स्तोत्र · शिव

लिंगाष्टकम्: अर्थ सहित

शिवलिंग की आठ छोटी संस्कृत स्तुतियाँ, हर एक उसी पंक्ति पर ख़त्म होती है: “उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ”। सीखने में आसान, और पूरे भारत के शिव मंदिरों में गाई जाती है।

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सुनें: लिंगाष्टकम्

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

लिंगाष्टकम् क्या है

अष्टकम् आठ श्लोकों की स्तुति होती है। लिंगाष्टकम् लिंग की स्तुति है, वह सरल गोल रूप जिसमें मंदिरों और घरों में शिव जी की पूजा होती है: निराकार का साकार चिह्न। हर श्लोक बताता है कि लिंग किस कारण पूजनीय है, ब्रह्मा और विष्णु द्वारा पूजे जाने से लेकर रावण का घमंड तोड़ने तक, और हर श्लोक समर्पण की उसी पंक्ति पर ख़त्म होता है।

इसके रचयिता ज्ञात नहीं; इसे अक्सर आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है, पर इसका कोई प्रमाण नहीं। इसकी संस्कृत सरल और लयबद्ध है, इसलिए शुरुआत करने वालों के लिए यह अच्छा पहला स्तोत्र है।

पाठ कैसे करें, क्रम से

इसमें लगभग चार मिनट लगते हैं।

  1. हाथ-मुँह धोकर शिवलिंग या शिव जी के चित्र के सामने बैठें; सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि पारंपरिक हैं, पर कोई भी दिन ठीक है।
  2. हो सके तो जल, बेलपत्र या सफ़ेद फूल चढ़ाएँ, और दीया जलाएँ।
  3. आठों श्लोक और अंतिम श्लोक धीरे-धीरे पढ़ें। अंग्रेज़ी अक्षरों से पढ़ना भी बिल्कुल ठीक है।
  4. अंत में “ॐ नमः शिवाय” बोलें और एक पल शांत रहें, या शिव जी की आरती गाएँ।

लिंगाष्टकम्, अर्थ सहित

हर श्लोक एक ही पंक्ति पर ख़त्म होता है, “तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्”: उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

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श्लोक 1

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Brahma-murari-surarchita lingam,
nirmala-bhasita-shobhita lingam,
janmaja-duhkha-vinashaka lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिस लिंग की पूजा ब्रह्मा, विष्णु और देवता करते हैं, जो निर्मल प्रकाश से शोभित है, जो जन्म से जुड़े दुखों का नाश करता है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga worshipped by Brahma, Vishnu and the gods, shining with a pure light, which ends the sorrows that come with birth; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 2

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं
कामदहनकरुणाकरलिङ्गम्।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Deva-muni-pravara-archita lingam,
kama-dahana karunakara lingam,
ravana-darpa-vinashana lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिसकी पूजा देवता और श्रेष्ठ मुनि करते हैं, जिसने कामदेव को भस्म किया और जो करुणा की खान है, जिसने रावण का घमंड तोड़ा, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga worshipped by gods and the best of sages, which burned away Kama, the god of desire, and is a mine of compassion, which broke Ravana's pride; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 3

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं
बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Sarva-sugandhi-sulepita lingam,
buddhi-vivardhana-karana lingam,
siddha-surasura-vandita lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिस पर हर तरह के सुगंधित लेप लगे हैं, जो बुद्धि बढ़ाने का कारण है, जिसकी वंदना सिद्ध, देवता और असुर सब करते हैं, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga anointed with every fragrance, the cause of growing wisdom, honoured by the perfected ones, by gods and by demons alike; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 4

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं
फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Kanaka-mahamani-bhushita lingam,
phanipati-veshtita shobhita lingam,
daksha-suyajna-vinashana lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जो सोने और बड़े रत्नों से सजा है, जिससे नागराज लिपटे हैं, जिसने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga adorned with gold and great jewels, beautiful with the king of serpents coiled around it, which brought Daksha's sacrifice to an end; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 5

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं
पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Kumkuma-chandana-lepita lingam,
pankaja-hara-sushobhita lingam,
sanchita-papa-vinashana lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिस पर कुमकुम और चंदन का लेप है, जो कमल की माला से सुशोभित है, जो इकट्ठे हुए पापों का नाश करता है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga anointed with kumkum and sandal paste, lovely with a garland of lotuses, which destroys the wrongs gathered over time; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 6

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं
भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Devaganarchita-sevita lingam,
bhavair bhaktibhir eva cha lingam,
dinakara-koti-prabhakara lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिसकी पूजा और सेवा देवताओं के समूह सच्चे भाव और भक्ति से करते हैं, जिसकी चमक करोड़ों सूर्यों जैसी है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga worshipped and served by the hosts of gods with true feeling and devotion, shining like millions of suns; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 7

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं
सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्।
अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Ashtadalopari-veshtita lingam,
sarva-samudbhava-karana lingam,
ashta-daridra-vinashana lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जो आठ पंखुड़ियों वाले कमल पर विराजमान है, जो सारी सृष्टि की उत्पत्ति का कारण है, जो आठ तरह की दरिद्रता को मिटाता है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga set upon an eight-petalled lotus, the cause from which everything arises, which ends the eight kinds of poverty; to that eternal Shiva-linga I bow.

श्लोक 8

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं
सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम्।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Suraguru-suravara-pujita lingam,
suravana-pushpa-sadarchita lingam,
paratparam paramatmaka lingam,
tat pranamami sadashiva lingam.

अर्थ: जिसकी पूजा देवगुरु बृहस्पति और श्रेष्ठ देवता करते हैं, जिस पर स्वर्ग के उपवन के फूल सदा चढ़ते हैं, जो सबसे परे है और परमात्मा का स्वरूप है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

Meaning: The linga worshipped by Brihaspati, teacher of the gods, and the greatest gods, always offered flowers from the gardens of heaven, beyond the highest, the Supreme Self itself; to that eternal Shiva-linga I bow.

फलश्रुति

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

Lingashtakam idam punyam yah pathech chhiva-sannidhau,
shivalokam avapnoti shivena saha modate.

अर्थ: जो शिव जी के सामने इस पवित्र लिंगाष्टक का पाठ करता है, वह शिवलोक पाता है और शिव के साथ आनंद में रहता है।

Meaning: Whoever recites this sacred Lingashtakam in the presence of Shiva reaches Shiva's world and rejoices with him.

सवाल-जवाब

लिंगाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?

सोमवार, प्रदोष, सावन का महीना और महाशिवरात्रि पारंपरिक समय हैं; बहुत लोग रोज़ शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए इसका पाठ करते हैं।

लिंगाष्टकम् किसने लिखा?

यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं। इसे अक्सर आदि शंकराचार्य का माना जाता है, पर इसका कोई पुराना प्रमाण नहीं; यह पारंपरिक स्तुति है।

श्लोक 7 में “आठ तरह की दरिद्रता” क्या है?

परंपरा में इसकी कोई एक सूची तय नहीं। इसे आम तौर पर हर तरह की कमी माना जाता है, धन, स्वास्थ्य, ज्ञान, परिवार, शांति आदि की, जो अष्टलक्ष्मी के आठ रूपों के सामने हैं।

पाठ और स्रोत

संस्कृत पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक स्तोत्र है। हर श्लोक द्रिक पंचांग और संस्कृत विकिस्रोत से मिलाया गया, जो शब्दों के बीच की दूरी और वर्तनी के अलावा एक जैसे हैं। पाठांतर: “रावणदर्पविनाशक” (श्लोक 2) और अंतिम श्लोक में “पठेत् शिवसन्निधौ”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।

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