चालीसा · कृष्ण

श्री कृष्ण चालीसा: अर्थ सहित

श्री कृष्ण की स्तुति, गोकुल के माखन-प्रेमी बालक से गीता सुनाने वाले सारथी तक। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: कृष्ण चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

श्री कृष्ण कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

श्री कृष्ण विष्णु के आठवें अवतार हैं, और बहुत से भक्तों के लिए सबसे पूर्ण अवतार। उनका जन्म मथुरा में कंस की जेल में देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ; उसी रात उन्हें यमुना पार ले जाया गया, और गोकुल व वृंदावन के ग्वालों के बीच यशोदा और नंद ने उन्हें पाला। उनका बचपन प्रिय कथाओं से भरा है: चुराया हुआ माखन, कालिया नाग, एक उँगली पर उठाया गोवर्धन, गोपियों और राधा के साथ रास। बड़े होकर वे पांडवों के मित्र बने, महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी, और भगवद्गीता के उपदेशक।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। कृष्ण चालीसा कृष्ण के रूप का वर्णन करने वाले दो दोहों से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। चौपाइयाँ क्रम से उनका जीवन सुनाती हैं, पूतना और गोवर्धन से लेकर कंस, सुदामा, विदुर, गीता और द्रौपदी तक, और बाद के युग की भक्त मीरा को भी याद करती हैं, जिन्होंने राणा का भेजा विष पिया और उन्हें कुछ नहीं हुआ। कवि अड़तीसवीं चौपाई में अपना नाम लेते हैं: सुंदरदास। उनके बारे में इससे ज़्यादा कुछ ज्ञात नहीं है; यह पारंपरिक स्तुति है, जो उत्तर भारत की पूजा की किताबों में छपती है।

कई परिवार इसे जन्माष्टमी और एकादशी पर पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री कृष्ण चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत का एक दोहा।

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दोहा 1

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥

Banshi shobhit kar madhur, neel jalad tan shyaam,
arun adhar janu bimbaphal, nayan kamal abhiraam.

अर्थ: हाथ में मधुर बाँसुरी शोभा देती है, शरीर नीले बादल जैसा साँवला है; लाल होंठ मानो बिंबफल हों, और आँखें कमल जैसी सुंदर।

Meaning: A sweet flute graces your hand, your body is dark as a rain cloud; your red lips are like the bimba fruit, your eyes lovely as lotuses.

दोहा 2

पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥

Poorn Indra, aravind mukh, peetaambar shubh saaj,
jai manmohan madan chhavi, Krishnachandra mahaaraaj.

अर्थ: आपका मुख पूरे चाँद और कमल जैसा है, पीले वस्त्र की सुंदर सज्जा है; मन मोहने वाले, कामदेव जैसी छवि वाले महाराज कृष्णचंद्र, आपकी जय हो।

Meaning: Your face is like the full moon and the lotus, your yellow robe beautiful; victory to you, King Krishnachandra, who steal the heart, lovelier than the god of love.

चौपाई 1

जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।
जय वसुदेव देवकी नन्दन॥

Jai Yadunandan jai jagvandan,
jai Vasudev Devaki nandan.

अर्थ: जय हो यदुवंश के लाल, जिन्हें सारा जगत नमन करता है; जय हो वसुदेव और देवकी के पुत्र।

Meaning: Victory to the joy of the Yadu clan, honoured by the whole world; victory to the son of Vasudeva and Devaki.

चौपाई 2

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥

Jai Yashuda sut Nand dulaare,
jai prabhu bhaktan ke drig taare.

अर्थ: जय हो यशोदा के बेटे, नंद के दुलारे; जय हो प्रभु, जो भक्तों की आँखों के तारे हैं।

Meaning: Victory to Yashoda's son, Nanda's darling; victory to the Lord, the apple of his devotees' eyes.

चौपाई 3

जय नटनागर नाग नथैया।
कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥

Jai Natnaagar naag nathaiya,
Krishna Kanhaiya dhenu charaiya.

अर्थ: जय हो सबसे चतुर नर्तक, कालिया नाग को नाथने वाले; कृष्ण कन्हैया, गायें चराने वाले।

Meaning: Victory to the master dancer, who reined in the serpent Kaliya; Krishna, Kanhaiya, who grazed the cows.

चौपाई 4

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।
आओ दीनन कष्ट निवारो॥

Puni nakh par prabhu girivar dhaaro,
aao deenan kasht nivaaro.

अर्थ: प्रभु, फिर से नाख़ून पर पर्वत उठा लीजिए; आइए, दीन-दुखियों के कष्ट दूर कीजिए।

Meaning: Lord, lift the mountain on your fingertip once more; come and take away the troubles of the humble.

चौपाई 5

बंशी मधुर अधर धरि टेरी।
होवे पूर्ण विनय यह मेरी॥

Banshi madhur adhar dhari teri,
hove poorn vinay yah meri.

अर्थ: होंठों पर मधुर बाँसुरी रखकर पुकार दीजिए, ताकि मेरी यह विनती पूरी हो।

Meaning: Put the sweet flute to your lips and call out, so that this prayer of mine is fulfilled.

चौपाई 6

आओ हरि पुनि माखन चाखो।
आज लाज भारत की राखो॥

Aao Hari puni maakhan chaakho,
aaj laaj Bhaarat ki raakho.

अर्थ: हे हरि, आइए, फिर से माखन चखिए; आज भारत की लाज रखिए।

Meaning: Come, Hari, taste the butter once more; today keep the honour of Bharat.

चौपाई 7

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥

Gol kapol, chibuk arunaare,
mridu muskaan mohini daare.

अर्थ: गोल गाल, लाल-सी ठोड़ी, और कोमल मुस्कान जो सबको मोह लेती है।

Meaning: Round cheeks, a rosy chin, and a soft smile that casts its spell on all.

चौपाई 8

रंजित राजिव नयन विशाला।
मोर मुकुट वैजन्ती माला॥

Ranjit raajiv nayan vishaala,
mor mukut vaijanti maala.

अर्थ: कमल जैसी रंगीली बड़ी आँखें, मोर-पंख का मुकुट और वैजयंती की माला।

Meaning: Large eyes tinted like lotuses, a crown of peacock feathers and a garland of vaijayanti flowers.

चौपाई 9

कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।
कटि किंकिणी काछन काछे॥

Kundal shravan peetpat aachhe,
kati kinkini kaachhan kaachhe.

अर्थ: कानों में कुंडल, सुंदर पीले वस्त्र, कमर में घुँघरू वाली करधनी, और कसकर बाँधी धोती।

Meaning: Earrings in your ears, a fine yellow robe, a belt of little bells at your waist, and your dhoti tucked up tight.

चौपाई 10

नील जलज सुन्दर तनु सोहे।
छवि लखि सुर नर मुनि मन मोहे॥

Neel jalaj sundar tanu sohe,
chhavi lakhi sur nar muni man mohe.

अर्थ: नीले कमल जैसा सुंदर शरीर शोभा देता है; यह छवि देखकर देवता, मनुष्य और मुनि सबका मन मोहित हो जाता है।

Meaning: Your body glows, lovely as a blue lotus; seeing it, gods, people and sages are all enchanted.

चौपाई 11

मस्तक तिलक, अलक घुँघराले।
आओ कृष्ण बाँसुरी वाले॥

Mastak tilak, alak ghunghraale,
aao Krishna baansuri vaale.

अर्थ: माथे पर तिलक और घुँघराले बाल; आओ, बाँसुरी वाले कृष्ण।

Meaning: A tilak on your forehead and curling locks: come, Krishna of the flute.

चौपाई 12

करि पय पान, पूतनहिं तार्यो।
अका बका कागासुर मार्यो॥

Kari pay paan, Pootanahin taaryo,
Aka Baka Kaagaasur maaryo.

अर्थ: आपने दूध पीकर ही पूतना को मुक्ति दे दी, और अघासुर, बकासुर और कागासुर को मारा।

Meaning: Just by drinking her milk you set Putana free, and you slew the demons Agha, Baka and the crow-demon.

चौपाई 13

मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला।
भै शीतल लखतहिं नँदलाला॥

Madhuvan jalat agin jab jvaala,
bhai sheetal lakhatahin Nandlaala.

अर्थ: जब मधुवन आग की लपटों में जल रहा था, तो नंदलाल के देखते ही वह शीतल हो गया।

Meaning: When the forest of Madhuvan was burning in flames, it turned cool the moment Nanda's son looked at it.

चौपाई 14

सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई।
मूसर धार वारि वर्षाई॥

Surpati jab Braj chadhyo risaai,
moosar dhaar vaari varshaai.

अर्थ: जब देवराज इंद्र क्रोध में ब्रज पर चढ़ आए और मूसल जैसी मोटी धारों से पानी बरसाया,

Meaning: When Indra, king of the gods, rose in anger against Braj and poured down rain in streams as thick as pestles,

चौपाई 15

लगत लगत ब्रज चहन बहायो।
गोवर्धन नख धारि बचायो॥

Lagat lagat Braj chahan bahaayo,
Govardhan nakh dhaari bachaayo.

अर्थ: और ब्रज बह ही जाने वाला था, तब आपने गोवर्धन पर्वत नाख़ून पर उठाकर उसे बचा लिया।

Meaning: and Braj was about to be washed away, you held up Mount Govardhan on your fingertip and saved it.

चौपाई 16

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।
मुख महँ चौदह भुवन दिखाई॥

Lakhi Yasuda man bhram adhikaai,
mukh mahan chaudah bhuvan dikhaai.

अर्थ: यह देखकर यशोदा के मन में बड़ा अचरज हुआ, जब आपने अपने मुख में चौदह लोक दिखा दिए।

Meaning: Yashoda was filled with wonder when you showed her the fourteen worlds inside your mouth.

चौपाई 17

दुष्ट कंस अति उधम मचायो।
कोटि कमल जब फूल मँगायो॥

Dusht Kans ati udham machaayo,
koti kamal jab phool mangaayo.

अर्थ: दुष्ट कंस ने बहुत उत्पात मचाया, जब उसने (यमुना के कालीदह से) करोड़ों कमल के फूल मँगवाए।

Meaning: Wicked Kansa caused great havoc when he demanded millions of lotus flowers (from the Yamuna pool where Kaliya lived).

चौपाई 18

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।
चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥

Naathi Kaaliyahin tab tum leenhen,
charan chihn dai nirbhay keenhen.

अर्थ: तब आपने कालिया नाग को नाथ लिया, और उसके फनों पर अपने चरणों के चिह्न देकर उसे निडर कर दिया।

Meaning: Then you reined in the serpent Kaliya and, leaving your footprints on his hoods, made him free of fear.

चौपाई 19

करि गोपिन संग रास विलासा।
सबकी पूरण करि अभिलाषा॥

Kari gopin sang raas vilaasa,
sabki pooran kari abhilaasha.

अर्थ: गोपियों के साथ रास रचाकर आपने सबकी मनोकामना पूरी की।

Meaning: Dancing the raas with the gopis, you fulfilled the longing of every one of them.

चौपाई 20

केतिक महा असुर संहार्यो।
कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥

Ketik maha asur sanhaaryo,
Kansahi kes pakadi dai maaryo.

अर्थ: आपने कितने ही बड़े असुरों का अंत किया, और कंस को बालों से पकड़कर मार गिराया।

Meaning: You ended many mighty demons, and seized Kansa by the hair and struck him down.

चौपाई 21

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।
उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥

Maat-pita ki bandi chhudaai,
Ugrasen kahan raaj dilaai.

अर्थ: माता-पिता को क़ैद से छुड़ाया, और उग्रसेन को राज वापस दिलाया।

Meaning: You freed your mother and father from prison and gave the kingdom back to Ugrasena.

चौपाई 22

महि से मृतक छहों सुत लायो।
मातु देवकी शोक मिटायो॥

Mahi se mritak chhahon sut laayo,
maatu Devaki shok mitaayo.

अर्थ: आप धरती के नीचे से माँ देवकी के छहों मरे हुए बेटों को वापस लाए, और उनका शोक मिटाया।

Meaning: You brought back from the underworld the six sons of Devaki who had died, and ended your mother's grief.

चौपाई 23

भौमासुर मुर दैत्य संहारी।
लाये षट दश सहस कुमारी॥

Bhaumaasur Mur daitya sanhaari,
laaye shat dash sahas kumaari.

अर्थ: आपने भौमासुर (नरकासुर) और मुर दैत्य का अंत किया, और सोलह हज़ार राजकुमारियों को छुड़ाकर लाए।

Meaning: You ended Bhaumasura (Narakasura) and the demon Mura, and brought home the sixteen thousand princesses they held captive.

चौपाई 24

दै भीमहिं तृण चीर सहारा।
जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥

Dai Bheemahin trin cheer sahaara,
Jaraasindhu raakshas kahan maara.

अर्थ: भीम को तिनका चीरकर इशारा दिया, और इस तरह जरासंध राक्षस को मरवाया।

Meaning: By splitting a blade of grass you showed Bhima the way, and so the demon-king Jarasandha was slain.

चौपाई 25

असुर बकासुर आदिक मार्यो।
भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥

Asur Bakaasur aadik maaryo,
bhaktan ke tab kasht nivaaryo.

अर्थ: बकासुर आदि असुरों को मारकर आपने भक्तों के कष्ट दूर किए।

Meaning: Slaying Bakasura and other demons, you took away the troubles of your devotees.

चौपाई 26

दीन सुदामा के दुःख टार्यो।
तंदुल तीन मूँठि मुख डार्यो॥

Deen Sudaama ke dukh taaryo,
tandul teen moonthi mukh daaryo.

अर्थ: आपने ग़रीब सुदामा के दुख दूर किए, उनके लाए चावल की तीन मुट्ठियाँ अपने मुँह में डालकर।

Meaning: You ended poor Sudama's hardship, eating three handfuls of the rice he had brought you.

चौपाई 27

प्रेम के साग विदुर घर माँगे।
दुर्योधन के मेवा त्यागे॥

Prem ke saag Vidur ghar maange,
Duryodhan ke meva tyaage.

अर्थ: आपने विदुर के घर प्रेम से बना साग माँगकर खाया, और दुर्योधन के मेवे छोड़ दिए।

Meaning: At Vidura's house you asked for simple greens made with love, and turned down Duryodhana's rich dishes.

चौपाई 28

लखी प्रेम की महिमा भारी।
ऐसे श्याम दीन हितकारी॥

Lakhi prem ki mahima bhaari,
aise Shyaam deen hitkaari.

अर्थ: आपने प्रेम की बड़ी महिमा पहचानी; ऐसे हैं श्याम, दीनों का भला करने वाले।

Meaning: You knew how great love is; such is Shyam, the friend of the humble.

चौपाई 29

भारत के पारथ रथ हाँके।
लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥

Bhaarat ke Paarath rath haanke,
liye chakra kar nahin bal thaake.

अर्थ: महाभारत के युद्ध में आपने अर्जुन का रथ हाँका; हाथ में चक्र लिए आपका बल कभी नहीं थका।

Meaning: In the great war of the Mahabharata you drove Arjuna's chariot; with the discus in your hand, your strength never tired.

चौपाई 30

निज गीता के ज्ञान सुनाए।
भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥

Nij Geeta ke gyaan sunaae,
bhaktan hriday sudha varshaae.

अर्थ: आपने अपनी गीता का ज्ञान सुनाया, और भक्तों के हृदय में अमृत बरसाया।

Meaning: You spoke the wisdom of your own Gita and showered nectar on the hearts of your devotees.

चौपाई 31

मीरा थी ऐसी मतवाली।
विष पी गई बजाकर ताली॥

Meera thi aisi matvaali,
vish pi gai bajaakar taali.

अर्थ: मीरा आपकी भक्ति में ऐसी मगन थीं कि ताली बजाते हुए विष पी गईं।

Meaning: Meera was so lost in love for you that she drank poison clapping her hands.

चौपाई 32

राणा भेजा साँप पिटारी।
शालिग्राम बने बनवारी॥

Raana bheja saanp pitaari,
Shaaligraam bane Banvaari.

अर्थ: राणा ने टोकरी में साँप भेजा, तो बनवारी शालिग्राम बन गए।

Meaning: When the Rana sent her a snake in a basket, Krishna of the forests became a Shaligram stone.

चौपाई 33

निज माया तुम विधिहिं दिखायो।
उर ते संशय सकल मिटायो॥

Nij maaya tum Vidhihin dikhaayo,
ur te sanshay sakal mitaayo.

अर्थ: आपने ब्रह्मा जी को अपनी माया दिखाई और उनके मन का सारा संदेह मिटा दिया।

Meaning: You showed Brahma your power of illusion and cleared every doubt from his heart.

चौपाई 34

तब शत निन्दा करि तत्काला।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥

Tab shat ninda kari tatkaala,
jeevan mukt bhayo Shishupaala.

अर्थ: सौ अपमान पूरे होते ही शिशुपाल उसी क्षण जीवन से मुक्त हो गया।

Meaning: When Shishupala had spoken his hundred insults, at that very moment he was freed from life.

चौपाई 35

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।
दीनानाथ लाज अब जाई॥

Jabahin Draupadi ter lagaai,
Deenaanaath laaj ab jaai.

अर्थ: जब द्रौपदी ने पुकारा: “हे दीनानाथ, अब मेरी लाज जा रही है,”

Meaning: When Draupadi cried out, “Lord of the helpless, my honour is being taken,”

चौपाई 36

तुरतहि वसन बने नँदलाला।
बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥

Turatahi vasan bane Nandlaala,
badhe cheer bhai ari munh kaala.

अर्थ: तो नंदलाल तुरंत वस्त्र बन गए; साड़ी बढ़ती गई और शत्रुओं का मुँह काला हुआ।

Meaning: at once Nanda's son became her garment; the sari kept growing and her enemies were put to shame.

चौपाई 37

अस अनाथ के नाथ कन्हैया।
डूबत भँवर बचावत नैया॥

As anaath ke naath Kanhaiya,
doobat bhanvar bachaavat naiya.

अर्थ: ऐसे हैं अनाथों के नाथ कन्हैया, जो भँवर में डूबती नाव को बचा लेते हैं।

Meaning: Such is Kanhaiya, protector of those who have no one, who saves the boat sinking in the whirlpool.

चौपाई 38

सुन्दरदास आस उर धारी।
दया दृष्टि कीजै बनवारी॥

Sundardaas aas ur dhaari,
daya drishti keejai Banvaari.

अर्थ: सुंदरदास हृदय में आशा लिए हैं: हे बनवारी, दया की नज़र कीजिए।

Meaning: Sundardas holds this hope in his heart: Banwari, look on me with kindness.

चौपाई 39

नाथ सकल मम कुमति निवारो।
क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥

Naath sakal mam kumati nivaaro,
kshamahu begi apraadh hamaaro.

अर्थ: हे नाथ, मेरी सारी बुरी सोच दूर कीजिए, और जल्दी से हमारे अपराध क्षमा कीजिए।

Meaning: Lord, take away all my wrong thinking, and quickly forgive our faults.

चौपाई 40

खोलो पट अब दर्शन दीजै।
बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥

Kholo pat ab darshan deejai,
bolo Krishna Kanhaiya ki jai.

अर्थ: अब पट खोलकर दर्शन दीजिए। बोलो, कृष्ण कन्हैया की जय!

Meaning: Now open the curtain and let us see you. Say it: victory to Krishna Kanhaiya!

अंतिम दोहा 1

यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥

Yah chaalisa Krishna ka, paath karai ur dhaari,
asht siddhi navnidhi phal, lahai padaarath chaari.

अर्थ: जो कृष्ण की यह चालीसा हृदय में धारण करके पढ़ता है, वह आठ सिद्धियाँ, नौ निधियाँ और जीवन के चारों फल पाता है।

Meaning: Whoever recites this chalisa of Krishna, holding it in their heart, receives the eight powers, the nine treasures and the four aims of life.

सवाल-जवाब

कृष्ण चालीसा किसने लिखी?

कवि अड़तीसवीं चौपाई में अपना नाम लेते हैं: सुंदरदास। उनके बारे में और कुछ दर्ज नहीं है। यह चालीसा पीढ़ियों से पूजा की किताबों में बिना किसी और लेखक के नाम के छपती आई है।

कृष्ण की स्तुति में मीरा का नाम क्यों है?

मीरा, राजस्थान की सोलहवीं सदी की संत-कवयित्री, कृष्ण की सबसे प्रिय भक्तों में से हैं। कथा है कि राणा ने उन्हें विष और टोकरी में साँप भेजा, और हर बार कृष्ण ने उनकी रक्षा की। चालीसा उन्हें सुदामा, विदुर और द्रौपदी के साथ उन भक्तों में गिनती है जिन्हें कृष्ण ने बचाया।

तिनके और जरासंध की कथा क्या है?

जरासंध दो हिस्सों में जन्मा था जिन्हें एक राक्षसी ने जोड़ दिया था, इसलिए उसे सामान्य तरीक़े से मारा नहीं जा सकता था। भीम से उसकी कुश्ती के समय कृष्ण ने एक तिनका चीरकर दोनों टुकड़े उल्टी दिशाओं में फेंके; भीम समझ गए, उन्होंने जरासंध को दो हिस्सों में चीरा और दोनों को अलग-अलग फेंक दिया।

क्या ज्योतिष में कृष्ण का किसी ग्रह से संबंध है?

शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथ परंपरा से कृष्ण अवतार को चंद्रमा से जोड़ते हैं। यह पारंपरिक संबंध है; चालीसा अपने आप में भक्ति की स्तुति है, कोई उपाय या किसी फल की गारंटी नहीं।

पाठ और स्रोत

कृष्ण चालीसा पारंपरिक, सार्वजनिक भक्ति स्तुति है। हर पंक्ति तीन स्वतंत्र पाठों से मिलाई गई: संस्कृत डॉक्यूमेंट्स (sanskritdocuments.org, krishna40; भारत डिस्कवरी का पाठ यही है), भक्ति भारत (bhaktibharat.com) और रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार के चालीसा संग्रह के दो संस्करण (आरती चालीसा संग्रह, 2000, और 51 चालीसा संग्रह, 2004)। सबमें वही दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंतिम दोहा, उसी क्रम में हैं। जहाँ ये अलग हैं, वहाँ हमने वह पाठ लिया है जो अधिकतर में है।

पाठभेद: दोहा 2 का पूर्ण इन्द्र हर जगह ऐसे ही छपा है और आम तौर पर पूर्ण इन्दु, यानी “पूरा चाँद”, समझा जाता है, और हमने यही अर्थ लिया है; चौ. 5 टेरी … मेरी (पुस्तकें; संस्कृत डॉक्यूमेंट्स टेरौ … मेरौ; भक्ति भारत होवे पूर्ण मनोरथ मेरो); चौ. 8 रंजित (संस्कृत डॉक्यूमेंट्स राजित); चौ. 9 काछन काछे (संस्कृत डॉक्यूमेंट्स काछनी काछे); चौ. 13 लखतहिं (पुस्तकें और भक्ति भारत लखितहिं); चौ. 14 मूसर (भक्ति भारत में छपाई की भूल मसूर); चौ. 23 षट दश, यानी सोलह (स्कैन की हुई पुस्तकों में घट दस); चौ. 24 सहारा (पुस्तकें संहारा); चौ. 29 भारत (स्कैन में मारथ) और थाके (भक्ति भारत ताके); चौ. 34 तब (पुस्तकें तव); चौ. 37 बचावत नैया (संस्कृत डॉक्यूमेंट्स बचावै); चौ. 40 की जै (पुस्तकें की जय)। वर्तनी के छोटे अंतर (मार्‍यो/मारयो, नथैया/नथइया) नहीं गिनाए। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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