चालीसा · शीतला माता

श्री शीतला माता चालीसा: अर्थ सहित

शीतला माता की स्तुति, वह शीतल माँ जिन्हें उत्तर भारत में बच्चों की रक्षक के रूप में पूजा जाता है। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: शीतला माता चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

शीतला माता कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

शीतला (“ठंडी, शीतल करने वाली”) वे माँ हैं जिनकी पूजा उत्तर और पश्चिम भारत, बंगाल और नेपाल के गाँव-कस्बों में होती है। उन्हें गधे पर सवार, हाथ में झाड़ू, सूप और ठंडे जल का कलश लिए दिखाया जाता है: एक साफ़-सुथरे घर के औज़ार। सदियों से परिवार तब उनकी शरण में जाते रहे हैं जब किसी बच्चे को बुख़ार या चेचक हो, इस प्रार्थना के साथ कि तपन शांत हो जाए; स्कंद पुराण में उनकी एक छोटी स्तुति है, और उनका सबसे प्रसिद्ध पर्व शीतला अष्टमी (बसौड़ा) है, जब चूल्हा नहीं जलता और एक दिन पहले बना भोजन खाया जाता है।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। शीतला चालीसा दो दोहों से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। इसमें माँ की शीतल आभा की स्तुति है, यह कथा है कि उन्होंने बच्चों में रोग फैलाने वाले विस्फोटक नाम के दैत्य को कैसे हराया, और उनके लोक-नाम और उनके वाहन गधे के पाँच नाम हैं। कवि अपना नाम रामसुंदर बताते हैं, जो प्रयाग के पास गंगा तट पर रहते थे; यही नाम गणेश और शनि चालीसा में भी आता है।

बहुत-सी लोक-स्तुतियों की तरह यह चालीसा भी आस्था की भाषा में आरोग्य की बात करती है। इसके शब्द भक्ति हैं, चिकित्सा की सलाह नहीं: परंपरा शीतला पूजा को स्वच्छता और देखभाल से जोड़ती है, और प्रार्थना डॉक्टर के इलाज के साथ चलती है, उसकी जगह कभी नहीं। कई परिवार इसे शीतला अष्टमी के आसपास पढ़ते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

शीतला माता चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा।

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दोहा 1

जय जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान।
होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बल ज्ञान॥

Jai jai Mata Sheetla, tumahin dharai jo dhyaan,
hoy vimal sheetal hriday, vikasai buddhi bal gyaan.

अर्थ: जय हो, जय हो माता शीतला! जो आपका ध्यान करता है, उसका हृदय निर्मल और शांत हो जाता है, और उसकी बुद्धि, बल और ज्ञान खिल उठते हैं।

Meaning: Victory, victory to Mother Sheetla! Whoever keeps you in mind finds the heart grow clear and cool, and good sense, strength and knowledge blossom.

दोहा 2

घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार।
शीतल छइयाँ में झुलई, मइयाँ पलना डार॥

Ghat-ghat vaasi Sheetla, sheetal prabha tumhaar,
sheetal chhaiyaan mein jhulai, maiyaan palna daar.

अर्थ: हे शीतला, आप हर प्राणी के भीतर बसती हैं, और आपकी आभा शीतल है। माँ, अपनी ठंडी छाया में पालना डालकर हमें झुलाइए।

Meaning: Sheetla, you live within every heart, and your radiance is cool. Mother, hang a cradle in your cool shade and rock us in it.

चौपाई 1

जय जय जय श्री शीतला भवानी।
जय जग जननि सकल गुणखानी॥

Jai jai jai Shri Sheetla Bhavaani,
jai jag janani sakal gunkhaani.

अर्थ: जय हो, जय हो, जय हो श्री शीतला भवानी! जय हो जगत की माँ, जो सब गुणों की खान हैं।

Meaning: Victory, victory, victory to Shri Sheetla Bhavani! Victory to the Mother of the world, the mine of every virtue.

चौपाई 2

गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित।
पूरण शरदचंद्र सम साजित॥

Grih-grih shakti tumhaari raajit,
pooran sharad-chandra sam saajit.

अर्थ: घर-घर में आपकी शक्ति विराजती है, शरद ऋतु के पूरे चाँद जैसी शोभा लिए।

Meaning: Your power dwells in every home, lovely as the full Moon of autumn.

चौपाई 3

विस्फोटक से जलत शरीरा।
शीतल करत हरत सब पीरा॥

Visphotak se jalat shareera,
sheetal karat harat sab peera.

अर्थ: जब शरीर फुंसियों और फफोलों की जलन से तपता है, आप उसे शीतल करके सारी पीड़ा हर लेती हैं।

Meaning: When the body burns with blisters and eruptions, you cool it and take away all the pain.

चौपाई 4

मातु शीतला तव शुभनामा।
सबके गाढ़े आवहिं कामा॥

Maatu Sheetla tav shubh naama,
sabke gaadhe aavahin kaama.

अर्थ: हे माँ शीतला, आपका शुभ नाम सबके कठिन समय में काम आता है।

Meaning: Mother Sheetla, your blessed name comes to everyone's help in hard times.

चौपाई 5

शोकहरी शंकरी भवानी।
बाल-प्राणरक्षी सुखदानी॥

Shokahari Shankari Bhavaani,
baal-praan-rakshi sukhdaani.

अर्थ: आप शोक हरने वाली, कल्याण करने वाली भवानी हैं, बच्चों के प्राणों की रक्षक और सुख देने वाली।

Meaning: You are Bhavani who takes away grief and brings good, protector of children's lives and giver of happiness.

चौपाई 6

शुचि मार्जनी कलश कर राजै।
मस्तक तेज सूर्य सम साजै॥

Shuchi maarjani kalash kar raajai,
mastak tej soorya sam saajai.

अर्थ: आपके हाथों में पवित्र झाड़ू और कलश शोभा देते हैं, और माथे पर सूर्य जैसा तेज चमकता है।

Meaning: A pure broom and a water pot shine in your hands, and a radiance like the Sun glows on your brow.

चौपाई 7

चौसठ योगिन संग में गावैं।
वीणा ताल मृदंग बजावैं॥

Chausath yogin sang mein gaavain,
veena taal mridang bajaavain.

अर्थ: चौंसठ योगिनियाँ आपके साथ गाती हैं, और वीणा, करताल और मृदंग बजाती हैं।

Meaning: The sixty-four yoginis sing with you and play the veena, cymbals and drum.

चौपाई 8

नृत्य नाथ भैरों दिखरावैं।
सहज शेष शिव पार न पावैं॥

Nritya naath Bhairon dikharaavain,
sahaj Shesh Shiv paar na paavain.

अर्थ: स्वामी भैरव आपके आगे नृत्य दिखाते हैं; शेषनाग और शिव भी सहज ही आपकी महिमा का पार नहीं पाते।

Meaning: Lord Bhairava dances before you; even Shesha and Shiva cannot reach the end of your glory.

चौपाई 9

धन्य धन्य धात्री महारानी।
सुर नर मुनि तब सुयश बखानी॥

Dhanya dhanya Dhaatri Mahaaraani,
sur nar muni tab suyash bakhaani.

अर्थ: धन्य हैं, धन्य हैं आप, सबको धारण करने वाली महारानी; देवता, मनुष्य और मुनि आपका यश गाते हैं।

Meaning: Blessed, blessed are you, great queen who sustains all; gods, people and sages sing your praise.

चौपाई 10

ज्वाला रूप महा बलकारी।
दैत्य एक विस्फोटक भारी॥

Jwaala roop maha balkaari,
daitya ek Visphotak bhaari.

अर्थ: एक बार विस्फोटक नाम का एक बड़ा दैत्य था, जलती ज्वाला जैसा और बहुत बलवान।

Meaning: Once there was a mighty demon called Visphotak (“eruption”), fierce as a flame and very strong.

चौपाई 11

घर-घर प्रविशत कोई न रक्षत।
रोग रूप धरि बालक भक्षत॥

Ghar-ghar pravishat koi na rakshat,
rog roop dhari baalak bhakshat.

अर्थ: वह घर-घर में घुस जाता, कोई बचा नहीं पाता था; रोग का रूप धरकर वह बच्चों को खा जाता था।

Meaning: He entered house after house and no one could stop him; taking the form of disease, he devoured children.

चौपाई 12

हाहाकार मच्यो जग भारी।
सक्यो न जब संकट टारी॥

Haahaakaar machyo jag bhaari,
sakyo na jab sankat taari.

अर्थ: सारे जगत में भारी हाहाकार मच गया, जब कोई उस संकट को टाल न सका।

Meaning: A great cry of distress rose across the world, for no one could turn that danger away.

चौपाई 13

तब मैया धरि अद्भुत रूपा।
कर में लिये मार्जनी सूपा॥

Tab maiya dhari adbhut roopa,
kar mein liye maarjani soopa.

अर्थ: तब माँ ने अद्भुत रूप धारण किया, हाथ में झाड़ू और सूप लेकर।

Meaning: Then the Mother took a wondrous form, a broom and a winnowing basket in her hands.

चौपाई 14

विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्ह्यो।
मुसल प्रहार बहुविधि कीन्ह्यो॥

Visphotakahin pakadi kar leenhyo,
musal prahaar bahuvidhi keenhyo.

अर्थ: उन्होंने विस्फोटक को हाथ से पकड़ लिया और मूसल से उस पर कई तरह से प्रहार किए।

Meaning: She seized Visphotak in her hand and struck him many times with a pestle.

चौपाई 15

बहुत प्रकार वह विनती कीन्हा।
मैया नहीं भल मैं कछु चीन्हा॥

Bahut prakaar vah vinati keenha,
maiya nahin bhal main kachhu cheenha.

अर्थ: उसने तरह-तरह से विनती की: “माँ, मैं आपको ठीक से पहचान नहीं पाया।”

Meaning: He pleaded in every way: “Mother, I did not truly know who you are.”

चौपाई 16

अब नहिं मातु काहु गृह जइहौं।
जहँ अपवित्र वही घर रहि हौं॥

Ab nahin maatu kaahu grih jaihaun,
jahan apavitra vahi ghar rahi haun.

अर्थ: “माँ, अब मैं किसी (शुद्ध) घर में नहीं जाऊँगा; जहाँ अपवित्रता होगी, बस उसी घर में रहूँगा।”

Meaning: “Mother, now I will enter no clean home; I will stay only where there is uncleanness.”

चौपाई 17

भभकत तन शीतल ह्वै जइहैं।
विस्फोटक भय घोर नसइहैं॥

Bhabhakat tan sheetal hvai jaihain,
visphotak bhay ghor nasaihain.

अर्थ: तब तपते शरीर शीतल हो जाएँगे, और फफोलों का घोर भय मिट जाएगा।

Meaning: Then burning bodies will grow cool, and the terrible fear of eruptions will vanish.

चौपाई 18

श्री शीतलहिं भजे कल्याना।
वचन सत्य भाषे भगवाना॥

Shri Sheetlahin bhaje kalyaana,
vachan satya bhaashe Bhagavaana.

अर्थ: श्री शीतला को भजने में कल्याण है; भगवान ने यह सत्य वचन कहा है।

Meaning: There is good in worshipping Shri Sheetla; the Lord himself has spoken this true word.

चौपाई 19

पूजन पाठ मातु जब करि है।
भय आनँद सकल दुख हरि है॥

Poojan paath maatu jab kari hai,
bhay aanand sakal dukh hari hai.

अर्थ: जब कोई माँ की पूजा और पाठ करता है, तो भय आनंद में बदल जाता है और माँ सारे दुख हर लेती हैं।

Meaning: When one worships the Mother and recites her praise, fear turns to joy and she takes away every sorrow.

चौपाई 20

विस्फोटक भय जिहि गृह भाई।
भजै देवि कहँ यही उपाई॥

Visphotak bhay jihi grih bhaai,
bhajai devi kahan yahi upaai.

अर्थ: हे भाई, जिस घर में इस रोग का भय हो, वहाँ देवी का भजन ही (भक्त का) सहारा है।

Meaning: Brother, in a home where this illness is feared, singing to the goddess is the devotee's refuge.

चौपाई 21

कलश शीतला का सजवावै।
द्विज से विधिवत पाठ करावै॥

Kalash Sheetla ka sajvaavai,
dvij se vidhivat paath karaavai.

अर्थ: (परंपरा कहती है:) शीतला का कलश सजवाए और किसी विद्वान ब्राह्मण से विधि से पाठ करवाए।

Meaning: (Tradition says:) have Sheetla's water pot dressed and a learned priest recite her praise in the proper way.

चौपाई 22

तुम्हीं शीतला जग की माता।
तुम्हीं पिता जग की सुखदाता॥

Tumhin Sheetla jag ki maata,
tumhin pita jag ki sukhdaata.

अर्थ: हे शीतला, आप ही जगत की माता हैं, आप ही पिता, आप ही जगत को सुख देने वाली।

Meaning: Sheetla, you alone are the mother of the world, you its father, you the giver of its happiness.

चौपाई 23

तुम्हीं जगद्धात्री सुखसेवी।
नमो नमामि शीतले देवी॥

Tumhin Jagaddhaatri sukhsevi,
namo namaami Sheetle Devi.

अर्थ: आप ही जगत को धारण करने वाली और सुख देने वाली हैं; हे देवी शीतला, आपको बार-बार प्रणाम।

Meaning: You alone hold up the world and serve its happiness; again and again I bow to you, Goddess Sheetla.

चौपाई 24

नमो सुखकरणी दुखहरणी।
नमो नमो जगतारणि धरणी॥

Namo sukhkarani dukhharani,
namo namo jagataarani dharani.

अर्थ: सुख देने वाली, दुख हरने वाली, आपको प्रणाम; जगत को पार लगाने वाली और धारण करने वाली, आपको प्रणाम।

Meaning: I bow to you who bring joy and remove sorrow; I bow to you who carry the world across and hold it up.

चौपाई 25

नमो नमो त्रैलोक्य वंदिनी।
दुख दारिद्रादिक निकंदिनी॥

Namo namo trailokya vandini,
dukh daaridraadik nikandini.

अर्थ: तीनों लोकों में वंदनीय, दुख और दरिद्रता को जड़ से मिटाने वाली, आपको प्रणाम।

Meaning: I bow to you, honoured in the three worlds, who uproot sorrow, poverty and every lack.

चौपाई 26

श्री शीतला शेढ़ला महला।
रुणली हृणनी मातु मंदला॥

Shri Sheetla, Shedhla, Mahla,
Runli, Hrinani, maatu Mandla.

अर्थ: श्री शीतला, शेढ़ला, महला, रुणली, हृणनी और माता मंदला: ये माँ के लोक-नाम हैं।

Meaning: Shri Sheetla, Shedhla, Mahla, Runli, Hrinani and Mother Mandla: these are the Mother's folk names.

चौपाई 27

हो तुम दिगम्बर तनुधारी।
शोभित पंचनाम असवारी॥

Ho tum digambar tanudhaari,
shobhit panchnaam asvaari.

अर्थ: आप दिशाओं को ही वस्त्र बनाकर रहती हैं, और पाँच नामों वाले वाहन पर शोभा पाती हैं।

Meaning: You wear only the open sky, and you ride gracefully on a mount with five names.

चौपाई 28

रासभ खर बैसाख सुनंदन।
गर्दभ दुर्वाकंद निकंदन॥

Raasabh, khar, Baisaakh-sunandan,
gardabh, durvaakand-nikandan.

अर्थ: वह वाहन है गधा, जिसके पाँच नाम हैं: रासभ, खर, वैशाखनंदन, गर्दभ, और दूब की जड़ें खाने वाला।

Meaning: That mount is the donkey, called by five names: rasabh, khar, Vaishakhnandan, gardabh, and the one who eats the roots of durva grass.

चौपाई 29

सुमिरत संग शीतला माई।
जाहि सकल दुख दूर पराई॥

Sumirat sang Sheetla maai,
jaahi sakal dukh door paraai.

अर्थ: माँ शीतला को साथ में याद करते ही सारे दुख दूर भाग जाते हैं।

Meaning: As soon as one remembers Mother Sheetla, every sorrow runs far away.

चौपाई 30

गलका गलगण्डादि जु होई।
ताकर मंत्र न औषधि कोई॥

Galka, galgandaadi ju hoi,
taakar mantra na aushadhi koi.

अर्थ: गले के रोग और गलगंड जैसी बीमारियाँ, जिनका (कवि के शब्दों में) कोई मंत्र या दवा नहीं,

Meaning: Throat ailments and swellings of the neck, which (in the poet's words) no mantra or medicine can touch,

चौपाई 31

एक मातु जी का आराधन।
और नहिं कोई है साधन॥

Ek maatu ji ka aaraadhan,
aur nahin koi hai saadhan.

अर्थ: उनके लिए (कवि कहते हैं) माँ की आराधना ही एक सहारा है, और कोई साधन नहीं।

Meaning: For these, the poet says, the Mother's worship is the one refuge; there is no other means.

चौपाई 32

निश्चय मातु शरण जो आवै।
निर्भय मन इच्छित फल पावै॥

Nishchay maatu sharan jo aavai,
nirbhay man ichchhit phal paavai.

अर्थ: जो विश्वास के साथ माँ की शरण में आता है, वह निडर होकर मनचाहा फल पाता है।

Meaning: Whoever comes to the Mother's shelter with firm faith grows fearless and receives what the heart desires.

चौपाई 33

कोढ़ी निर्मल काया धारै।
अंधा दृग निज दृष्टि निहारै॥

Kodhi nirmal kaaya dhaarai,
andha drig nij drishti nihaarai.

अर्थ: कोढ़ से पीड़ित को स्वच्छ शरीर मिलता है, और नेत्रहीन अपनी आँखों से देखने लगता है।

Meaning: One with a skin disease is given a clear body, and one without sight sees with their own eyes.

चौपाई 34

बंध्या नारि पुत्र को पावै।
जन्म दरिद्र धनी होइ जावै॥

Bandhya naari putra ko paavai,
janm daridra dhani hoi jaavai.

अर्थ: संतान की आस रखने वाली स्त्री को पुत्र मिलता है, और जन्म से निर्धन धनी हो जाता है।

Meaning: A woman longing for a child is blessed with a son, and one born poor becomes rich.

चौपाई 35

मातु शीतला के गुण गावत।
लखा मूक को छंद बनावत॥

Maatu Sheetla ke gun gaavat,
lakha mook ko chhand banaavat.

अर्थ: माँ शीतला के गुण गाते हुए गूँगा भी छंद रचते देखा गया है।

Meaning: Singing Mother Sheetla's virtues, even one who could not speak has been seen composing verse.

चौपाई 36

यामें कोई करै जनि शंका।
जग में मैया का ही डंका॥

Yaamen koi karai jani shanka,
jag mein maiya ka hi danka.

अर्थ: इसमें कोई शंका न करे; सारे जगत में माँ का ही डंका बजता है।

Meaning: Let no one doubt this; the Mother's drum sounds across the whole world.

चौपाई 37

भनत रामसुंदर प्रभुदासा।
तट प्रयाग से पूरब पासा॥

Bhanat Raamsundar prabhudaasa,
tat Prayaag se poorab paasa.

अर्थ: प्रभु के दास रामसुंदर यह कहते हैं, जो प्रयाग के तट से पूर्व की ओर पास ही रहते हैं।

Meaning: So says Ramsundar, servant of the Lord, who lives close by, to the east of the riverbank at Prayag.

चौपाई 38

ग्राम तिवारी पूर मम बासा।
ककरा गंगा तट दुर्वासा॥

Graam Tivaari Poor mam baasa,
Kakra Ganga tat Durvaasa.

अर्थ: मेरा निवास तिवारी पुर गाँव में है, ककरा के पास गंगा तट पर, जहाँ दुर्वासा ऋषि का आश्रम है।

Meaning: My home is the village of Tiwari Pur, by Kakra on the bank of the Ganga, where the sage Durvasa had his hermitage.

चौपाई 39

अब विलंब मैं तोहि पुकारत।
मातु कृपा कौ बाट निहारत॥

Ab vilamb main tohi pukaarat,
maatu kripa kau baat nihaarat.

अर्थ: माँ, देर हो रही है, मैं आपको पुकार रहा हूँ और आपकी कृपा की राह देख रहा हूँ।

Meaning: Mother, it is growing late; I call to you and watch the road for your grace.

चौपाई 40

पड़ा द्वार सब आस लगाई।
अब सुधि लेत शीतला माई॥

Pada dwaar sab aas lagaai,
ab sudhi let Sheetla maai.

अर्थ: सारी आशा लगाए मैं आपके द्वार पर पड़ा हूँ; माँ शीतला, अब मेरी सुध लीजिए।

Meaning: I lie at your door with all my hope in you; Mother Sheetla, now remember me.

अंतिम दोहा 1

यह चालीसा शीतला, पाठ करे जो कोय।
सपनेहु दुख व्यापे नहीं, नित सब मंगल होय॥

Yah chaalisa Sheetla, paath kare jo koy,
sapnehu dukh vyaape nahin, nit sab mangal hoy.

अर्थ: जो कोई शीतला चालीसा का पाठ करता है, उसे सपने में भी दुख नहीं छूता, और हर दिन सब मंगल होता है।

Meaning: Whoever recites this Sheetla Chalisa is untouched by sorrow even in dreams, and every day all is well.

सवाल-जवाब

शीतला चालीसा किसने लिखी?

कवि अंत के पास अपना नाम बताते हैं: रामसुंदर, प्रभु के दास, जो प्रयाग के पूर्व में गंगा तट पर ककरा के पास के गाँव के थे। उनके बारे में इससे ज़्यादा ज्ञात नहीं है; एक ऑनलाइन संस्करण में उनकी जगह “कमल” छपा है।

शीतला माता गधे पर सवार क्यों हैं और झाड़ू क्यों रखती हैं?

उनकी झाड़ू, सूप और ठंडे जल का कलश एक साफ़, शीतल घर के औज़ार हैं, और साधारण-सा गधा उनका वाहन है। चालीसा तो गधे के पाँच संस्कृत नाम भी गिनाती है: रासभ, खर, वैशाखनंदन, गर्दभ और “दूब की जड़ें खाने वाला”।

चालीसा में विस्फोटक दैत्य कौन है?

विस्फोटक का अर्थ है “फूटना”, यानी चेचक के फफोले। चालीसा इस रोग को एक दैत्य के रूप में दिखाती है जो घरों में घुसकर बच्चों को हानि पहुँचाता था, जब तक माँ ने उसे पकड़ नहीं लिया; तब उसने वचन दिया कि वह साफ़ घरों से दूर रहेगा। यह भक्ति की कथा है, और इसमें शीतला और स्वच्छता का पुराना पारंपरिक संबंध झलकता है।

क्या यह चालीसा रोग का इलाज है?

नहीं। कुछ चौपाइयाँ कवि की आस्था के शब्दों में आरोग्य की बात करती हैं, और बहुत-से परिवारों को उनसे सांत्वना मिलती है, पर प्रार्थना सही इलाज के साथ सहारा है, उसकी जगह कभी नहीं।

पाठ और स्रोत

पाठ को चार संस्करणों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: रणधीर प्रकाशन की छपी पुस्तक आरती चालीसा संग्रह (हरिद्वार, 2000; archive.org पर स्कैन), भक्ति भारत (bhaktibharat.com), द्रिक पंचांग (drikpanchang.com, पंक्ति-दर-पंक्ति जाँचा), और sanskritdocuments.org (भारत डिस्कवरी पर वही पाठ है)। छपी पुस्तक और भक्ति भारत काफ़ी मिलते हैं; द्रिक पंचांग एक अलग साक्षी है; sanskritdocuments का पाठ बहुत बिगड़ा हुआ है और केवल वहीं लिया गया जहाँ वह किसी और का समर्थन करता है।

पाठभेद: चौ. 3 पीरा (छपी पुस्तक; बाक़ी में पीड़ा); चौ. 5 बाल-प्राणरक्षी (छपी पुस्तक; भक्ति भारत में छपाई की भूल प्राणक्षरी); चौ. 8 दिखरावैं (छपी पुस्तक; कहीं दिखलावैं); चौ. 14 मुसल प्रहार (छपी पुस्तक; बाक़ी में प्रमाण); चौ. 15 चीन्हा (छपी पुस्तक; भक्ति भारत में कीन्हा दोहराया); चौ. 16 का दूसरा भाग भक्ति भारत और sanskritdocuments के अनुसार, क्योंकि छपी पुस्तक में यहाँ पाठ बिगड़ा है; चौ. 17 भभकत तन शीतल ह्वै जइहैं (छपी पुस्तक और द्रिक पंचांग; भक्ति भारत में अब भगतन शीतल भय जइहौं); चौ. 19 (पूजन पाठ मातु…) भक्ति भारत और sanskritdocuments में है, द्रिक पंचांग में नहीं; चौ. 24 धरणी (छपी पुस्तक में तरणी); चौ. 25 त्रैलोक्य (छपा त्रलोक्य); चौ. 26 शेढ़ला, महला, रुणली, हृणनी और मंदला जैसे लोक-नाम संस्करणों में अलग हैं और अस्पष्ट हैं; चौ. 29 दुख (भक्ति भारत में भूल से सुख); चौ. 37 भनत रामसुंदर (छपी पुस्तक और द्रिक पंचांग; sanskritdocuments में कहत राम सुंदर; भक्ति भारत में भगत कमल); चौ. 38 ग्राम तिवारी पूर (भक्ति भारत; छपी पुस्तक में पुरी तिवारी); चौ. 40 भक्ति भारत और sanskritdocuments के अनुसार (छपी पुस्तक में रक्षा करहु शीतला माई)। द्रिक पंचांग में शुरू में एक ही दोहा है; भक्ति भारत और sanskritdocuments अंत में एक दूसरा दोहा जोड़ते हैं, एक अस्पष्ट तिथि-पंक्ति (“बुझे सहस्र विक्रमी…”) जिसे भरोसे से पढ़ा नहीं जा सकता; वह यहाँ नहीं दिया गया। वर्तनी के छोटे अंतर नहीं गिनाए। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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