चालीसा · तुलसी

श्री तुलसी चालीसा: अर्थ सहित

विष्णु की प्रिय, पवित्र तुलसी माता की स्तुति। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: तुलसी चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

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तुलसी माता कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

तुलसी पवित्र पौधा है, और हिंदू घरों में देवी भी: तुलसी माता, या वृंदा। पुराण बताते हैं कि वे पहले असुर जलंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा थीं, जिनकी निष्ठा के कारण उनका पति हारता न था। देवताओं से जलंधर का युद्ध ख़त्म करने के लिए विष्णु ने उसके पति का रूप लेकर उनका व्रत तोड़ा; दुख में वृंदा ने उन्हें पत्थर, यानी शालिग्राम, बनने का श्राप दिया, और विष्णु ने उन्हें तुलसी का पौधा बनने का वर दिया, जो उन्हें इतना प्रिय है कि उनकी कोई पूजा तुलसी-दल के बिना पूरी नहीं होती। इस बंधन का उत्सव हर साल तुलसी विवाह में मनाया जाता है, जब तुलसी का विवाह शालिग्राम या कृष्ण से होता है।

भारत में अनगिनत घरों के आँगन या बालकनी में तुलसी का पौधा होता है; सुबह उसे जल दिया जाता है और शाम को दीया जलाया जाता है, और विष्णु व कृष्ण को चढ़ने वाले भोग में उसके पत्ते रखे जाते हैं।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। तुलसी चालीसा दो दोहों से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में चार दोहे। इसका अधिकांश भाग तुलसी की कथा तीन जन्मों में सुनाता है: विष्णु से विवाह की इच्छा और लक्ष्मी जी का श्राप, राधा जी के श्राप के बाद शंखचूड़ की पत्नी के रूप में जीवन, और वृंदा के रूप में जन्म, जलंधर का अंत और वे दो श्राप जिनसे वे तुलसी का पौधा और विष्णु शालिग्राम बने। यह ब्रज और अवधी मिली पारंपरिक लोक-स्तुति है। कवि का नाम निश्चित नहीं है: एक चौपाई में कवि सुंदर का नाम है, और अंतिम दोहे में तुलसीदास का, जो स्वयं को “तुलसी सूत सुखराम” कहते हैं; इन्हें रामचरितमानस वाले गोस्वामी तुलसीदास नहीं माना जाता।

तुलसी विवाह, यानी शालिग्राम रूप में विष्णु से तुलसी के विवाह का पर्व, इस वर्ष शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है, कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन; कुछ परिवार इसे एक दिन पहले, प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी को मनाते हैं।

कई परिवार इसे कार्तिक के महीने में और तुलसी विवाह पर पढ़ते हैं, और एक नियमित समय रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री तुलसी चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत के चार दोहे। कुछ पंक्तियाँ हर छपी प्रति में बिगड़ी हुई हैं; जहाँ अर्थ निश्चित नहीं है, वहाँ यह बताया गया है।

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दोहा 1

जय जय तुलसी भगवती, सत्यवती सुखदानी।
नमो नमो हरि प्रेयसी, श्री वृन्दा गुन खानी॥

Jai jai Tulsi Bhagavati, Satyavati sukhdaani,
namo namo Hari preyasi, Shri Vrinda gun khaani.

अर्थ: जय हो, जय हो देवी तुलसी, सत्य से भरी और सुख देने वाली। हरि की प्रिया, गुणों की खान श्री वृंदा, आपको बार-बार नमस्कार।

Meaning: Victory, victory to Goddess Tulsi, full of truth and giver of joy. Again and again I bow to you, beloved of Hari, Shri Vrinda, a treasury of virtues.

दोहा 2

श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब।
जनहित हे वृन्दावनी, अब न करहु विलम्ब॥

Shri Hari sheesh birajini, dehu amar var Amb,
janhit he Vrindavani, ab na karahu vilamb.

अर्थ: हे माँ, जो श्री हरि के मस्तक पर विराजती हैं, अमर वरदान दीजिए। हे वृंदावन वाली, लोगों के भले के लिए अब देर न कीजिए।

Meaning: Mother, you who rest on Shri Hari's head, grant a lasting blessing. Lady of Vrindavan, for the good of all, delay no longer.

चौपाई 1

धन्य धन्य श्री तुलसी माता।
महिमा अगम सदा श्रुति गाता॥

Dhanya dhanya Shri Tulsi Maata,
mahima agam sada shruti gaata.

अर्थ: धन्य हैं, धन्य हैं श्री तुलसी माता; आपकी महिमा अपार है, जिसे वेद सदा गाते हैं।

Meaning: Blessed, blessed is Mother Tulsi; your glory is beyond reach, and the Vedas sing it always.

चौपाई 2

हरि के प्राणहु से तुम प्यारी।
हरिहीं हेतु कीन्हो तप भारी॥

Hari ke praanahu se tum pyaari,
Harihin hetu keenho tap bhaari.

अर्थ: आप हरि को उनके प्राणों से भी प्यारी हैं; हरि को पाने के लिए ही आपने भारी तप किया।

Meaning: You are dearer to Hari than his own life; it was for Hari alone that you did great austerities.

चौपाई 3

जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो।
तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो॥

Jab prasann hai darshan deenhyo,
tab kar jori vinay us keenhyo.

अर्थ: जब हरि ने प्रसन्न होकर दर्शन दिए, तब आपने हाथ जोड़कर यह विनती की:

Meaning: When Hari, pleased, appeared before you, you folded your hands and made this request:

चौपाई 4

हे भगवन्त कन्त मम होहू।
दीन जानी जनि छाडाहू छोहु॥

He Bhagavant kant mam hohu,
deen jaani jani chhaadahu chhohu.

अर्थ: “हे भगवान, आप मेरे पति बनिए; मुझे दीन जानकर अपना स्नेह न छोड़िए।”

Meaning: “Lord, become my husband; knowing how humble I am, do not withdraw your love.”

चौपाई 5

सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी।
दीन्हो श्राप कध पर आनी॥

Suni Lakshmi Tulsi ki baani,
deenho shraap kadh par aani.

अर्थ: तुलसी की यह बात सुनकर लक्ष्मी जी ने क्रोध में आकर श्राप दिया:

Meaning: When Lakshmi heard Tulsi's words, she grew angry and laid a curse on her:

चौपाई 6

उस अयोग्य वर मांगन हारी।
होहू विटप तुम जड़ तनु धारी॥

Us ayogya var maangan haari,
hohu vitap tum jad tanu dhaari.

अर्थ: “तुमने ऐसा अनुचित वर माँगा है, इसलिए तुम पेड़ बनो, ऐसा शरीर धारण करो जो चल न सके।”

Meaning: “You who ask for so unfitting a boon, become a plant, taking a body that cannot move.”

चौपाई 7

सुनी तुलसी हीं श्रप्यो तेहिं ठामा।
करहु वास तुहू नीचन धामा॥

Suni Tulsi hin shrapyo tehin thaama,
karahu vaas tuhu neechan dhaama.

अर्थ: यह सुनकर तुलसी ने भी उसी जगह श्राप दिया: “तुम भी नीच लोगों के घरों में रहोगी।”

Meaning: Hearing this, Tulsi cursed her in return, there and then: “You too will live in the homes of the unworthy.”

चौपाई 8

दियो वचन हरि तब तत्काला।
सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला॥

Diyo vachan Hari tab tatkaala,
sunahu sumukhi jani hohu bihaala.

अर्थ: तब हरि ने तुरंत वचन दिया: “सुनो, सुंदर मुख वाली, व्याकुल मत हो।”

Meaning: Then Hari at once gave his word: “Listen, fair one, do not be distressed.”

चौपाई 9

समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा।
पुजिहौ आस वचन सत मोरा॥

Samay paai vhau rau paati tora,
pujihau aas vachan sat mora.

अर्थ: “समय आने पर मैं तुम्हारा पति बनूँगा, तुम्हारी आशा पूरी होगी; मेरा वचन सच्चा है।”

Meaning: “When the time comes I shall be your husband and your hope will be fulfilled; my word is true.”

चौपाई 10

तब गोकुल मह गोप सुदामा।
तासु भई तुलसी तू बामा॥

Tab Gokul mah gop Sudaama,
taasu bhai Tulsi too baama.

अर्थ: फिर गोकुल में सुदामा नाम का एक ग्वाला था; हे तुलसी, आप उसकी पत्नी बनीं।

Meaning: Then in Gokul there was a cowherd named Sudama, and you, Tulsi, became his wife.

चौपाई 11

कृष्ण रास लीला के माही।
राधे शक्यो प्रेम लखी नाही॥

Krishna raas leela ke maahi,
Raadhe shakyo prem lakhi naahi.

अर्थ: कृष्ण की रास लीला में राधा जी आपका प्रेम देखकर सह न सकीं,

Meaning: In Krishna's circle dance, Radha could not bear to see your love,

चौपाई 12

दियो श्राप तुलसिह तत्काला।
नर लोकही तुम जन्महु बाला॥

Diyo shraap Tulsih tatkaala,
nar lokahi tum janmahu baala.

अर्थ: और उन्होंने तुरंत तुलसी को श्राप दिया: “हे बाला, तुम मनुष्यों के लोक में जन्म लो।”

Meaning: and at once she cursed Tulsi: “Girl, be born in the world of mortals.”

चौपाई 13

यो गोप वह दानव राजा।
शङ्खचूड नामक शिर ताजा॥

Yo gop vah daanav raaja,
Shankhachood naamak shir taaja.

अर्थ: वह ग्वाला दानवों का राजा बना, शंखचूड़ नाम का, जिसके सिर पर मुकुट था।

Meaning: That cowherd became a king of the danavas, named Shankhachuda, with a crown upon his head.

चौपाई 14

तुलसी भई तासु की नारी।
परम सती गुण रूप अगारी॥

Tulsi bhai taasu ki naari,
param sati gun roop agaari.

अर्थ: तुलसी उसकी पत्नी बनीं, परम पतिव्रता, गुण और रूप का घर।

Meaning: Tulsi became his wife, wholly faithful, a home of virtue and beauty.

चौपाई 15

अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ।
कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ॥

As dvai kalp beet jab gayau,
kalp triteeya janm tab bhayau.

अर्थ: इस तरह जब दो कल्प बीत गए, तब तीसरे कल्प में आपका जन्म हुआ।

Meaning: So two ages of the world went by, and in the third age you were born again.

चौपाई 16

वृन्दा नाम भयो तुलसी को।
असुर जलन्धर नाम पति को॥

Vrinda naam bhayo Tulsi ko,
asur Jalandhar naam pati ko.

अर्थ: तब तुलसी का नाम वृंदा हुआ, और उनके पति का नाम असुर जलंधर था।

Meaning: Then Tulsi was named Vrinda, and her husband was the asura Jalandhar.

चौपाई 17

करि अति द्वन्द अतुल बलधामा।
लीन्हा शंकर से संग्राम॥

Kari ati dvand atul baldhaama,
leenha Shankar se sangraam.

अर्थ: अपार बल वाले जलंधर ने बड़ा झगड़ा खड़ा किया और शंकर जी से युद्ध छेड़ दिया।

Meaning: Jalandhar, a storehouse of matchless strength, stirred up great strife and went to war with Shankar.

चौपाई 18

जब निज सैन्य सहित शिव हारे।
मरही न तब हर हरिही पुकारे॥

Jab nij sainya sahit Shiv haare,
marahi na tab Har Harihi pukaare.

अर्थ: जब अपनी सेना सहित शिव जी हारने लगे और जलंधर मरता न था, तब हर (शिव) ने हरि (विष्णु) को पुकारा।

Meaning: When Shiva and his army were beaten back and Jalandhar would not die, Hara called on Hari for help.

चौपाई 19

पतिव्रता वृन्दा थी नारी।
कोऊ न सके पतिहि संहारी॥

Pativrata Vrinda thi naari,
kou na sake patihi sanhaari.

अर्थ: वृंदा पतिव्रता स्त्री थीं, इसलिए कोई उनके पति को मार नहीं सकता था।

Meaning: Vrinda was a wife of perfect faithfulness, and so no one could kill her husband.

चौपाई 20

तब जलन्धर ही भेष बनाई।
वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई॥

Tab Jalandhar hi bhesh banaai,
Vrinda dhig Hari pahuchyo jaai.

अर्थ: तब हरि जलंधर का ही वेश बनाकर वृंदा के पास जा पहुँचे।

Meaning: Then Hari took on Jalandhar's own form and went to Vrinda.

चौपाई 21

शिव हित लही करि कपट प्रसंगा।
कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा॥

Shiv hit lahi kari kapat prasanga,
kiyo satitva dharm tohi bhanga.

अर्थ: शिव की भलाई के लिए छल का सहारा लेकर उन्होंने आपके पतिव्रत धर्म को भंग कर दिया।

Meaning: For Shiva's sake he used a deception, and broke your vow of faithfulness.

चौपाई 22

भयो जलन्धर कर संहारा।
सुनी उर शोक उपारा॥

Bhayo Jalandhar kar sanhaara,
suni ur shok upaara.

अर्थ: जलंधर मारा गया; यह सुनकर आपके हृदय में गहरा शोक उमड़ा।

Meaning: Jalandhar was slain; hearing it, a deep grief rose in your heart.

चौपाई 23

तिही क्षण दियो कपट हरि टारी।
लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी॥

Tihi kshan diyo kapat Hari taari,
lakhi Vrinda dukh gira uchaari.

अर्थ: उसी क्षण हरि ने छल का वेश हटा दिया; यह देखकर वृंदा ने दुख से भरे वचन कहे:

Meaning: At that moment Hari put off the disguise; seeing it, Vrinda spoke in sorrow:

चौपाई 24

जलन्धर जस हत्यो अभीता।
सोई रावन तस हरिही सीता॥

Jalandhar jas hatyo abheeta,
soi Raavan tas harihi Seeta.

अर्थ: “जैसे तुमने निडर जलंधर को मारा है, वैसे ही रावण तुम्हारी सीता को हर ले जाएगा।”

Meaning: “As you have killed the fearless Jalandhar, so Ravana will carry off your Sita.”

चौपाई 25

अस प्रस्तर सम हृदय तुम्हारा।
धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा॥

As prastar sam hriday tumhaara,
dharm khandi mam patihi sanhaara.

अर्थ: “तुम्हारा हृदय पत्थर जैसा है; धर्म तोड़कर तुमने मेरे पति को मरवाया।”

Meaning: “Your heart is like stone: breaking dharma, you brought about my husband's death.”

चौपाई 26

यही कारण लही श्राप हमारा।
होवे तनु पाषाण तुम्हारा॥

Yahi kaaran lahi shraap hamaara,
hove tanu paashaan tumhaara.

अर्थ: “इसी कारण मेरा श्राप लो: तुम्हारा शरीर पत्थर का हो जाए।”

Meaning: “For this, take my curse: may your body turn to stone.”

चौपाई 27

सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे।
दियो श्राप बिना विचारे॥

Suni Hari turatahi vachan uchaare,
diyo shraap bina vichaare.

अर्थ: यह सुनकर हरि ने तुरंत कहा: “तुमने बिना सोचे-समझे श्राप दिया है।”

Meaning: Hearing this, Hari answered at once: “You have cursed without thinking.”

चौपाई 28

लख्यो न निज करतूती पति को।
छलन चह्यो जब पारवती को॥

Lakhyo na nij kartooti pati ko,
chhalan chahyo jab Paarvati ko.

अर्थ: “तुमने अपने पति की करतूत नहीं देखी, जब उसने पार्वती जी को छलना चाहा था।”

Meaning: “You did not see what your own husband did when he tried to deceive Parvati.”

चौपाई 29

जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा।
जग मह तुलसी विटप अनूपा॥

Jadmati tuhu as ho jadroopa,
jag mah Tulsi vitap anoopa.

अर्थ: “हे भोली, तुम भी अचल रूप धारण करो, और संसार में तुलसी का अनुपम पौधा बनो।”

Meaning: “Simple-hearted one, you too shall take a still form, and become the matchless Tulsi plant in the world.”

चौपाई 30

धग्व रूप हम शालिग्रामा।
नदी गण्डकी बीच ललामा॥

Dhagv roop ham Shaaligraama,
nadi Gandaki beech lalaama.

अर्थ: “मैं गंडकी नदी में सुंदर शालिग्राम का रूप धारण करूँगा।”

Meaning: “And I shall take the form of the Shaligram stone, beautiful in the river Gandaki.”

चौपाई 31

जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं।
सब सुख भोगी परम पद पईहै॥

Jo Tulsi dal hamahi chadh ihain,
sab sukh bhogi param pad paihai.

अर्थ: “जो मुझे तुलसी के पत्ते चढ़ाएगा, वह सब सुख भोगकर परम पद पाएगा।”

Meaning: “Whoever offers me Tulsi leaves will know every happiness and reach the highest state.”

चौपाई 32

बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा।
अतिशय उठत शीश उर पीरा॥

Binu Tulsi Hari jalat shareera,
atishay uthat sheesh ur peera.

अर्थ: तुलसी के बिना हरि का शरीर जलता है, और सिर व हृदय में बहुत पीड़ा उठती है।

Meaning: Without Tulsi, Hari's body burns, and great pain rises in his head and heart.

चौपाई 33

जो तुलसी दल हरि शिर धारत।
सो सहस्र घट अमृत डारत॥

Jo Tulsi dal Hari shir dhaarat,
so sahasra ghat amrit daarat.

अर्थ: जो हरि के सिर पर तुलसी का पत्ता रखता है, मानो वह हज़ार घड़े अमृत चढ़ाता है।

Meaning: Whoever places a Tulsi leaf on Hari's head pours, as it were, a thousand pots of nectar.

चौपाई 34

तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी।
रोग दोष दुःख भंजनी हारी॥

Tulsi Hari man ranjani haari,
rog dosh dukh bhanjani haari.

अर्थ: तुलसी हरि के मन को प्रसन्न करने वाली हैं, और रोग, दोष और दुख को मिटाने वाली हैं।

Meaning: Tulsi delights Hari's heart and breaks the hold of illness, fault and sorrow.

चौपाई 35

प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर।
तुलसी राधा में नाही अन्तर॥

Prem sahit Hari bhajan nirantar,
Tulsi Raadha mein naahi antar.

अर्थ: प्रेम से हरि का निरंतर भजन करने में तुलसी और राधा में कोई अंतर नहीं है।

Meaning: In their constant, loving devotion to Hari, there is no difference between Tulsi and Radha.

चौपाई 36

व्यञ्जन हो छप्पनहु प्रकारा।
बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा॥

Vyanjan ho chhappanahu prakaara,
binu Tulsi dal na Harihi pyaara.

अर्थ: चाहे छप्पन प्रकार के व्यंजन हों, तुलसी के पत्ते के बिना वे हरि को प्रिय नहीं।

Meaning: Even a feast of fifty-six dishes does not please Hari without a Tulsi leaf.

चौपाई 37

सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही।
लहत मुक्ति जन संशय नाही॥

Sakal teerth Tulsi taru chhaahi,
lahat mukti jan sanshay naahi.

अर्थ: तुलसी के पौधे की छाया में सारे तीर्थ हैं; वहाँ लोग मुक्ति पाते हैं, इसमें संदेह नहीं।

Meaning: All the holy places lie in the shade of the Tulsi plant; there people find liberation, without a doubt.

चौपाई 38

कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत।
तुलसिहि निकट सहसगुण पावत॥

Kavi Sundar ik Hari gun gaavat,
Tulsihi nikat sahasgun paavat.

अर्थ: कवि सुंदर कहते हैं: तुलसी के पास बैठकर हरि का गुण-गान करने वाला हज़ार गुना फल पाता है।

Meaning: The poet Sundar says: one who sings Hari's praise near Tulsi gains a thousandfold.

चौपाई 39

बसत निकट दुर्बासा धामा।
जो प्रयास ते पूर्व ललामा॥

Basat nikat Durbaasa dhaama,
jo prayaas te poorv lalaama.

अर्थ: (कवि) दुर्वासा ऋषि के धाम के पास रहते हैं; इस पंक्ति का दूसरा भाग छपे पाठों में स्पष्ट नहीं है।

Meaning: (The poet) lives near the dwelling of the sage Durvasa; the second half of this line is unclear in the printed texts.

चौपाई 40

पाठ करहि जो नित नर नारी।
होही सुख भाषहि त्रिपुरारी॥

Paath karahi jo nit nar naari,
hohi sukh bhaashahi Tripuraari.

अर्थ: जो स्त्री-पुरुष रोज़ इसका पाठ करते हैं, वे सुखी होते हैं: ऐसा त्रिपुरारी (शिव) कहते हैं।

Meaning: The men and women who recite it daily find happiness: so says Tripurari, Shiva.

अंतिम दोहा 1

तुलसी चालीसा पढ़ही, तुलसी तरु ग्रह धारी।
दीपदान करि पुत्र फल, पावही बन्ध्यहु नारी॥

Tulsi chaalisa padhahi, Tulsi taru grah dhaari,
deepdaan kari putra phal, paavahi bandhyahu naari.

अर्थ: जो तुलसी चालीसा पढ़ती है, घर में तुलसी का पौधा रखती है और दीपदान करती है, वह संतान से वंचित स्त्री भी संतान का फल पाती है।

Meaning: A woman who reads the Tulsi Chalisa, keeps a Tulsi plant at home and offers a lamp, even if she has longed in vain for a child, receives that blessing.

अंतिम दोहा 2

सकल दुःख दरिद्र हरि, हार ह्वै परम प्रसन्न।
आशिय धन जन लड़हि, ग्रह बसही पूर्णा अत्र॥

Sakal dukh daridra Hari, haar hvai param prasann,
aashiy dhan jan ladahi, grah basahi poorna atra.

अर्थ: हरि अत्यंत प्रसन्न होकर सारे दुख और दरिद्रता हर लेते हैं; ऐसे लोग आशीर्वाद, धन और परिवार पाते हैं और अन्न से भरे घर में रहते हैं।

Meaning: Hari, greatly pleased, takes away all sorrow and want; such devotees receive blessings, wealth and family, and live in a home full of grain.

अंतिम दोहा 3

लाही अभिमत फल जगत मह, लाही पूर्ण सब काम।
जेई दल अर्पही तुलसी तंह, सहस बसही हरीराम॥

Laahi abhimat phal jagat mah, laahi poorn sab kaam,
jei dal arpahi Tulsi tanh, sahas basahi Hariraam.

अर्थ: वे संसार में मनचाहा फल पाते हैं और उनके सब काम पूरे होते हैं; जहाँ तुलसी के पत्ते अर्पित होते हैं, वहाँ हरि हज़ार रूपों में बसते हैं।

Meaning: They gain the fruit they wish for in this world and see all their work fulfilled; where Tulsi leaves are offered, Hari dwells a thousandfold.

अंतिम दोहा 4

तुलसी महिमा नाम लख, तुलसी सूत सुखराम।
मानस चालीस रच्यो, जग महं तुलसीदास॥

Tulsi mahima naam lakh, Tulsi soot Sukhraam,
maanas chaalees rachyo, jag mahan Tulsidaas.

अर्थ: तुलसी के नाम की महिमा देखकर कवि तुलसीदास ने, जो स्वयं को “तुलसी सूत सुखराम” कहते हैं, संसार के लिए ये चालीस पद रचे। (इस दोहे का अर्थ छपे पाठों में पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।)

Meaning: Seeing the glory of Tulsi's name, the poet Tulsidas, who calls himself “Sukhram, son of Tulsi”, composed these forty verses for the world. (The sense of this doha is not fully clear in the printed texts.)

सवाल-जवाब

तुलसी चालीसा किसने लिखी?

यह निश्चित नहीं है। पाठ एक चौपाई में कवि सुंदर का नाम लेता है, और अंतिम दोहे में तुलसीदास का, जो स्वयं को “तुलसी सूत सुखराम” कहते हैं। इनके बारे में और कुछ ज्ञात नहीं है, और यह स्तुति हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की नहीं मानी जाती। यह पारंपरिक लोक-स्तुति है।

वृंदा ने विष्णु को श्राप क्यों दिया?

विष्णु उनके पति जलंधर का रूप लेकर उनके पास आए, ताकि उनका पतिव्रत, जो जलंधर की रक्षा करता था, टूट जाए और देवताओं पर उसका युद्ध ख़त्म हो। छल का पता चलने पर उन्होंने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) बनने और, जैसे जलंधर ने प्राण खोए, वैसे ही अपनी पत्नी खोने का श्राप दिया, जिसे चालीसा रावण द्वारा सीता-हरण से जोड़ती है। बदले में विष्णु ने उन्हें तुलसी का पौधा बनाया, जो सदा उन्हें प्रिय है।

क्या तुलसी चालीसा एक से अधिक हैं?

हाँ। इस पेज पर सबसे ज़्यादा छपने वाली चालीसा है, जो “जय जय तुलसी भगवती” से शुरू होती है। एक और, छोटी स्तुति “श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय” से शुरू होती है, जो कथा के बजाय प्रशंसा की प्रार्थना है।

शालिग्राम क्या है?

नेपाल की गंडकी नदी में मिलने वाला चिकना काला पत्थर, जिसमें अक्सर किसी प्राचीन जीवाश्म का चक्र होता है, और जिसे विष्णु का रूप मानकर पूजा जाता है। चालीसा में वृंदा के श्राप के कारण विष्णु यह रूप लेते हैं, इसीलिए तुलसी और शालिग्राम की पूजा साथ होती है।

पाठ और स्रोत

पाठ को तीन प्रकाशित प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: भक्ति भारत (bhaktibharat.com), इंस्टाएस्ट्रो (instaastro.com) और नवभारत लाइव (navbharatlive.com)। तीनों में शब्द एक जैसे हैं, बिगड़ी पंक्तियाँ भी, इसलिए ये एक ही छपी परंपरा से हैं; नवभारत लाइव ने छपाई की कुछ भूलें सुधारी हैं। हम तीनों की तरह दो आरंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ और चार अंतिम दोहे देते हैं। एक अलग, छोटी तुलसी चालीसा (“श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय”, आज तक पर छपी) यहाँ नहीं दी गई।

पाठ: चौ. 1 तुलसी (नवभारत लाइव; बाक़ी दो में छपाई की भूल तलसी); चौ. 2 हरिहीं (छपा हरीहीँ); चौ. 13 शङ्खचूड (छपा शङ्ख चुड); चौ. 25 हृदय (कहीं ह्रदय); चौ. 33 सहस्र (कहीं सहस्त्र); चौ. 36 व्यञ्जन (छपा व्यन्जन)। ये पंक्तियाँ ठीक वैसी रखी गई हैं जैसी तीनों में छपी हैं, भले उनके शब्द घिसे हुए हैं: चौ. 5 कध पर आनी (अर्थ, “क्रोध में”, से लगता है मूल क्रोध उर आनी था); चौ. 9 व्हौ रौ पाती तोरा (अर्थ “मैं तुम्हारा पति बनूँगा”); चौ. 17 संग्राम (तुक से संग्रामा लगता है); चौ. 22 सुनी उर शोक उपारा (अर्थ “हृदय में गहरा शोक उमड़ा”); चौ. 30 धग्व रूप (अर्थ “रूप धारण करूँगा”, शायद धरब रूप); चौ. 39, जिसका दूसरा भाग हम नहीं समझ सके; और दूसरा व चौथा अंतिम दोहा। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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