आरती · हनुमान

आरती कीजै हनुमान लला की: हनुमान जी की आरती अर्थ सहित

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा के बाद गाई जाने वाली आरती। इसमें छोटी-सी रामायण है: लंका की छलाँग, लंका दहन, संजीवनी बूटी और पाताल से राम-लक्ष्मण को छुड़ाना।

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सुनें: हनुमान जी की आरती: आरती कीजै हनुमान लला की

ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

यह आरती क्या है

“आरती कीजै हनुमान लला की” में हनुमान जी को लला, यानी प्यारा बच्चा, कहा गया है, घर के बड़ों के दुलार से। हर पद रामायण की एक घटना याद दिलाता है: सीता जी तक राम का संदेश ले जाना, सागर पार करके लंका जलाना, लक्ष्मण जी को जीवित करने के लिए संजीवनी लाना, और पाताल में घुसकर अहिरावण से राम-लक्ष्मण को छुड़ाना।

कई पाठों के अंत में तुलसीदास जी का नाम आता है, और यह आरती अक्सर उनसे जोड़ी जाती है, पर इसके रचयिता के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। यह पारंपरिक पाठ है जो पीढ़ियों से उत्तर भारत के घरों और मंदिरों में गाया जाता है।

कब गाई जाती है

  • मंगलवार और शनिवार, हनुमान चालीसा के बाद।
  • हनुमान जयंती और सुंदरकांड पाठ में।
  • कठिन समय में, जब परिवार साहस के लिए हनुमान जी को याद करते हैं।

आरती कैसे करें, क्रम से

पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, और इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग four मिनट में किया जा सकता है।

  1. हाथ-मुँह धोकर हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
  2. एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और बूंदी या गुड़-चना रखें।
  3. दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
  4. नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
  5. आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
  6. सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ। फिर प्रसाद बाँटें।

धुन और कुछ शब्द हर घर में थोड़े अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।

आरती कीजै हनुमान लला की, अर्थ सहित

पहला पद टेक है: यह शुरू में गाया जाता है और हर पद के बाद दोहराया जाता है।

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टेक

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

Aarti kije hanuman lala ki,
dusht dalan raghunath kala ki.

अर्थ: प्यारे हनुमान जी की आरती कीजिए, जो दुष्टों का नाश करने वाले और श्री रघुनाथ (राम) की शक्ति हैं।

Meaning: Sing the aarti of dear Hanuman, destroyer of the wicked, the very power of Raghunath (Rama).

पद 1

जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

Jaake bal se girivar kaanpe,
rog dosh jaake nikat na jhaanke.

अर्थ: जिनके बल से बड़े-बड़े पर्वत काँप उठते हैं, और रोग व दोष जिनके पास झाँकते भी नहीं।

Meaning: By whose strength great mountains tremble, and near whom illness and faults dare not even look.

पद 2

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

Anjani putra maha baldaai,
santan ke prabhu sada sahaai.

अर्थ: अंजनी के पुत्र, महान बल देने वाले, जो संतों के सदा सहायक हैं।

Meaning: Son of Anjani, giver of great strength, ever the helper of good people.

पद 3

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

De beera raghunath pathaae,
lanka jaari siya sudhi laae.

अर्थ: श्री राम ने उन्हें बीड़ा (काम का ज़िम्मा) देकर भेजा, और वे लंका जलाकर सीता जी का समाचार लाए।

Meaning: Rama gave him the betel roll of a sworn mission and sent him; he burned Lanka and brought back news of Sita.

पद 4

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

Lanka so kot samudra-si khaai,
jaat pavansut baar na laai.

अर्थ: लंका जैसा क़िला और समुद्र जैसी खाई, पर पवनपुत्र को वहाँ जाने में ज़रा भी देर नहीं लगी।

Meaning: A fortress like Lanka with a moat as wide as the sea, yet the son of the Wind took no time at all to get there.

पद 5

लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सवारे॥

Lanka jaari asur sanhaare,
siyaram ji ke kaaj savaare.

अर्थ: उन्होंने लंका जलाई, असुरों का संहार किया और सीता-राम जी के काम पूरे किए।

Meaning: He set Lanka ablaze, struck down the demons and accomplished the work of Sita and Rama.

पद 6

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

Lakshman moorchhit pade sakaare,
aani sanjeevan praan ubaare.

अर्थ: जब लक्ष्मण जी मूर्छित पड़े थे, तब सुबह होने से पहले संजीवनी लाकर उनके प्राण बचाए।

Meaning: When Lakshmana lay unconscious, he brought the sanjeevani herb before dawn and saved his life.

पद 7

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥

Paithi paatal tori jam-kaare,
ahiravan ki bhuja ukhaare.

अर्थ: वे पाताल में घुसे, यम जैसे भयानक बंधन तोड़े, और अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं।

Meaning: He entered the underworld, broke its deadly bonds and tore off the arms of Ahiravana.

पद 8

बाएँ भुजा असुरदल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

Baayen bhuja asurdal maare,
daahine bhuja santjan taare.

अर्थ: बाईं भुजा से उन्होंने असुरों की सेना मारी, और दाहिनी भुजा से संतों को पार उतारा।

Meaning: With his left arm he struck down the demon army; with his right he carried the good to safety.

पद 9

सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥

Sur nar muni aarti utaaren,
jai jai jai hanuman uchaaren.

अर्थ: देवता, मनुष्य और मुनि उनकी आरती उतारते हैं और “जय जय जय हनुमान” बोलते हैं।

Meaning: Gods, people and sages wave the lamp before him and call out, “Victory, victory, victory to Hanuman!”

पद 10

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

Kanchan thaar kapoor lau chhaai,
aarti karat anjana maai.

अर्थ: सोने की थाली में कपूर की लौ फैली है, और माँ अंजना स्वयं उनकी आरती कर रही हैं।

Meaning: On a golden plate the camphor flame glows, and Mother Anjana herself performs his aarti.

पद 11

जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

Jo hanuman ji ki aarti gaave,
basi baikunth param pad paave.

अर्थ: जो हनुमान जी की यह आरती गाता है, वह वैकुंठ में बसकर परम पद पाता है।

Meaning: Whoever sings this aarti of Hanuman comes to dwell in Vaikuntha and reaches the highest state.

सवाल-जवाब

क्या आरती हनुमान चालीसा के बाद होती है?

हाँ, आम क्रम यही है: पहले चालीसा, फिर दीये के साथ यह आरती, फिर प्रसाद।

“दे बीरा” का क्या अर्थ है?

बीरा (बीड़ा) पान का बीड़ा है। किसी को बीड़ा देना उसे कोई काम सौंपने का तरीका था; राम ने सीता जी को खोजने भेजते समय हनुमान जी को बीड़ा दिया।

कौन-से दिन सबसे अच्छे हैं?

मंगलवार और शनिवार, और हनुमान जयंती, वैसे कोई भी दिन ठीक है।

पाठ और स्रोत

हिंदी पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति द्रिक पंचांग, शुभ पंचांग और संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के “आरती संग्रह” से मिलाई गई; द्रिक और शुभ पंचांग शब्दशः एक हैं और हमने वही पाठ लिया है। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: पद 3 में “लंका जाय सिया सुधि लाये”, पद 4 में “लंका सौ कोटि समुद्र सी खाई”, और अंतिम पद से पहले कुछ लोगों द्वारा गाई जाने वाली पंक्ति “लंक विध्वंस किए रघुराई, तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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