आरती · गंगा
ॐ जय गंगे माता: गंगा जी की आरती अर्थ सहित
गंगा माता की आरती, उस नदी की जिसे देवी के रूप में पूजा जाता है: पाँच छोटे पद जो हरिद्वार और वाराणसी के घाटों पर और गंगा दशहरा पर घरों में गाए जाते हैं, हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और सरल अर्थ के साथ।
सुनें: गंगा जी की आरती: ॐ जय गंगे माता
ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।
यह आरती क्या है
गंगा को माँ और देवी के रूप में पूजा जाता है। पुरानी कथा में राजा भगीरथ अपने पूर्वजों, राजा सगर के साठ हज़ार पुत्रों, की मुक्ति के लिए उन्हें स्वर्ग से धरती पर लाए; उनके वेग को थामने के लिए शिव जी ने उन्हें अपनी जटाओं में लिया। “ॐ जय गंगे माता” वह छोटी हिंदी आरती है जो ज़्यादातर परिवार जानते हैं, और इसका दूसरा पद इसी कथा की याद दिलाता है।
यह अज्ञात रचयिता की पारंपरिक रचना है, जो “ॐ जय जगदीश हरे” की धुन में गाई जाती है। घाटों की प्रसिद्ध शाम की गंगा आरती में बड़े दीप और कई गीत होते हैं; यह आरती कहीं भी, छोटे दीये और थोड़े गंगाजल के साथ गाई जा सकती है। एक बार पूरी गाने में लगभग तीन मिनट लगते हैं।
कब गाई जाती है
- गंगा दशहरा (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी), जिस दिन गंगा का धरती पर आना माना जाता है, और गंगा सप्तमी।
- शाम को घाटों पर: हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी और प्रयागराज में, और पवित्र स्नान के बाद।
- कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या, बड़े स्नान के दिन।
आरती कैसे करें, क्रम से
पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, और इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग पाँच मिनट में किया जा सकता है।
- हाथ-मुँह धोकर गंगा माँ (चित्र, या गंगाजल का छोटा पात्र) के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
- एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और मिठाई रखें।
- दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
- नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ। घरों में चलन है: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
- आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
- सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ। फिर प्रसाद बाँटें।
धुन और कुछ शब्द हर घर में थोड़े अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।
ॐ जय गंगे माता, अर्थ सहित
पहला पद टेक है: यह शुरू में गाया जाता है और हर पद के बाद दोहराया जाता है।
सवाल-जवाब
“ॐ जय गंगे माता” किसने लिखी?
रचयिता ज्ञात नहीं हैं। यह पारंपरिक लोक आरती है, जो पीढ़ियों से गाई जा रही है और कई आरती पुस्तकों में छपी है; सबके लिए है।
क्या यही आरती हर की पौड़ी और दशाश्वमेध घाट पर गाई जाती है?
घाटों की बड़ी शाम की आरती में गीतों और मंत्रों का अपना क्रम होता है (अक्सर “हर हर गंगे” के साथ), और हर घाट की अपनी परंपरा है। “ॐ जय गंगे माता” आम तौर पर उसमें शामिल होती है और घर पर गाने में सबसे आसान है।
क्या गंगा जी की और आरतियाँ भी हैं?
हाँ। गीता प्रेस के “आरती संग्रह” में “जय गंगा मैया, माँ जय सुरसरि मैया” और तुलसीदास जी के दो पद (“जय जय भगीरथनंदिनि…”) हैं। कुछ लोग शुरू में संस्कृत श्लोक “नमामि गंगे तव पाद पंकजम्” भी गाते हैं।
पाठ और स्रोत
पाठ अज्ञात रचयिता की पारंपरिक आरती है, सार्वजनिक। हर पंक्ति भक्ति भारत, भारत डिस्कवरी और द्रिक पंचांग से मिलाई गई। हमने वह पाठ लिया है जो भक्ति भारत और भारत डिस्कवरी में एक जैसा है, मानक वर्तनी के साथ (“पड़े”, “शरणागति”, “मुक्ति”)। द्रिक पंचांग में टेक “मैया जय गंगे माता” है, “जोत” की जगह “ज्योति”, “कृपा दृष्टि हो तुम्हारी”, पद 3 में “एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता” और पद 4 में “आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता; सेवक वही सहज में” है। भक्ति भारत शुरू में संस्कृत श्लोक “नमामि गंगे” और “हर हर गंगे” देता है, जिन्हें हमने नहीं लिया। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।
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