आरती · शिव

ॐ जय शिव ओंकारा: शिव जी की आरती अर्थ सहित

शिव जी की सबसे प्रसिद्ध आरती, जो सोमवार को, सावन में और महाशिवरात्रि की पूरी रात गाई जाती है। यहाँ यह हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और हर पद के सरल अर्थ के साथ है।

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सुनें: शिव जी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा

ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

यह आरती क्या है

“ॐ जय शिव ओंकारा” शिव जी की ओंकार रूप में स्तुति है, यानी वे स्वयं पवित्र ध्वनि ॐ हैं। इसका सबसे गहरा भाव बीच में है: ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव, जो तीन दिखते हैं, ॐ अक्षर में एक ही हैं; केवल अविवेकी उन्हें अलग समझते हैं। इसके चारों ओर शिव जी के रूपों का वर्णन है: एक मुख, चार मुख और पाँच मुख वाले, हंस, गरुड़ और बैल पर सवार, जटा में गंगा और अर्धांग में पार्वती।

अंतिम पद में शिवानंद स्वामी का नाम है, जिन्हें परंपरा से यह आरती और “जय अम्बे गौरी” दोनों का रचयिता माना जाता है। यह पुराना भक्ति पाठ है, सबके लिए।

कब गाई जाती है

  • सोमवार: शिव जी का दिन, शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाने के बाद।
  • प्रदोष, सावन का महीना और महाशिवरात्रि, जब रात के चारों प्रहरों में गाई जाती है।
  • शिव चालीसा के बाद या महामृत्युंजय मंत्र के बाद।

आरती कैसे करें, क्रम से

पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, और इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग six मिनट में किया जा सकता है।

  1. हाथ-मुँह धोकर शिव जी के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
  2. एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और बेलपत्र और मिठाई रखें।
  3. दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
  4. नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
  5. आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
  6. सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ। फिर प्रसाद बाँटें।

धुन और कुछ शब्द हर घर में थोड़े अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।

ॐ जय शिव ओंकारा, अर्थ सहित

पहला पद टेक है: यह शुरू में गाया जाता है और हर पद के बाद दोहराया जाता है।

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टेक

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

Om jai shiv omkara, swami jai shiv omkara,
brahma vishnu sadashiv, ardhangi dhara.

अर्थ: जय हो ओंकार रूप शिव, जय हो स्वामी! आप ही ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव हैं, और पार्वती को अपने आधे अंग में धारण करते हैं।

Meaning: Glory to Shiva, who is Om! You are Brahma, Vishnu and Sadashiv, and you hold Parvati as half of your own body.

पद 1

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥

Ekanan chaturanan, panchanan raje,
hansasan garudasan, vrishvahan saje.

अर्थ: आप एक मुख (विष्णु), चार मुख (ब्रह्मा) और पाँच मुख (शिव) के रूप में शोभा पाते हैं; हंस, गरुड़ और बैल पर सवार होते हैं।

Meaning: You shine as the one-faced (Vishnu), the four-faced (Brahma) and the five-faced (Shiva), riding the swan, Garuda and the bull.

पद 2

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥

Do bhuj chaar chaturbhuj, dasbhuj ati sohe,
trigun roop nirakhte, tribhuvan jan mohe.

अर्थ: दो भुजाओं, चार भुजाओं और दस भुजाओं वाले रूप अत्यंत सुंदर हैं। आपके तीनों गुणों वाले रूप देखकर तीनों लोकों के लोग मोहित हो जाते हैं।

Meaning: Two-armed, four-armed and ten-armed, your forms are radiant. Seeing your three forms, the people of the three worlds are enchanted.

पद 3

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहे, भाले शशिधारी॥

Akshamala vanmala, mundmala dhari,
chandan mrigmad sohe, bhale shashidhari.

अर्थ: आप रुद्राक्ष की माला, वनफूलों की माला और मुंडों की माला धारण करते हैं; चंदन और कस्तूरी शोभा देते हैं, और माथे पर चंद्रमा है।

Meaning: You wear a rosary of beads, a garland of wild flowers and a garland of skulls; sandal paste and musk adorn you, and the Moon rests on your brow.

पद 4

श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक, भूतादिक संगे॥

Shvetambar pitambar, baaghambar ange,
sanakadik garudadik, bhootadik sange.

अर्थ: आपके अंगों पर सफ़ेद वस्त्र, पीले वस्त्र और बाघ की खाल है; सनक आदि ऋषि, गरुड़ आदि और भूत-गण आपके साथ रहते हैं।

Meaning: You are clothed in white, in yellow and in tiger skin; the sage Sanaka and his brothers, Garuda and the spirit hosts are with you.

पद 5

कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी॥

Kar ke madhya kamandalu, chakra trishooldhari,
sukhkari dukhhari, jagpalan kari.

अर्थ: आपके हाथों में कमंडल, चक्र और त्रिशूल हैं। आप सुख देने वाले, दुख हरने वाले और जगत का पालन करने वाले हैं।

Meaning: In your hands are the water pot, the discus and the trident. You give joy, take away sorrow and sustain the world.

पद 6

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका॥

Brahma vishnu sadashiv, jaanat aviveka,
pranavakshar mein shobhit, ye teenon eka.

अर्थ: अविवेकी लोग ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव को अलग-अलग समझते हैं, पर ॐ अक्षर में ये तीनों एक ही होकर शोभित हैं।

Meaning: The unwise think of Brahma, Vishnu and Sadashiv as separate; in the syllable Om the three shine as one.

पद 7

लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

Lakshmi va savitri, parvati sanga,
parvati ardhangi, shivlahari ganga.

अर्थ: लक्ष्मी, सावित्री और पार्वती साथ हैं; पार्वती आपकी अर्धांगिनी हैं, और गंगा आपकी जटा से लहराती बहती हैं।

Meaning: Lakshmi, Savitri and Parvati are with you; Parvati is half of you, and the Ganga flows in waves from your hair.

पद 8

पर्वत सोहें पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥

Parvat sohen parvati, shankar kailasa,
bhaang dhature ka bhojan, bhasmi mein vaasa.

अर्थ: पर्वत पर पार्वती शोभा पाती हैं, और शंकर कैलास पर। भांग और धतूरा आपका भोजन है, और आप भस्म में वास करते हैं।

Meaning: Parvati graces the mountain and Shankar dwells on Kailash. Bhang and datura are his food, and he lives covered in sacred ash.

पद 9

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

Jata mein gang bahat hai, gal mundan mala,
shesh naag liptavat, odhat mrigchhala.

अर्थ: आपकी जटा में गंगा बहती है, गले में मुंडों की माला है; शेषनाग आपसे लिपटे रहते हैं, और आप मृगछाला ओढ़ते हैं।

Meaning: The Ganga flows in your matted hair, a garland of skulls hangs at your neck; the serpent Shesha coils around you, and you wear a deerskin.

पद 10

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

Kashi mein viraje vishwanath, nandi brahmachari,
nit uth darshan pavat, mahima ati bhari.

अर्थ: काशी में विश्वनाथ के रूप में आप विराजते हैं, और ब्रह्मचारी नंदी आपकी सेवा में हैं। जो रोज़ उठकर आपके दर्शन करता है, उसकी महिमा बहुत बड़ी है।

Meaning: In Kashi you reign as Vishwanath, with the celibate Nandi beside you. Great is the blessing of those who rise each day to see you.

पद 11

त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

Trigunswami ji ki aarti, jo koi nar gave,
kahat shivanand swami, manvanchhit phal pave.

अर्थ: शिवानंद स्वामी कहते हैं: जो भी तीनों गुणों के स्वामी की यह आरती गाता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।

Meaning: Shivanand Swami says: whoever sings this aarti of the Lord of the three qualities receives what the heart wishes for.

सवाल-जवाब

“ॐकारा” है या “ओंकारा”?

दोनों एक ही शब्द हैं, ओंकार: जो स्वयं ॐ हैं।

शिव जी की आरती में ब्रह्मा और विष्णु का नाम क्यों है?

क्योंकि इसका मुख्य भाव यही है कि ॐ में तीनों एक हैं। पहले पद तीनों रूपों का वर्णन करते हैं, और पद 6 कहता है कि केवल अविवेकी उन्हें अलग मानते हैं।

कुछ पाठ छोटे हैं। कौन-सा सही है?

दोनों। पुराने संग्रहों में पद 6 के बाद सीधे शिवानंद वाला पद आता है; लक्ष्मी-सावित्री, कैलास, गंगा और काशी वाले पदों के साथ लंबा पाठ आज ज़्यादातर घरों में गाया जाता है। जितना आपके घर में गाया जाता है, उतना गाइए।

पाठ और स्रोत

हिंदी पाठ शिवानंद स्वामी से जुड़ी पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति द्रिक पंचांग, शुभ पंचांग, संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के “आरती संग्रह” और भारतकोश से मिलाई गई; जहाँ अंतर है, वहाँ बहुमत का पाठ लिया है। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: “तीनों रूप निरखते” (पद 2), “त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी” (पद 3, द्रिक), “कर में श्रेष्ठ कमण्डलु… जगकर्ता जगहर्ता जग पालन कर्ता” (पद 5, पुराने पाठ), “प्रणवाक्षर मध्ये” (पद 6), और टेक में “स्वामी हर शिव ओंकारा”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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