आरती · कृष्ण
आरती कुंजबिहारी की: कृष्ण जी की आरती अर्थ सहित
जन्माष्टमी की आधी रात और वृंदावन में हर शाम गाई जाने वाली कृष्ण जी की आरती: बाँसुरी, मोर-मुकुट, साथ में राधा, और चाँदनी में चमकती यमुना की रेत।
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ताली, घंटी और मंजीरे की हल्की आरती-ताल के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।
यह आरती क्या है
कुंजबिहारी वे कृष्ण हैं जो वृंदावन के फूलों भरे कुंजों में विहार करते हैं; गिरिधर वे जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया; मुरारी मुर राक्षस को मारने वाले। यह आरती प्रार्थना से ज़्यादा एक चित्र है: बाँसुरी और मोर-मुकुट वाला साँवला बालक, पास में चमकती राधा, दर्शन को तरसते देवता, और उनके चरणों से बहती गंगा। इसके रचयिता ज्ञात नहीं; यह ब्रज की पारंपरिक आरती है जो वृंदावन के मंदिरों में गाई जाती है।
कब गाई जाती है
- जन्माष्टमी, आधी रात को कृष्ण जन्म के उत्सव के बाद।
- एकादशी और गुरुवार, और लड्डू गोपाल वाले बहुत से घरों में रोज़ शाम।
- राधाष्टमी, होली और गोवर्धन पूजा पर, ख़ास तौर पर ब्रज में।
आरती कैसे करें
- कृष्ण जी या लड्डू गोपाल के चित्र के सामने बैठें; तुलसी दल, फूल और माखन-मिश्री या कोई मिठाई चढ़ाएँ।
- आरती की थाली में घी का दीया या कपूर जलाएँ; कोई घंटी बजाए या सब ताली बजाएँ।
- आरती गाते हुए थाली को धीरे-धीरे दाईं ओर घुमाएँ; हर पद के बाद टेक दोहराएँ।
- सब लौ के ऊपर से आरती लें, फिर प्रसाद बाँटें।
आरती कुंजबिहारी की, अर्थ सहित
टेक शुरू में और हर पद के बाद गाई जाती है।
सवाल-जवाब
“कुंजबिहारी” का क्या अर्थ है?
वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले: श्री कृष्ण। गिरिधर का अर्थ है पर्वत उठाने वाले, और मुरारी का मुर राक्षस को मारने वाले।
यह कब गाई जाती है?
सबसे बढ़कर जन्माष्टमी की आधी रात को, और एकादशी, गुरुवार को, तथा लड्डू गोपाल वाले घरों में रोज़।
पाठ और स्रोत
हिंदी (ब्रज) पाठ पारंपरिक, सार्वजनिक आरती है। हर पंक्ति द्रिक पंचांग और संस्कृत डॉक्यूमेंट्स के “आरती संग्रह” से मिलाई गई; जहाँ अंतर है, वहाँ हमने द्रिक का क्रम और शब्द लिए हैं, क्योंकि आरती संग्रह के पाठ में साफ़ लिपिकीय भूलें हैं (जैसे “अजेमुरचन” और “कसक मृद मंग”)। पाठांतर: गंगा वाला पद दूसरे स्थान पर; पद 1 में “नन्द के नन्द, श्री आनन्द कन्द, मोहन बृज चन्द”; पद 2 में “लतन” या “लसन”। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और अर्थ हमारे अपने हैं।
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