स्तोत्र · गणेश

संकटनाशन गणेश स्तोत्र: गणेश जी के बारह नाम, अर्थ सहित

नारद पुराण के आठ श्लोक, जिनमें गणेश जी के बारह नाम हैं। इसके नाम का अर्थ है “संकटों का नाश करने वाला”, और यह बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और किसी भी नई शुरुआत से पहले पढ़ा जाता है।

Read in English →

सुनें: संकटनाशन गणेश स्तोत्र

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

यह स्तोत्र क्या है

नारद पुराण में नारद मुनि यह प्रार्थना सिखाते हैं: गौरी-पुत्र गणेश जी को प्रणाम करें और सुबह, दोपहर और शाम उनके बारह नाम याद करें। ये नाम उनका रूप बताते हैं: टेढ़ी सूँड़, एक दाँत, काली-पीली आँखें, हाथी का मुख, बड़ा पेट, विघ्नों के राजा, माथे पर चंद्रमा। छोटा और साफ़ होने के कारण यह अक्सर पहला संस्कृत स्तोत्र होता है जो बच्चे सीखते हैं।

संकटनाशन गणेश स्तोत्र, अर्थ सहित

श्लोक 2 से 4 में बारह नाम हैं; श्लोक 5 से 8 में पाठ का फल बताया गया है।

दिखाएँ

श्लोक 1

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये॥

Pranamya shirasa devam gauri-putram vinayakam,
bhaktavasam smaren nityam ayuh-kamartha-siddhaye.

अर्थ: सिर झुकाकर गौरी-पुत्र विनायक देव को प्रणाम करें, जो भक्तों के हृदय में बसते हैं, और लंबी आयु, इच्छाओं और धन की पूर्ति के लिए उनका रोज़ स्मरण करें।

Meaning: Bowing the head to the god Vinayaka, son of Gauri, who lives in the hearts of his devotees, one should remember him daily for long life and for the fulfilment of wishes and needs.

श्लोक 2

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥

Prathamam vakratundam cha ekadantam dvitiyakam,
tritiyam krishna-pingaksham gajavaktram chaturthakam.

अर्थ: पहला नाम वक्रतुंड (टेढ़ी सूँड़ वाले), दूसरा एकदंत (एक दाँत वाले), तीसरा कृष्णपिंगाक्ष (काली-पीली आँखों वाले), चौथा गजवक्त्र (हाथी के मुख वाले)।

Meaning: First, Vakratunda, of the curved trunk; second, Ekadanta, of the single tusk; third, Krishnapingaksha, of the dark-tawny eyes; fourth, Gajavaktra, of the elephant face.

श्लोक 3

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥

Lambodaram panchamam cha shashtham vikatam eva cha,
saptamam vighnarajam cha dhumravarnam tathashtamam.

अर्थ: पाँचवाँ लंबोदर (बड़े पेट वाले), छठा विकट (विशाल, अद्भुत रूप वाले), सातवाँ विघ्नराज (विघ्नों के राजा), और आठवाँ धूम्रवर्ण (धुएँ के रंग वाले)।

Meaning: Fifth, Lambodara, of the large belly; sixth, Vikata, the mighty and wondrous; seventh, Vighnaraja, king of obstacles; and eighth, Dhumravarna, the smoke-coloured.

श्लोक 4

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥

Navamam bhalachandram cha dashamam tu vinayakam,
ekadasham ganapatim dvadasham tu gajananam.

अर्थ: नौवाँ भालचंद्र (माथे पर चंद्रमा वाले), दसवाँ विनायक (सबके नायक), ग्यारहवाँ गणपति (गणों के स्वामी), और बारहवाँ गजानन (हाथी के मुख वाले)।

Meaning: Ninth, Bhalachandra, with the Moon on his forehead; tenth, Vinayaka, the supreme leader; eleventh, Ganapati, lord of the ganas; and twelfth, Gajanana, the elephant-faced.

श्लोक 5

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो॥

Dvadashaitani namani trisandhyam yah pathen narah,
na cha vighna-bhayam tasya sarva-siddhikaram prabho.

अर्थ: जो इन बारह नामों का सुबह, दोपहर और शाम पाठ करता है, उसे विघ्नों का डर नहीं रहता; हे प्रभो, यह पाठ सब कामों में सफलता देता है।

Meaning: Whoever recites these twelve names at dawn, noon and dusk has no fear of obstacles; O Lord, this brings success in everything.

श्लोक 6

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम्॥

Vidyarthi labhate vidyam dhanarthi labhate dhanam,
putrarthi labhate putran moksharthi labhate gatim.

अर्थ: विद्या चाहने वाले को विद्या मिलती है, धन चाहने वाले को धन, संतान चाहने वाले को संतान, और मोक्ष चाहने वाले को परम गति।

Meaning: One who seeks learning gains learning, one who seeks wealth gains wealth, one who longs for children is blessed with them, and one who seeks liberation reaches the highest goal.

श्लोक 7

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥

Japed ganapati-stotram shadbhir masaih phalam labhet,
samvatsarena siddhim cha labhate natra samshayah.

अर्थ: जो इस गणपति स्तोत्र का जप करता है, उसे छह महीने में फल मिलता है, और एक वर्ष में सिद्धि; इसमें संदेह नहीं।

Meaning: Whoever repeats this Ganapati stotra sees its fruit in six months and its full blessing within a year; of this there is no doubt.

श्लोक 8

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः॥

Ashtabhyo brahmanebhyash cha likhitva yah samarpayet,
tasya vidya bhavet sarva ganeshasya prasadatah.

अर्थ: जो इसे लिखकर आठ विद्वान ब्राह्मणों को भेंट करता है, उसे गणेश जी की कृपा से सारी विद्या प्राप्त होती है।

Meaning: Whoever writes it out and offers it to eight learned Brahmins gains every kind of knowledge by the grace of Ganesha.

पाठ कैसे करें

इसमें लगभग तीन मिनट लगते हैं।

  1. गणेश जी के चित्र के सामने बैठें; हो तो दूर्वा या फूल चढ़ाएँ और दीया जलाएँ।
  2. आठों श्लोक धीरे-धीरे पढ़ें। परंपरा में यह दिन में तीन बार (त्रिसंध्या) पढ़ा जाता है, पर दिन में एक बार भी अच्छी शुरुआत है।
  3. बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के दस दिन ख़ास माने जाते हैं। चाहें तो अंत में गणेश जी की आरती गाएँ।

सवाल-जवाब

गणेश जी के बारह नाम कौन-से हैं?

वक्रतुंड, एकदंत, कृष्णपिंगाक्ष, गजवक्त्र, लंबोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति और गजानन।

यह स्तोत्र कहाँ से है?

नारद पुराण से, जहाँ नारद मुनि इसे सिखाते हैं। इसे संकटनाशन गणेश स्तोत्र भी कहते हैं।

क्या दिन में तीन बार पढ़ना ज़रूरी है?

पाठ दिन की तीनों संधियों में पढ़ने की प्रशंसा करता है, पर दिन में एक बार ध्यान से पढ़ना भी अच्छा अभ्यास है। श्लोक 7 के छह महीने और एक साल नियमित अभ्यास की बात हैं, कोई गारंटी नहीं।

पाठ और स्रोत

संस्कृत पाठ (नारद पुराण) सार्वजनिक है। हर श्लोक द्रिक पंचांग और संस्कृत विकिस्रोत (बृहत्स्तोत्ररत्नाकर से) से मिलाया गया; दोनों की साफ़ टंकण भूलें (जैसे “स्मरेनित्यम्”, “गजवक्र”, “फालचन्द्रं”, “नव विघ्नभयं”) मानक पाठ के अनुसार ठीक की गई हैं। आपको ये पाठांतर मिल सकते हैं: श्लोक 3 में “सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं” और श्लोक 5 में “सर्वसिद्धिकरं परम्”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

पाठ या ऑडियो में कोई ग़लती दिखी? हमें बताइए →