आरती · लक्ष्मी
ॐ जय लक्ष्मी माता: लक्ष्मी जी की आरती अर्थ सहित
वह आरती जो ज़्यादातर घरों में दिवाली के लक्ष्मी पूजन के बाद और शुक्रवार की शाम गाई जाती है: आठ छोटे पद, हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और सरल अर्थ के साथ, और आरती करने की आसान विधि।
सुनें: लक्ष्मी जी की आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता
ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।
यह आरती क्या है
आरती वह गीत है जो पूजा के अंत में देवता के सामने दीया घुमाते हुए गाया जाता है। “ॐ जय लक्ष्मी माता” समृद्धि, कृपा और कल्याण की देवी लक्ष्मी की सबसे प्रसिद्ध आरती है। इसकी धुन “ॐ जय जगदीश हरे” जैसी है, इसलिए ज़्यादातर लोग इसे एक बार सुनकर ही गाने लगते हैं।
पदों में लक्ष्मी जी को उमा, रमा और ब्रह्माणी के रूप में एक ही जगत-माता कहा गया है, क्षीर सागर से चौदह रत्नों के साथ उनके प्रकट होने की याद है, और सीधे शब्दों में बताया है कि वे क्या लाती हैं: ऐसा घर जहाँ सद्गुण आते हैं और मन नहीं घबराता। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं; यह उत्तर भारत की पारंपरिक आरती है जो घरों में पीढ़ियों से गाई जाती है।
कब गाई जाती है
- दिवाली की रात: लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद, गणेश जी की आरती के ठीक बाद। देखें दिवाली पूजन विधि।
- धनतेरस और शरद पूर्णिमा: साल की दो और बड़ी लक्ष्मी-संध्याएँ।
- शुक्रवार: शुक्रवार लक्ष्मी जी का दिन है; कई घरों में शाम के दीये के साथ, अक्सर लक्ष्मी चालीसा के बाद, गाई जाती है।
- किसी भी नई शुरुआत पर: नई दुकान, नया घर, नया बही-खाता।
आरती कैसे करें, क्रम से
पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, पर इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग पाँच मिनट में किया जा सकता है।
- हाथ-मुँह धोकर लक्ष्मी जी के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
- एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और मिठाई या खील-बताशे रखें।
- दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजा सके तो बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
- नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ। घरों में चलन है: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
- आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
- सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ।
- मिठाई प्रसाद के रूप में बाँटें।
हर घर की धुन अलग होती है और कुछ शब्द भी अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।
ॐ जय लक्ष्मी माता, अर्थ सहित
पहला पद टेक है: यह शुरू में गाया जाता है और हर पद के बाद दोहराया जाता है (अक्सर केवल पहली पंक्ति, “ॐ जय लक्ष्मी माता”)।
सवाल-जवाब
क्या लक्ष्मी जी से पहले गणेश जी की आरती होती है?
हाँ, आम क्रम यही है। हर पूजा में पहले गणेश जी की पूजा होती है, इसलिए दिवाली पर परिवार पहले जय गणेश देवा और फिर ॐ जय लक्ष्मी माता गाते हैं।
“हरि विष्णु विधाता” है या “हर विष्णु विधाता”?
दोनों गाए जाते हैं। छपे पाठों में अधिकतर “हरि विष्णु विधाता” है; कुछ परिवार “हर” गाते हैं, जिसका अर्थ बनता है कि शिव (हर), विष्णु और ब्रह्मा (विधाता) तीनों देवी की सेवा करते हैं। दोनों ठीक हैं।
क्या बिना कपूर या घंटी के आरती कर सकते हैं?
हाँ। एक दीया काफ़ी है, और घंटी की जगह ताली भी ठीक है। कुछ भी न हो तो हाथ जोड़कर गाना भी आरती ही है।
आरती में कितना समय लगता है?
हर पद के बाद टेक के साथ लगभग चार-पाँच मिनट।
पाठ और स्रोत
हिंदी पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति दो स्वतंत्र प्रकाशित पाठों (द्रिक पंचांग और देखो पंचांग) से मिलाई गई, जो वर्तनी के अलावा पंक्ति-दर-पंक्ति एक जैसे हैं। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: “निशिदिन” की जगह “निसदिन”, टेक में “हरि” की जगह “हर”, “जो कोई जन गाता” की जगह “जो कोई नर गाता”, और पद 4 में “ताँहि में हैं सद्गुण आता”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।
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