चालीसा · सूर्य

श्री सूर्य चालीसा: अर्थ सहित

सूर्य देव की चालीस छोटी चौपाइयाँ, उन देवता की जिन्हें हम सब अपनी आँखों से देखते हैं। नीचे पूरा पाठ हिंदी में, वही अंग्रेज़ी अक्षरों में, और हर चौपाई का सरल अर्थ दिया है।

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सुनें: सूर्य चालीसा

मधुर संगीत के साथ कंप्यूटर-आवाज़ में शांत पाठ, जो पंक्ति-दर-पंक्ति मूल पाठ से जाँचा गया है। यह साथ पढ़ने में सहायता है, पंडित जी या घर के बड़ों का विकल्प नहीं।

तेज़ पाठ, पूरा पाठ (3 मिनट)

पूरा पाठ तेज़ गति में, जैसे बहुत से लोग रोज़ पढ़ते हैं; कुछ भी छोड़ा नहीं गया।

सूर्य देव कौन हैं, और यह चालीसा क्या है

सूर्य वे हैं जिन्हें ऋग्वेद से ही संसार का नेत्र और प्रकाश व जीवन देने वाला माना गया है। उन्हें प्रत्यक्ष देवता कहते हैं, यानी वे देवता जिन्हें सीधे देखा जा सकता है। पुराण उन्हें सात घोड़ों वाले सोने के रथ पर दिखाते हैं, जिसे अरुण (भोर) चलाते हैं; वे अदिति और कश्यप के पुत्र हैं (इसीलिए आदित्य), और शनि तथा धर्मराज यम के पिता। ज्योतिष में वे नौ ग्रहों में पहले हैं: आत्मा, पिता और अधिकार के ग्रह।

चालीसा लगभग चालीस पदों (चालीस) की सरल हिंदी स्तुति होती है। सूर्य चालीसा, जो अपने अंतिम दोहे में स्वयं को भानु चालीसा कहती है, एक दोहे से शुरू होती है, उसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और अंत में एक दोहा। यह पुरानी संस्कृत परंपरा को हिंदी में कहती है: सूर्य के अनेक नामों से उनकी स्तुति करती है, सूर्य नमस्कार के बारह नमस्कारों के साथ बोले जाने वाले बारह नाम याद दिलाती है, रक्षा-कवच की तरह शरीर के हर अंग पर सूर्य का एक नाम रखती है, और अंत में साल के हर महीने में सूर्य का नाम बताती है। किसी कवि का नाम नहीं है; यह पारंपरिक भक्ति-रचना है, जो चालीसा पुस्तिकाओं में छपती है और पूरे उत्तर भारत में गाई जाती है।

इसमें कही गई आशाएँ, स्वास्थ्य, धन और निर्भयता की, भक्ति के शब्द हैं, वादे नहीं। कई परिवार इसे रविवार को या सूर्योदय के समय पढ़ते हैं, और एक नियमित दिन रखने से निरंतरता बनी रहती है; पर जब भी मन पुकारे, तब पढ़िए।

श्री सूर्य चालीसा, अर्थ सहित

हर पद हिंदी में, अंग्रेज़ी अक्षरों में और छोटे अर्थ के साथ दिया है: शुरू का दोहा, चालीस चौपाइयाँ और अंत का दोहा। कई पंक्तियाँ सूर्य के नामों की सूची हैं; अर्थ में उन्हें नाम ही रहने दिया है।

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दोहा 1

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

Kanak badan kundal makar, mukta maala ang,
padmaasan sthit dhyaaiye, shankh chakra ke sang.

अर्थ: सोने जैसा तेजस्वी शरीर, कानों में मकर के आकार के कुंडल, अंगों पर मोतियों की माला: शंख और चक्र लिए, कमल-आसन में बैठे सूर्य देव का ध्यान कीजिए।

Meaning: A body shining like gold, earrings shaped like the makara, a string of pearls on his limbs: bring to mind the Sun seated in the lotus posture, holding the conch and the discus.

चौपाई 1

जय सविता जय जयति दिवाकर।
सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥

Jai Savita jai jayati Divaakar,
Sahasraanshu Saptaashva Timirhar.

अर्थ: जय हो सविता, जय हो दिवाकर (दिन करने वाले); आप हज़ार किरणों वाले, सात घोड़ों वाले और अँधेरा हरने वाले हैं।

Meaning: Victory to Savita, victory to Divakar, maker of the day: you of a thousand rays, drawn by seven horses, remover of darkness.

चौपाई 2

भानु पतंग मरीची भास्कर।
सविता हंस सुनूर विभाकर॥

Bhaanu Patang Mareechi Bhaaskar,
Savita Hans Sunoor Vibhaakar.

अर्थ: भानु, पतंग, मरीचि, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर और विभाकर: ये सब आपके ही नाम हैं।

Meaning: Bhanu, Patanga, Marichi, Bhaskara, Savita, Hamsa, Sunura and Vibhakara: all these are your names.

चौपाई 3

विवस्वान आदित्य विकर्तन।
मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥

Vivasvaan Aaditya Vikartan,
Maartand Harirup Virochan.

अर्थ: विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तंड, हरि-रूप और विरोचन भी आप ही हैं।

Meaning: You are also Vivasvan, Aditya, Vikartana, Martanda, the one whose form is Hari, and Virochana.

चौपाई 4

अम्बरमणि खग रवि कहलाते।
वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

Ambarmani khag Ravi kahlaate,
Ved Hiranyagarbh kah gaate.

अर्थ: आप आकाश के मणि, आकाश में विचरने वाले (खग) और रवि कहलाते हैं; वेद आपको हिरण्यगर्भ कहकर गाते हैं।

Meaning: You are called the jewel of the sky, the one who moves through the sky, and Ravi; the Vedas sing of you as Hiranyagarbha, the golden womb of creation.

चौपाई 5

सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि।
मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥

Sahasraanshu Pradyotan, kahi kahi,
munigan hot prasann mod lahi.

अर्थ: “सहस्रांशु”, “प्रद्योतन” कह-कहकर मुनिजन प्रसन्न होते हैं और आनंद पाते हैं।

Meaning: Calling you “thousand-rayed” and “the one who lights all things”, the sages grow glad and full of joy.

चौपाई 6

अरुण सदृश सारथी मनोहर।
हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

Arun sadrish saarathi manohar,
haankat hay saata chadhi rath par.

अर्थ: अरुण जैसे सुंदर सारथी रथ पर चढ़कर आपके सातों घोड़े हाँकते हैं।

Meaning: A charioteer as fair as Aruna, the dawn, mounts the chariot and drives your seven horses.

चौपाई 7

मंडल की महिमा अति न्यारी।
तेज रूप केरी बलिहारी॥

Mandal ki mahima ati nyaari,
tej roop keri balihaari.

अर्थ: आपके सूर्य-मंडल की महिमा बहुत अनोखी है; आपके तेजस्वी रूप पर मैं न्योछावर हूँ।

Meaning: The glory of your blazing disc is beyond compare; I give myself to your radiant form.

चौपाई 8

उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते।
देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

Uchchaihshrava sadrish hay jote,
dekhi Purandar lajjit hote.

अर्थ: आपके रथ में उच्चैःश्रवा जैसे घोड़े जुते हैं, जिन्हें देखकर इंद्र भी लज्जित हो जाते हैं।

Meaning: Horses like Uchchaihshravas are yoked to your chariot; seeing them, even Indra feels humbled.

चौपाई 9

मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर।
सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥

Mitra Mareechi Bhaanu Arun Bhaaskar,
Savita Surya Ark Khag Kalikar.

अर्थ: मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, कलिकर,

Meaning: Mitra, Marichi, Bhanu, Aruna, Bhaskara, Savita, Surya, Arka, Khaga, Kalikara,

चौपाई 10

पूषा रवि आदित्य नाम लै।
हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

Poosha Ravi Aaditya naam lai,
Hiranyagarbhaay namah kahi kai.

अर्थ: पूषा, रवि और आदित्य: ये नाम लेकर और “हिरण्यगर्भाय नमः” कहकर,

Meaning: Pusha, Ravi and Aditya: taking these names, and saying “salutation to Hiranyagarbha”,

चौपाई 11

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं।
मस्तक बारह बार नवावैं॥

Dwaadas naam prem son gaavain,
mastak baarah baar navaavain.

अर्थ: जो प्रेम से आपके बारह नाम गाते हैं और बारह बार सिर झुकाते हैं,

Meaning: those who sing your twelve names with love and bow their heads twelve times,

चौपाई 12

चार पदारथ जन सो पावै।
दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

Chaar padaarath jan so paavai,
dukh daaridra agh punj nasaavai.

अर्थ: वे जीवन के चारों पुरुषार्थ पाते हैं, और उनके दुख, दरिद्रता और पापों का ढेर मिट जाता है।

Meaning: gain the four aims of life, and their heap of sorrow, want and wrongdoing melts away.

चौपाई 13

नमस्कार को चमत्कार यह।
विधि हरिहर को कृपासार यह॥

Namaskaar ko chamatkaar yah,
Vidhi Harihar ko kripaasaar yah.

अर्थ: यह नमस्कार का चमत्कार है; यह ब्रह्मा, विष्णु और शिव की कृपा का सार है।

Meaning: This is the wonder of the namaskar, the salutation; it is the essence of the grace of Brahma, Vishnu and Shiva.

चौपाई 14

सेवै भानु तुमहिं मन लाई।
अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

Sevai Bhaanu tumahin man laai,
ashtasiddhi navanidhi tehin paai.

अर्थ: हे भानु, जो मन लगाकर आपकी सेवा करता है, वह आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ पाता है।

Meaning: O Bhanu, whoever serves you with a willing heart receives the eight powers and the nine treasures.

चौपाई 15

बारह नाम उच्चारन करते।
सहस जनम के पातक टरते॥

Baarah naam uchchaaran karte,
sahas janam ke paatak tarte.

अर्थ: बारह नामों का उच्चारण करने से हज़ार जन्मों के पाप टल जाते हैं।

Meaning: As the twelve names are spoken, the wrongs of a thousand lifetimes fall away.

चौपाई 16

उपाख्यान जो करते तवजन।
रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

Upaakhyaan jo karte tav jan,
ripu son jam lahte so tehi chhan.

अर्थ: आपके जो भक्त आपकी कथा कहते हैं, उनके शत्रु उसी क्षण हार जाते हैं।

Meaning: Those of your people who tell your story see their enemies overcome that very moment.

चौपाई 17

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।
प्रबल मोह को फंद कटतु है॥

Dhan sut jut parivaar badhtu hai,
prabal moh ko phand katatu hai.

अर्थ: धन और संतान सहित परिवार बढ़ता है, और मोह का मज़बूत फंदा कट जाता है।

Meaning: The family grows, with wealth and children, and the strong noose of attachment is cut.

चौपाई 18

अर्क शीश को रक्षा करते।
रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

Ark sheesh ko raksha karte,
Ravi lalaat par nitya biharte.

अर्थ: अर्क सिर की रक्षा करते हैं, और रवि सदा माथे पर विराजते हैं।

Meaning: Arka guards the head, and Ravi always rests upon the forehead.

चौपाई 19

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत।
कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥

Surya netra par nitya viraajat,
karn des par Dinkar chhaajat.

अर्थ: सूर्य सदा आँखों पर विराजते हैं, और दिनकर कानों पर शोभा देते हैं।

Meaning: Surya always dwells upon the eyes, and Dinakara shines over the ears.

चौपाई 20

भानु नासिका वासकरहुनित।
भास्कर करत सदा मुखको हित॥

Bhaanu naasika vaas karahu nit,
Bhaaskar karat sada mukh ko hit.

अर्थ: हे भानु, आप सदा नाक में बसें; भास्कर सदा मुख का भला करते हैं।

Meaning: Bhanu, dwell always in the nose; Bhaskara always keeps the mouth well.

चौपाई 21

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।
रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥

Onth rahain Parjanya hamaare,
rasna beech Teekshn bas pyaare.

अर्थ: पर्जन्य हमारे होंठों पर रहें, और प्यारे तीक्ष्ण जीभ में बसें।

Meaning: May Parjanya stay upon our lips, and dear Tikshna dwell upon the tongue.

चौपाई 22

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा।
तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

Kanth Suvarnaret ki shobha,
Tigmatejasah kaandhe lobha.

अर्थ: गले पर सुवर्णरेता की शोभा है, और तिग्मतेजा (तीखे तेज वाले) कंधों पर सुशोभित हैं।

Meaning: Suvarnareta, the golden one, adorns the throat, and Tigmatejas, the sharp-rayed, graces the shoulders.

चौपाई 23

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर।
त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥

Pooshaan baahu Mitra peethahin par,
Tvashta Varun rahat su-ushnakar.

अर्थ: पूषा भुजाओं पर और मित्र पीठ पर हैं; गर्म किरणों वाले त्वष्टा और वरुण भी वहीं रहते हैं।

Meaning: Pusha is on the arms and Mitra on the back; Tvashta and Varuna, of the warm rays, stay there too.

चौपाई 24

युगल हाथ पर रक्षा कारन।
भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

Yugal haath par raksha kaaran,
Bhaanumaan ur sarm su-udar chan.

अर्थ: दोनों हाथों की रक्षा के लिए भानुमान हैं, जो छाती और पेट को भी शरण देते हैं।

Meaning: Bhanuman is there to guard both hands, and shelters the chest and the belly.

चौपाई 25

बसत नाभि आदित्य मनोहर।
कटिमंह, रहत मन मुदभर॥

Basat naabhi Aaditya manohar,
kati manh, rahat man mud bhar.

अर्थ: सुंदर आदित्य नाभि में बसते हैं, और कमर में रहकर मन को आनंद से भर देते हैं।

Meaning: Lovely Aditya dwells at the navel, and staying at the waist he fills the mind with joy.

चौपाई 26

जंघा गोपति सविता बासा।
गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

Jangha Gopati Savita baasa,
gupt Divaakar karat hulaasa.

अर्थ: जाँघों में गोपति और सविता का वास है, और दिवाकर गुप्त अंगों को प्रसन्न रखते हैं।

Meaning: Gopati and Savita dwell in the thighs, and Divakara gladdens the hidden parts.

चौपाई 27

विवस्वान पद की रखवारी।
बाहर बसते नित तम हारी॥

Vivasvaan pad ki rakhvaari,
baahar baste nit tam haari.

अर्थ: विवस्वान पैरों की रखवाली करते हैं, और अँधेरा हरने वाले सदा बाहर भी बसते हैं।

Meaning: Vivasvan keeps watch over the feet, and the remover of darkness dwells all around, outside as well.

चौपाई 28

सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै।
रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

Sahasraanshu sarvaang samhaarai,
raksha kavach vichitra vichaare.

अर्थ: सहस्रांशु पूरे शरीर को सँभालते हैं: यह रक्षा का अद्भुत कवच समझिए।

Meaning: Sahasranshu takes care of every limb: think of this as a wondrous armour of protection.

चौपाई 29

अस जोजन अपने मन माहीं।
भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं॥

As jo jan apne man maahin,
bhay jag beech karahun tehi naahin.

अर्थ: जो व्यक्ति इसे इसी तरह अपने मन में रखता है, उसे संसार में कहीं भय नहीं होता।

Meaning: Whoever keeps this in mind in this way knows no fear anywhere in the world.

चौपाई 30

दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै।
जोजन याको मन मंह जापै॥

Dadru kushth tehin kabahu na vyaapai,
jo jan yaako man manh jaapai.

अर्थ: जो व्यक्ति मन में इसका जप करता है, उसे दाद और कोढ़ जैसे रोग कभी नहीं घेरते।

Meaning: Whoever repeats it in the heart is never overtaken by diseases of the skin.

चौपाई 31

अंधकार जग का जो हरता।
नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

Andhkaar jag ka jo harta,
nav prakaash se aanand bharta.

अर्थ: जो संसार का अँधेरा हरते हैं और नए प्रकाश से आनंद भर देते हैं,

Meaning: He who takes away the darkness of the world and fills it with joy through new light,

चौपाई 32

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही।
कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

Grah gan grasi na mitaavat jaahi,
koti baar main pranavaun taahi.

अर्थ: जिन्हें ग्रहों का समूह निगलकर भी मिटा नहीं सकता, उन्हें मैं करोड़ों बार प्रणाम करता हूँ।

Meaning: whom the hosts of planets cannot swallow and put out, to him I bow ten million times.

चौपाई 33

मंद सदृश सुत जग में जाके।
धर्मराज सम अद्भुत बांके॥

Mand sadrish sut jag mein jaake,
Dharmraaj sam adbhut baanke.

अर्थ: जिनके पुत्र संसार में शनि जैसे हैं, और धर्मराज यम जैसे अद्भुत और प्रतापी,

Meaning: whose sons in the world are like Shani, the slow one, and wondrous, splendid Dharmaraja Yama,

चौपाई 34

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा।
किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

Dhanya-dhanya tum Dinmani deva,
kiya karat sur muni nar seva.

अर्थ: हे दिन के मणि सूर्य देव, आप धन्य हैं, धन्य हैं; देवता, मुनि और मनुष्य सब आपकी सेवा करते हैं।

Meaning: Blessed, blessed are you, Lord Sun, jewel of the day; gods, sages and people all serve you.

चौपाई 35

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों।
दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥

Bhakti bhaav yut poorn niyam son,
door hatat so bhav ke bhram son.

अर्थ: जो भक्ति-भाव और पूरे नियम से आपको भजता है, वह संसार के भ्रमों से दूर हो जाता है।

Meaning: One who worships you with devotion and steady discipline moves far from the illusions of worldly life.

चौपाई 36

परम धन्य सों नर तनधारी।
हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

Param dhanya son nar tandhaari,
hain prasann jehi par tam haari.

अर्थ: वह देहधारी मनुष्य परम धन्य है, जिस पर अँधेरा हरने वाले सूर्य प्रसन्न हैं।

Meaning: Supremely blessed is the person on whom the remover of darkness is pleased.

चौपाई 37

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन।
मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥

Arun Maagh manh Surya Phaalgun,
Madhu Vedaang naam Ravi udayan.

अर्थ: माघ में आप अरुण नाम से और फाल्गुन में सूर्य नाम से उगते हैं; मधु (चैत्र) में आपका नाम वेदांग है।

Meaning: In Magh you rise as Aruna, in Phalgun as Surya; in Madhu (Chaitra) your name is Vedanga.

चौपाई 38

भानु उदय बैसाख गिनावै।
ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

Bhaanu uday Baisaakh ginaavai,
Jyeshth Indra Aashaadh Ravi gaavai.

अर्थ: बैसाख में आप भानु बनकर उगते हैं; ज्येष्ठ में इंद्र और आषाढ़ में रवि नाम से गाए जाते हैं।

Meaning: In Baisakh you are counted as Bhanu; in Jyeshtha you are sung as Indra, and in Ashadh as Ravi.

चौपाई 39

यम भादों आश्विन हिमरेता।
कातिक होत दिवाकर नेता॥

Yam Bhaadon Aashwin Himreta,
Kaatik hot Divaakar neta.

अर्थ: भादों में आप यम और आश्विन में हिमरेता हैं; कार्तिक में आप दिवाकर बनकर अगुआई करते हैं।

Meaning: In Bhadon you are Yama, in Ashwin Himareta; in Kartik you lead as Divakara.

चौपाई 40

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं।
पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥

Agahan Bhinn Vishnu hain Poosahin,
Purush naam Ravi hain malmaasahin.

अर्थ: अगहन में आप भिन्न, पौष में विष्णु हैं; और अधिक मास (मलमास) में रवि का नाम पुरुष है।

Meaning: In Agahan you are Bhinna, in Paush Vishnu; and in the extra month (malmas) the Sun's name is Purusha.

अंतिम दोहा 1

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

Bhaanu chaalisa prem yut, gaavahin je nar nitya,
sukh sampatti lahi bibidh, honhin sada kritkritya.

अर्थ: जो लोग इस भानु चालीसा को रोज़ प्रेम से गाते हैं, वे तरह-तरह के सुख और संपत्ति पाकर सदा संतुष्ट और सफल रहते हैं।

Meaning: Those who sing this Bhanu Chalisa with love every day find many kinds of happiness and wealth, and always feel their life fulfilled.

सवाल-जवाब

सूर्य चालीसा किसने लिखी?

पाठ में किसी कवि का नाम नहीं है, और कोई ज्ञात भी नहीं। यह पारंपरिक स्तुति है, जो सूर्य की पुरानी संस्कृत स्तुति (उनके बारह नाम और सूर्य कवच) को सरल हिंदी में कहती है।

इसे भानु चालीसा भी क्यों कहते हैं?

भानु, यानी “चमकने वाले”, सूर्य का एक नाम है, और अंतिम दोहा इस स्तुति को “भानु चालीसा” कहता है।

चालीसा में कौन-से बारह नाम हैं?

चौपाई 9 और 10 में ये नाम हैं: मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, कलिकर, पूषा, रवि और आदित्य, और अंत में “हिरण्यगर्भाय नमः”। सूर्य नमस्कार के साथ बोले जाने वाले बारह नाम हैं: मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क और भास्कर; चालीसा इनमें से ज़्यादातर रखती है और अरुण व कलिकर जोड़ती है।

ज्योतिष से सूर्य का क्या संबंध है?

ज्योतिष में सूर्य नौ ग्रहों में पहले हैं, जो आत्मा, पिता, ऊर्जा और अधिकार से जुड़े हैं। चालीसा अपने आप में भक्ति की स्तुति है, कोई उपाय या किसी फल की गारंटी नहीं। अपनी कुंडली में सूर्य कहाँ हैं, यह देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली खोलें।

पाठ और स्रोत

पाठ को चार प्रकाशित प्रतियों से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया गया: भक्ति भारत (bhaktibharat.com), आज तक (aajtak.in), द्रिक पंचांग (drikpanchang.com, हिंदी पेज) और बूँद ब्लॉग (boondadrop.blogspot.com) की एक स्वतंत्र प्रति। चारों में एक जैसा शुरू का दोहा, चालीस चौपाइयाँ और अंत का दोहा है, और किसी में कवि का नाम नहीं है।

पाठभेद: सहस्रांशु (चौ. 1, 5 और 28; आज तक और द्रिक पंचांग; भक्ति भारत और ब्लॉग में सहस्त्रांशु); चौ. 40 रविहैं / रवि हैं (केवल शब्दों के बीच की जगह); पंक्तियों के बीच के विराम-चिह्न संस्करणों में अलग हैं। कुछ पंक्तियाँ हर संस्करण में कठिन हैं (चौ. 16 जमलहते सोतेहि छन, चौ. 24 उरसर्म सुउदरचन, चौ. 25 कटिमंह, चौ. 39 हिमरेता, संभवतः हिरण्यरेता के लिए); हमने पाठ वैसा ही रखा है जैसा चारों में छपा है, और अर्थ में सबसे संभावित भाव दिया है। अंग्रेज़ी अक्षरों का पाठ और दोनों अर्थ हमारे अपने हैं।

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