चालीसा · विष्णु

श्री विष्णु चालीसा: अर्थ सहित

जगत के पालनहार विष्णु की चालीस छोटी चौपाइयाँ, जो उनके अवतारों की कथा कहती हैं और विनम्र प्रार्थना पर पूरी होती हैं। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: विष्णु चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

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पूरा पाठ तेज़ गति में, जैसे बहुत से लोग रोज़ पढ़ते हैं; कुछ भी छोड़ा नहीं गया।

विष्णु कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

विष्णु त्रिदेवों में पालनहार हैं, सृष्टि रचने वाले ब्रह्मा और परिवर्तन करने वाले शिव के साथ। उन्हें साँवले-नीले रंग का, क्षीर सागर में शेषनाग पर विश्राम करते हुए दिखाया जाता है, चरणों में लक्ष्मी जी, हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल। पुराण कहते हैं कि जब-जब धर्म कमज़ोर पड़ता है, वे अवतार लेकर संसार में आते हैं: मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह, नरसिंह, राम, कृष्ण और अन्य रूपों में।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। विष्णु चालीसा एक दोहे से शुरू होती है और उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं। पहले आधे भाग में विष्णु के रूप की स्तुति और अवतारों की कथाएँ हैं: राम, वराह, समुद्र-मंथन और मोहिनी, भस्मासुर, और असुर जलंधर व उसकी पतिव्रता पत्नी वृंदा की कथा, जो आगे की परंपरा में तुलसी बनती हैं। दूसरा आधा भाग विनम्र निजी प्रार्थना है: “मैं आपकी पूजा का सही तरीका नहीं जानता; मुझे अपना लीजिए।” लेखक ज्ञात नहीं है; अंतिम पंक्ति में “निगम” नाम आता है, जो कवि का नाम भी हो सकता है और सीधे वेदों का अर्थ भी। यह पारंपरिक लोक-स्तुति है, जो चालीसा संग्रहों में बिना लेखक के नाम के छपती है।

कई परिवार इसे गुरुवार और एकादशी को पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री विष्णु चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू का एक दोहा और चालीस चौपाइयाँ। जलंधर-कथा की कुछ पंक्तियाँ हर संस्करण में अस्पष्ट शब्दों में हैं; उनके अर्थ सावधानी से दिए गए हैं, और नीचे स्रोत वाले भाग में उनकी व्याख्या है।

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आरंभ का दोहा

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय॥

Vishnu suniye vinay sevak ki chit laay,
keerat kuchh varnan karoon deejai gyaan bataay.

अर्थ: हे विष्णु, अपने सेवक की विनती मन लगाकर सुनिए। मैं आपकी कीर्ति का कुछ वर्णन करना चाहता हूँ, मुझे उसका ज्ञान दीजिए।

Meaning: Vishnu, listen with attention to your servant's prayer. I wish to tell a little of your glory; give me the understanding to do it.

चौपाई 1

नमो विष्णु भगवान खरारी।
कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥

Namo Vishnu Bhagwan Kharaari,
kasht nashaavan akhil bihaari.

अर्थ: हे भगवान विष्णु, खर राक्षस के शत्रु, आपको नमस्कार; आप कष्ट मिटाने वाले हैं और सारे जगत में विहार करते हैं।

Meaning: I bow to you, Lord Vishnu, enemy of the demon Khara; you end suffering and move freely through the whole universe.

चौपाई 2

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥

Prabal jagat mein shakti tumhaari,
tribhuvan phail rahi ujiyaari.

अर्थ: संसार में आपकी शक्ति सबसे प्रबल है, और आपका उजाला तीनों लोकों में फैला है।

Meaning: Your power is mightiest in the world, and your light spreads through the three worlds.

चौपाई 3

सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥

Sundar roop manohar soorat,
saral swabhaav mohani moorat.

अर्थ: आपका रूप सुंदर है, चेहरा मन को भाने वाला; स्वभाव सरल है और मूर्ति मन मोह लेती है।

Meaning: Your form is beautiful and your face delights the heart; your nature is simple and your image enchanting.

चौपाई 4

तन पर पीताम्बर अति सोहत।
बैजन्ती माला मन मोहत॥

Tan par peetaambar ati sohat,
baijanti maala man mohat.

अर्थ: शरीर पर पीला वस्त्र बहुत शोभा देता है, और वैजयंती माला मन मोह लेती है।

Meaning: The yellow robe looks splendid on you, and the Vaijayanti garland charms the heart.

चौपाई 5

शंख चक्र कर गदा बिराजे।
देखत दैत्य असुर दल भाजे॥

Shankh chakra kar gada biraaje,
dekhat daitya asur dal bhaaje.

अर्थ: आपके हाथों में शंख, चक्र और गदा शोभित हैं; इन्हें देखते ही दैत्यों और असुरों के दल भाग जाते हैं।

Meaning: The conch, the discus and the mace shine in your hands; at the sight of them the hosts of demons run away.

चौपाई 6

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥

Satya dharm mad lobh na gaaje,
kaam krodh mad lobh na chhaaje.

अर्थ: आपमें सत्य और धर्म गूँजते हैं, घमंड और लालच की आवाज़ नहीं; काम, क्रोध, मद और लोभ आपको छू भी नहीं पाते।

Meaning: In you truth and dharma resound, and pride and greed have no voice; desire, anger, pride and greed find no place in you.

चौपाई 7

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन।
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥

Sant bhakt sajjan manranjan,
danuj asur dushtan dal ganjan.

अर्थ: आप संतों, भक्तों और सज्जनों का मन प्रसन्न करते हैं, और दानवों, असुरों और दुष्टों के दल का नाश करते हैं।

Meaning: You gladden the hearts of saints, devotees and good people, and you crush the hosts of demons and the wicked.

चौपाई 8

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।
दोष मिटाय करत जन सज्जन॥

Sukh upjaay kasht sab bhanjan,
dosh mitaay karat jan sajjan.

अर्थ: आप सुख उपजाते हैं और सब कष्ट तोड़ देते हैं; दोष मिटाकर लोगों को सज्जन बना देते हैं।

Meaning: You bring forth happiness and break every hardship; you wipe away faults and make people good.

चौपाई 9

पाप काट भव सिन्धु उतारण।
कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥

Paap kaat bhav sindhu utaaran,
kasht naashkar bhakt ubaaran.

अर्थ: आप पाप काटकर संसार-सागर से पार उतारते हैं, और कष्ट मिटाकर भक्तों को उबारते हैं।

Meaning: You cut away sin and carry us across the ocean of worldly life; you end suffering and lift your devotees out of it.

चौपाई 10

करत अनेक रूप प्रभु धारण।
केवल आप भक्ति के कारण॥

Karat anek roop prabhu dhaaran,
keval aap bhakti ke kaaran.

अर्थ: हे प्रभु, आप अनेक रूप धारण करते हैं, केवल भक्ति और भक्तों के कारण।

Meaning: Lord, you take on many forms, only for the sake of devotion and your devotees.

चौपाई 11

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।
तब तुम रूप राम का धारा॥

Dharani dhenu ban tumahin pukaara,
tab tum roop Raam ka dhaara.

अर्थ: जब धरती ने गाय बनकर आपको पुकारा, तब आपने राम का रूप धारण किया।

Meaning: When the Earth took the form of a cow and called out to you, you took the form of Rama.

चौपाई 12

भार उतार असुर दल मारा।
रावण आदिक को संहारा॥

Bhaar utaar asur dal maara,
Raavan aadik ko sanhaara.

अर्थ: आपने धरती का भार उतारा, असुरों के दल को मारा, और रावण आदि का संहार किया।

Meaning: You lifted the Earth's burden, struck down the demon hosts, and destroyed Ravana and the others.

चौपाई 13

आप वाराह रूप बनाया।
हिरण्याक्ष को मार गिराया॥

Aap Vaaraah roop banaaya,
Hiranyaaksh ko maar giraaya.

अर्थ: आपने वराह (सूअर) का रूप बनाया और हिरण्याक्ष को मार गिराया।

Meaning: You took the form of Varaha, the boar, and struck down Hiranyaksha.

चौपाई 14

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया।
चौदह रतनन को निकलाया॥

Dhar matsya tan sindhu banaaya,
chaudah ratanan ko niklaaya.

अर्थ: मछली का शरीर धरकर आपने सागर में लीला की, और चौदह रत्न बाहर निकलवाए।

Meaning: Taking the body of a fish you moved through the ocean, and you had the fourteen treasures brought out of it.

चौपाई 15

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया।
रूप मोहनी आप दिखाया॥

Amilakh asuran dwand machaaya,
roop Mohini aap dikhaaya.

अर्थ: अमृत को देखकर असुरों ने झगड़ा मचा दिया, तब आपने मोहिनी का रूप दिखाया।

Meaning: Seeing the nectar, the demons started a quarrel, and you showed yourself as Mohini.

चौपाई 16

देवन को अमृत पान कराया।
असुरन को छवि से बहलाया॥

Devan ko amrit paan karaaya,
asuran ko chhavi se bahlaaya.

अर्थ: आपने देवताओं को अमृत पिलाया, और असुरों को अपनी सुंदरता से बहला दिया।

Meaning: You gave the gods the nectar to drink and held the demons spellbound with your beauty.

चौपाई 17

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया।
मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया॥

Koorm roop dhar sindhu majhaaya,
Mandraachal giri turat uthaaya.

अर्थ: कछुए का रूप धरकर आपने सागर मथवाया, और मंदराचल पर्वत तुरंत उठा लिया।

Meaning: Taking the form of the tortoise you had the ocean churned, and at once you bore up Mount Mandara.

चौपाई 18

शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।
भस्मासुर को रूप दिखाया॥

Shankar ka tum phand chhudaaya,
Bhasmaasur ko roop dikhaaya.

अर्थ: आपने शंकर को संकट के फंदे से छुड़ाया, जब भस्मासुर को (मोहिनी का) रूप दिखाया।

Meaning: You freed Shankara from his snare by showing Bhasmasura your (Mohini) form.

चौपाई 19

वेदन को जब असुर डुबाया।
कर प्रबन्ध उन्हें ढुँढवाया॥

Vedan ko jab asur dubaaya,
kar prabandh unhen dhundhvaaya.

अर्थ: जब एक असुर ने वेदों को (सागर में) डुबा दिया, तब आपने उपाय करके उन्हें खोज निकाला।

Meaning: When a demon sank the Vedas in the waters, you found a way and brought them back.

चौपाई 20

मोहित बनकर खलहि नचाया।
उसही कर से भस्म कराया॥

Mohit bankar khalahi nachaaya,
us hi kar se bhasm karaaya.

अर्थ: मोहिनी बनकर आपने उस दुष्ट (भस्मासुर) को नचाया, और उसी के हाथ से उसे भस्म करवा दिया।

Meaning: As the enchantress you made that wicked one (Bhasmasura) dance, and had him burnt to ashes by his own hand.

चौपाई 21

असुर जलन्धर अति बलदाई।
शंकर से उन कीन्ह लड़ाई॥

Asur Jalandhar ati baldaai,
Shankar se un keenh ladaai.

अर्थ: असुर जलंधर बहुत बलवान था; उसने शंकर से युद्ध किया।

Meaning: The demon Jalandhar was very mighty, and he went to war against Shankara.

चौपाई 22

हार पार शिव सकल बनाई।
कीन सती से छल खल जाई॥

Haar paar Shiv sakal banaai,
keen Sati se chhal khal jaai.

अर्थ: शिव ने हर उपाय कर लिया (पर वह हारा नहीं); तब उस दुष्ट ने जाकर सती (पार्वती) से छल करना चाहा।

Meaning: Shiva tried every means (but could not defeat him); then the wicked one went to deceive Sati (Parvati).

चौपाई 23

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥

Sumiran keen tumhen Shivraani,
batlaai sab vipat kahaani.

अर्थ: तब शिव की रानी (पार्वती) ने आपको याद किया और संकट की सारी कहानी बताई।

Meaning: Then Shiva's queen (Parvati) called on you and told you the whole story of the trouble.

चौपाई 24

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥

Tab tum bane muneeshwar gyaani,
Vrinda ki sab surati bhulaani.

अर्थ: तब आप एक ज्ञानी महामुनि बने, और (जलंधर की पत्नी) वृंदा की सारी सुध-बुध भुला दी।

Meaning: Then you became a wise great sage, and Vrinda (Jalandhar's wife) lost all her awareness.

चौपाई 25

देखत तीन दनुज शैतानी।
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥

Dekhat teen danuj shaitaani,
Vrinda aay tumhen lapataani.

अर्थ: (आपको) उस दानव के रूप में देखकर वृंदा आई और आपसे लिपट गई।

Meaning: Seeing (you in) the demon's form, Vrinda came and embraced you.

चौपाई 26

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।
हना असुर उर शिव शैतानी॥

Ho sparsh dharm kshati maani,
hana asur ur Shiv shaitaani.

अर्थ: उस स्पर्श से उसका पतिव्रत-धर्म टूटा माना गया, और शिव ने उस दुष्ट असुर के हृदय पर प्रहार करके उसे मार दिया।

Meaning: With that touch her vow of faithfulness was held to be broken, and Shiva struck the wicked demon in the heart.

चौपाई 27

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे।
हिरणाकुश आदिक खल मारे॥

Tumne Dhruv Prahlaad ubaare,
Hiranaakush aadik khal maare.

अर्थ: आपने ध्रुव और प्रह्लाद को उबारा, और हिरण्यकशिपु जैसे दुष्टों को मारा।

Meaning: You saved Dhruva and Prahlada, and destroyed the wicked such as Hiranyakashipu.

चौपाई 28

गणिका और अजामिल तारे।
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥

Ganika aur Ajaamil taare,
bahut bhakt bhav sindhu utaare.

अर्थ: आपने गणिका और अजामिल को तारा, और बहुत से भक्तों को संसार-सागर से पार उतारा।

Meaning: You saved Ganika and Ajamila, and carried many devotees across the ocean of worldly life.

चौपाई 29

हरहु सकल संताप हमारे।
कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥

Harahu sakal santaap hamaare,
kripa karahu Hari sirjan haare.

अर्थ: हमारे सारे दुख-ताप हर लीजिए; हे हरि, सृष्टि रचने वाले, कृपा कीजिए।

Meaning: Take away all our sorrows; be kind to us, Hari, creator of all.

चौपाई 30

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे।
दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥

Dekhahun main nij darash tumhaare,
deen bandhu bhaktan hitkaare.

अर्थ: मैं आपके अपने दर्शन कर सकूँ, हे दीनों के बंधु, भक्तों का भला करने वाले।

Meaning: May I see you as you are, friend of the helpless, well-wisher of your devotees.

चौपाई 31

चहत आपका सेवक दर्शन।
करहु दया अपनी मधुसूदन॥

Chahat aapka sevak darshan,
karahu daya apni Madhusoodan.

अर्थ: आपका सेवक आपके दर्शन चाहता है; हे मधुसूदन, अपनी दया कीजिए।

Meaning: Your servant longs to see you; show me your kindness, Madhusudana.

चौपाई 32

जानूं नहीं योग्य जप पूजन।
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥

Jaanoon nahin yogya jap poojan,
hoy yagya stuti anumodan.

अर्थ: मैं उचित जप और पूजा नहीं जानता; मेरा यह यज्ञ और स्तुति स्वीकार हो।

Meaning: I do not know the proper chanting and worship; may this offering and praise be accepted.

चौपाई 33

शीलदया सन्तोष सुलक्षण।
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥

Sheel daya santosh sulakshan,
vidit nahin vratbodh vilakshan.

अर्थ: शील, दया, संतोष और अच्छे गुण, और व्रतों का गहरा ज्ञान, मुझे इनमें से कुछ भी पता नहीं।

Meaning: Good conduct, compassion, contentment, good qualities and the deep knowledge of vows: I know none of these.

चौपाई 34

करहुं आपका किस विधि पूजन।
कुमति विलोक होत दुख भीषण॥

Karahun aapka kis vidhi poojan,
kumati vilok hot dukh bheeshan.

अर्थ: मैं आपकी पूजा किस तरह करूँ? अपनी कुबुद्धि देखकर मुझे बड़ा दुख होता है।

Meaning: How am I to worship you? Seeing my own poor understanding, I feel deep sorrow.

चौपाई 35

करहुं प्रणाम कौन विधि सुमिरण।
कौन भांति मैं करहु समर्पण॥

Karahun pranaam kaun vidhi sumiran,
kaun bhaanti main karahu samarpan.

अर्थ: मैं किस तरह प्रणाम करूँ, किस तरह आपका स्मरण करूँ, किस भाँति अपने को आपको सौंपूँ?

Meaning: How shall I bow to you, how remember you, in what way offer myself to you?

चौपाई 36

सुर मुनि करत सदा सेवकाई।
हर्षित रहत परम गति पाई॥

Sur muni karat sada sevkaai,
harshit rahat param gati paai.

अर्थ: देवता और मुनि सदा आपकी सेवा करते हैं, और परम गति पाकर आनंदित रहते हैं।

Meaning: Gods and sages serve you always, and having reached the highest state they live in joy.

चौपाई 37

दीन दुखिन पर सदा सहाई।
निज जन जान लेव अपनाई॥

Deen dukhin par sada sahaai,
nij jan jaan lev apnaai.

अर्थ: आप दीन-दुखियों के सदा सहायक हैं; मुझे अपना जन जानकर अपना लीजिए।

Meaning: You are always the helper of the poor and the suffering; know me as your own and take me in.

चौपाई 38

पाप दोष संताप नशाओ।
भव बन्धन से मुक्त कराओ॥

Paap dosh santaap nashaao,
bhav bandhan se mukt karaao.

अर्थ: मेरे पाप, दोष और दुख मिटाइए, और संसार के बंधन से मुक्त कीजिए।

Meaning: Wipe away my sins, faults and sorrows, and free me from the bonds of worldly life.

चौपाई 39

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ।
निज चरनन का दास बनाओ॥

Sut sampati de sukh upjaao,
nij charanan ka daas banaao.

अर्थ: संतान और संपत्ति देकर सुख उपजाइए, और मुझे अपने चरणों का सेवक बना लीजिए।

Meaning: Grant children and wealth and bring forth happiness, and make me a servant at your feet.

चौपाई 40

निगम सदा ये विनय सुनावै।
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥

Nigam sada ye vinay sunaavai,
padhai sunai so jan sukh paavai.

अर्थ: “निगम” सदा यह विनती सुनाता है; जो इसे पढ़ता या सुनता है, वह सुख पाता है।

Meaning: “Nigam” ever offers this prayer; whoever reads or hears it finds happiness.

सवाल-जवाब

विष्णु चालीसा किसने लिखी?

लेखक ज्ञात नहीं है। अंतिम चौपाई “निगम सदा ये विनय सुनावै” से शुरू होती है: निगम कवि का अपना नाम हो सकता है, क्योंकि चालीसा के कवि अक्सर अंतिम पद में अपना नाम रखते हैं, या इसका अर्थ वेद (निगम) भी हो सकता है। यह स्तुति चालीसा संग्रहों में बिना लेखक के नाम के छपती है और पीढ़ियों से गाई जाती है।

चालीसा में जलंधर और वृंदा की कथा क्या है?

शिव पुराण और पद्म पुराण में असुर जलंधर तब तक अजेय था जब तक उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रत बना रहा। जब उसने देवताओं पर आक्रमण किया और पार्वती जी को भी छलना चाहा, तब विष्णु वृंदा के सामने पहले एक मुनि बनकर और फिर स्वयं जलंधर का रूप धरकर आए; उसका व्रत टूटते ही शिव उसे मार सके। दुखी वृंदा ने विष्णु को शाप दिया, और आगे की परंपरा कहती है कि वे तुलसी का पौधा बनीं, जिन्हें विष्णु अपनी प्रिया मानते हैं; इसी की याद तुलसी विवाह में की जाती है।

चालीसा चौदह रत्नों को मत्स्य अवतार से क्यों जोड़ती है?

पुराण समुद्र-मंथन को, जिससे चौदह रत्न निकले, कूर्म (कछुआ) अवतार से जोड़ते हैं, और वेदों को बचाने को मत्स्य अवतार से। चालीसा कुछ पंक्तियों में इन कथाओं को मिला देती है, जैसा लोक-स्तुतियों में अक्सर होता है; हमने वही अनुवाद किया है जो पाठ कहता है, और यहाँ यह बात लिख दी है।

क्या ज्योतिष में विष्णु को बृहस्पति से जोड़ा जाता है?

हाँ, परंपरा से: बृहस्पति (गुरु) को विष्णु से जोड़ा जाता है, और गुरुवार को दोनों से। चालीसा अपने आप में भक्ति की स्तुति है, कोई उपाय या किसी फल की गारंटी नहीं। अपनी कुंडली में बृहस्पति कहाँ हैं, यह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली खोलें।

पाठ और स्रोत

पाठ को पाँच संस्करणों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: भक्ति भारत (bhaktibharat.com; इंस्टाएस्ट्रो में यही पाठ है), पत्रिका (patrika.com), अमर उजाला (amarujala.com, पहली चौबीस चौपाइयाँ), और रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार के दो छपे चालीसा संग्रह (आरती चालीसा संग्रह, 2000, और 51 चालीसा संग्रह, 2004, दोनों archive.org पर स्कैन)। किसी में लेखक का नाम नहीं है। छपी किताबों में प्रकाशक का कॉपीराइट संग्रह पर है; चालीसा स्वयं कई प्रकाशकों द्वारा पारंपरिक पाठ के रूप में छापी जाती है। सब संस्करणों की तरह हम एक दोहा और चालीस चौपाइयाँ देते हैं; पत्रिका अंत में “इति श्री विष्णु चालीसा” लिखती है।

पाठभेद (हमने वह पाठ लिया है जो अधिकतर संस्करणों में है): चौ. 13 वाराह … हिरण्याक्ष (भक्ति भारत में वराह … हरण्याक्ष); चौ. 27 ध्रुव (छपी किताबों में धुरू); चौ. 30 निज दरश (छपी किताबों में नित दरश, “रोज़ दर्शन”); चौ. 31 चहत (पत्रिका में चाहता); चौ. 32 जप पूजन (पत्रिका में जब पूजन); चौ. 36 सेवकाई (छपी किताबों में सिवकाई); चौ. 39 सुत सम्पति (पत्रिका और दोनों छपी किताबें; भक्ति भारत में सुख संपत्ति, जिससे एक ही पंक्ति में सुख दोहराया जाता है)। वर्तनी के छोटे अंतर (छवि/छबि, ढुँढवाया/ढूंढवाया, जलंधर/जलन्धर) नहीं गिनाए।

अस्पष्ट पंक्तियाँ: कुछ पंक्तियाँ हर संस्करण में एक जैसी हैं पर अस्पष्ट शब्दों में हैं, शायद पुरानी नक़ल की वजह से; हमने आम पाठ रखा है और अर्थ सावधानी से दिया है। चौ. 6 में दोनों आधों में “मद लोभ” दोहराया गया है; पहले आधे को हमने “आपमें सत्य और धर्म गूँजते हैं, मद और लोभ नहीं” पढ़ा है। चौ. 15 का अमिलख हमने अमि लख, यानी “अमृत देखकर”, पढ़ा है। चौ. 14 चौदह रत्नों को मत्स्य अवतार से जोड़ती है, और चौ. 17 के मझाया को हमने “(सागर) मथवाया” माना है। जलंधर-प्रसंग (चौ. 21–26) में: चौ. 22 के हार पार शिव सकल बनाई को शिव पुराण की कथा के अनुसार “शिव ने हर उपाय कर लिया” पढ़ा है; चौ. 25 के देखत तीन दनुज शैतानी में तीन को तिन (“उस”) मानकर “(आपको) उस दानव के रूप में देखकर” पढ़ा है; चौ. 26 के शैतानी को “दुष्ट” माना है। ये अर्थ उसी पुराण-कथा के अनुसार हैं जो ये पंक्तियाँ कहती हैं। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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