह फल पाता॥

Yamuna mein jo manuj nahaata,
saat dinon mein vah phal paata.

अर्थ: जो मनुष्य यमुना में नहाता है, वह सात दिनों में पुण्य का फल पाता है;

Meaning: Whoever bathes in the Yamuna receives its blessing in seven days;

चौपाई 28

सरसुति तीन दिनों में देतीं।
गंगा तुरत बाद ही देतीं॥

Sarasuti teen dinon mein deteen,
Ganga turat baad hi deteen.

अर्थ: सरस्वती तीन दिनों में फल देती हैं, और गंगा स्नान के तुरंत बाद;

Meaning: the Saraswati gives it in three days, and the Ganga right after the bath;

चौपाई 29

पर रेवा का दर्शन करके।
मानव फल पाता मन भर के॥

Par Reva ka darshan karke,
maanav phal paata man bhar ke.

अर्थ: पर रेवा (नर्मदा) के तो दर्शन मात्र से मनुष्य मन भरकर फल पाता है।

Meaning: but simply by seeing Reva, a person receives the blessing in full.

चौपाई 30

तुम्हरी महिमा है अति भारी।
जिसको गाते हैं नर-नारी॥

Tumhri mahima hai ati bhaari,
jisko gaate hain nar-naari.

अर्थ: आपकी महिमा बहुत बड़ी है, जिसे सब स्त्री-पुरुष गाते हैं।

Meaning: Your glory is very great, and men and women everywhere sing it.

चौपाई 31

जो नर तुम में नित्य नहाता।
रुद्र लोक में पूजा जाता॥

Jo nar tum mein nitya nahaata,
Rudra lok mein pooja jaata.

अर्थ: जो व्यक्ति रोज़ आपमें स्नान करता है, वह शिव के लोक में सम्मान पाता है।

Meaning: Whoever bathes in you every day is honoured in the world of Shiva.

चौपाई 32

जड़ी बूटियां तट पर राजें।
मोहक दृश्य सदा ही साजें॥

Jadi bootiyaan tat par raajen,
mohak drishya sada hi saajen.

अर्थ: आपके तट पर जड़ी-बूटियाँ उगती हैं, और वहाँ सदा मनमोहक दृश्य सजे रहते हैं।

Meaning: Healing herbs grow along your banks, and the views there are always enchanting.

चौपाई 33

वायु सुगन्धित चलती तीरा।
जो हरती नर तन की पीरा॥

Vaayu sugandhit chalti teera,
jo harti nar tan ki peera.

अर्थ: आपके किनारे सुगंधित हवा चलती है, जो शरीर की थकान और पीड़ा हर लेती है।

Meaning: A fragrant breeze blows along your shore and eases the body's aches.

चौपाई 34

घाट-घाट की महिमा भारी।
कवि भी गा नहिं सकते सारी॥

Ghaat-ghaat ki mahima bhaari,
kavi bhi ga nahin sakte saari.

अर्थ: आपके हर घाट की महिमा बड़ी है; कवि भी उसे पूरी नहीं गा सकते।

Meaning: Every one of your ghats has its own great glory; even poets cannot sing it all.

चौपाई 35

नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा।
और सहारा नहीं मम दूजा॥

Nahin jaanoon main tumhri pooja,
aur sahaara nahin mam dooja.

अर्थ: मैं आपकी पूजा की विधि नहीं जानता, फिर भी मेरा आपके सिवा और कोई सहारा नहीं है।

Meaning: I do not know how to worship you, yet I have no other support but you.

चौपाई 36

हो प्रसन्न ऊपर मम माता।
तुम ही मातु मोक्ष की दाता॥

Ho prasann oopar mam maata,
tum hi maatu moksh ki daata.

अर्थ: माता, मुझ पर प्रसन्न हों; हे माँ, आप ही मोक्ष देने वाली हैं।

Meaning: Mother, be pleased with me; you alone are the giver of liberation.

चौपाई 37

जो मानव यह नित है पढ़ता।
उसका मान सदा ही बढ़ता॥

Jo maanav yah nit hai padhta,
uska maan sada hi badhta.

अर्थ: जो मनुष्य इसे रोज़ पढ़ता है, उसका मान सदा बढ़ता है।

Meaning: Whoever reads this every day grows always in honour.

चौपाई 38

जो शत बार इसे है गाता।
वह विद्या धन दौलत पाता॥

Jo shat baar ise hai gaata,
vah vidya dhan daulat paata.

अर्थ: जो इसे सौ बार गाता है, वह विद्या और धन-दौलत पाता है।

Meaning: Whoever sings it a hundred times receives learning and wealth.

चौपाई 39

अगणित बार पढ़ै जो कोई।
पूरण मनोकामना होई॥

Aganit baar padhai jo koi,
pooran manokaamna hoi.

अर्थ: जो इसे अनगिनत बार पढ़ता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।

Meaning: Whoever reads it countless times sees the heart's wish fulfilled.

चौपाई 40

सबके उर में बसत नर्मदा।
यहां वहां सर्वत्र नर्मदा॥

Sabke ur mein basat Narmada,
yahaan vahaan sarvatra Narmada.

अर्थ: नर्मदा सबके हृदय में बसती हैं; यहाँ-वहाँ, हर जगह नर्मदा हैं।

Meaning: Narmada lives in every heart; here, there and everywhere is Narmada.

अंतिम दोहा 1

भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप।
माता जी की कृपा से, दूर होत सन्ताप॥

Bhakti bhaav ur aani ke, jo karta hai jaap,
maata ji ki kripa se, door hot santaap.

अर्थ: जो मन में भक्ति भाव लाकर जप करता है, माता जी की कृपा से उसके दुख दूर होते हैं।

Meaning: Whoever prays with devotion in the heart finds sorrow lifted by the Mother's grace.

सवाल-जवाब

नर्मदा चालीसा किसने लिखी?

पाठ में या हमें मिले किसी भी संस्करण में किसी कवि का नाम नहीं है। यह पारंपरिक भक्ति स्तुति है, जो हरिद्वार के रणधीर प्रकाशन जैसे चालीसा-संग्रहों और भक्ति वेबसाइटों पर बिना लेखक के नाम के छपती है।

नर्मदा को रेवा क्यों कहते हैं?

रेवा उस धातु से बना है जिसका अर्थ है “उछलना” या “तेज़ बहना”, क्योंकि यह नदी चट्टानों पर उछलती, प्रपातों में गिरती बहती है। नर्मदा का अर्थ आम तौर पर “आनंद देने वाली” बताया जाता है। चालीसा दोनों नाम लेती है, और उन्हें मेकल पर्वत की पुत्री भी कहती है, जहाँ से वे निकलती हैं।

नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या है?

नर्मदा की तलहटी का चिकना, अंडाकार पत्थर, जिसे नदी ने अपने आप आकार दिया है। परंपरा मानती है कि नर्मदा शिव से उत्पन्न हुईं, इसलिए ये पत्थर बिना किसी और प्राण-प्रतिष्ठा के शिवलिंग के रूप में पूजे जाते हैं; चालीसा की वह पंक्ति, जिसमें उनके जल में हड्डी पत्थर बन जाती है, नदी की शक्ति में इसी विश्वास को दिखाती है।

यमुना, सरस्वती और गंगा वाली चौपाई का क्या अर्थ है?

यह पवित्र नदियों के बारे में एक प्रसिद्ध पौराणिक कथन दोहराती है: यमुना में स्नान सात दिनों में पवित्र करता है, सरस्वती में तीन दिनों में, गंगा में तुरंत, और नर्मदा केवल दर्शन से। यह उनकी महिमा गाने का तरीक़ा है, दूसरी नदियों को छोटा बताना नहीं।

पाठ और स्रोत

पाठ को तीन स्वतंत्र प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: रणधीर प्रकाशन के चालीसा-संग्रह (हरिद्वार; आरती चालीसा संग्रह, 2000, और 51 चालीसा संग्रह, 2004, archive.org पर स्कैन), आज तक (aajtak.in) और भक्ति भारत (bhaktibharat.com; इंस्टाएस्ट्रो का पाठ उसी की प्रति है, इसलिए अलग नहीं गिना)। सबमें वही दो आरंभिक दोहे, उसी क्रम में चालीस चौपाइयाँ और एक अंतिम दोहा है; किसी कवि या तिथि का नाम नहीं है। 2000 की छपाई में चौपाई 2 से 4 (अमरकंटक में प्रकट होना) नहीं हैं, जो 2004 की छपाई और दोनों दूसरे स्रोतों में हैं।

पाठभेद: पहला दोहा पूजित (आज तक, भक्ति भारत; छपी प्रति में पूजिता); चौ. 2 निकलीं (भक्ति भारत निकली); चौ. 4 सूर्य (भक्ति भारत में छपाई की भूल सुर्य) और अश्वनि, यानी अश्विनी नक्षत्र; चौ. 9 मगरमच्छ (भक्ति भारत मगरमच्छा); चौ. 14 गावैं (भक्ति भारत गवैं); चौ. 17 सरस्वती (छपी प्रति में सरसुति); चौ. 19 करके असनाना (छपी प्रति, आज तक; भक्ति भारत कर के स्नाना) और छपी प्रति का नर नाना, “अनेक पीढ़ियाँ”, जहाँ आज तक और भक्ति भारत में नर नारा है, जिसका स्पष्ट अर्थ नहीं बनता; चौ. 20 तुम्हरी भजन (छपी प्रति तुम्ही); चौ. 21 कोटि जनों को तारा (भक्ति भारत में है जुड़ा); चौ. 22 सब स्रोतों में समोद्भवा, जिसे सोमोद्भवा, “शिव से उत्पन्न”, पढ़ा गया; चौ. 23 तुम महिमा कहि नहिं जाई (छपी प्रति, आज तक; भक्ति भारत तुम्हरी … नहीं); चौ. 26 वर वारी (भक्ति भारत वारि), जिसका अर्थ सावधानी से “आपका श्रेष्ठ जल” किया गया; चौ. 28 सरसुति तीन दिनों में देतीं (छपी प्रति, आज तक; भक्ति भारत सरस्वती … दीनों … देती)। वर्तनी के छोटे अंतर (राजें/राजैं, यहां/यहाँ) नहीं गिनाए। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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