आरती · गणेश

जय गणेश देवा: गणेश जी की आरती अर्थ सहित

उत्तर भारत की लगभग हर पूजा की पहली आरती, और दिवाली की रात लक्ष्मी जी की आरती से पहले गाई जाने वाली आरती: हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और सरल अर्थ के साथ, और आरती करने की आसान विधि।

Read in English →

सुनें: गणेश जी की आरती: जय गणेश देवा

ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

यह आरती क्या है

विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा हर पूजा में सबसे पहले होती है, इसलिए “जय गणेश देवा” अक्सर वह पहली आरती है जो बच्चे सीखते हैं। यह छोटी और सरल है: इसमें उनके माता-पिता पार्वती और महादेव का नाम है, उनके एक दाँत, चार भुजाओं और मूषक की सवारी का वर्णन है, पान, फूल, मेवे और लड्डू जैसे सरल भोग हैं, और यह प्रार्थना है कि जिनके पास कुछ नहीं, उनकी लाज रखें।

“सूर श्याम शरण आए” पंक्ति को आम तौर पर कृष्ण (श्याम) के भक्त संत कवि सूरदास की छाप माना जाता है, इसीलिए यह आरती उनसे जोड़ी जाती है; कुछ लोग “सूरश्याम” को किसी बाद के कवि का नाम मानते हैं। जो भी हो, यह सदियों पुराना पारंपरिक पाठ है, सबके लिए।

कब गाई जाती है

  • किसी भी पूजा के अंत में, मुख्य देवता की आरती से पहले।
  • दिवाली की रात: लक्ष्मी-गणेश पूजन में पहले यह, फिर ॐ जय लक्ष्मी माता। देखें दिवाली पूजन विधि।
  • बुधवार और चतुर्थी: गणेश जी का दिन और हर महीने की चतुर्थी, और गणेश चतुर्थी के उत्सव में रोज़।
  • किसी नई शुरुआत से पहले: नया घर, दुकान का उद्घाटन, परीक्षा, यात्रा। गणेश चालीसा के अंत में भी यही गाई जाती है।

आरती कैसे करें, क्रम से

पंडित जी की ज़रूरत नहीं। आरती हर पूजा का अंतिम भाग है, पर इसे अकेले भी, सुबह या शाम, लगभग पाँच मिनट में किया जा सकता है।

  1. हाथ-मुँह धोकर गणेश जी के चित्र या मूर्ति के सामने खड़े हों या बैठें।
  2. एक थाली में घी का दीया या कपूर, थोड़ी रोली और चावल, एक फूल और लड्डू या मोदक और दूर्वा के कुछ तिनके रखें।
  3. दीया या कपूर जलाएँ। कोई घंटी बजा सके तो बजाए, या सब ताली बजाते हुए साथ गाएँ।
  4. नीचे दी आरती गाएँ और थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाएँ। घरों में चलन है: चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर, एक बार मुख की ओर, फिर सात बार पूरे रूप के चारों ओर।
  5. आख़िरी पद के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर उसे रख दें।
  6. सब आरती लें: दोनों हथेलियाँ एक पल लौ के ऊपर रखकर आँखों और सिर से लगाएँ।
  7. मिठाई प्रसाद के रूप में बाँटें।

हर घर की धुन अलग होती है और कुछ शब्द भी अलग होते हैं। जैसे आपके घर में गाई जाती है, वैसे ही गाइए; भाव शब्दों से ज़्यादा मायने रखता है।

जय गणेश देवा, अर्थ सहित

पहला पद टेक है, जो शुरू में और हर पद के बाद गाया जाता है।

दिखाएँ

टेक

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

Jai ganesh jai ganesh, jai ganesh deva,
mata jaki parvati, pita mahadeva.

अर्थ: जय हो गणेश देव! जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव।

Meaning: Victory to Lord Ganesha, whose mother is Parvati and whose father is Mahadev (Shiva).

पद 1

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥

Ekdant dayavant, chaar bhujadhari,
maathe par tilak sohe, moose ki savari.

अर्थ: एक दाँत वाले, दया से भरे, चार भुजाओं वाले; माथे पर तिलक शोभा देता है, और चूहा उनकी सवारी है।

Meaning: The one-tusked, full of compassion, with four arms; a tilak shines on his forehead, and he rides a mouse.

पद 2

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥

Paan chadhe phal chadhe, aur chadhe meva,
laddu-an ka bhog lage, sant karen seva.

अर्थ: उन्हें पान, फल और मेवे चढ़ाए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है, और संत उनकी सेवा करते हैं।

Meaning: Betel leaves, fruit and dry fruit are offered to him; laddoos are his favourite food, and holy people serve him.

पद 3

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

Andhan ko aankh det, kodhin ko kaya,
baanjhan ko putra det, nirdhan ko maya.

अर्थ: वे अंधों को आँखें देते हैं, कोढ़ से पीड़ितों को स्वस्थ शरीर, संतान की आस रखने वालों को संतान, और निर्धनों को धन।

Meaning: He gives sight to the blind, a healthy body to those with leprosy, a child to those longing for one, and wealth to the poor.

पद 4

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

'Soor' shyam sharan aaye, safal keeje seva,
mata jaki parvati, pita mahadeva.

अर्थ: सूर (कवि) कहते हैं: हे श्याम, हम आपकी शरण में आए हैं, हमारी सेवा सफल कीजिए। जिनकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव।

Meaning: Soor (the poet) says: we have come to your shelter, Lord; make our service bear fruit. You whose mother is Parvati and whose father is Mahadev.

पद 5 (कई घरों में गाया जाता है)

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी॥

Deenan ki laaj rakho, shambhu sutkari,
kamana ko poorn karo, jaaun balihari.

अर्थ: हे शिव के पुत्र, दीन-दुखियों की लाज रखिए; हमारी मनोकामना पूरी कीजिए, मैं आप पर न्योछावर हूँ।

Meaning: Son of Shambhu (Shiva), protect the honour of the helpless; fulfil our wishes, I offer myself to you.

सवाल-जवाब

गणेश जी की आरती पहले क्यों गाई जाती है?

गणेश जी शुरुआत के देवता और विघ्नहर्ता हैं, इसलिए परंपरा हर देवता से पहले उनकी पूजा करती है। दिवाली पर उनकी आरती के बाद ॐ जय लक्ष्मी माता गाई जाती है।

माथे पर “तिलक” है या “सिंदूर”?

दोनों गाए जाते हैं। ज़्यादातर छपे पाठों में “माथे पर तिलक सोहे” है; बहुत से परिवार “माथे सिंदूर सोहे” गाते हैं, क्योंकि गणेश जी को सिंदूर चढ़ता है। जो आप बचपन से गाते आए हैं, वही गाइए।

जय गणेश देवा किसने लिखी?

“सूर श्याम शरण आए” पंक्ति को परंपरा से सोलहवीं सदी के संत कवि सूरदास की छाप माना जाता है, पर यह प्रमाणित नहीं है; इसे पारंपरिक आरती कहना ही ठीक है।

आरती में कितना समय लगता है?

हर पद के बाद टेक के साथ लगभग तीन मिनट।

पाठ और स्रोत

हिंदी पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति स्वतंत्र प्रकाशित पाठों से मिलाई गई: द्रिक पंचांग, भारतकोश, संस्कृत डॉक्यूमेंट्स का “आरती संग्रह”, भक्ति भारत और शुभ पंचांग। हमने वह पाठ लिया है जो इनमें से ज़्यादातर में है। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: “माथे सिंदूर सोहे”, पद 2 में “पान चढ़े फूल चढ़े” या “हार चढ़े फूल चढ़े”, पद 3 में “अंधे को आँख देत”, और पद 5 में “शंभु सुतवारी” और “जग बलिहारी”। पद 5 कुछ छपे पाठों में नहीं है, इसलिए हमने उसे ‘कई घरों में गाया जाता है’ लिखा है। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

पाठ या ऑडियो में कोई ग़लती दिखी? हमें बताइए →