मंत्र · शांति

शांति मंत्र: वैदिक शांति पाठ अर्थ सहित

वे छोटी शांति प्रार्थनाएँ जिनसे वैदिक अध्ययन, विद्यालय की प्रार्थना-सभाएँ और कई पूजाएँ शुरू और ख़त्म होती हैं। हर एक के अंत में तीन बार “शान्तिः” कहा जाता है: अपने भीतर शांति, आसपास की दुनिया से शांति, और उन शक्तियों से शांति जो हमारे वश में नहीं।

Read in English →

सुनें: शांति मंत्र

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

शांति मंत्र क्या हैं

शांति का अर्थ है शांति, चैन। शांति मंत्र वेदों और उपनिषदों के आवाहन हैं, जो अध्ययन की शुरुआत में बोले जाते हैं ताकि गुरु और शिष्य बिना टकराव के साथ सीखें, और अनुष्ठानों के अंत में, ताकि जो किया गया वह शांति लाए। ये केवल अपने लिए कुछ नहीं माँगते: गुरु और शिष्य दोनों के लिए शक्ति, अंधेरे की जगह प्रकाश, आकाश, धरती, जल और वनस्पतियों में शांति, और सबके लिए सुख।

तीन बार “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” का परंपरागत अर्थ तीन तरह के कष्टों से शांति है: जो हमारे भीतर से उठते हैं (आध्यात्मिक), जो दूसरे प्राणियों से आते हैं (आधिभौतिक), और जो प्रकृति और भाग्य से आते हैं (आधिदैविक)।

शांति मंत्र, अर्थ सहित

कोई एक, या पाँचों क्रम से बोलें। हर एक के अंत में “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” कहा जाता है।

दिखाएँ

सह नाववतु (तैत्तिरीय और कठ उपनिषद)

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om saha navavatu, saha nau bhunaktu,
saha viryam karavavahai,
tejasvi navadhitam astu ma vidvishavahai.
Om shantih shantih shantih.

अर्थ: ईश्वर हम दोनों (गुरु और शिष्य) की साथ रक्षा करें, साथ पालन करें; हम साथ मिलकर शक्ति से काम करें; हमारा पढ़ा हुआ तेजस्वी हो; हम एक-दूसरे से द्वेष न करें। ॐ शांति, शांति, शांति।

Meaning: May the Divine protect us both, teacher and student, together; may it nourish us together; may we work together with strength; may our learning be full of light; may we never resent each other. Om, peace, peace, peace.

पूर्णमदः (ईश और बृहदारण्यक उपनिषद)

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om purnamadah purnamidam purnat purnam udachyate,
purnasya purnam adaya purnam evavashishyate.
Om shantih shantih shantih.

अर्थ: वह (परमात्मा) पूर्ण है, यह (संसार) भी पूर्ण है; पूर्ण से ही पूर्ण प्रकट होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही बचा रहता है। ॐ शांति, शांति, शांति।

Meaning: That is whole, this is whole; from the whole the whole comes forth. Take the whole from the whole, and the whole alone remains. Om, peace, peace, peace.

असतो मा (बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28)

ॐ असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om asato ma sad gamaya,
tamaso ma jyotir gamaya,
mrityor ma amritam gamaya.
Om shantih shantih shantih.

अर्थ: मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। ॐ शांति, शांति, शांति।

Meaning: Lead me from the unreal to the real. Lead me from darkness to light. Lead me from death to the deathless. Om, peace, peace, peace.

द्यौः शान्तिः (शुक्ल यजुर्वेद 36.17)

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om dyauh shantir antariksham shantih
prithivi shantir apah shantir oshadhayah shantih,
vanaspatayah shantir vishvedevah shantir brahma shantih
sarvam shantih shantir eva shantih sa ma shantir edhi.
Om shantih shantih shantih.

अर्थ: आकाश में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, जल में शांति हो, औषधियों में शांति हो; वनस्पतियों में शांति हो, सभी देवताओं में शांति हो, ब्रह्म में शांति हो; सब कुछ शांत हो, शांति ही शांति हो, और वह शांति मुझे भी मिले। ॐ शांति, शांति, शांति।

Meaning: Peace in the sky, peace in the space between, peace on earth, peace in the waters, peace in the healing herbs; peace in the trees, peace among all the gods, peace in Brahman; may everything be peace, peace itself; may that peace come to me. Om, peace, peace, peace.

सर्वे भवन्तु सुखिनः (पारंपरिक)

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om sarve bhavantu sukhinah sarve santu niramayah,
sarve bhadrani pashyantu ma kashchid duhkha-bhag bhavet.
Om shantih shantih shantih.

अर्थ: सब सुखी हों, सब रोग से मुक्त हों; सब अच्छा ही देखें, कोई भी दुख का भागी न बने। ॐ शांति, शांति, शांति।

Meaning: May all be happy, may all be free from illness; may all see what is good, and may no one have to suffer. Om, peace, peace, peace.

कब और कैसे पढ़ें

  1. आराम से, कमर सीधी रखकर बैठें और कुछ धीमी साँसें लें।
  2. पढ़ाई या काम से पहले: सह नाववतु, जैसे विद्यालयों और गुरुकुलों में होता है।
  3. सुबह या शाम की प्रार्थना: असतो मा और पूर्णमदः।
  4. पूजा, हवन या पाठ के अंत में: द्यौः शान्तिः, फिर सर्वे भवन्तु सुखिनः।
  5. तीनों “शान्तिः” धीरे-धीरे, हर बार थोड़ा धीमे बोलें, और एक पल चुपचाप बैठें।

सवाल-जवाब

“शान्तिः” तीन बार क्यों कहा जाता है?

परंपरा इसे तीन तरह के कष्टों से शांति बताती है: अपने भीतर से, दूसरे प्राणियों से, और प्रकृति या भाग्य से। इससे मन भी सहज रूप से शांत होता है।

पढ़ाई से पहले कौन-सा शांति मंत्र बोलते हैं?

ॐ सह नाववतु, जो तैत्तिरीय और कठ उपनिषद से है। यह गुरु और शिष्य दोनों की साथ-साथ प्रार्थना है।

क्या “सर्वे भवन्तु सुखिनः” वेदों से है?

सीधे नहीं। यह बाद के ग्रंथों में मिलने वाली पारंपरिक प्रार्थना है, जो हर जगह वैदिक शांति मंत्रों के साथ बोली जाती है।

पाठ और स्रोत

पाठ: सह नाववतु (तैत्तिरीय उपनिषद 2.1, कठ उपनिषद), पूर्णमदः (ईश उपनिषद, बृहदारण्यक उपनिषद 5.1.1), असतो मा (बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28), द्यौः शान्तिः (शुक्ल यजुर्वेद, वाजसनेयी संहिता 36.17), सर्वे भवन्तु सुखिनः (पारंपरिक)। हर एक संस्कृत विकिस्रोत (उन्हें उद्धृत करने वाले उपनिषद पाठ) और shlokam.org से मिलाया गया। रोज़ के पाठ की तरह वैदिक स्वर-चिह्न नहीं दिए गए। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

पाठ या ऑडियो में कोई ग़लती दिखी? हमें बताइए →