चालीसा · सरस्वती

श्री सरस्वती चालीसा: अर्थ सहित

ज्ञान, वाणी, संगीत और कलाओं की देवी माँ सरस्वती की स्तुति। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: सरस्वती चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

माँ सरस्वती कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

माँ सरस्वती ज्ञान, वाणी, संगीत और कलाओं की देवी हैं। ऋग्वेद में वे पहले एक महान नदी हैं और फिर प्रेरित वाणी (वाक्) की देवी; बाद की परंपरा में वे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की शक्ति हैं, और लक्ष्मी व पार्वती के साथ तीन महान देवियों में से एक। उन्हें श्वेत वस्त्रों में, सफ़ेद कमल पर बैठे या हंस पर सवार, वीणा, पुस्तक और माला लिए दिखाया जाता है। विद्यार्थी, संगीतकार, लेखक और शिक्षक पीढ़ियों से उनकी ओर देखते आए हैं, और कई बच्चे पहला अक्षर उन्हीं के नाम से लिखना शुरू करते हैं।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल पुरानी हिंदी की स्तुति होती है। सरस्वती चालीसा दो दोहों से शुरू होती है, उसमें उनतालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में दो दोहे। इसमें माँ के रूप की स्तुति है, यह याद है कि उनकी कृपा से वाल्मीकि और कालिदास कवि बने और तुलसीदास व सूरदास को सहारा मिला, और फिर उन्हें उस एक महान माँ के रूप में देखा गया है जिन्होंने मधु-कैटभ, रक्तबीज और शुंभ-निशुंभ को हराया; अंत में बल, बुद्धि और विद्या के लिए अपनी-सी प्रार्थना है।

कवि तीन बार अपना नाम लेते हैं: रामसागर, दूसरे दोहे में, अंतिम चौपाई में और अंतिम दोहे में। उनके या उनके समय के बारे में इससे ज़्यादा कुछ ज्ञात नहीं है। यह चालीसा एक पुरानी भक्ति रचना है जो उत्तर भारत के घरों और स्कूलों में गाई जाती है, और सबकी है। कई परिवार इसे सरस्वती के पर्व वसंत पंचमी पर पढ़ते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री सरस्वती चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू के दो दोहे, उनतालीस चौपाइयाँ और अंत के दो दोहे।

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दोहा 1

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥

Janak janani padmaraj, nij mastak par dhari,
bandaun maatu Saraswati, buddhi bal de daataari.

अर्थ: माता-पिता के कमल जैसे चरणों की धूल अपने माथे पर लगाकर मैं माँ सरस्वती को प्रणाम करता हूँ: हे देने वाली, बुद्धि और बल दीजिए।

Meaning: Placing on my head the dust of my father's and mother's lotus feet, I bow to Mother Saraswati: giver of gifts, grant me understanding and strength.

दोहा 2

पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥

Poorn jagat mein vyaapt tav, mahima amit anantu,
Ramsagar ke paap ko, maatu tuhi ab hantu.

अर्थ: आपकी असीम, अनंत महिमा पूरे जगत में फैली है; हे माँ, अब आप ही रामसागर (कवि) की भूलें मिटाइए।

Meaning: Your glory, measureless and endless, fills the whole world; Mother, you alone can now wipe away the wrongs of Ramsagar, the poet.

चौपाई 1

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।
जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥

Jai Shri sakal buddhi balraasi,
jai sarvagya amar avinaasi.

अर्थ: जय हो, हे श्री, आप सारी बुद्धि और बल का भंडार हैं; जय हो, आप सब कुछ जानने वाली, अमर और अविनाशी हैं।

Meaning: Victory to you, treasure-house of all wisdom and strength; victory to you who know all things, deathless and imperishable.

चौपाई 2

जय जय जय वीणाकर धारी।
करती सदा सुहंस सवारी॥

Jai jai jai veenaakar dhaari,
karti sada suhans savaari.

अर्थ: जय हो, जय हो, हाथ में वीणा धारण करने वाली माँ की; आप सदा सुंदर हंस की सवारी करती हैं।

Meaning: Victory, victory, victory to you who hold the veena in your hand and always ride a graceful swan.

चौपाई 3

रूप चतुर्भुज धारी माता।
सकल विश्व अंदर विख्याता॥

Roop chaturbhuj dhaari maata,
sakal vishva andar vikhyaata.

अर्थ: हे माँ, आप चार भुजाओं वाला रूप धारण करती हैं और पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं।

Meaning: Mother, you take a four-armed form and are known throughout the world.

चौपाई 4

जग में पाप बुद्धि जब होती।
जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥

Jag mein paap buddhi jab hoti,
jabahi dharm ki pheeki jyoti.

अर्थ: जब संसार में लोगों की बुद्धि बुराई की ओर मुड़ती है, और धर्म की ज्योति फीकी पड़ जाती है,

Meaning: When people's minds in the world turn towards wrong, and the light of dharma grows dim,

चौपाई 5

तबहि मातु ले निज अवतारा।
पाप हीन करती महि तारा॥

Tabahi maatu le nij avtaara,
paap heen karti mahi taara.

अर्थ: तब माँ स्वयं अवतार लेती हैं, और धरती को बुराई से मुक्त करके उसका उद्धार करती हैं।

Meaning: then the Mother herself takes form, frees the earth of wrongdoing and carries it across.

चौपाई 6

वाल्मीकिजी थे हत्यारा।
तव प्रसाद जानै संसारा॥

Vaalmiki ji the hatyaara,
tav prasaad jaanai sansaara.

अर्थ: वाल्मीकि जी पहले एक हत्यारे डाकू थे; आपकी कृपा से वे क्या बने, यह सारा संसार जानता है।

Meaning: Valmiki was once a robber who took lives; the whole world knows what he became by your grace.

चौपाई 7

रामायण जो रचे बनाई।
आदि कवि की पदवी पाई॥

Raamaayan jo rache banaai,
aadi kavi ki padavi paai.

अर्थ: उन्होंने रामायण की रचना की और आदि कवि, यानी पहले कवि, की उपाधि पाई।

Meaning: He composed the Ramayana and earned the title of the first poet.

चौपाई 8

कालिदास जो भये विख्याता।
तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

Kaalidaas jo bhaye vikhyaata,
teri kripa drishti se maata.

अर्थ: हे माँ, कालिदास जो इतने प्रसिद्ध हुए, वे आपकी कृपा-दृष्टि से ही हुए।

Meaning: Kalidasa, who became so renowned, became so through your kind glance, Mother.

चौपाई 9

तुलसी सूर आदि विद्वाना।
भये और जो ज्ञानी नाना॥

Tulsi Soor aadi vidvaana,
bhaye aur jo gyaani naana.

अर्थ: तुलसीदास और सूरदास जैसे विद्वान, और जितने भी दूसरे ज्ञानी हुए,

Meaning: Scholars such as Tulsidas and Surdas, and all the many other wise ones who have lived,

चौपाई 10

तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा।
केवल कृपा आपकी अम्बा॥

Tinhahin na aur raheu avalamba,
keval kripa aapki Amba.

अर्थ: उनका कोई और सहारा नहीं था; हे अम्बा, केवल आपकी कृपा ही थी।

Meaning: had no other support; Mother, they had only your grace.

चौपाई 11

करहु कृपा सोइ मातु भवानी।
दुखित दीन निज दासहि जानी॥

Karahu kripa soi maatu Bhavaani,
dukhit deen nij daasahi jaani.

अर्थ: हे माँ भवानी, मुझे अपना दुखी, दीन सेवक जानकर वही कृपा कीजिए।

Meaning: Mother Bhavani, show me that same grace, knowing me as your own servant, troubled and humble.

चौपाई 12

पुत्र करै अपराध बहूता।
तेहि न धरइ चित सुंदर माता॥

Putra karai aparaadh bahoota,
tehi na dharai chit sundar maata.

अर्थ: बेटा चाहे कितनी भी ग़लतियाँ करे, सुंदर मन वाली माँ उन्हें मन में नहीं रखती।

Meaning: However many wrongs a child commits, a loving mother does not hold them in her heart.

चौपाई 13

राखु लाज जननि अब मेरी।
विनय करउँ बहु भाँति घनेरी॥

Raakhu laaj janani ab meri,
vinay karaun bahu bhaanti ghaneri.

अर्थ: हे जननी, अब मेरी लाज रखिए; मैं तरह-तरह से बार-बार विनती करता हूँ।

Meaning: Mother, protect my honour now; I plead with you again and again, in every way I can.

चौपाई 14

मैं अनाथ तेरी अवलंबा।
कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

Main anaath teri avalamba,
kripa karau jai jai Jagadamba.

अर्थ: मैं अनाथ हूँ, आप ही मेरा सहारा हैं; कृपा कीजिए, जय हो, जय हो जगदंबा।

Meaning: I have no one else; you are my only support. Be kind to me; victory, victory to you, Mother of the world.

चौपाई 15

मधु कैटभ जो अति बलवाना।
बाहुयुद्ध विष्णु ते ठाना॥

Madhu Kaitabh jo ati balvaana,
baahuyuddh Vishnu te thaana.

अर्थ: मधु और कैटभ, जो बहुत बलवान थे, उन्होंने विष्णु से मल्लयुद्ध ठाना।

Meaning: Madhu and Kaitabha, two demons of great strength, took on Vishnu in hand-to-hand combat.

चौपाई 16

समर हजार पाँच में घोरा।
फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥

Samar hazaar paanch mein ghora,
phir bhi mukh unse nahin mora.

अर्थ: पाँच हज़ार वर्षों तक घोर युद्ध चला, फिर भी उन्होंने मुँह नहीं मोड़ा।

Meaning: The fierce battle went on for five thousand years, and still they would not turn away.

चौपाई 17

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥

Maatu sahaay keenh tehi kaala,
buddhi vipreet bhai khalhaala.

अर्थ: उस समय माँ ने सहायता की, और उन दुष्टों की बुद्धि उलटी हो गई।

Meaning: At that moment the Mother came to help, and the minds of those wicked ones turned against themselves.

चौपाई 18

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

Tehi te mrityu bhai khal keri,
puravahu maatu manorath meri.

अर्थ: इसी से उन दुष्टों का अंत हुआ। हे माँ, मेरी मनोकामना भी पूरी कीजिए।

Meaning: That is how the wicked ones met their end. Mother, fulfil my heart's wish too.

चौपाई 19

चंड मुंड जो थे विख्याता।
छन महुँ संहारेउ तेहि माता॥

Chand Mund jo the vikhyaata,
chhan mahun sanhaareu tehi maata.

अर्थ: हे माँ, चंड और मुंड, जो बहुत प्रसिद्ध थे, उन्हें आपने क्षण भर में मार डाला।

Meaning: Chanda and Munda, the famous demons, you destroyed in a moment, Mother.

चौपाई 20

रक्तबीज से समरथ पापी।
सुर मुनि हृदय धरा सब काँपी॥

Raktabeej se samarath paapi,
sur muni hriday dhara sab kaanpi.

अर्थ: रक्तबीज जैसे शक्तिशाली पापी से देवताओं और मुनियों के हृदय और पूरी धरती काँप उठी।

Meaning: Before a mighty wrongdoer like Raktabija, the hearts of gods and sages trembled, and the whole earth shook.

चौपाई 21

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।
बार बार बिनवउँ जगदंबा॥

Kaateu sir jimi kadali khamba,
baar baar binavaun Jagadamba.

अर्थ: आपने उसका सिर ऐसे काट दिया जैसे केले का तना; हे जगदंबा, मैं बार-बार आपसे विनती करता हूँ।

Meaning: You cut off his head as easily as a banana stem. Mother of the world, again and again I pray to you.

चौपाई 22

जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।
छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥

Jag prasiddh jo Shumbh Nishumbha,
chhin mein badhe taahi too Amba.

अर्थ: हे अम्बा, शुंभ और निशुंभ, जो सारे जग में प्रसिद्ध थे, उन्हें आपने पल भर में मार दिया।

Meaning: Shumbha and Nishumbha, known throughout the world, you slew in an instant, Mother.

चौपाई 23

भरत मातु बुधि फेरेउ जाई।
रामचंद्र बनवास कराई॥

Bharat maatu budhi phereu jaai,
Ramchandra banvaas karaai.

अर्थ: आपने जाकर भरत की माता कैकेयी की बुद्धि फेर दी, और राम जी को वनवास दिलवाया।

Meaning: You went and turned the mind of Bharata's mother, Kaikeyi, and so brought about Rama's exile to the forest.

चौपाई 24

एहि विधि रावण वध तुम कीन्हा।
सुर नर मुनि सब कहुँ सुख दीन्हा॥

Ehi vidhi Raavan vadh tum keenha,
sur nar muni sab kahun sukh deenha.

अर्थ: इसी तरह आपने रावण का अंत करवाया, और देवताओं, मनुष्यों और मुनियों सबको सुख दिया।

Meaning: In this way you brought about Ravana's end and gave peace to gods, people and sages alike.

चौपाई 25

को समरथ तव यश गुन गाना।
निगम अनादि अनंत बखाना॥

Ko samarath tav yash gun gaana,
nigam anaadi anant bakhaana.

अर्थ: आपके यश और गुणों का गान करने में कौन समर्थ है? वेदों ने आपको अनादि और अनंत कहा है।

Meaning: Who could ever sing your glory and virtues in full? The Vedas call you without beginning and without end.

चौपाई 26

विष्णु रुद्र अज सकहिं न मारी।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

Vishnu Rudra Aj sakahin na maari,
jinki ho tum rakshaakaari.

अर्थ: जिनकी आप रक्षा करती हैं, उन्हें विष्णु, रुद्र और ब्रह्मा भी नहीं मार सकते।

Meaning: Those whom you protect, not even Vishnu, Rudra or Brahma could strike down.

चौपाई 27

रक्तदंतिका और शताक्षी।
नाम अपार है दानव भक्षी॥

Raktadantika aur Shataakshi,
naam apaar hai daanav bhakshi.

अर्थ: रक्तदंतिका और शताक्षी जैसे आपके अनगिनत नाम हैं, हे दानवों का अंत करने वाली।

Meaning: Raktadantika, Shatakshi: your names are countless, you who make an end of demons.

चौपाई 28

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

Durgam kaaj dhara par keenha,
Durga naam sakal jag leenha.

अर्थ: आपने धरती पर सबसे कठिन काम किया, इसलिए सारा जग आपको दुर्गा नाम से पुकारता है।

Meaning: You did on earth what was hardest to do, and so the whole world calls you Durga.

चौपाई 29

दुर्ग आदि हरनी तू माता।
कृपा करहु जब जब सुखदाता॥

Durg aadi harani too maata,
kripa karahu jab jab sukhdaata.

अर्थ: हे माँ, आप हर कठिनाई और संकट हरने वाली हैं; हे सुख देने वाली, हर बार कृपा कीजिए।

Meaning: Mother, you remove every hardship; giver of happiness, be kind to us whenever we call.

चौपाई 30

नृप कोपित जो मारन चाहै।
कानन में घेरे मृग नाहै॥

Nrip kopit jo maaran chaahai,
kaanan mein ghere mrig naahai.

अर्थ: जब कोई क्रोधित राजा मारना चाहे, या जंगल में शेर घेर ले,

Meaning: When an angry king seeks someone's life, or a lion corners them in the forest,

चौपाई 31

सागर मध्य पोत के भंगे।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥

Saagar madhya pot ke bhange,
ati toofaan nahin kou sange.

अर्थ: या बीच समुद्र में जहाज़ टूट जाए, भारी तूफ़ान हो और कोई साथ न हो,

Meaning: when a ship breaks apart in mid-ocean, in a great storm, with no one beside them,

चौपाई 32

भूत प्रेत बाधा या दुख में।
हो दरिद्र अथवा संकट में॥

Bhoot pret baadha ya dukh mein,
ho daridra athva sankat mein.

अर्थ: भूत-प्रेत की बाधा हो या दुख, ग़रीबी हो या कोई संकट,

Meaning: when troubled by spirits or by sorrow, in poverty or in danger,

चौपाई 33

नाम जपे मंगल सब होई।
संशय इसमें करइ न कोई॥

Naam jape mangal sab hoi,
sanshay ismein karai na koi.

अर्थ: आपका नाम जपने से सब मंगल होता है; इसमें कोई संदेह न करे।

Meaning: calling your name brings all that is good; let no one doubt it.

चौपाई 34

पुत्रहीन जो आतुर भाई।
सबै छाँड़ि पूजें एहि माई॥

Putraheen jo aatur bhaai,
sabai chhaandi poojen ehi maai.

अर्थ: हे भाई, जो संतान के लिए व्याकुल हैं, वे सब छोड़कर इन्हीं माँ की पूजा करते हैं।

Meaning: Those who long for a child, brother, set everything else aside and worship this Mother.

चौपाई 35

करै पाठ नित यह चालीसा।
होय पुत्र सुंदर गुण ईसा॥

Karai paath nit yah chaalisa,
hoy putra sundar gun eesa.

अर्थ: जो रोज़ यह चालीसा पढ़ता है, उसे सुंदर और गुणी संतान होती है, ऐसा यह स्तुति कहती है।

Meaning: Whoever reads this chalisa every day is blessed with a fine child, rich in good qualities, the hymn says.

चौपाई 36

धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।
संकट रहित अवश्य हो जावै॥

Dhoopaadik naivedya chadhaavai,
sankat rahit avashya ho jaavai.

अर्थ: जो धूप आदि और भोग चढ़ाता है, वह अवश्य संकटों से मुक्त हो जाता है।

Meaning: Whoever offers incense and food to her is surely freed from trouble.

चौपाई 37

भक्ति मातु की करै हमेशा।
निकट न आवै ताहि कलेशा॥

Bhakti maatu ki karai hamesha,
nikat na aavai taahi kalesha.

अर्थ: जो सदा माँ की भक्ति करता है, उसके पास क्लेश नहीं आता।

Meaning: Sorrow does not come near one who is always devoted to the Mother.

चौपाई 38

बंदी पाठ करें शत बारा।
बंदी पाश दूर हो सारा॥

Bandi paath karen shat baara,
bandi paash door ho saara.

अर्थ: कैदी अगर सौ बार पाठ करे, तो उसके सारे बंधन छूट जाते हैं।

Meaning: If one held captive recites it a hundred times, all their bonds fall away.

चौपाई 39

रामसागर बाँधि हेतु भवानी।
कीजै कृपा दास निज जानी॥

Ramsagar baandhi hetu Bhavaani,
keejai kripa daas nij jaani.

अर्थ: हे भवानी, रामसागर (कवि) से प्रेम के बंधन में बँधकर, उसे अपना सेवक जानकर कृपा कीजिए।

Meaning: Bhavani, bound to Ramsagar, the poet, by love, be kind to him, knowing him as your own servant.

अंतिम दोहा 1

मातु सूरज कांति तव, अंधकार मम रूप।
डूबन ते रक्षा करहु, परूँ न मैं भव कूप॥

Maatu sooraj kaanti tav, andhakaar mam roop,
dooban te raksha karahu, paroon na main bhav koop.

अर्थ: हे माँ, आपकी चमक सूरज जैसी है, और मैं अँधेरे जैसा हूँ; मुझे डूबने से बचाइए, ताकि मैं संसार के कुएँ में न गिरूँ।

Meaning: Mother, your radiance is like the sun's, and I am like the darkness; save me from drowning, so that I do not fall into the well of worldly life.

अंतिम दोहा 2

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वति मातु।
रामसागर अधम को, आश्रय तू ही दे दातु॥

Bal buddhi vidya dehu mohi, sunahu Sarasvati maatu,
Ramsagar adham ko, aashray too hi de daatu.

अर्थ: हे माँ सरस्वती, सुनिए: मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए। हे दाता, इस छोटे-से रामसागर को आप ही सहारा दीजिए।

Meaning: Hear me, Mother Saraswati: give me strength, understanding and learning. Giver of gifts, you alone can shelter this lowly Ramsagar.

सवाल-जवाब

सरस्वती चालीसा किसने लिखी?

कवि रामसागर के नाम से हस्ताक्षर करते हैं, दूसरे दोहे, अंतिम चौपाई और अंतिम दोहे में। उनके बारे में और कुछ ज्ञात नहीं; यह चालीसा छोटी छपी पुस्तिकाओं और गायन के ज़रिए चली आई है।

सरस्वती की स्तुति में दुर्गा की कथाएँ क्यों हैं?

देवी परंपरा में सभी देवियाँ एक ही माँ के रूप हैं। इन कथाओं का स्रोत देवी माहात्म्य उन्हें तीन रूपों में पूजता है, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती, और चालीसा इसी दृष्टि से चलती है: विद्या की देवी ही मधु-कैटभ, रक्तबीज और शुंभ को हराने वाली भी हैं।

सरस्वती को हंस और वीणा के साथ क्यों दिखाया जाता है?

माना जाता है कि हंस दूध और पानी को अलग कर देता है, जो ज्ञान से आने वाले विवेक की उपमा है; वीणा संगीत और कलाओं के सामंजस्य का प्रतीक है। हाथ की पुस्तक विद्या है, और माला निरंतर साधना।

क्या ज्योतिष में सरस्वती किसी ग्रह से जुड़ी हैं?

ज्योतिष में माँ सरस्वती को परंपरा से बुध ग्रह से जोड़ा जाता है, जो वाणी, विद्या और बुद्धि का ग्रह है, और कभी-कभी गुरु (बृहस्पति) से भी। चालीसा अपने आप में भक्ति की स्तुति है, कोई उपाय या किसी फल की गारंटी नहीं।

पाठ और स्रोत

पाठ को दो परिवारों की चार प्रकाशित प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: भारत डिस्कवरी (bharatdiscovery.org) और भक्ति भारत (bhaktibharat.com), जिनका हिंदी पाठ इंस्टाएस्ट्रो (instaastro.com) दोहराता है; और हिंदूपीडिया (hindupedia.com) व हिंदू ब्लॉग (hindu-blog.com), और इंस्टाएस्ट्रो का अंग्रेज़ी अक्षरों वाला पाठ, जो थोड़ा अलग पाठ मानते हैं। रणधीर प्रकाशन (हरिद्वार) के 51 चालीसा संग्रह में भी यह छपी है, पर उसका स्कैन पंक्ति-दर-पंक्ति पढ़ने लायक़ नहीं था। जहाँ दोनों परिवार अलग हैं, वहाँ हमने वह पाठ लिया है जो ज़्यादा स्रोतों में है और अर्थ व छंद में बेहतर बैठता है; रामसागर के अलावा कोई कवि नहीं बताया गया, और कोई स्रोत लेखक होने का दावा नहीं करता।

पाठभेद (पहले हमारा पाठ): दोहा 2 रामसागर के पाप को (भारत डिस्कवरी, भक्ति भारत, हिंदू ब्लॉग: दुष्टजनों के पाप को); चौ. 4–5 जबहि … तबहि मातु ले निज अवतारा, पाप हीन करती महि तारा (अन्य: तब ही … तब ही मातु का निज अवतारी, पाप हीन करती महतारी); चौ. 7 रामायण (अन्य: रामचरित); चौ. 12 चित सुंदर माता (अन्य में सुंदर नहीं); चौ. 13 बहु भाँति घनेरी (अन्य: भांति बहु तेरी); चौ. 15 विष्णु ते (अन्य: से); चौ. 17 कीन्ह … भई (हिंदू ब्लॉग व इंस्टाएस्ट्रो: भई … करी); चौ. 19 छन महुँ संहारेउ तेहि (अन्य: क्षण महु संहारे उन); चौ. 22 छिन में बधे (अन्य: क्षण में बाँधे); चौ. 24 तुम कीन्हा … सब कहुँ (अन्य: तू कीन्हा … सबको); चौ. 26 विष्णु रुद्र अज सकहिं न मारी (भारत डिस्कवरी व भक्ति भारत में बिगड़ा हुआ विष्णु रुद्र जस कहिन मारी); चौ. 30 जो … चाहै … नाहै (अन्य: को … चाहे … नाहे); चौ. 31 भंगे (अन्य: भंजे); चौ. 34 एहि माई (अन्य: एहि भाई); चौ. 38 शत (कहीं सत, वही शब्द); चौ. 39 रामसागर बाँधि हेतु भवानी, कीजै कृपा दास निज जानी (भारत डिस्कवरी, भक्ति भारत, हिंदूपीडिया; इंस्टाएस्ट्रो: करहु कृपा भवमुक्ति भवानी, मो कहँ दास सदा निज जानी; हिंदू ब्लॉग में कवि का नाम नहीं); अंतिम दोहा 1 सूरज … डूबन ते (कहीं सूर्य … डूबन से); अंतिम दोहा 2 रामसागर अधम को, आश्रय तू ही दे दातु (हिंदूपीडिया व इंस्टाएस्ट्रो: अधम रामसागरहिं तुम, आश्रय देउ पुनातु)। चौ. 39 का अर्थ (“रामसागर से प्रेम के बंधन में बँधकर”) एक कठिन पंक्ति का हमारा सावधान अर्थ है। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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